ढींगरी (ऑयस्टर) मशरूम (Pleurotus) भारत में लगभग कहीं भी उगाया जा सकता है जहाँ छायादार, साफ कमरा और सस्ता भूसा हो, 20 से 30°C और 70 से 90% नमी पर, पर यह फायदेमंद होगा या नहीं यह इस पर निर्भर है कि ताजा मशरूम एक-दो दिन में बिक जाए। इसे न कम्पोस्ट चाहिए और न केसिंग मिट्टी: कटे हुए धान या गेहूँ के भूसे को पाश्चराइज करके स्पॉन के साथ पॉलीथीन बैग में भरा जाता है, और पहले मशरूम बैग भरने के लगभग 3 से 4 हफ्ते बाद आते हैं।
यह पूर्वोत्तर, छत्तीसगढ़ और बिहार में लोकप्रिय है और ICAR-DMR सोलन, ICAR पूर्वोत्तर क्षेत्र के केंद्र और KVK इसे सिखाते हैं। नीचे के उपज के आँकड़े शोध केंद्रों के नतीजे हैं, और भाव के आँकड़े ICAR के 2020 के एक लेख से हैं, इसलिए बड़ी इकाई बनाने से पहले छोटा बैच आज़माएँ और अपना स्थानीय बाजार देख लें।
कहाँ और कब उगता है
- तापमान और नमी: ICAR पूर्वोत्तर क्षेत्र (नागालैंड) 20 से 30°C और 70 से 90% सापेक्ष नमी बताता है। ICAR-DMR सोलन ने स्पॉन रन और फलन 24 ± 2°C पर किया और स्पॉन रन के बाद नमी 80 ± 5% रखी।
- मौसम: पहाड़ों में मार्च से अक्टूबर; मैदानों में अक्टूबर से मार्च (ICAR पूर्वोत्तर, नागालैंड)। अलग-अलग प्रजातियाँ अलग तापमान सहती हैं, इसलिए मैदान के उत्पादक प्रजाति बदलकर ज्यादा महीनों में फसल ले सकते हैं।
- ICAR-DMR द्वारा परखी प्रजातियाँ: Pleurotus djamor (गुलाबी ऑयस्टर) और P. ostreatus var. Florida (सफेद)। P. pulmonarius का कोंकण में और P. sajor-caju का बिहार में परीक्षण हुआ है।
- कमरा: सीधी धूप के बिना छायादार कमरा, ताजी हवा के लिए हवादारी और धोया जा सकने वाला फर्श या दीवारें। झोपड़ी, खाली कमरा या शेड चल सकता है अगर पानी के छिड़काव से नमी बनाई रखी जा सके।
प्रजातियाँ और विशेषताएँ
नीचे के नतीजे ICAR-DMR सोलन के ट्रायल (Mushroom Research, 2023) के हैं, जो 24 ± 2°C पर गेहूँ के भूसे और गेहूँ के दाने के स्पॉन से किया गया। आपके दिन और उपज अलग हो सकते हैं।
| स्ट्रेन (स्रोत) | स्पॉन रन | पहली तुड़ाई | जैविक दक्षता | फल का आकार |
|---|---|---|---|---|
| P. djamor DMRP-205 (ICAR-DMR) | 8 दिन | 20 दिन | 67.2% | लगभग 8 ग्राम, छतरी 6.4 सेमी |
| P. ostreatus var. Florida DMRP-136 (ICAR-DMR) | 12 दिन | 24 दिन | 72.8% | लगभग 12 ग्राम, छतरी 8.3 सेमी |
जैविक दक्षता सूखे सब्सट्रेट के वजन के प्रतिशत के रूप में ताजे मशरूम का वजन है, यानी 67% का मतलब 1 किलो सूखे भूसे से लगभग 670 ग्राम ताजा मशरूम। स्पॉन केवल ICAR-DMR, राज्य विश्वविद्यालय या KVK की सुझाई प्रयोगशाला से लें; स्पॉन की गुणवत्ता उपज का एक अहम कारक है, और उसी ट्रायल में दाने वाले स्पॉन ने सस्ते गेहूँ के भूसे वाले स्पॉन से ज्यादा उपज दी।
