अरबी (कोलोकेसिया / घुइयां) की खेती 2026
साल भर स्थिर सब्जी मांग के लिए कम-ऑक्सालेट अरबी कंद और खाने योग्य पत्ते उगाएं।

परिचय
कोलोकेसिया, जिसे अरबी, घुइयां या ताड़ो कहते हैं, एक बहुउपयोगी कंद फसल है जहां कंद और पत्ते दोनों बिकते हैं, दो आय स्रोत देते हुए। कंद पूरे भारत में मुख्य सब्जी हैं और पत्तों से पात्रा व अन्य व्यंजन बनते हैं, खासकर गुजरात, महाराष्ट्र और पूर्व में। मुख्य पहलू उन्नत कम-ऑक्सालेट किस्में चुनना है जो खुजली के बिना पकती हैं और बेहतर दाम पाती हैं, और साल भर फसल देना क्योंकि इसे चरणबद्ध किया जा सकता है। यह कई कंदों से बेहतर आंशिक छाया व जलभराव सहती है, आर्द्रभूमि और बाग फर्श में फिट होते हुए। यह पृष्ठ व्यावसायिक सब्जी व दोहरे-उत्पाद पहलू पर केंद्रित है।
जलवायु
अरबी गर्म आर्द्र फसल है जो 21 से 35 डिग्री सेल्सियस, उच्च आर्द्रता और 1000 मिमी या अधिक वर्षा या सिंचाई पसंद करती है। यह अधिकांश कंदों के विपरीत आंशिक छाया और उथला खड़ा पानी भी सहती है, इसलिए गीली निचली भूमि और तालाब व धान खेत के किनारों के लिए उपयुक्त है। यह पाला या लंबा सूखा सहन नहीं करती।
मिट्टी
अरबी कई मिट्टियों पर उगती है पर उपजाऊ, नमी रोकने वाली, जैविक पदार्थ से भरपूर दोमट या चिकनी दोमट पसंद करती है, पीएच 5.5 से 7.0। अधिकांश कंदों के विपरीत यह भारी, गीली मिट्टी सहती है, इसीलिए यह निचली व जलभराव क्षेत्रों में उगती है। कंद गुणवत्ता हेतु अच्छी उर्वरता व जैविक पदार्थ सही जल निकास से अधिक मायने रखते हैं। कम्पोस्ट कंद आकार व पत्ती उपज दोनों सुधारता है।
रोपाई और दूरी
25 से 30 ग्राम के छोटे कॉर्मेल या कंद टुकड़े फरवरी से जून में मेड़ों या समतल क्यारियों पर लगभग 45 गुणा 30 सेमी दूरी पर लगाएं, बीज दर मोटे तौर पर 1.5 से 2.5 टन प्रति हेक्टेयर। बीज को जैव-फफूंदनाशक से उपचारित करें, और नमी बचाने व खरपतवार रोकने हेतु मल्चिंग करें। चरणबद्ध रोपण लंबे समय तक पत्ते व कंद आपूर्ति देता है।
किस्में
मुक्ताकेशी, श्री रश्मि, श्री पल्लवी, श्री किरण और पंचमुखी जैसी उन्नत कम-ऑक्सालेट किस्में गले की जलन के बिना पकती हैं और अच्छी बाजार मांग रखती हैं, लगभग 18 से 22 टन प्रति हेक्टेयर उपज के साथ। कुछ कंद के साथ पत्ती हेतु भी विकसित हैं। प्रमाणित कम-खुजली किस्में चुनें क्योंकि उच्च-ऑक्सालेट स्थानीय खुजली करती और कम दाम पाती हैं।
देखभाल और प्रबंधन
एफवाईएम के साथ संतुलित एनपीके दें और मिट्टी लगातार नम रखें, क्योंकि अरबी को अच्छे कंद हेतु स्थिर नमी चाहिए। दो-तीन निराई और मिट्टी चढ़ाना कंद बनना सुधारते हैं। पत्ते काटने पर परिपक्व बाहरी पत्ते लें, पौधा पूरा न उतारें। पर्याप्त पोटाश कंद गुणवत्ता व भंडारण सुधारता है।
