शिटाके (Lentinula edodes) भारत में उगाई जा सकती है, लेकिन यह वहीं ठीक चलती है जहां दिन ठंडे हों (फलन के लिए करीब 20°C) या एयर कंडीशनिंग वाली यूनिट हो, और इसके लिए स्टरलाइज किए हुए बुरादे या भूसे के ब्लॉक, ऑटोक्लेव या प्रेशर स्टरलाइजर और ठंडे झटके का चरण चाहिए। यह धीमी और सफाई के प्रति संवेदनशील मशरूम है, बटन या ढींगरी के शेड में आसानी से जोड़ने वाली चीज नहीं।
शिटाके पर भारत में शोध असली है लेकिन छोटा है। ICAR-मशरूम अनुसंधान निदेशालय (DMR), सोलन, IIHR बेंगलुरु और TNAU ने स्ट्रेन और सब्सट्रेट पर काम किया है, फिर भी व्यावसायिक उत्पादन अभी कम है। DMR का एक शोध पत्र मुख्य रुकावट बताता है: सही पेड़ों का अच्छा सख्त लकड़ी का बुरादा मिलना मुश्किल है। कुछ भी बनाने से पहले बुरादे का स्रोत और खरीदार पक्का कर लें।
कहां उगाई जा सकती है
- ठंडे पहाड़ी इलाके: हिमाचल प्रदेश (सोलन, जहां DMR है), उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर तथा तमिलनाडु की नीलगिरि और कोडाईकनाल की पहाड़ियों में शिटाके पर काम की खबर है। TNAU ने जापानी साझेदारों के साथ कोयंबटूर, नीलगिरि और मेट्टुपालयम में बुरादा-ब्लॉक वाली शिटाके पर काम किया।
- मैदान: शिटाके आमतौर पर 20°C से नीचे के तापमान पर बढ़ती है, इसलिए मैदानों के उत्पादकों को ठंडा किया हुआ फलन कमरा चाहिए या सिर्फ सर्दी की फसल लेनी होगी। महीनों चिलर चलाने से मुनाफा खत्म हो सकता है।
- खुले में लट्ठे: पारंपरिक तरीके में सख्त लकड़ी के लट्ठों में स्पॉन के प्लग लगाए जाते हैं। एक व्यापार रिपोर्ट हिमाचल में करीब 40 इंच लंबे और 3 से 4 इंच मोटे विलो के लट्ठों को खुली छांव में रखने की बात बताती है, जिनमें करीब 3 महीने से फलन शुरू होता है और 4 से 5 साल चलता है। यह धीमा है और लकड़ी की उपलब्धता पर टिका है; कोई भी लट्ठा काटने से पहले अपने राज्य के पेड़ कटाई के नियम देख लें।
स्ट्रेन और सब्सट्रेट
| स्ट्रेन या सब्सट्रेट | स्रोत | बताया गया नतीजा |
|---|---|---|
| गेहूं के भूसे और चोकर पर DMRO-327 | ICAR-DMR सोलन, Indian Journal of Horticulture 2018 | भूसे पर फलने वाले 9 स्ट्रेन में सबसे अच्छा: प्रति किलो गीले सब्सट्रेट पर 202 ग्राम ताजी मशरूम, biological efficiency 60%, स्पॉनिंग के करीब 91 दिन बाद पहली तुड़ाई |
| गेहूं के भूसे पर DMRO-34 और DMRO-412 | उसी ट्रायल में | मध्यम: प्रति किलो करीब 140 ग्राम, biological efficiency करीब 42% |
| बाकी DMRO स्ट्रेन (35, 51, 297, 330) | उसी ट्रायल में | कमजोर: प्रति किलो 38 से 50 ग्राम, biological efficiency 11 से 15% |
| बुरादा + 14.5% गेहूं का चोकर (स्ट्रेन LE-01 से LE-03) | Visva-Bharati University, Intl. Journal of Economic Plants 2025 | प्रति 750 ग्राम बैग 392 से 410 ग्राम ताजी मशरूम, biological efficiency 46 से 55%; चावल की भूसी का चोकर देने पर 348 से 375 ग्राम; बिना पूरक वाला बुरादा 270 से 292 ग्राम |
- सबसे ज्यादा फर्क स्ट्रेन से पड़ता है: DMR के भूसे वाले ट्रायल में सबसे अच्छे स्ट्रेन ने सबसे खराब से करीब पांच गुना उपज दी। स्पॉन किसी नामित स्ट्रेन का DMR सोलन या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से लें, किसी बिना नाम के विक्रेता से नहीं।
- Biological efficiency का मतलब है ताजी मशरूम का वजन, सूखे सब्सट्रेट के वजन के प्रतिशत में। ट्रायल के आंकड़े प्रयोगशाला जैसी साफ हालत के हैं; खेत पर इससे कम की उम्मीद रखें।
ब्लॉक वाली फसल कैसे चलती है
- सब्सट्रेट: बुरादा या कटा हुआ भूसा (4 से 6 सेमी) गेहूं या चावल के चोकर के साथ (बुरादे के ट्रायल में करीब 14.5%; DMR के भूसे वाले ट्रायल में भूसा, चोकर और जिप्सम 80:19:1), नमी करीब 66%, पॉलीप्रोपिलीन बैग में भरें।
- स्टरलाइज करें: ट्रायल में बैग 121°C और 15 psi पर 2 घंटे ऑटोक्लेव किए गए। DMR से जुड़े एक ट्रायल के अनुसार करीब 80°C पर पास्चुराइजेशन भी चलता है, और उच्च दबाव पर स्टरलाइजेशन से सबसे अच्छी उपज मिली।
