पेकन भारत में एक खास, लंबे इंतजार वाली पेड़ की फसल है। यह हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर (मुख्यतः राजौरी और पुंछ) के मध्य पहाड़ों में, और उत्तराखंड व नीलगिरि के छोटे हिस्सों में उगाई जाती है, हर जगह कुछ सौ हेक्टेयर में। पेड़ों को फल देने में 5 से 10 साल लगते हैं, वे बहुत बड़े हो जाते हैं, और जम्मू के ज्यादातर मौजूदा बाग बिना नाम वाले बीज के पेड़ हैं, इसलिए राज्य बागवानी विभाग या विश्वविद्यालय से सिर्फ जानी-पहचानी किस्मों के कलमी पेड़ ही लगाएं।
Indian Farming पत्रिका (फरवरी 2026) खेत-द्वार भाव ₹500 से ₹700 प्रति किलो बताती है, लेकिन जिलों के असली उत्पादन के आंकड़े इसी साहित्य के आशावादी उपज दावों से काफी नीचे हैं, इसलिए पेकन को मुख्य आमदनी नहीं बल्कि विविधीकरण का छोटा प्लॉट मानें।
भारत में यह कहां उगता है
- हिमाचल प्रदेश: करीब 700 हेक्टेयर, मुख्यतः कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सोलन में (Indian Farming, 2026)। पेकन 1930 के दशक में पालमपुर के Government Fruit Farm में लगाए गए (आठ किस्में), और वही हिमालय में रोपण सामग्री का स्रोत बना।
- जम्मू और कश्मीर: 2015-16 में जम्मू क्षेत्र में 464.68 हेक्टेयर, उत्पादन करीब 104 टन; राजौरी में 163 हेक्टेयर पर 62 टन और पुंछ में 125 हेक्टेयर पर 7.5 टन। जिला प्रशासन अब पुंछ को करीब 507 हेक्टेयर और साल में 75 टन बताता है, और GI टैग का आवेदन चल रहा है। स्थानीय नामों में खोरी, शिमला अखरोट और बच्छ डून हैं।
- अन्य: उत्तराखंड और तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में बिखरे हुए पेड़ हैं। SKUAST के 2025 के एक शोधपत्र में भारत का कुल क्षेत्र करीब 1,000 हेक्टेयर बताया गया है।
- जलवायु: ऐसे मध्य पहाड़ी इलाके जो अखरोट और सेब वाले इलाकों से ज्यादा गर्म हैं। KVK पुंछ (करीब 992 मीटर) पर SKUAST के ट्रायल की जगह पर सालाना बारिश 1,200 से 1,400 मिमी और तापमान सर्दी में करीब -2.6 °C से गर्मी में 28.7 °C तक रहता है। पेड़ों को सर्दी में करीब 400 chilling hours चाहिए, और हिमाचल के लेख में मिट्टी का pH 5.5 से 7.5 और गहरी, उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली दोमट बताई गई है। जलभराव या भारी चिकनी मिट्टी में जड़ के रोग लगते हैं।
- फल अच्छे भरने के लिए लंबा, गर्म मौसम चाहिए, इसलिए ऊंची और ठंडी जगहें और पाला पड़ने वाले गड्ढे खराब चुनाव हैं।
किस्में और परागण
| किस्म | स्रोत | खासियत | कहां के लिए ठीक |
|---|---|---|---|
| Desirable, Western, Wichita, Forket | अमेरिकी चयन | Protandrous: मादा फूल तैयार होने से पहले पराग झड़ता है | Protogynous किस्म के साथ लगाएं |
| Pawnee, Caddo, Cheyenne, Cape Fear, Sioux | अमेरिकी चयन | Protogynous: पराग झड़ने से पहले मादा फूल तैयार होते हैं | Protandrous किस्म के साथ लगाएं |
| Mahan, Mohawk, Caddo | अमेरिकी चयन | अच्छे प्रबंधन में हिमालय के मध्य पहाड़ों की हालत के लिए अनुकूल बताई गई | हिमाचल प्रदेश के मध्य पहाड़ |
| Mahan, Nellish, Burkett | अमेरिकी चयन | जम्मू और कश्मीर की नर्सरियों में कलम या चश्मे से तैयार; कलमी पेड़ बीज वाले पेड़ों से बड़े और पतले छिलके वाले फल देते हैं | राजौरी, पुंछ और J&K के दूसरे मध्य पहाड़ |