कीट और रोग
गीले मौसम में अरबी पत्ती झुलसा सबसे गंभीर रोग है, जो बड़ी उपज हानि करता है, साथ ही कंद सड़न और पत्तों पर अरबी हॉर्नवर्म व एफिड। प्रतिरोधी किस्में, स्वच्छ बीज कंद, हवा हेतु दूरी उपयोग करें, और संक्रमित पत्ते हटाएं। अच्छी खेत स्वच्छता और बहुत घना रोपण न करना झुलसा घटाता है, पत्ती व कंद दोनों फसलों की रक्षा करते हुए।
उपज और कटाई
कंद 5 से 8 माह पर तैयार होते हैं जब पत्तियां पीली होकर सूखें; पत्ते पहले और मौसम भर तोड़े जा सकते हैं। सावधानी से खोदें, कॉर्मेल को मातृ कंद से अलग करें, और साफ करें। कंद ठंडी सूखी स्थिति में कुछ सप्ताह रहते हैं। चरणबद्ध रोपण और दोहरी पत्ती-व-कंद कटाई आय फैलाते और बाजार जोखिम घटाते हैं।
लागत और मुनाफा
अरबी मध्यम-आदान फसल है। अच्छी व उन्नत पद्धतियों में उपज सामान्यतः लगभग 80 से 120 क्विंटल प्रति एकड़ बताई जाती है। किसान अक्सर शिखर मौसम में लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति एकड़ शुद्ध लाभ बताते हैं, और पत्ते व चरणबद्ध बिक्री जोड़ने पर अधिक। ये संकेतात्मक हैं जो किस्म, क्षेत्र, मौसम व बाजार से बदलते हैं, इसलिए विस्तार से पहले स्थानीय दाम जांचें।
ये अनुमानित आंकड़े हैं। असली लागत और आमदनी क्षेत्र, बाजार और प्रबंधन के अनुसार बदलती है, इसलिए स्थानीय रूप से पुष्टि करें।
बाजार और मांग
कंद पूरे भारत की सब्जी मंडियों में साल भर स्थिर मांग के साथ बिकते हैं, और पत्ते गुजरात, महाराष्ट्र व पूर्व में पात्रा व समान व्यंजनों हेतु अच्छे बिकते हैं। साफ, श्रेणीबद्ध, कम-ऑक्सालेट कंद और कोमल पत्ते देना, और अच्छे दाम पाने हेतु कटाई चरणबद्ध करना लाभ बढ़ाता है। स्थानीय रिटेल गठजोड़ व एफपीओ शहरी बाजार व प्रसंस्करणकर्ता तक पहुंचाते हैं।
सब्सिडी और सहायता
कोलोकेसिया एमआईडीएच में कंद व सब्जी फसल के रूप में रोपण सामग्री और क्षेत्र विस्तार की सहायता के साथ शामिल है, जिसमें भारत सरकार अधिकांश राज्यों में 60 प्रतिशत और पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों में 90 प्रतिशत वित्त देती है। राज्य उद्यान मिशन और आरकेवीवाई कई राज्यों में सब्जी व कंद खेती और कटाई-उपरांत प्रबंधन की सहायता करते हैं।
भारत में कहां उगाएं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कौन सी अरबी किस्म खुजली नहीं करती?
क्या मैं अरबी के कंद और पत्ते दोनों बेच सकता हूं?
क्या अरबी जलभराव भूमि में उग सकती है?
अरबी की सबसे हानिकारक बीमारी कौन सी है?
मैं साल के अधिक समय अरबी कैसे आपूर्ति करूं?
खेती शुरू करने में मदद चाहिए या किसानों से जुड़ना है?
समुदाय में पूछें संघ से जुड़ें