मिल्की मशरूम (Calocybe indica) भारत के गर्म हिस्सों के लिए एक व्यावहारिक छोटा उद्यम है, क्योंकि यह 30 से 35 डिग्री C पर फलता है, जब बटन और ज्यादातर ऑयस्टर फसलें फेल हो जाती हैं। इसे छायादार, नम, साफ कमरा, पाश्चराइज्ड भूसा, अच्छा दाना स्पॉन और एक दो दिन में ताजा मशरूम बिकने वाला रोज का बाजार चाहिए, क्योंकि पूरी फसल 3 से 4 फ्लश में ताजी तोड़ी जाती है।
बताया जाता है कि यह बटन और ऑयस्टर के बाद भारत में तीसरा सबसे ज्यादा व्यावसायिक रूप से उगाया जाने वाला मशरूम है। मिल्की मशरूम का कोई ताजा भारतीय भाव नहीं मिला; पहले अपना बाजार जांचें, क्योंकि जो भाव आपको सच में मिलेगा वही तय करता है कि उद्यम चलेगा या नहीं।
कहां और कब चलता है
- मूल: प्रजाति का पहला दस्तावेजीकरण पश्चिम बंगाल में हुआ और तमिलनाडु में 1990 के दशक के अंत में इसका व्यावसायीकरण हुआ, और 1998 में Tamil Nadu Agricultural University से एक किस्म जारी हुई। ICAR-DMR अध्ययन में इस्तेमाल जंगली स्ट्रेन कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, छत्तीसगढ़, बिहार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से आईं।
- तापमान: स्पॉन रन लगभग 25 से 30 डिग्री C और फसल 30 से 35 डिग्री C; 25 से नीचे या 38 से ऊपर बढ़त नहीं होती। नमी स्पॉन रन में 80 से 85% और फसल कमरे में 80% से ऊपर। उत्तर भारत की सर्दी में बिना गर्म किए ये तापमान नहीं मिलते, इसलिए वहां यह मुख्यतः गर्मी और बरसात की फसल है; समीक्षा उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में साल भर फसल बताती है।
- जंगली फलन बारिश के बाद मई से अगस्त में होता है, जो इसकी गर्मी और नमी की जरूरत से मेल खाता है।
कैसे उगाया जाता है
| चरण | शोध में क्या बताया गया |
|---|---|
| सब्सट्रेट | TNAU आधारित समीक्षा में गेहूं का भूसा, धान की पुआल और ज्वार के डंठल सबसे अच्छे रहे; बांग्लादेश के सब्सट्रेट ट्रायल में धान की पुआल से सबसे ज्यादा दक्षता मिली |
| पूर्व उपचार | 4 से 5 घंटे भिगोएं, फिर लगभग 80 डिग्री C पर 45 से 60 मिनट भाप दें; पानी निथारकर 60 से 70% नमी रखें |
| स्पॉन | ज्वार या गेहूं के दाने का स्पॉन, लगभग 2% स्पॉनिंग दर, 21 दिन पुराना स्पॉन; स्पॉन रन लगभग 30 डिग्री C पर 15 से 20 दिन |
| पूरक | गीले सब्सट्रेट के 5% की दर से कपास बीज खली ने बिना पूरक की तुलना में प्रति बेड उपज 300 से 380 ग्राम बढ़ाई; बांग्लादेश के ट्रायल में 30% मक्का पाउडर सबसे अच्छा रहा |
| केसिंग | आंशिक भाप दी चिकनी दोमट (pH लगभग 8.4) 1.5 से 2 सेमी, स्पॉन रन के दौरान डालें; बांग्लादेश के ट्रायल में 3 सेमी गोबर और दोमट मिट्टी (3:1) सबसे अच्छी रही |
| फलन | 30 से 35 डिग्री C, नमी 80% से ऊपर; पहली फ्लश बेड तैयार करने के 24 से 30 दिन बाद; 3 से 4 फ्लश |
इन्हें शोध के मान समझें, नुस्खा नहीं। बेड का आकार, थैले या ट्रे, और भाप देने की सही व्यवस्था प्रयोगशालाओं में अलग है; पैसा लगाने से पहले KVK या कृषि विश्वविद्यालय में हाथों से प्रदर्शन देखें। स्पॉन किसी अनाम विक्रेता से नहीं, सरकारी या विश्वविद्यालय प्रयोगशाला से लें, और कल्चर और तैयारी की तारीख पूछें।
उपज: ट्रायल क्या दिखाते हैं
| ट्रायल | सब्सट्रेट या उपचार | जैविक दक्षता | कहां |
|---|---|---|---|
| PMC3741572 | धान की पुआल (7 सब्सट्रेट में सबसे अच्छी) | 91.75% | Jahangirnagar University, बांग्लादेश |
| PMC3741544 | धान की पुआल + 30% मक्का पाउडर | 91.9% (नियंत्रण, बिना पूरक: उपज लगभग 174 ग्राम बनाम 459 ग्राम) | बांग्लादेश |
| PMC3741572 | धान की पुआल और 3 सेमी गोबर व दोमट केसिंग | 62.94% | बांग्लादेश |