सब्सट्रेट और बैग की तैयारी
- भूसा: धान या गेहूँ का भूसा 3 से 5 सेमी के टुकड़ों में कटा हुआ। ICAR के ट्रायल में कोंकण में धान के भूसे से लगभग 76% और गेहूँ के भूसे से लगभग 75% जैविक दक्षता मिली। गेहूँ का चोकर मिलाने पर धान के भूसे की दक्षता लगभग 85% और चावल की भूसी मिलाने पर लगभग 83% हो गई। अन्य खेत के कचरे (गन्ना, कपास कचरा, मक्के का भुट्टा, केले का तना और मूंगफली का छिलका) भी इस्तेमाल होते हैं, पर पहले कुछ बैग पर आज़माएँ।
- पाश्चराइज करना (ICAR पूर्वोत्तर): कटे भूसे को ठंडे पानी में 8 से 12 घंटे भिगोएँ, गर्म पानी में 15 से 20 मिनट उबालें और छाया में ठंडा करें। ICAR-DMR ने भाप से पाश्चराइज किया और 60 से 65% नमी वाले भूसे के साथ काम किया। भूसे को निचोड़ें: कुछ बूँदें निकलें, धार नहीं।
- बैग: 60 x 45 सेमी या 50 x 35 सेमी के पारदर्शी पॉलीथीन बैग, लगभग हर 10 सेमी पर छेद।
- भराई: लगभग 5 सेमी भूसे की परतें, हर परत पर बराबर स्पॉन छिड़का हुआ, हर बैग में 4 से 5 परतें; DMR ट्रायल में गीले वजन का 3% स्पॉन और 5 किलो के बैग में 12 से 14 छेद रखे गए।
- स्वच्छता: हाथ धोएँ, साफ जगह पर काम करें और बिना धुले बैग दोबारा न इस्तेमाल करें। हरे, काले या बदबूदार धब्बों वाले बैग कमरे से बहुत दूर फेंक दें।
स्पॉन रन और फलन
- स्पॉन रन: बैग 12 से 20 दिन अँधेरे में रखें; पूरी सफेद बढ़त में 20 से 25 दिन लगते हैं (ICAR पूर्वोत्तर)।
- फलन: पॉलीथीन हटाएँ या चीर दें और साफ पानी का छिड़काव करें; पहले मशरूम 5 से 7 दिन बाद आते हैं। हल्के छिड़काव से नमी लगभग 80% (70 से 90% की सीमा के भीतर) रखें, रोशनी और ताजी हवा दें, और मशरूम को ज्यादा गीला न करें।
- फ्लश: अगले फ्लश लगभग 10 दिन के अंतर पर आते हैं, हर चक्र में 3 से 4 फ्लश।
- तुड़ाई: गुच्छे तब मरोड़कर तोड़ें जब टोपी के किनारे अभी मुड़े हों और टोपी चपटी होकर बीजाणु गिराने से पहले। डंठल के आधार का मलबा हटाएँ। पानी देने से पहले तोड़ें, क्योंकि गीले मशरूम जल्दी खराब होते हैं।
- फसल के बाद: इस्तेमाल हो चुके भूसे का कम्पोस्ट बनाया जा सकता है या पशुओं के बिछावन में लगाया जा सकता है; इसे फलन कमरे के पास न छोड़ें क्योंकि यह मक्खियों और फफूंद को बुलाता है।
कीट और रोग
- हरी फफूंद (Trichoderma), दूसरी फफूंदें और मक्खियाँ आम समस्याएँ हैं और लगभग हमेशा खराब पाश्चराइजेशन, पुराने स्पॉन या गंदे कमरे से आती हैं। इलाज से बचाव बेहतर है।
- जो मशरूम खाने हैं उन पर कीटनाशक या फफूंदनाशक न छिड़कें। संक्रमण बार-बार हो तो KVK या ICAR-DMR सोलन से पूछें कि क्या सुरक्षित है।
- फसल सुरक्षा की सामान्य जानकारी के लिए कीट देखें; मशरूम के लिए अलग सलाह चाहिए।
उपज, लागत और आमदनी
