केसर आम सौराष्ट्र (गुजरात) की गर्म और सूखी पट्टी में सबसे अच्छा चलता है, यानी जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली और भावनगर में, जहां इसे गिर केसर के नाम से GI टैग मिला है। इसे मराठवाड़ा और महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी उगाया जाता है। कलमी बाग को फल देना शुरू करने में 4 से 5 साल लगते हैं, और असली अड़चन पेड़ नहीं बल्कि फूल आने के समय का मौसम है: बेमौसम बारिश, बादल और चक्रवात ने हाल के कई सालों में फसल घटाई है।

2025 में सोरठ क्षेत्र की औसत उपज करीब 7 टन प्रति हेक्टेयर (2.8 टन प्रति एकड़) बताई गई, जो घनी रोपाई से मिलने वाली बताई जाने वाली 15 से 20 टन/हेक्टेयर से बहुत कम है। हिसाब क्षेत्र की औसत उपज से लगाएं, ब्रोशर की उपज से नहीं।

भारत में यह कहां उगता है

  • सौराष्ट्र, गुजरात: सोरठ क्षेत्र में आम के 29,245 हेक्टेयर बाग बताए गए, और पिछले साल करीब 1.97 लाख टन उत्पादन हुआ। पुरानी रिपोर्टें जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली और भावनगर में केसर का रकबा करीब 20,000 से 25,000 हेक्टेयर और सीजन का औसत उत्पादन करीब 2.5 लाख टन बताती हैं।
  • GI टैग: गिर केसर 2011 में गिरनार की तलहटी (जूनागढ़ और अमरेली जिले) में उगे फल के लिए Geographical Indication के रूप में दर्ज हुआ। इस इलाके के बाहर, जैसे मराठवाड़ा में, उगा केसर सादे केसर के नाम से बिकता है और उस पर गिर नाम नहीं लग सकता।
  • महाराष्ट्र और दूसरे राज्य: Mahatma Phule Krishi Vidyapeeth (MPKV) का एक शोध पत्र केसर को महाराष्ट्र की सबसे लोकप्रिय किस्म बताता है, और गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी इसका रकबा बढ़ रहा है।
  • जलवायु: गर्म, सूखी गर्मी और फूल आने के आसपास सूखा मौसम फसल को रास आता है। Junagadh Agricultural University (JAU) के अनुसार केसर को पकने के लिए अपेक्षाकृत कम गर्मी की जरूरत होती है। फूल आने के समय बारिश, ओले और दिन-रात के तापमान में बड़े उतार-चढ़ाव से भारी नुकसान होता है।
  • मिट्टी: गहरी, अच्छे जल निकास वाली दोमट या मध्यम काली मिट्टी; JAU की सलाह के अनुसार केसर की गुठली का मूलवृंत सिंचाई के पानी में EC 2.0 dS/m तक की खारापन सह लेता है। जलभराव वाली जगह से बचें।
  • मौसम का जोखिम: दिन-रात के तापमान के उतार-चढ़ाव और बेमौसम बारिश के बाद 2023 के सीजन में उत्पादन 2022 की तुलना में 25 से 30% गिरा, और मई 2021 के चक्रवात Tauktae ने सौराष्ट्र में बहुत सी फसल नष्ट कर दी।

किस्म, रोपण सामग्री और दूरी

  • किस्म: केसर खुद एक किस्म है। Rahuri में MPKV के ट्रायल में अच्छे पोषण प्रबंधन पर केसर के फल का वजन करीब 241 ग्राम, गूदा 70% और TSS 19.5 डिग्री Brix रहा। फल कच्चे परिपक्व अवस्था में तोड़े जाते हैं और तोड़ने के बाद पकाए जाते हैं।
  • कलमें: पंजीकृत नर्सरी से कलमें लें और केसर की डाली (scion) जाने-पहचाने पेड़ की ही लगवाएं। JAU गुजरात की नर्सरियों के लिए मूलवृंत के रूप में केसर की गुठली की सलाह देता है।
  • दूरी: TNAU पारंपरिक रोपाई के लिए हर तरफ 7 से 10 मीटर (करीब 40 से 80 पौधे प्रति एकड़, 100 से 200 प्रति हेक्टेयर), घनी रोपाई के लिए 5 x 5 मीटर (400 पौधे प्रति हेक्टेयर, करीब 162 प्रति एकड़) और डबल हेज रो पद्धति (266 पौधे प्रति हेक्टेयर) बताता है। घनी रोपाई वाले बाग नियमित छंटाई और कैनोपी प्रबंधन पर टिके होते हैं, और JAU के पास घनी रोपाई वाले केसर में कैनोपी प्रबंधन पर ट्रायल का काम है।
  • रोपाई का समय: मानसून की शुरुआत, गड्ढों में कम्पोस्ट और ऊपरी मिट्टी भरकर।

