हेज़लनट भारत में कोई साबित व्यावसायिक फसल नहीं है। यह समशीतोष्ण हिमालय में जंगली उगती है, और यूरोपीय हेज़लनट की किस्में कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में आजमाई गई हैं, लेकिन उपज, भाव या कमाई का कोई जांचा हुआ भारतीय बाग का रिकॉर्ड नहीं मिला। इसे सिर्फ ठंडे पहाड़ी इलाके में छोटे ट्रायल के रूप में लगाएं, समशीतोष्ण फल अनुसंधान संस्थान की सलाह से, और इस पर आजीविका की योजना न बनाएं।

जिसे वादा की गई कमाई के साथ हेज़लनट के पौधे बेचे जा रहे हों, उसके लिए यही ईमानदार स्थिति है। नीचे बताया गया है कि क्या दर्ज है और पैसा लगाने से पहले क्या पूछना चाहिए।

भारत में क्या मौजूद है

  • भारतीय हेज़लनट (Corylus jacquemontii): हिमालय का पेड़, जिसे अक्सर तुर्की हेज़ल (Corylus colurna) की ही प्रजाति माना जाता है, और पहाड़ी समुदाय इसे मेवे, चारे और ईंधन के लिए मानते हैं। 2019 के एक अध्ययन ने हिमाचल प्रदेश में पांगी (चंबा जिला) और कोटखाई (शिमला जिला) के प्राकृतिक झुंडों का 1,800 से 3,300 मीटर पर सर्वे किया, और कुछ जगहों पर कमजोर पुनर्जनन की वजह से संरक्षण और वनीकरण की जरूरत बताई।
  • कश्मीर: मेवे को स्थानीय भाषा में virin कहते हैं। SKUAST-Kashmir के वैज्ञानिकों ने बताया कि अच्छी किस्में कश्मीर में बहुत पहले लाई गई थीं, लेकिन गुणन की तकनीक न होने से लोकप्रिय नहीं हो सकीं; उनका 2010 का अध्ययन कलमों की जड़ें निकालने पर था। जंगली Corylus jacquemontii डाचीगाम और करनाह (कुपवाड़ा जिला) में भी मिलती है।
  • स्थानीय नाम: एक खेती लेख के अनुसार हिमाचल प्रदेश में thangi और उत्तराखंड में bhotia badam।
  • उगाई जाने वाली यूरोपीय हेज़लनट (Corylus avellana): हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में किस्मों का मूल्यांकन हुआ है, लेकिन नतीजों के आंकड़े जांचे नहीं जा सके।

कहां आजमाई जा सकती है

  • जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर हिमालय के सिर्फ ठंडे समशीतोष्ण पहाड़ों को ही उपयुक्त माना जाता है। मैदान और उपोष्ण पहाड़ी इलाके नहीं।
  • अच्छे जल निकास वाली, मध्यम उपजाऊ मिट्टी चुनें; जलभराव वाली भारी चिकनी मिट्टी ठीक नहीं है। मिट्टी और जगह की ये बातें बागवानी की आम समझ हैं, किसी जांचे हुए भारतीय पैकेज से नहीं, इसलिए संस्थान से पक्का कर लें।

रोपण सामग्री

  • जंगली पेड़ों के बीज से बने पौधे एक जैसे नहीं होते और फल देने में लंबा समय ले सकते हैं। आपकी ऊंचाई पर परखी हुई किस्मों के नाम वाले, कलम लगे या दाब वाले पौधे ही सुरक्षित चुनाव हैं।
  • हेज़लनट का परागण हवा से होता है और इसे मेल खाने वाली परागण किस्में चाहिए, इसलिए नर्सरी से परागण योजना लिखित में मांगें।
  • पौधे सिर्फ किसी संस्थान या ऐसी नर्सरी से लें जो किस्म, उसका मूल और बिक्री का बिल दिखा सके। जिस फसल का भारतीय बाग में कोई रिकॉर्ड नहीं, उसमें बिना जांच की रोपण सामग्री सबसे बड़ा जोखिम है।

रिटर्न का समय और आंकड़े

  • एक दूसरे दर्जे का खेती लेख पांचवें साल के आसपास पहली फसल, 15 से 20 साल के बीच सबसे ज्यादा फल, ₹200 से ₹300 प्रति किलो थोक भाव और 10 से 15 साल बाद सकारात्मक नकदी प्रवाह बताता है। वह किसी भारतीय बाग के रिकॉर्ड का हवाला नहीं देता, इसलिए ये भरोसेमंद योजना के आंकड़े नहीं हैं।
  • इन दावों को मान भी लें, तो हेज़लनट का पेड़ लंबी अवधि का निवेश है जिसमें कई साल कोई आय नहीं होती। कोई भी ट्रायल बाग पकने तक अपनी मौजूदा फसलें चलाते रखें।
  • भारत का कोई भाव, उपज या लागत तालिका जांची नहीं जा सकी, इसलिए यहां कोई नहीं दी गई है।
💡 सुझाव: पौधे खरीदने से पहले SKUAST-Kashmir के Division of Pomology, ICAR-CITH श्रीनगर या डॉ वाई एस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी को लिखकर पूछें कि क्या आपकी ऊंचाई के लिए परखी हुई किस्में, परागण किस्में और खरीदार मौजूद हैं। अगर वे कोई नाम न बता सकें, तो इस प्रस्ताव को प्रयोग मानें, कारोबार नहीं।

बाजार और जोखिम

  • देश में उगी हेज़लनट के लिए कोई संगठित भारतीय buy-back या प्रसंस्करण बाजार जांचा नहीं जा सका। ट्रायल से बड़ा कुछ लगाने से पहले खरीदार पक्का करें।
  • गारंटी वाले buy-back या प्रति एकड़ आय के दावे के साथ पौधे बेचने वालों से सावधान रहें; उनसे उगाने वालों की सूची मांगें और मौजूदा किसानों से खुद बात करें। मिलकर बेचने के लिए FPO और बागवानी की मदद के लिए subsidy finder देखें; हेज़लनट की कोई खास सब्सिडी जांची नहीं जा सकी।
  • पहाड़ की एक और समशीतोष्ण मेवा फसल, जिसका भारत में लंबा रिकॉर्ड है, walnut में दी गई है।

स्रोत