ICAR के लगभग ₹35 प्रति किलो उत्पादन लागत और ₹100 से ₹120 प्रति किलो बाजार भाव (Indian Horticulture, 2020) के हिसाब से मार्जिन ₹65 से ₹85 प्रति किलो है। 60 से 70% जैविक दक्षता पर 100 किलो सूखे भूसे का उदाहरण:
| मद | कम मामला | ज्यादा मामला |
|---|---|---|
| 100 किलो सूखे भूसे से ताजा मशरूम | 60 किलो | 70 किलो |
| ₹35 प्रति किलो की लागत | ₹2,100 | ₹2,450 |
| ₹100 और ₹120 प्रति किलो पर बिक्री | ₹6,000 | ₹8,400 |
| प्रति चक्र मार्जिन | ₹3,900 | ₹5,950 |
ये आँकड़े मानते हैं कि सब बिक गया; खराब बैगों, न बिके माल और आपकी अपनी मेहनत से ये घटते हैं। बैग भरने से आखिरी फ्लश तक एक चक्र में लगभग 8 हफ्ते लगते हैं, इसलिए एक कमरा तब तक पूरी आमदनी नहीं देगा जब तक आप कई बैग अलग-अलग बैचों में न चलाएँ, और उसके लिए पहले पक्के खरीदार चाहिए।
बाजार और बिक्री
- ताजा ढींगरी मशरूम केवल एक-दो दिन टिकता है, इसलिए खेत के पास होटल, रेस्तराँ, सब्जी की दुकानों और साप्ताहिक बाजार में बेचें। नजदीकी भाव मंडी भाव और स्थानीय विक्रेताओं से देखें। छेद वाली पॉलीथीन या डिब्बों में पैक करें और ठंडा रखें।
- बचे माल को धूप या ओवन में सुखाकर सूखे मशरूम के रूप में बेचा जा सकता है, या अचार और पाउडर बनाया जा सकता है; इसमें खाद्य लाइसेंस और लेबलिंग चाहिए, इसलिए KVK से पूछें।
- एक ही इलाके में कई किसान एक साथ शुरू करें तो स्थानीय भाव गिर सकते हैं। बढ़ाने से पहले खरीदार पक्के करें।
- ऐसे प्रस्तावों से सावधान रहें जो स्पॉन, बैग या "किट" ऊँचे दाम पर बेचकर खरीद वापसी का वादा करते हैं। खरीदार से लिखित ऑर्डर माँगें और स्पॉन केवल सरकारी या विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला से लें।
- किसान उत्पादक समूह (FPO) एक ठंडा कमरा (कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी) और डिलीवरी का फेरा साझा कर सकता है।
प्रशिक्षण और सहायता
ICAR-DMR सोलन, ICAR पूर्वोत्तर क्षेत्र के केंद्र और KVK छोटे प्रशिक्षण चलाते हैं और कल्चर व स्पॉन देते हैं। मशरूम इकाइयों के लिए सहायता राज्य और साल के हिसाब से बदलती है, इसलिए जिला बागवानी कार्यालय से पूछें और सब्सिडी फाइंडर देखें। जहाँ बैंक माने वहाँ इकाई के लिए कर्ज KCC के जरिए मिल सकता है।
Sources
- Comparative evaluation of different spawn substrates on oyster mushroom, ICAR-DMR Solan, Mushroom Research 32(1), 2023
- Oyster Mushroom Cultivation, ICAR Research Complex for NEH Region Nagaland Centre and KVK Dimapur, 2017
- Suitability of various substrates for Pleurotus pulmonarius in Konkan Region of Maharashtra, Mushroom Research
- Oyster mushroom cultivation for quality protein and income enhancement, Indian Horticulture 64(5), 2020 (ICAR)