खाद, सिंचाई और फूल

पेड़ की उम्रप्रति पेड़ FYMप्रति पेड़ N, P, K
पहला साल10 किलो0.2, 0.2, 0.3 किलो
इसके बाद हर साल10 किलो बढ़ाएं0.2, 0.2, 0.3 किलो बढ़ाएं
छठे साल से50 किलो1.0, 1.0, 1.5 किलो
  • यह तालिका आम के लिए TNAU का सामान्य कार्यक्रम है, केसर के लिए अलग से नहीं बनी। पूरे बड़े पेड़ों के लिए अक्सर बताई जाने वाली एक और मात्रा 1.5 किलो N, 0.5 किलो P और 1.0 किलो K के साथ 40 से 50 किलो FYM है, जिसमें आधा नाइट्रोजन मानसून की शुरुआत में और बाकी फूल आने पर दिया जाता है। मिट्टी की जांच कराएं और अपने KVK की सलाह मानें।
  • दक्षिण सौराष्ट्र के कायाकल्प किए गए (पुराने छांटे गए) केसर बागों के लिए JAU कायाकल्प के चौथे साल से प्रति पेड़ आधार खुराक में 150 किलो FYM के साथ 562.5 ग्राम N, 240 ग्राम P और 562.5 ग्राम K, और फरवरी में 562.5 ग्राम N और 562.5 ग्राम K, और साथ में जुलाई के बीच में मिट्टी में प्रति पेड़ 7.5 ग्राम सक्रिय तत्व paclobutrazol की सलाह देता है (JAU सिफारिश, 2020)।
  • JAU कायाकल्प किए गए केसर बागों में बेहतर फूल के लिए अक्टूबर में और एक महीने बाद 1,000 ppm cycocel के दो छिड़काव (2023), और घनी रोपाई वाले केसर में फूल आने पर और फल लगने के दो हफ्ते बाद 1,500 ppm salicylic acid (2025) की भी सलाह देता है। इन वृद्धि नियामकों की मात्रा और समय सही होना जरूरी है, इसलिए इन्हें सिर्फ KVK या विश्वविद्यालय की सलाह पर इस्तेमाल करें।
  • Rahuri के MPKV ट्रायल में उर्वरक को फल बढ़ने की peanut, marble और egg अवस्थाओं के हिसाब से छोटी मात्राओं में बांटकर देने से सामान्य दो खुराक वाले कार्यक्रम की तुलना में बड़ा फल, ज्यादा गूदा और बेहतर मिठास मिली।
  • पानी की कमी वाले सौराष्ट्र में मल्चिंग के साथ ड्रिप आम है।

कीट और रोग

  • फुदका (hopper): फूल के समय का मुख्य कीट। TNAU फूल की बाली निकलते समय और दो हफ्ते बाद acephate 75 SP 1 ग्राम प्रति लीटर या phosalone 35 EC 1.5 मिली प्रति लीटर का छिड़काव बताता है। जब मधुमक्खियां फूलों पर आ रही हों, तब खिले फूलों पर छिड़काव न करें।
  • चूर्णिल आसिता (powdery mildew): बाली की अवस्था में wettable sulphur 0.2%, खासकर बादल और ठंडे मौसम में।
  • फल मक्खी: methyl eugenol के ट्रैप, करीब 10 मिली प्रति ट्रैप और 25 ट्रैप प्रति हेक्टेयर (10 प्रति एकड़), साथ में गिरे फल उठाकर गाड़ दें।
  • विकृति (malformation): प्रभावित बालियों और टहनियों को छांट दें और carbendazim 0.1% का छिड़काव करें।
  • रसायनों के नाम यहां सिर्फ वही हैं जो TNAU ने बताए हैं, और उसका पेज पुराना है; आम के कुछ पुराने रसायनों (जैसे carbaryl और tridemorph) पर भारत में रोक लगी है या प्रतिबंध का प्रस्ताव आया है, इसलिए कोई भी उत्पाद खरीदने से पहले पक्का कर लें कि वह अभी पंजीकृत है। लेबल और अपने स्थानीय KVK की सलाह मानें, और तुड़ाई से पहले का इंतजार का समय रखें, जो निर्यात के फल के लिए जरूरी है।

