नारंगी गूदे वाला शकरकंद (OFSP) उगाने में आसान फसल है, साधारण मिट्टी पर बेल की कटिंग से 110 से 120 दिन में तैयार, लेकिन ऊंचे दाम पर बेचना मुश्किल: इसके लिए भारत में कोई भाव श्रृंखला नहीं है और ज्यादातर खरीदार अब भी साधारण शकरकंद का भाव ही देते हैं। यह उन किसानों के लिए सबसे ठीक है जो किसी पोषण कार्यक्रम, प्रोसेसर, SHG या शहरी रिटेल चैनल के पास हैं जिसे नारंगी रंग पहले से चाहिए।

नारंगी रंग बीटा-कैरोटीन से आता है, जो विटामिन A का पूर्वरूप है। भारतीय ट्रायल में नारंगी लाइनों में ताजे कंद में प्रति 100 ग्राम करीब 4 से 12 मिग्रा मिला, इसलिए पोषण का दावा असली है, पर ऊंचा दाम पक्का नहीं है। ज्यादातर भारतीय OFSP लाइनें ICAR-CTCRI (तिरुवनंतपुरम) बनाता है। भारत में शकरकंद करीब 1.3 लाख हेक्टेयर में है और औसत उपज 10.9 टन/हेक्टेयर है (ICAR-CTCRI 2023, एक 2026 ट्रायल पेपर के हवाले से)।

भारत में यह कहां उगता है

  • मुख्य राज्य: ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में ज्यादातर क्षेत्र है; केरल, त्रिपुरा और दूसरे पूर्वोत्तर राज्य भी उगाते हैं। CTCRI और KVK का OFSP काम अट्टप्पाडी (केरल), ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और त्रिपुरा से बताया गया है।
  • जलवायु: गर्म, नम मौसम और पाला नहीं; बेलें जमीन ढक लें तो यह सूखे दौर सह लेता है।
  • मिट्टी: दोमट, अच्छे जल निकास वाली, pH 5.6 से 6.6 (TNAU)। भारी जलभराव वाली चिकनी मिट्टी में कंद खराब बनते हैं।
  • मौसम (TNAU): तमिलनाडु में रोपाई के लिए जून से जुलाई और सितंबर सबसे ठीक हैं। KAU दूसरी धान की फसल के बाद दिसंबर से जनवरी में सिंचित रोपाई बताता है, जो धान की परती जमीन के लिए ठीक है।

किस्में

किस्मस्रोतखासियतटिप्पणी
Bhu SonaICAR-CTCRIनारंगी से पीला गूदा; 2024-25 के KVK Dhalai (त्रिपुरा) ट्रायल में 26.3 टन/हेक्टेयर, सूखा पदार्थ 30.4%, TSS 14.6 °Brix और स्वाद में सबसे ऊंचे अंक; ट्रायल की चर्चा में बीटा-कैरोटीन 8 से 12 मिग्रा प्रति 100 ग्राम बताया गयाएक जगह का ट्रायल; CTCRI की सबसे अच्छी तरह दर्ज पोषण किस्म
SP 95/4ICAR-CTCRIप्रति 100 ग्राम 8 मिग्रा बीटा-कैरोटीन; कंद करीब 300 ग्राम, तकुए के आकार के, प्रसंस्करण के लिए ठीकअट्टप्पाडी (केरल) के आदिवासी कार्यक्रम में इस्तेमाल
ST 14ICAR-CTCRI, भुवनेश्वर (ओडिशा)नारंगी गूदा, भूरा छिलका; ताजे में बीटा-कैरोटीन 11.3 मिग्रा प्रति 100 ग्राम; मिठास कम2012 का लैब अध्ययन; अभी की उपलब्धता जांच लें
S 61ICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरमनारंगी गूदा, गुलाबी छिलका; ताजे में बीटा-कैरोटीन 11.0 मिग्रा प्रति 100 ग्राम; मिठास कम2012 का लैब अध्ययन; अभी की उपलब्धता जांच लें
Kamala SundariBCKV, कल्याणी (पश्चिम बंगाल)नारंगी गूदा, भूरा छिलका; ताजे में बीटा-कैरोटीन 6.9 मिग्रा प्रति 100 ग्राम; मिठास कम2012 का लैब अध्ययन; अभी की उपलब्धता जांच लें
SV 98ICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरमनारंगी गूदा; सूखा पदार्थ 27.7%; ताजे में बीटा-कैरोटीन 6.8 मिग्रा प्रति 100 ग्राम; मध्यम मिठास2012 का लैब अध्ययन; अभी की उपलब्धता जांच लें
  • बीटा-कैरोटीन किस्म और लैब के हिसाब से बदलता है, इसलिए किसी भी किस्म को विटामिन A से भरपूर बताकर बेचने से पहले सप्लायर से जांच रिपोर्ट मांगें।
  • गहरा नारंगी गूदा आमतौर पर, पर हमेशा नहीं, ज्यादा बीटा-कैरोटीन दिखाता है, और नारंगी किस्में अक्सर स्थानीय पीली या सफेद किस्मों से कम मीठी होती हैं। अपने खरीदारों से स्वाद चखवा लें।
  • रोपण सामग्री (बेल की कटिंग) व्यावहारिक रुकावट है। बेलें ICAR-CTCRI, भुवनेश्वर के उसके क्षेत्रीय केंद्र, अपने KVK या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से किस्म के नाम के लिखित ब्योरे के साथ लें।

