सूरन (ओल, जिमीकंद) केरल, ओडिशा, गुजरात और तमिलनाडु समेत कई जगह 8 महीने की कंद फसल के रूप में उगाई जाती है, और यह नारियल की छांव में भी उग जाती है। इसकी मुख्य लागत बीज कंद और मजदूरी है, और मुख्य रोग का खतरा कॉलर रॉट है। ICAR के ट्रायल में 23 से 32 टन प्रति हेक्टेयर (9 से 13 टन प्रति एकड़) मिला, जो प्रचार में बताए जाने वाले 50 से 80 टन से काफी कम है।
उपज मुश्किल हिस्सा नहीं है; बिक्री है। 2026 में केरल की मंडियों में भाव सिर्फ करीब ₹24 से ₹55 प्रति किलो रहे, और कंद भारी और जल्दी खराब होने वाली सब्जी है, इसलिए बड़े क्षेत्र में लगाने से पहले पक्का कर लें कि बेचेंगे कहां।
कहां उगती है और क्या चाहिए
- ट्रायल की जगहें: ICAR-CTCRI क्षेत्रीय केंद्र, भुवनेश्वर (ओडिशा); नवसारी कृषि विश्वविद्यालय (दक्षिण गुजरात, काली कपास मिट्टी); और तमिलनाडु के पूर्वी तट पर तिरुवारूर, जहां यह नारियल के पेड़ों के बीच उगाई गई। फसल केरल में भी खूब उगाई जाती है।
- मिट्टी और पानी: अच्छे जल निकास वाली मिट्टी चाहिए। खराब जल निकास और गर्म गीला मौसम कॉलर रॉट को बढ़ावा देते हैं। गुजरात के ट्रायल में सिंचाई दी गई; भुवनेश्वर की फसल बारानी थी और अक्टूबर से जनवरी में चार पूरक सिंचाइयां दी गईं।
- छांव: ICAR-CTCRI इस फसल को छांव सहने वाली बताता है, और तिरुवारूर के ट्रायल में यह 7.5 x 7.5 मीटर पर लगे 38 साल पुराने नारियल के पेड़ों के बीच उगाई गई।
- अवधि: भुवनेश्वर की फसल जून के बीच में लगाई गई और फरवरी के बीच में काटी गई, यानी रोपाई के 8 महीने बाद।
किस्में
| किस्म | स्रोत | ट्रायल का नतीजा |
|---|---|---|
| Gajendra | ANGRAU (2006) | तिरुवारूर में नारियल के नीचे 28.9 टन/हेक्टेयर; 50% अंकुरण 56 दिन में; औसत कंद वजन 1.34 किलो; 25.3% शुष्क पदार्थ। भुवनेश्वर ट्रायल: 23 से 32 टन/हेक्टेयर |
| Sree Padma | ICAR-CTCRI (1993) | उसी तिरुवारूर ट्रायल में 24.8 टन/हेक्टेयर; 50% अंकुरण 62 दिन में; औसत कंद 0.98 किलो |
| स्थानीय प्रकार | किसानों की अपनी | 14.8 टन/हेक्टेयर; धीमी, 50% अंकुरण में 93 दिन |
- तिरुवारूर के ट्रायल में Gajendra ने सबसे अच्छा शुद्ध लाभ दिया। ICAR-CTCRI ने बताया है कि कोई भी उगाई जाने वाली किस्म कॉलर रॉट के प्रति प्रतिरोधी नहीं है।
- किस्म के हिसाब से खुजली (acridity) की कोई रेटिंग पुष्ट नहीं हुई। भुवनेश्वर के ट्रायल में सिर्फ रासायनिक खाद की तुलना में गोबर की खाद वाले जैविक पोषण से कंदों में calcium oxalate घटा।
बीज कंद, दूरी और रोपाई
- बीज का आकार: भुवनेश्वर के ट्रायल में 400 ग्राम के Gajendra कंद 90 x 90 सेमी पर लगाए गए। नवसारी के एक ट्रायल में 250, 500 और 750 ग्राम के कंद और तीन दूरियां (60 x 60, 75 x 50, 75 x 60 सेमी) परखी गईं; सबसे ज्यादा उपज, 74.6 टन/हेक्टेयर, 75 x 60 सेमी पर 500 ग्राम के कंद से आई, लेकिन बाकी मेल में नतीजे ऊपर-नीचे रहे (34 से 60 टन/हेक्टेयर), इसलिए इसे एक ट्रायल मानें, वादा नहीं।