| SKJPP 25 (Jammu Pecannut) | SKUAST-जम्मू, बीज वाले पेड़ों में से चुनी गई | फल देने वाले 60 बीज वाले पेड़ों में से उपज और फल के गुणों के आधार पर चुनी गई; रिलीज कमेटी की मंजूरी | जम्मू संभाग |
- पेकन हवा से परागित होता है, और हर पेड़ या तो protandrous होता है या protogynous। दोनों तरह के पेड़ मिलाकर लगाएं ताकि मादा फूल खुलने पर पराग उपलब्ध रहे; एक ही किस्म के ब्लॉक में फल कम बनते हैं।
- बीज वाले पेड़ों के फल बहुत अलग-अलग होते हैं, अक्सर छोटे और मोटे छिलके वाले। राजौरी और पुंछ में SKUAST के फल देने वाले 60 बीज वाले पेड़ों (12 से 15 साल पुराने) के सर्वे में फल का वजन 3.56 से 8.63 ग्राम और छिलके की मोटाई 0.30 से 1.89 मिमी तक रही। कलमी पौधे इसी फर्क की वजह से लेने चाहिए।
- कलम की लकड़ी और पौधे बागवानी विभाग या विश्वविद्यालय की नर्सरी से लें, और खरीदने से पहले किस्म और परागण का प्रकार पक्का कर लें।
प्रवर्धन, रोपाई और दूरी
- तरीका: हिमाचल में जून से जुलाई में बीज वाले मूलवृंत पर पैच बडिंग। KVK पुंछ में दो साल पुराने पेंसिल जितने मोटे मूलवृंतों पर SKUAST के ट्रायल में अगस्त के दूसरे हफ्ते की पैच बडिंग से सबसे अच्छा कलम जमाव (63.29%) और सबसे जल्दी कली फूटना (18 दिन) मिला; मार्च के दूसरे हफ्ते की whip grafting से सबसे अच्छा बचाव (44.38%) रहा। फरवरी की four-flap grafting में सिर्फ 31.62% जमाव हुआ। कलमों का अच्छा-खासा हिस्सा खराब होने की उम्मीद रखें, इसलिए बचाव की गारंटी देने वाली नर्सरी से खरीदें।
- रोपाई: हिमाचल में दिसंबर से जनवरी, जब मिट्टी में नमी हो और मौसम ठंडा हो।
- दूरी: पेड़ों के बीच कम से कम 8 से 10 मीटर। यानी प्रति हेक्टेयर 100 से 156 पेड़, या प्रति एकड़ करीब 40 से 63, जैसे 10 x 10 मीटर पर प्रति एकड़ 40 पेड़।
- आकार देना: central leader प्रणाली, सबसे नीची डाल जमीन से करीब 1 मीटर ऊपर; भारी छंटाई न करें और सिर्फ सूखी, टूटी या रोगी लकड़ी हटाएं।
- पहले 3 से 4 साल में अंतर-फसलें: मटर, फ्रेंच बीन, लहसुन, क्लोवर, लोबिया या सोयाबीन से आमदनी मिलती है और पहाड़ी मिट्टी बचती है।
खाद और सिंचाई
- पेकन को दूसरे मेवे के पेड़ों से ज्यादा पानी चाहिए, खासकर फूल आने, फल बनने और गिरी भरने के समय। शुरू में थाले बनाकर सिंचाई करें और फिर ड्रिप या स्प्रिंकलर पर जाएं; drip irrigation देखें।
- प्रति पेड़ उम्र के हिसाब से खाद की कोई पुष्ट भारतीय सारणी नहीं मिली। उम्र के हिसाब से मात्रा के लिए राज्य बागवानी विश्वविद्यालय (हिमाचल के लिए YSPUHF नौणी, जम्मू के लिए SKUAST) से पूछें, और खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच कराएं; fertilizers देखें।
कीट और रोग
- बढ़वार के दौर में माहू और माइट, पत्तियों पर इल्लियां, फूल आने पर थ्रिप्स, और फल बनते समय नट बोरर और स्टिंक बग हिमाचल की IPM सारणी में बताई मुख्य परेशानियां हैं; नमी वाले हालात में पत्ती धब्बे लगते हैं।
- नियंत्रण ज्यादातर सांस्कृतिक है: लेडीबर्ड भृंग को बढ़ावा दें, इल्लियां हाथ से चुनें, लाइट और फेरोमोन ट्रैप लगाएं, खराब फल इकट्ठा करके नष्ट करें, बाग साफ रखें और हवा के लिए छंटाई करें। नीम आधारित छिड़काव और बोर्डो मिश्रण सुझाए गए विकल्प हैं। लेबल के हिसाब से चलें और अपने KVK से पूछें। pests देखें।