रोपण सामग्री और दूरी

  • नर्सरी: TNAU घुन-मुक्त कंदों से नर्सरी में बेलें उगाने और 3 महीने से पुरानी बेलों से 2 से 3 गांठों वाली 10 से 15 सेमी की कटिंग लेने की सलाह देता है; KAU 20 से 25 सेमी की कटिंग इस्तेमाल करता है। TNAU के अनुसार कटिंग को Azospirillum से उपचारित करें।
  • मेड़: 60 सेमी की दूरी पर (TNAU, KAU)। कटिंग मेड़ पर 15 से 20 सेमी की दूरी पर लगाएं, जो प्रति हेक्टेयर करीब 80,000 कटिंग या प्रति एकड़ 32,000 है।
  • त्रिपुरा के KVK ट्रायल में 75 सेमी x 30 सेमी रखा गया, यानी प्रति हेक्टेयर करीब 44,000 पौधे (प्रति एकड़ 17,800)।
  • सिर्फ साफ, घुन-मुक्त बेलें लें; संक्रमित रोपण सामग्री ही शकरकंद घुन के खेत में आने का मुख्य रास्ता है।

खाद और सिंचाई

  • TNAU: प्रति हेक्टेयर 25 टन गोबर की खाद (प्रति एकड़ 10 टन) और रोपाई पर प्रति हेक्टेयर 20:40:60 किलो N, P2O5, K2O, और 30 दिन बाद वही मात्रा फिर। कुल 40:80:120 किलो प्रति हेक्टेयर (16:32:49 किलो प्रति एकड़) बैठता है। Azospirillum डालने पर TNAU नाइट्रोजन दो-तिहाई कर देता है।
  • त्रिपुरा KVK ट्रायल: प्रति हेक्टेयर 10 टन गोबर की खाद और 50:25:50 किलो N, P2O5, K2O, जिसमें आधा नाइट्रोजन और पूरा P और K रोपाई पर और बाकी N 30 दिन बाद।
  • बहुत ज्यादा नाइट्रोजन से बेलें बढ़ती हैं पर कंद छोटे रहते हैं। अपनी मिट्टी की जांच के हिसाब से चलें और fertilizers देखें।
  • सिंचाई (TNAU): रोपाई से पहले, तीसरे दिन, फिर कटाई से एक हफ्ते पहले तक हर हफ्ते। 25, 50 और 75 दिन पर मिट्टी चढ़ाएं और 50 व 75 दिन पर बेलें उलट दें ताकि गांठों पर जड़ें न फूटें।

कीट और रोग

  • शकरकंद घुन (Cylas formicarius): मुख्य नुकसान। एक 2026 ट्रायल पेपर दूसरी जगहों पर गंभीर मामलों में 70% तक नुकसान बताता है; त्रिपुरा ट्रायल में नीम और फेरोमोन ट्रैप के प्रबंधन में घुन का असर उन्नत किस्मों में करीब 4 से 5% और स्थानीय में 6.5 से 7.9% रहा।
  • साफ रोपण सामग्री, फसल चक्र, कटाई के बाद अवशेष हटाने, करीब 50 दिन पर मिट्टी चढ़ाने ताकि दरारों में कंद खुले न रहें, फेरोमोन ट्रैप और नीम आधारित छिड़काव से रोकथाम करें। किसी भी कीटनाशक के लिए लेबल के हिसाब से चलें और अपने KVK से पूछें।
  • मृदु सड़न: TNAU जगह-जगह carbendazim 1 ग्राम प्रति लीटर से जड़ में डालने की सलाह देता है। खेत में जल निकास रखें।

