कोलोकेसिया (अरबी, ताड़ो, घुइयां) एक भरोसेमंद सब्जी कंद फसल है जो भारत में लगभग 1,500 मीटर तक की ऊंचाई पर ज्यादातर जगह चलती है, गर्म और नम मौसम में, जहां 1,000 मिमी बारिश हो या नियमित सिंचाई मिले। इसके लिए दोमट मिट्टी, बोने के लिए कंदिकाएं (cormels), करीब 6 से 8 महीने और बरसात में पत्ती झुलसा की तैयारी चाहिए।

छपी हुई उपज में बहुत फर्क है: सामान्य package of practices में करीब 8 से 10 टन/हेक्टेयर, केरल की उन्नत किस्मों में 15 से 20 टन/हेक्टेयर, और मेघालय के एक ट्रायल में 20 टन/हेक्टेयर मुख्य कंद के साथ 15 टन/हेक्टेयर बगल की कंदिकाएं। वही किस्म चुनें जो आपकी स्थानीय मंडी पसंद करती है और उसी मौसम में बोएं जिसमें आपके इलाके में बोई जाती है।

कहां और कैसे उगती है

  • जलवायु: औसत तापमान 21 से 27°C, 1,500 मीटर तक की ऊंचाई, और बढ़वार के दौरान करीब 1,000 मिमी बारिश; जहां बारिश कम हो वहां ऊपर से सिंचाई दें (TNAU)।
  • मिट्टी: दोमट मिट्टी, pH 5.5 से 7.0 (TNAU)। कोलोकेसिया मूल रूप से गीली जमीन का पौधा है और ज्यादातर कंदों से बेहतर नमी सह लेता है, फिर भी सामान्य package में पानी भरने के बजाय हफ्ते में एक बार सिंचाई की जाती है।
  • मौसम: TNAU के package में जून से जुलाई और फरवरी से मार्च बुवाई के ठीक समय हैं। मेघालय के उमियम में ICAR के ट्रायल में मार्च में बुवाई हुई और बारानी हालत में 240 दिन पर खुदाई हुई।
  • खुजली: कच्चे कंद, कंदिकाओं और पत्तों में calcium oxalate के कण होते हैं जिनसे खुजली होती है। पकाने या रात भर पानी में भिगोने से यह निकल जाती है, और अच्छी गुणवत्ता के कंद बिना रेशे के और पकने पर नरम होते हैं। अगर कोई किस्म पकाने के बाद भी खुजली करे तो खरीदार अच्छा दाम नहीं देंगे।

किस्में

किस्मस्रोतखासियत
Sree RashmiICAR-CTCRI, तिरुवनंतपुरम7 से 8 महीने; 15 से 20 टन/हेक्टेयर; ऊंचा पौधा (100 से 150 सेमी); शंकु आकार की कंदिकाएं; पकाने में अच्छी
Sree PallaviICAR-CTCRI6.5 से 7 महीने; 15 से 18 टन/हेक्टेयर; प्रति पौधा 20 से 25 छोटी कंदिकाएं; खेत में पत्ती झुलसा और मोजेक के प्रति सहनशील (KAU पोर्टल)
Sree KiranICAR-CTCRI6.5 से 7 महीने; भारत की पहली हाइब्रिड अरबी; कंदिकाएं ज्यादा दिन टिकती हैं
Panchamukhi, Co 1, Satamukhi (Kovvur)TNAU के package में लोकप्रिय किस्मों के रूप में दर्जउमियम के ट्रायल में Panchamukhi से सबसे ज्यादा कंद उपज (20 टन/हेक्टेयर, औसत कंद 1.5 किलो) और White Gouriya से सबसे ज्यादा कंदिका और कुल उपज (15.29 और 25.92 टन/हेक्टेयर) मिली
  • उमियम के ट्रायल में Nayabungalow में पत्ती झुलसा सबसे कम (8% प्रकोप) रहा। ऑक्सेलिक एसिड और स्टार्च किस्मों में अलग-अलग थे, इसलिए नामों से ज्यादा स्थानीय ट्रायल के नतीजे मायने रखते हैं।
  • बोने की कंदिकाएं राज्य कृषि विश्वविद्यालय, KVK या ICAR-CTCRI से लें, आम बाजार से नहीं, क्योंकि वहां की सामग्री में झुलसा और मोजेक हो सकता है।

रोपण सामग्री और दूरी

  • रोपण सामग्री: 20 से 25 ग्राम की कंदिकाएं, 2.5 से 7.5 सेमी गहराई पर (TNAU)। उमियम के ट्रायल में अंकुरित कंद या कंदिकाएं 5 से 7 सेमी गहरी लगाई गईं।
  • बीज दर: 800 किलो/हेक्टेयर, यानी करीब 325 किलो प्रति एकड़ (TNAU)।
  • दूरी: मेड़ और नालियां 45 सेमी की दूरी पर और नाली में पौधे 45 सेमी पर (TNAU), यानी करीब 20,000 पौधे प्रति एकड़ या 49,000 प्रति हेक्टेयर। उमियम के ट्रायल में भी 45 x 45 सेमी रखा गया। ICAR से बताई गई एक और दूरी 60 x 40 सेमी है।