- प्रति एकड़ पौधे: 90 x 90 सेमी पर प्रति हेक्टेयर 12,346 (प्रति एकड़ करीब 4,940); 75 x 60 सेमी पर प्रति हेक्टेयर करीब 22,200 (प्रति एकड़ करीब 8,990)। नारियल के नीचे तिरुवारूर में 45 x 90 सेमी की क्यारियां रखी गईं।
- बीज की जरूरत: 400 ग्राम x 4,940 पौधे यानी प्रति एकड़ करीब 2 टन बीज कंद, और 500 ग्राम x 8,990 पौधे यानी प्रति एकड़ करीब 4.5 टन। बीज सबसे बड़ी अकेली लागत है, इसलिए दूरी तय करने से पहले उसका भाव देख लें।
- कटे या पूरे कंदों का रोपाई से तीन दिन पहले उपचार करें (कॉलर रॉट वाला भाग देखें)। तिरुवारूर के ट्रायल में कटे टुकड़ों को नमी उड़ने से रोकने के लिए गोबर के घोल में डुबोया गया और गड्ढों को ऊपरी मिट्टी और 2 से 3 किलो गोबर की खाद से भरा गया।
- रोपाई के बाद धान की पराली या घास की मल्चिंग करें; करीब 20, 40 और 70 दिन पर (भुवनेश्वर) या 45 दिन पर (नवसारी) निराई और मिट्टी चढ़ाई करें।
पोषण
| कार्यक्रम | प्रति हेक्टेयर | प्रति एकड़ | बताई गई उपज |
|---|---|---|---|
| भुवनेश्वर, रासायनिक (N-P2O5-K2O) | 80-60-100 किलो | करीब 32-24-40 किलो | 23.4 टन/हेक्टेयर |
| भुवनेश्वर, FYM + राख + जैव उर्वरक | 10 टन FYM + 5 टन राख + 5 किलो Azospirillum + 5 किलो PSB | करीब 4 टन FYM + 2 टन राख + 2 किलो Azospirillum + 2 किलो PSB | 32.0 टन/हेक्टेयर |
| नवसारी, FYM + रासायनिक | 15 टन FYM + 100:50:150 किलो N:P2O5:K2O | करीब 6 टन FYM + 40:20:61 किलो | कंद के आकार और दूरी के हिसाब से 34 से 75 टन/हेक्टेयर |
- खाद और फॉस्फोरस खेत तैयार करते समय या गड्ढे में डालें। भुवनेश्वर में आधी नाइट्रोजन और पोटाश रोपाई के एक महीने बाद और बाकी एक महीने और बाद दी गई; नवसारी में आधी रोपाई पर गड्ढे में और आधी 45 दिन पर मिट्टी चढ़ाते समय। fertilizers देखें और मिट्टी की जांच से पक्का करें।
कॉलर रॉट और दूसरी समस्याएं
- ICAR-CTCRI कॉलर रॉट (Sclerotium rolfsii) को सभी उगाने वाले इलाकों का सबसे आम और नुकसानदेह रोग बताता है। इससे तने के आधार पर पानी भरे धब्बे, पीलापन और पौधे का गिरना होता है, साथ में सफेद फफूंद और सरसों जैसे भूरे sclerotia दिखते हैं। यह कटे हुए कंदों में भंडारण के दौरान सड़न भी करता है।
- कृषि उपाय: रोगमुक्त कंद, खेत का जल निकास, गहरी जुताई, पराली की मल्चिंग, रोगी पौधे निकालना, और गैर-मेजबान फसलों के साथ फेरबदल; एक ही खेत में बार-बार सूरन लगाने से रोग बढ़ता है।
- रासायनिक (CTCRI): रोपाई से तीन दिन पहले कंदों को mancozeb + carbendazim 2 ग्राम प्रति लीटर से उपचारित करें, और निराई के बाद उसी मात्रा से drench करें। लेबल और अपने KVK की सलाह के हिसाब से चलें।
- जैविक (CTCRI): गोबर के घोल में Trichoderma 5 ग्राम प्रति किलो कंद, Trichoderma मिली FYM 2 से 2.5 किलो प्रति गड्ढा, और निराई के बाद तने के पास 150 ग्राम Trichoderma वर्मीकम्पोस्ट प्रति पौधा। pests देखें।
कटाई और उपज
