बादाम भारत में केवल कुछ ठंडी घाटियों में चलता है जहां बसंत में पाले का खतरा कम हो, मुख्यतः कश्मीर, कुछ हिमाचल प्रदेश में, और वहां भी रकबा घटता रहा है क्योंकि कमाई, बाजार और बसंत का पाला तीनों कमजोर रहे हैं। नया बाग लगाने की सोचने वाले इसे लंबा और जोखिम भरा निवेश मानें, जो उन्नत किस्मों, परागणकर्ता और पहले से तय खरीदार पर निर्भर है।
बताए गए आंकड़े गिरावट दिखाते हैं: कश्मीर में बादाम के बाग 2006-07 के 16,374 हेक्टेयर से घटकर 2019-20 में 4,177 हेक्टेयर रह गए, और उत्पादन 15,183 टन से 9,898 टन हो गया, क्योंकि किसान सेब की ओर चले गए। भारत की राष्ट्रीय बादाम उत्पादकता 2013 में लगभग 0.73 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई थी, जबकि विश्व औसत करीब 1.5 टन है।
भारत में कहां उगता है
- कश्मीर घाटी: भारतीय बादाम उत्पादन का केंद्र; बताया जाता है कि देश का 90% से ज्यादा बादाम कश्मीर में होता है। छोटे क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में हैं।
- जलवायु: बादाम को ठीक से फूलने के लिए सर्दी की ठंड चाहिए, लेकिन यह जल्दी फूलता है, इसलिए फूल के समय बसंत का पाला और ओले ICAR-CITH द्वारा बताए गए मुख्य खतरे हैं।
- मैदानी या गर्म इलाकों के लिए उपयुक्त नहीं। नर्सरी के दावे पर मैदान के लिए पौधे न खरीदें।
- पुराने बाग: कश्मीर के कई बाग दशकों पुराने हैं और कम व खराब गुणवत्ता की उपज देते हैं, इसीलिए कायाकल्प और बेहतर किस्मों से दोबारा रोपण को बढ़ावा दिया जाता है।
किस्में और परागण
| किस्म | स्रोत | विशेषताएं |
|---|---|---|
| Waris | ICAR-CITH, श्रीनगर | मध्यम, नरम छिलके वाले दाने, करीब 48% शेलिंग; बढ़वार की आदत सघन रोपण के अनुकूल; कश्मीर के एक ट्रायल में बढ़वार और उपज में Makhdoom और Shalimar से बेहतर रही |
| Makhdoom | ICAR-CITH, श्रीनगर | नरम छिलके वाले दाने, करीब 42% शेलिंग; जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में उगाई जाती है |
| Shalimar | ICAR-CITH, श्रीनगर | फैलने वाली आदत, करीब 50% शेलिंग; निर्यात के लिए उपयुक्त बताई गई |
| Pranyaj, Nonpareil | मुख्य बादाम क्षेत्रों के लिए Waris के साथ आशाजनक किस्मों में नामित (Indian Horticulture, 2018) | अपनी ऊंचाई पर प्रदर्शन CITH से पूछें |
- लगभग सभी बादाम किस्में स्व-बांझ होती हैं और उन्हें उसी समय फूलने वाली दूसरी, मेल खाने वाली किस्म चाहिए। Nonpareil जैसी कुछ किस्में कुछ दूसरी किस्मों के साथ भी बांझ होती हैं, इसलिए परागणकर्ता अंदाज से न चुनें; जोड़ी CITH या SKUAST-Kashmir से लें।
- कश्मीर के उत्पादकों की रिपोर्टों के अनुसार नरम छिलके वाली किस्में उसी हालत में पारंपरिक कठोर छिलके वाली किस्मों से बहुत कम उपज देती हैं, जो उनकी कमाई निराश करने का एक कारण है। दाने का प्रकार और भाव खरीदार से जांच लें।
रोपण और दूरी
- ICAR-CITH श्रीनगर के तीन साल के ट्रायल में Makhdoom, Waris और Shalimar पर 1,600 से 625 पौधे प्रति हेक्टेयर (करीब 650 से 250 प्रति एकड़) की दूरियां परखी गईं। कम घनत्व में पेड़ बड़े और दाने व गिरी बड़ी मिली, लेकिन सबसे ज्यादा घनत्व पर सबसे ज्यादा उपज, 4.01 टन प्रति हेक्टेयर, मिली।