खाद और सिंचाई

अवस्थाप्रति हेक्टेयरप्रति एकड़ (करीब)
आधार: FYM25 टन10 टन
आधार: N, P, K20, 30, 60 किलो8, 12, 24 किलो
45 दिन पर ऊपर से: N, P, K20, 30, 60 किलो8, 12, 24 किलो
  • कुल मात्रा 40 किलो N, 60 किलो P और 120 किलो K प्रति हेक्टेयर है (TNAU), यानी प्रति एकड़ करीब 16, 24 और 48 किलो। इसे मिट्टी जांच और fertilizer guide की मदद से खाद की बोरियों में बदलें।
  • हफ्ते में एक बार सिंचाई करें (TNAU), रेतीली मिट्टी या गर्मी में ज्यादा बार। जहां पानी कम हो वहां ड्रिप एक विकल्प है।

कीट और रोग

  • पत्ती झुलसा (Phytophthora colocasiae): बरसात में सबसे बड़ा खतरा, TNAU के अनुसार 50% तक नुकसान बताया गया है। Sree Pallavi जैसी सहनशील किस्में, साफ रोपण सामग्री और कतारों के बीच अच्छा जल निकास रखें।
  • माहू और पत्ती खाने वाले कीड़े: TNAU quinalphos या dimethoate 0.05% बताता है। लेबल के हिसाब से चलें, प्रतीक्षा अवधि मानें और मौजूदा सिफारिश अपने KVK से पूछ लें, क्योंकि पत्ते और कंद खाए जाते हैं।
💡 सुझाव: छोटे खेत में बुवाई 3 से 4 हफ्ते के अंतर पर करें। इससे कटाई बंट जाती है और पूरी फसल एक साथ झुलसा वाले मौसम में आने का खतरा घटता है।

कटाई और उपज

  • फसल 6 से 8 महीने में पकती है (TNAU), और TNAU 180 दिन में करीब 8 से 10 टन/हेक्टेयर बताता है।
  • CTCRI के अनुसार Sree Rashmi में 15 से 20 टन/हेक्टेयर और Sree Pallavi में 15 से 18 टन/हेक्टेयर मिलता है। एकड़ के हिसाब से सामान्य package में करीब 3.2 से 4 टन/एकड़ और उन्नत किस्मों में 6 से 8 टन/एकड़।
  • खुदाई पर मुख्य कंद और बगल की कंदिकाएं अलग की जाती हैं; बाजार में आमतौर पर कंदिकाएं बिकती हैं। मंडी भेजने से पहले आकार के हिसाब से छांट लें।

लागत और कमाई

  • अरबी की खेती की लागत का कोई पुष्ट भारतीय आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए यहां नहीं दिया गया है। मुख्य खर्च बीज कंदिकाएं (प्रति एकड़ 325 किलो), मेड़ बनाने, निराई और खुदाई की मजदूरी, और FYM हैं।
  • हिसाब का तरीका: कुल आय = उपज x भाव। प्रति एकड़ 3.2 से 8 टन पर खेत के भाव में हर ₹10 प्रति किलो का मतलब ₹32,000 से ₹80,000 प्रति एकड़ है। योजना बनाने से पहले अपनी नजदीकी मंडी में अरबी का ताजा भाव mandi bhav में देखें, क्योंकि भाव मौसम और आवक के साथ बदलते हैं।
  • बीज, FYM, खाद, मजदूरी और ढुलाई घटाएं। फसल को 6 से 8 महीने लगते हैं, इसलिए नतीजे की तुलना उसी जमीन पर किसी कम समय की सब्जी की कमाई से करें।

बाजार और बिक्री

  • अरबी पूरे भारत के शहरी बाजारों में नियमित सब्जी है, और उत्तर-पूर्व में पत्तों और डंठलों सहित पूरा पौधा खाया जाता है। स्थानीय सब्जी थोक व्यापारियों को बेचें; छंटे और धुले कंद बेहतर भाव पाते हैं।
  • पत्तों के तय भाव पर खरीदारों का कोई भारतीय आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए पहले खरीदार पक्का करें और पत्तों की कमाई को योजना नहीं, अतिरिक्त लाभ मानें।
  • समूह में बिक्री से ढुलाई में मदद मिलती है, इसके लिए FPO देखें। फसल बीमा की जानकारी PMFBY पर और मौजूदा योजनाएं subsidy finder पर मिलेंगी।

स्रोत