- स्पॉन: गेहूं के दाने वाला स्पॉन गीले वजन का 4 से 5%, साफ माहौल में डालें। 24°C से 25°C पर इन्क्यूबेट करें। Visva-Bharati के ट्रायल में ज्वार या गेहूं के दाने पर बना स्पॉन सबसे तेजी से फैला।
- भूरा होना और ठंडा झटका: परिपक्व होने पर सफेद ब्लॉक भूरा हो जाता है। जब उभार बनें या करीब तीन-चौथाई हिस्सा भूरा हो जाए, बैग हटाकर ब्लॉक को झटका दें, या तो रात भर फ्रिज में या करीब 10 मिनट बर्फ जैसे ठंडे पानी (4°C से 6°C) में।
- फलन कमरा: करीब 20°C, 85 से 90% नमी, एग्जॉस्ट फैन से ताजी हवा और थोड़ी रोशनी। टोपी चपटी होने से पहले तुड़ाई करें।
- फ्लश: तुड़ाई के बाद ब्लॉक को करीब 10 दिन आराम दें, फिर दोबारा भिगोकर फलन कराएं। आमतौर पर दो से तीन फ्लश मिलते हैं, और हर बार संक्रमण बढ़ता है।
- समय: DMR के अनुसार भूसे पर स्पॉनिंग से 88 दिन या उससे कम में पहली तुड़ाई होती है, और बुरादे पर मध्यम उपज के लिए 3 महीने से ज्यादा लगते हैं। नया बना कमरा पहली तिमाही में कमाई नहीं देगा।
लागत और कमाई
- प्रति बैग उपज: सबसे अच्छे बुरादे और गेहूं के चोकर वाले ट्रायल में प्रति बैग 0.39 से 0.41 किलो ताजी मशरूम। हिसाब के लिए प्रति बैग 0.25 से 0.35 किलो मानें, क्योंकि खेत की हालत ट्रायल से खराब होती है।
- भावों का रिकॉर्ड कमजोर है। व्यापार रिपोर्टों में बहुत फर्क है: 2017 की एक रिपोर्ट में हिमाचल की स्थानीय मंडियों में ₹200 से ₹500 प्रति किलो बताया गया, और बाद की लिस्टिंग में ताजी के ₹1,000 से ₹1,500 प्रति किलो और सूखी के करीब ₹1,600 से ₹2,000 प्रति किलो। शिटाके का कोई नियमित मंडी भाव नहीं है, इसलिए होटल, रेस्तरां या प्रोसेसर खरीदार से लिखित प्रस्ताव लें।
- उदाहरण (100 बैग, प्रति बैग 0.3 किलो = 30 किलो): ₹300 प्रति किलो पर कुल आय ₹9,000; ₹800 प्रति किलो पर ₹24,000। इसमें से बुरादा, चोकर, बैग, स्पॉन, स्टरलाइजर का ईंधन, बिजली या कूलिंग और मजदूरी अपने कोटेशन से घटाएं, क्योंकि प्रति बैग लागत का कोई पुष्ट भारतीय आंकड़ा नहीं मिला।
- फलन कमरा, ऑटोक्लेव, मिक्सर और कूलिंग बड़े स्थायी खर्च हैं। इनके बिना छोटे किसान को लागत में बटन और ढींगरी मशरूम से टक्कर लेना कठिन लगेगा।
कीट, रोग और गुणवत्ता
- हरा फफूंद (Trichoderma) सबसे बड़ा नुकसान है। यह खराब स्टरलाइजेशन, नम बैग और गंदे इनोकुलेशन से घुसता है। हरे हुए बैग कमरे में रखने की जगह फेंक दें।
- फलन कमरे साफ और जालीदार रखें। खाने की मशरूम पर किसी भी कीटनाशक के लिए लेबल के हिसाब से चलें और पहले अपने KVK से पूछें।
बाजार और जोखिम
- खरीदार होटल, रेस्तरां, गॉरमेट रिटेलर और सूखी मशरूम के व्यापारी हैं। भारत सूखी शिटाके आयात भी करता है, कस्टम रिकॉर्ड में चीन से खेप दिखती हैं, इसलिए सूखे माल की टक्कर आयात से है।
- जो विक्रेता "शिटाके ब्लॉक" या स्पॉन किट पर पक्की buy-back का वादा करें, उनके बारे में पहले DMR या अपने राज्य के बागवानी विभाग से पूछ लें।
- सुखाने और पैकिंग से प्रति किलो भाव बढ़ता है, लेकिन ड्रायर और साफ भंडारण चाहिए। सूखा माल टिकता है, जिससे ताजी बिक्री धीमी हो तो मदद मिलती है।
- समूह में बिक्री के लिए FPO और बागवानी योजनाओं के लिए subsidy finder देखें। मशरूम की मदद की दरें राज्य के हिसाब से अलग हैं, और शिटाके की कोई खास दर पुष्ट नहीं हुई।
स्रोत
- Sudheer Kumar et al., Enzyme profile of shiitake strains grown on wheat straw, Indian Journal of Horticulture 75(3), 2018 (ICAR-DMR Solan)
- Shanmugaraj et al., Optimizing spawn production and yield of shiitake, International Journal of Economic Plants 12(2), 2025
- FreshPlaza, new method for growing shiitake in India (trade report)
- FreshPlaza, growing shiitake mushrooms in India, TNAU and JICA (trade report, 2016)
- Tridge, dried shiitake India import records