तुड़ाई और उपज

  • पहला फल: कलमी पेड़ों में फल आना करीब 4 से 5 साल में शुरू होता है और अच्छी फसल करीब 7 से 8 साल में आती है; घनी रोपाई के पेड़ पहले फल देने लगते हैं।
  • सीजन: 2026 में तलाला APMC की नीलामी 19 अप्रैल को शुरू हुई, यानी 2025 से एक हफ्ता पहले, और पिछले साल का सीजन 44 दिन चलकर 8 जून को खत्म हुआ।
  • उपज: TNAU आम के लिए 15 साल तक 8 से 10 टन/हेक्टेयर और उसके बाद 15 से 20 टन/हेक्टेयर बताता है। सोरठ का क्षेत्रीय आंकड़ा 2025 में करीब 7 टन/हेक्टेयर था, जो एक साल छोड़कर फल आने और मौसम के नुकसान की वजह से कम है।
  • फल कच्चे परिपक्व अवस्था में तोड़ा जाता है। JAU ने पाया कि परिपक्व केसर को 14 डिग्री C और 90% नमी पर रखने से गुणवत्ता 25 दिन तक बनी रहती है।
💡 सुझाव: सौराष्ट्र के बाहर केसर का बाग लगाने से पहले देख लें कि आपके इलाके में फूल के समय सूखा मौसम रहता है या नहीं। जहां मार्च या अप्रैल में अक्सर बारिश होती है, वहां दूरी चाहे जो हो, फसल बार-बार खराब होगी।

लागत और कमाई

  • भाव के सबूत: 2025 में तलाला APMC में 10 किलो के करीब 449,450 डिब्बे औसतन ₹560 प्रति डिब्बा (₹56 प्रति किलो) पर बिके, जिनसे किसानों को ₹25.17 करोड़ मिले। अप्रैल 2026 में सीजन की शुरुआत में जूनागढ़ में 10 किलो के डिब्बे ₹1,200 से ₹1,500 पर बताए गए; यह शुरुआती भाव है, सीजन का औसत नहीं।
  • हिसाब (उदाहरण): क्षेत्र की 7 टन/हेक्टेयर उपज पर फल देते एक हेक्टेयर से 7,000 किलो x ₹56 = ₹3.9 लाख मिलते हैं (2.8 टन प्रति एकड़ पर ₹1.6 लाख प्रति एकड़)। 15 टन/हेक्टेयर और ₹56 प्रति किलो पर कुल आय ₹8.4 लाख प्रति हेक्टेयर बैठती है, लेकिन वह उपज अच्छे प्रबंधन वाले बागों का लक्ष्य है, औसत नहीं।
  • लागत: केसर की खेती की मौजूदा लागत का कोई पुष्ट आंकड़ा नहीं मिला। मुख्य खर्च कलमें, गड्ढे, ड्रिप, खाद, छिड़काव, छंटाई, तुड़ाई की मजदूरी और डिब्बे हैं। अपने KVK या बागवानी विभाग से स्थानीय अनुमान लें।
  • इंतजार: करीब 4 से 5 साल तक आम से कोई आमदनी नहीं होती।

बाजार और बिक्री

  • घरेलू: तलाला जैसे APMC यार्ड के जरिए ताजा फल, और पल्प व आमरस बनाने वाले प्रोसेसर। सीजन से पहले mandi bhav देख लें।
  • निर्यात: एक रिपोर्ट के अनुसार गुजरात ने 2025 में 689 टन आम निर्यात किया, और केसर UK, USA, कतर, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया भेजा गया। निर्यात के फल की धुलाई, ग्रेडिंग, गर्म पानी का उपचार और बताई गई अमेरिका की खेप के लिए irradiation जरूरी है। 2026 में सोरठ क्षेत्र के 675 किसानों ने APEDA में पंजीकरण कराया था। अप्रैल 2026 में हवाई माल भाड़ा करीब ₹600 प्रति किलो रहा, जबकि एक साल पहले ₹400 था, जिससे निर्यात का मुनाफा घटता है।
  • गिर लेबल: सिर्फ GI क्षेत्र का फल ही गिर केसर के नाम से बिक सकता है। जांची हुई उत्पत्ति पर ज्यादा भाव मिलता है; बाहर का फल गिर नाम से बेचना GI के खिलाफ है।
  • बीमा: जहां आपके जिले में आम अधिसूचित है वहां PMFBY देखें, सब्सिडी के लिए drip irrigation, और निर्यात के रास्तों के लिए export buyers। आम पर MIDH की मौजूदा सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं हो सकी।

स्रोत