- रोपाई के करीब 8 महीने बाद, जब पत्तियां पीली होकर सूख जाएं, कटाई करें। भुवनेश्वर की फसल से जैविक या मिश्रित पोषण में करीब 25 से 32 टन/हेक्टेयर और रासायनिक सिफारिश में 23.4 टन/हेक्टेयर मिला।
- नारियल के नीचे तिरुवारूर का ट्रायल: Gajendra 28.9 टन/हेक्टेयर, Sree Padma 24.8 टन/हेक्टेयर, स्थानीय 14.8 टन/हेक्टेयर। नारियल की उपज नहीं घटी: प्रति पेड़ सालाना नारियल 86.5 से बढ़कर 92.8 हो गए (6.3 प्रतिशत की बढ़त)।
- नवसारी का 74.6 टन/हेक्टेयर का आंकड़ा एक ट्रायल का एक मेल है। खेत की असली योजना 20 से 30 टन/हेक्टेयर पर बनाएं।
लागत और कमाई
- ट्रायल की लागत: ₹75,000 प्रति हेक्टेयर (तिरुवारूर, 2013 से 2015) और ₹110,000 से ₹132,000 प्रति हेक्टेयर (भुवनेश्वर, 2006 से 2008)। ये पुराने हैं, इसलिए बीज कंद, मजदूरी और खाद के भाव अपने इलाके से लें।
- ट्रायल की कमाई: तिरुवारूर: करीब ₹8 प्रति किलो पर कुल आय ₹2.31 लाख प्रति हेक्टेयर, शुद्ध ₹1.56 लाख और लाभ-लागत अनुपात 3.1। भुवनेश्वर: ₹10 प्रति किलो पर शुद्ध ₹1.24 से ₹2.03 लाख प्रति हेक्टेयर।
- 2026 के भाव: केरल की मंडियों के Agmarknet आंकड़ों में मई से अगस्त 2026 के बीच मंडी के हिसाब से करीब ₹2,400 से ₹5,500 प्रति क्विंटल (₹24 से ₹55 प्रति किलो) दिखे।
- प्रति एकड़ का उदाहरण (कुल आय): ₹30 प्रति किलो पर 10 टन यानी ₹3.0 लाख; ₹45 प्रति किलो पर 12 टन यानी ₹5.4 लाख। इसमें से बीज, मजदूरी, खाद, फफूंदनाशक और ढुलाई अपने कोटेशन से घटाएं। शुद्ध कमाई इससे काफी कम हो सकती है क्योंकि अकेला बीज ही प्रति एकड़ करीब 2 टन लगता है।
बाजार और जोखिम
- कंद सब्जी के रूप में स्थानीय मंडियों से बिकता है। 2026 में केरल की मंडियों के बीच भाव में दोगुने से ज्यादा का फर्क था, इसलिए लगाने से पहले mandi bhav और अपनी नजदीकी मंडी देख लें।
- कॉलर रॉट भंडारित कंदों को भी बिगाड़ देता है, इसलिए कटाई के जल्दी बाद बिक्री की योजना बनाएं या भंडारण से पहले उपचार करें (ICAR-CTCRI संक्रमित कंदों के लिए Trichoderma मिला गोबर का घोल सुझाता है)।
- जो कंपनियां सूरन के बीज कंद पर ऊंचे भाव की पक्की buy-back का वादा करें, उनसे सावधान रहें; पहले अपने KVK या बागवानी विभाग से पूछें। FPO से समूह में बिक्री और KCC का कर्ज मदद कर सकता है, और subsidy finder में योजनाएं मिलती हैं। कंद फसल की कोई सब्सिडी दर पुष्ट नहीं हुई।
स्रोत
- Sivakumar et al., Suitability study on elephant foot yam varieties under coconut gardens of east coast Tamil Nadu, J. Pharmacognosy and Phytochemistry 9(4S), 2020
- Nedunchezhiyan et al., Organic source of nutrients in elephant foot yam, Indian Journal of Agricultural Sciences 87(8), 2017 (ICAR-CTCRI Bhubaneswar)
- Patel et al., Effect of spacing and corm size on elephant foot yam, Journal of Root Crops 37(1), 2011 (Navsari Agricultural University)
- ICAR-CTCRI, Collar rot of elephant foot yam (2023)
- ACROP, elephant yam mandi prices, Kerala (Agmarknet data, 2026)
