चौसा (NHB की सूची में Samarbehisht Chausa) देर मौसम का टेबल आम है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब की आम पट्टी में चलता है। इसका बहुत मीठा फल दशहरी और लंगड़ा का सीजन खत्म होने के बाद बिकता है। इसके लिए बड़ा, दूर-दूर लगाया जाने वाला पेड़ चाहिए, असली आमदनी के लिए कई साल का धैर्य चाहिए और एक साल छोड़कर फल आने (alternate bearing) की योजना चाहिए। इसलिए यह जमीन और पास की मंडी वाले किसानों के लिए ठीक है, जल्दी कमाई चाहने वालों के लिए नहीं।

चौसा की उपज और अर्थशास्त्र पर भारत का अलग प्रकाशित आंकड़ा कम है। नीचे दूरी, पोषण और आम की सामान्य उपज के आंकड़े TNAU और ICAR-CISH से हैं और सामान्य रूप से आम पर लागू होते हैं; लगाने से पहले अपने KVK से जांच लें।

भारत में कहां उगता है

  • राज्य: राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) चौसा को उत्तर प्रदेश और पंजाब के लिए सूचीबद्ध करता है; यह बिहार में भी उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह लखनऊ, मलिहाबाद और पश्चिमी यूपी के बागों की आम किस्म है।
  • जलवायु: उपोष्ण जलवायु, जिसमें फूल आते समय पाला न पड़े और फूल से पहले सूखा दौर हो। नम तटीय इलाकों के लिए यह ठीक नहीं।
  • मिट्टी: गहरी, अच्छी जल निकासी वाली दोमट; जलभराव या खारे हिस्सों से बचें। 1 मी x 1 मी x 1 मी के गड्ढे खोदें।

चौसा में क्या खास है

  • देर से पकना: NHB के अनुसार दशहरी और लंगड़ा में फल लगने के लगभग 12 सप्ताह बाद तुड़ाई योग्य परिपक्वता आती है, जबकि चौसा और मल्लिका में लगभग 15 सप्ताह लगते हैं। उत्तर भारत में आम की कुल तुड़ाई जून से अगस्त तक चलती है।
  • फल: बड़ा, अंडाकार से तिरछा अंडाकार, हल्का पीला, बहुत मीठा, मध्यम भंडारण क्षमता वाला, टेबल और प्रसंस्करण के लिए उगाया जाता है। NHB गूदे को रेशेदार बताता है, इसलिए इसे बिना रेशे वाला बताकर न बेचें।
  • एक साल छोड़कर फल: ICAR-CISH चौसा को दशहरी, लंगड़ा और लखनऊ सफेदा के साथ उन किस्मों में गिनता है जिनमें एक साल भारी फसल और अगले साल कम या बिल्कुल फसल नहीं आती। NHB के अनुसार इसमें apical dominance भी दिखता है।
  • पेड़ का आकार: यह बड़ा पेड़ बनाता है, इसलिए CISH ने छोटे कद की किस्मों (Amrapali, Arunika, Ambika, Mallika) के साथ जो 3 x 3 मी की सघन रोपाई दिखाई, वह चौसा के लिए सीधा विकल्प नहीं है।
  • खाने की गुणवत्ता: नौ किस्मों पर ICAR के अध्ययन में उत्तर प्रदेश के चौसा ने जल्दी तोड़ने पर भी अच्छा पककर अच्छे स्वाद अंक पाए।

दूरी और रोपाई

पद्धतिदूरीप्रति हेक्टेयर पौधेप्रति एकड़ पौधे
पारंपरिक (CISH)10 x 10 मी100लगभग 40
पारंपरिक (CISH)12 x 12 मीलगभग 70लगभग 28
अधिक घनत्व (TNAU)5 x 5 मी400लगभग 160
  • CISH की गड्ढा विधि: मई से जून में खोदें, एक महीने बाद ऊपरी मिट्टी, 10 किलो गोबर की खाद, 2 किलो वर्मीकम्पोस्ट, 250 ग्राम बोनमील, 250 ग्राम नीम खली और 100 ग्राम DAP के साथ भरें, और मानसून शुरू होने पर (जुलाई से अगस्त) कलमी पौधे लगाएं। छोटे पौधे को सहारा दें।
  • असली चौसा के कलमी पौधे सरकारी या ICAR से मान्य नर्सरी से लें। बीजू पेड़ों में फल की गुणवत्ता अलग-अलग होती है।
  • 10 मी से कम दूरी पर लंबे, फैलने वाले पेड़ के लिए कटाई-छंटाई और छत्र प्रबंधन चाहिए। आजमाने से पहले CISH या अपने KVK से पूछें।