कटाई और उपज

  • कटाई: TNAU 110 से 120 दिन में 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर कंद बताता है, यानी प्रति एकड़ 8 से 10 टन। खुदाई से एक हफ्ता पहले सिंचाई बंद करें।
  • ट्रायल उपज: 2024-25 के त्रिपुरा ट्रायल में Bhu Sona ने 26.3 टन प्रति हेक्टेयर (10.6 टन प्रति एकड़) दी, जबकि उसी ट्रायल में स्थानीय शकरकंद ने 16 से 20 टन प्रति हेक्टेयर दी।
  • खेत का औसत: भारत का औसत 10.9 टन प्रति हेक्टेयर (4.4 टन प्रति एकड़) है, इसलिए ट्रायल के ऊंचे आंकड़े पर नहीं, अपने रिकॉर्ड पर योजना बनाएं।
  • ताजे कंद कम टिकते हैं और भंडारण में घुन का नुकसान बढ़ता है। खुदाई के कुछ दिन से कुछ हफ्तों के भीतर बिक्री की योजना बनाएं।
💡 सुझाव: एक एकड़ लगाने से पहले किसी खरीदार (पोषण कार्यक्रम, प्रोसेसर, SHG या रिटेलर) से रंग के अतिरिक्त भाव और उठाव की तारीख की चिट्ठी ले लें। इसके बिना नारंगी कंद साधारण शकरकंद के भाव पर ही बिकते हैं।

लागत और कमाई

  • भाव (साधारण शकरकंद, ओडिशा): 1 सितंबर 2026 को मंडी भाव भंजनगर (गंजाम) में ₹4,000 से ₹4,200 प्रति क्विंटल थे, और ओडिशा की दूसरी मंडियों में अधिकतम ₹2,500 से ₹3,000। लीन सीजन में भाव ऊंचे रहते हैं और कटाई के समय गिर जाते हैं। नारंगी कंद के लिए अलग भाव श्रृंखला नहीं मिली, इसलिए खरीदारों से लिखित भाव मांगें। mandi bhav देखें।
  • हिसाब (उदाहरण): प्रति एकड़ 4.4 टन के औसत और ₹2,500 प्रति क्विंटल पर कुल आय करीब ₹1.1 लाख प्रति एकड़ है (44 क्विंटल x ₹2,500)। प्रति एकड़ 8 टन और ₹2,500 प्रति क्विंटल पर यह करीब ₹2 लाख है। प्रति एकड़ 10 टन और ₹4,000 प्रति क्विंटल पर यह ₹4 लाख है, जिसके लिए अच्छी उपज, लीन सीजन की बिक्री और तैयार खरीदार चाहिए।
  • लागत: OFSP के लिए खेती की लागत का कोई पुष्ट आंकड़ा नहीं मिला। मुख्य मदें बेलें, गोबर की खाद, मेड़ बनाना, निराई, मिट्टी चढ़ाना, सिंचाई और खुदाई की मजदूरी हैं। फैसले से पहले अपने KVK से स्थानीय अनुमान ले लें।

बाजार और जोखिम

  • खरीदार: पोषण कार्यक्रम और NGO, चिप्स, आटे और प्यूरी के लिए SHG के प्रसंस्करण, हेल्थ-फूड रिटेलर और स्थानीय बाजार। अच्छी बेलें, कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण क्षमता कई जिलों में कम है, इसलिए अपने KVK से पूछें कि आपके पास क्या है।
  • जोखिम: घुन, जल्दी खराब होना, कटाई पर भाव का गिरना, और कुछ नारंगी लाइनों की स्थानीय स्वाद के लिए कम मिठास। "सुपरफूड" का लेबल लगाकर बेचने के लिए बीटा-कैरोटीन की लैब रिपोर्ट चाहिए।
  • FPO के जरिए साथ बेचने से ढुलाई और प्रसंस्करण के अनुबंध में मदद मिलती है। subsidy finder देखें; OFSP के लिए किसी योजना की दर की पुष्टि नहीं हो सकी। खरीफ की योजना के लिए crop calendar देखें।

स्रोत