| PMC10253166 | सबसे अच्छी जंगली स्ट्रेन DMRO-299 और DMRO-321 | 64.08% और 56.84% | ICAR-Directorate of Mushroom Research, सोलन |
- TNAU के काम का हवाला देने वाली एक समीक्षा 100 किलो सूखे सब्सट्रेट पर 140 किलो ताजे मशरूम की जैविक दक्षता बताती है। तालिका के ट्रायल, जिनमें भारतीय ICAR स्ट्रेन भी हैं, 57 से 92% बताते हैं। जब तक आपके अपने बैच कुछ और न दिखाएं, निचली ट्रायल सीमा पर बजट बनाएं।
- फसल की अवधि: समीक्षा में कुल 40 से 45 दिन है और दूसरी में 7 से 8 सप्ताह; बांग्लादेश के सब्सट्रेट ट्रायल में सारी तुड़ाई पूरी होने में 66 से 92 दिन लगे। ब्रोशर से ज्यादा समय मानकर चलें।
- छोटी बटन का औसत वजन 35 से 40 ग्राम है, और मशरूम कमरे के तापमान पर बिना फ्रिज के 5 से 7 दिन टिकता है, जो ज्यादातर अन्य उगाए जाने वाले मशरूम से लंबा है।
कीट और समस्याएं
- मुख्य नुकसान कीट प्रकोप और गंदे हैंडलिंग तथा खराब रखरखाव से आने वाली दूषित फफूंद और बैक्टीरिया बताए गए हैं। ठीक से भाप दें, स्पॉनिंग की जगह साफ रखें, और दूषित बेड तुरंत हटा दें; किसी भी रसायन के लिए लेबल मानें और अपने KVK से पूछें।
- ज्यादा पूरक देने से दक्षता घटती है (मक्का पाउडर ट्रायल में 30% सबसे अच्छा और ज्यादा खराब रहा), इसलिए ज्यादा मिलावट बेहतर नहीं है।
लागत और आय
- मिल्की मशरूम की उत्पादन लागत या बिक्री भाव का कोई प्रमाणित भारतीय आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए मुनाफे का आंकड़ा नहीं दिया गया। गिनने लायक लागतें: भूसा, भाप का ईंधन, स्पॉन, पूरक, केसिंग मिट्टी, पॉलीबैग या ट्रे, मजदूरी, छाया और पानी वाला शेड, और पैकिंग।
- गणित जो आप कर सकते हैं: 100 किलो सूखे भूसे पर ताजी उपज ट्रायल सीमा में 57 से 92 किलो है (140 किलो केवल सबसे अच्छी स्थिति की समीक्षा में)। ₹100 प्रति किलो के भाव पर यह 100 किलो सूखे भूसे पर ₹5,700 से ₹9,200 है, स्पॉन, मजदूरी और खराबी से पहले। ₹100 की जगह अपने बाजार का भाव डालें।
- कोई भाव श्रृंखला नहीं मिली, इसलिए मात्रा तय करने से पहले दुकानदारों और होटलों से पूछें कि वे असल में क्या देते हैं। स्थानीय मंडियों के भाव मंडी भाव पर हैं, जहां हर मंडी में मशरूम सूचीबद्ध नहीं हो सकता।
बाजार और जोखिम
- संभावित खरीदार स्थानीय सब्जी दुकानें, होटल, रेस्तरां और व्यापारी हैं, हालांकि कोई खरीदार आंकड़ा नहीं मिला; ताजा मिल्की मशरूम अन्य प्रकारों से ज्यादा टिकता है, जो गर्म बाजारों में बिक्री में मदद करता है। सुखाए और प्रोसेस किए उत्पादों पर इस गाइड के लिए शोध नहीं हुआ।
- मुख्य जोखिम संदूषण, खराब गुणवत्ता का स्पॉन, कमरे का ज्यादा गर्म होना और पतला स्थानीय बाजार हैं। बड़ी इकाई बनाने से पहले बिक्री समझौता समझदारी है; मिलकर बेचने के लिए FPO देखें।
- मिल्की मशरूम के लिए कोई प्रमाणित सब्सिडी दर नहीं मिली; सब्सिडी खोजक और अपने राज्य के बागवानी विभाग से जांचें। पात्र होने पर किसान क्रेडिट कार्ड कार्यशील पूंजी में मदद कर सकता है।
स्रोत
- A comprehensive review of tropical milky white mushroom (Calocybe indica P&C), PMC
- Influence of different supplements on the commercial cultivation of milky white mushroom, PMC
- Effect of different substrates and casing materials on growth and yield of Calocybe indica, PMC
- Eight high yielding strains of Calocybe indica, ICAR-Directorate of Mushroom Research, PMC
- The current status, bioactivity, food and pharmaceutical approaches of Calocybe indica: a review, PMC