कटाई, उपज और भंडारण
- फल आने के साल: 5 से 10 साल, किस्म और देखभाल पर निर्भर। अच्छी हालत में 10 साल का पेड़ करीब 5 मीटर ऊंचा होता है।
- पेड़ की उपज: अच्छे प्रबंधन में पूरे बढ़े पेड़ साल में 15 से 35 किलो फल देते हैं। प्रति एकड़ 40 पेड़ों पर यह करीब 600 से 1,400 किलो प्रति एकड़ बैठता है (100 पेड़ों पर प्रति हेक्टेयर 1,500 से 3,500 किलो)।
- हकीकत की जांच: ऊपर के जम्मू के आंकड़े (2015-16 में 464.68 हेक्टेयर और 104 टन) औसतन सिर्फ करीब 0.2 टन प्रति हेक्टेयर बैठते हैं, क्योंकि ज्यादातर पेड़ बिखरे हुए बीज वाले हैं और कई बाग अभी जवान हैं। हिमाचल के लेख का प्रति हेक्टेयर 1.5 से 2 टन गिरी और ₹9 से ₹12 लाख शुद्ध आय का अनुमान एक पूरे बढ़े, अच्छे संभाले बाग का है, औसत नहीं।
- कटाई: हिमाचल में नवंबर के पहले हफ्ते से, जब छिलका भूरा होकर फटने लगे; गिरे हुए फल हाथ से इकट्ठा करें।
- भंडारण: ज्यादा तेल होने से पेकन खराब होकर बासी हो जाता है। फल को सुरक्षित नमी तक सुखाएं, फिर 1 से 5 °C और 75 से 80% आर्द्रता पर रखें। छिलके वाले फल 21 °C पर करीब 4 महीने और फ्रिज की ठंड में करीब 2 साल चलते हैं।
लागत और कमाई
- भाव: हिमाचल का लेख महानगरों में खुदरा भाव ₹1,200 से ₹1,500 प्रति किलो और खेत-द्वार भाव ₹500 से ₹700 प्रति किलो बताता है; यह नहीं बताता कि यह छिलके वाले फल का है या गिरी का, इसलिए इस्तेमाल से पहले खरीदारों से पूछ लें।
- हिसाब (उदाहरण, पूरे बढ़े बाग का): प्रति एकड़ 40 पेड़ x 15 से 35 किलो = 600 से 1,400 किलो फल। ₹500 प्रति किलो के फल भाव पर (छिलके वाले फल का भाव मानकर) अच्छे साल में यह प्रति एकड़ ₹3 लाख से ₹7 लाख कुल आय है; अगर यह भाव गिरी का है, जो फल के वजन का सिर्फ एक हिस्सा होती है, तो आंकड़ा कम हो जाता है। 5 से 10 साल तक कोई कमाई नहीं होती।
- बाग की कोई पुष्ट भारतीय लागत सारणी नहीं मिली। जमीन लगाने से पहले पौधों, मजदूरी और सिंचाई की लागत जिला बागवानी कार्यालय से पूछें।
बाजार और मदद
- खरीदार सूखे मेवे के व्यापारी, बेकरी, मिठाई-चॉकलेट बनाने वाले और गिफ्ट की दुकानें हैं। भारत का बाजार छोटा है और अभी बन रहा है, और स्थानीय मात्रा कम है, इसलिए बिक्री व्यापारियों से सीधे संपर्क से होती है।
- जोखिम: गलत किस्म या खराब परागण मिश्रण, कलमों का खराब होना, वसंत का देर से पड़ने वाला पाला और आमदनी के लिए लंबा इंतजार।
- मदद: MIDH योजना और राज्य बागवानी विभाग रोपण सामग्री और प्रशिक्षण में मदद करते हैं; पेकन के लिए कोई खास दर पुष्ट नहीं हुई, इसलिए अपने जिला बागवानी कार्यालय से पूछें। पुंछ और राजौरी में SHG और FPO हैं; FPO और subsidy finder देखें। दूसरे मेवों के लिए walnut देखें।
स्रोत
- Dhiman et al., Pecan nut cultivation in Himachal Pradesh (Indian Farming, February 2026)
- Kumar et al., Optimizing propagation techniques and timing for pecan under Poonch conditions (Indian Journal of Agricultural Sciences, 2025)
- Rani et al., Evaluation of genetic diversity of pecan nut in Jammu region (Indian Journal of Horticulture, 2017)
- Sharma et al., Genetic divergence in pecan nut, release of SKJPP 25 (Indian Journal of Horticulture, 2022)
- District Poonch, One District One Product: pecan nut