- पारंपरिक बाग बहुत चौड़ी दूरी पर होते हैं और भरने में कई साल लेते हैं। सघन रोपण में कटाई-छंटाई और पाले का प्रबंधन चाहिए, इसलिए छोटे से शुरू करें और विश्वविद्यालय या KVK से बाग प्रशिक्षण लें।
- केवल कलमी पेड़ लगाएं, ICAR, राज्य विश्वविद्यालय या राज्य बागवानी विभाग की नर्सरी से, बिल पर किस्म का नाम लिखवाकर।
पोषण, सिंचाई और देखभाल
- बादाम में उर्वरक की मात्रा उम्र, मिट्टी और किस्म के हिसाब से बदलती है, इसलिए मिट्टी जांच और SKUAST-Kashmir या हिमाचल बागवानी विश्वविद्यालय की पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज का पालन करें; उर्वरक देखें।
- खुली छतरी रखने के लिए हर साल छंटाई करें। CITH पुराने पेड़ों का कायाकल्प दिसंबर से जनवरी में पहली श्रेणी की शाखाएं छांटकर और फिर उचित परागणकर्ता किस्म के साथ Waris की टॉप-ग्राफ्टिंग करके करता है।
- जहां संभव हो फूलों को बसंत के पाले से बचाएं, हवा की निकासी वाली जगह चुनकर, और ओला जाली केवल लागत जोड़कर ही सोचें।
- कश्मीर के कुछ बागों में पकते दानों को पक्षी बहुत नुकसान पहुंचाते हैं; भगाने या जाली की योजना बनाएं।
कटाई और उपज
- कश्मीर घाटी का सबसे अच्छा आंकड़ा CITH के सघन रोपण ट्रायल की अधिकतम उपज 4.01 टन प्रति हेक्टेयर (करीब 1.6 टन प्रति एकड़) है, अच्छे प्रबंधन में; राष्ट्रीय औसत उत्पादकता 2013 में लगभग 0.73 टन प्रति हेक्टेयर (करीब 0.3 टन प्रति एकड़) बताई गई थी। जब तक आपका अपना बाग कुछ और न दिखाए, औसत पर चलें।
- छिलका उतारना मेहनत वाला काम है: कश्मीर की एक रिपोर्ट के अनुसार 5 किलो हरे बादाम से सफाई के बाद केवल 2 से 3 किलो तैयार बादाम मिलता है।
- कलमी पेड़ों में पहली फसल और पूरी फसल के साल किस्म और स्थान पर निर्भर करते हैं; जो किस्म चुनें उसके आंकड़े CITH से पूछें।
लागत और कमाई
- बाग का बजट किस्म, दूरी और बाजार के हिसाब से बहुत बदलता है। अपनी किस्म और दूरी के लिए ताजा अर्थशास्त्र नोट SKUAST-Kashmir या राज्य बागवानी विभाग से पूछें।
- प्रति एकड़ आय = प्रति एकड़ बादाम (छिलके सहित) या गिरी के किलो x प्रति किलो भाव, घटा मजदूरी, छिलका उतारने, छिड़काव, छंटाई, पाले और पक्षी से बचाव का सालाना खर्च। ताजा भाव मंडी भाव और सूखे मेवे के व्यापारियों से देखें।
- बादाम छोड़ने वाले उत्पादकों ने बताया कि कमाई मेहनत को सही नहीं ठहराती; सेब से तुलना करें, जिसे कश्मीर के कई किसानों ने चुना।
बाजार और बिक्री
- भारत जितना बादाम खाता है उसका ज्यादातर आयात करता है, इसलिए भाव पर मुकाबला कड़ा है। कश्मीर के उत्पादकों ने कमजोर बाजार पहुंच, कम प्रोसेसिंग सुविधाओं और घाटी में अलग सूखे मेवे के बाजार के न होने की शिकायत की है, जबकि व्यापार जम्मू की नरवाल मंडी में केंद्रित है।
- ग्रेडिंग शेलिंग प्रतिशत, गिरी के आकार और रंग से होती है; पुराने बागों की उपज का केवल छोटा हिस्सा खाने के मानक पर खरा उतरता है, बाकी तेल के लिए जाता है।
- छिलका उतारने, ग्रेड करने और पैक करने वाले FPO के जरिए बेचने से भाव बेहतर हो सकता है; FPO और निर्यात खरीदार देखें। दोबारा रोपण के लिए सरकारी मदद राज्य और साल के हिसाब से बदलती है; अपने राज्य बागवानी विभाग से पूछें।