पोषण और सिंचाई

पेड़ की उम्र (TNAU, प्रति पेड़ प्रति वर्ष)गोबर खादNPK
पहला वर्ष10 किलो0.20 किलो0.20 किलो0.30 किलो
छठे वर्ष से50 किलो1.0 किलो1.0 किलो1.5 किलो
  • बीच की उम्र में मात्रा इन दो पंक्तियों के बीच बढ़ती है; TNAU की पूरी तालिका में दी है। 10 x 10 मी (प्रति एकड़ 40 पेड़) पर छठे वर्ष की मात्रा से एक पूर्ण पेड़ का मतलब लगभग 40 किलो N प्रति एकड़ (100 किलो प्रति हेक्टेयर) है, P भी उतना ही और K 60 किलो प्रति एकड़।
  • TNAU की सिंचाई सलाह है कि पारंपरिक तरीके में हर हफ्ते पानी दें, और ड्रिप में लगभग एक-तिहाई पानी लगता है। फूल आने से पहले के हफ्तों में सिंचाई रोकें ताकि पेड़ फूले, और फल लगने के बाद फिर शुरू करें। देखें ड्रिप सिंचाई।
  • फूल और फल लगना: TNAU फूल आने पर 20 ppm NAA छिड़काव और फरवरी में 0.5% यूरिया या 1% पोटैशियम नाइट्रेट छिड़काव बताता है। एक साल छोड़कर फल आने पर TNAU बिना फल वाले पेड़ों में सितंबर के पहले पखवाड़े में paclobutrazol बताता है; मात्रा पेड़ के आकार पर निर्भर है, इसलिए KVK से लें।
  • पहले मिट्टी की जांच कराएं और नतीजे के अनुसार चलें; देखें उर्वरक।

कीट और रोग

समस्याTNAU में बताया नियंत्रण
आम का फुदका (hopper)Acephate 75 SP, 1 ग्राम प्रति लीटर, फूल के आसपास दो छिड़काव
चूर्णिल आसिता (powdery mildew)Wettable sulphur 0.2%
एंथ्रेक्नोजMancozeb 2 ग्राम प्रति लीटर या carbendazim 1 ग्राम प्रति लीटर, 15 दिन के अंतर पर तीन छिड़काव
विकृति (malformation)अक्टूबर में NAA 100 से 200 ppm, फिर carbendazim 0.1%; विकृत मंजरी नष्ट करें
गुठली का घुन, मीली बग, फल मक्खीकीटनाशक का चुनाव और समय अपने KVK से लें; TNAU की पुरानी सूची में ऐसे उत्पाद हैं जो अब प्रतिबंधित हो सकते हैं

हमेशा लेबल और राज्य की वर्तमान सिफारिश मानें। पहचान में मदद के लिए कीट देखें।

तुड़ाई और उपज

  • पहला फल: पारंपरिक दूरी पर कलमी आम के पेड़ को कई साल लगते हैं; TNAU के आम के उपज कार्यक्रम में पहले 15 वर्ष 8 से 10 टन प्रति हेक्टेयर (3 से 4 टन प्रति एकड़) और 15 से 20 वर्ष में 15 से 20 टन प्रति हेक्टेयर (6 से 8 टन प्रति एकड़) बताया गया है। यह आम का सामान्य कार्यक्रम है, चौसा का मापा हुआ आंकड़ा नहीं, और एक साल छोड़कर फल आने से यह ऊपर-नीचे होगा।
  • परिपक्वता: फल लगने के लगभग 15 सप्ताह बाद हरी परिपक्व अवस्था में तोड़ें, जब गूदा क्रीम से हल्का पीला हो जाए और गुठली सख्त हो जाए (NHB)। लेटेक्स के दाग कम करने के लिए 10 से 20 सेमी डंठल छोड़ें, और फल को छाया में 25 किलो से अधिक न वाले क्रेट में रखें।
  • भंडारण अवधि: NHB मध्यम भंडारण क्षमता बताता है, इसलिए पकने के कुछ दिनों में बिक्री की योजना बनाएं।

लागत और आमदनी

अकेले चौसा के लिए भारत की सत्यापित लागत का आंकड़ा नहीं मिला। अपने स्थानीय आंकड़ों के साथ यह तरीका अपनाएं:

  • पूर्ण पेड़ों की प्रति एकड़ उपज x अच्छे ग्रेड में बिकने वाला हिस्सा x भाव। उदाहरण के लिए, 6 टन प्रति एकड़ x ₹30 प्रति किलो से ₹1.8 लाख बनेंगे, लेकिन यह भाव समझाने के लिए मान लिया गया है, कोई भाव नहीं; मंडी भाव और स्थानीय व्यापारियों से वर्तमान दाम देखें।
  • बाग की देखभाल, छिड़काव, मजदूरी, पैकिंग और ढुलाई घटाएं, और शुरुआती बिना उपज वाले वर्षों का खर्च बाद की फसलों पर बांटें।
  • संदर्भ के लिए, CISH की सघन रोपाई (3 x 3 मी, 2017 में लगाई) अपनाने वाले एक किसान को अन्य किस्मों से तीसरे वर्ष ₹1.5 से 2.0 लाख प्रति हेक्टेयर और सातवें वर्ष ₹3.5 से 4.0 लाख प्रति हेक्टेयर मिलने की रिपोर्ट है। यह एक ही मामला है, अलग किस्मों का, चौसा का अनुमान नहीं।

बाजार और बिक्री

  • चौसा दशहरी और लंगड़ा के बाद आता है, इसलिए देर मौसम में आपूर्ति कम रहती है; इसे उगाने का मुख्य व्यावसायिक कारण यही समय है।
  • स्थानीय और क्षेत्रीय थोक मंडियों में, सीधे खुदरा को या FPO के जरिए बेचें। मध्यम भंडारण क्षमता के कारण लंबी दूरी की ढुलाई तभी ठीक है जब फल सही परिपक्वता पर तोड़ा और ठंडा किया गया हो।
  • जोखिम: एक साल छोड़कर फल आने से आमदनी साल दर साल बदलती है, और मई से जून के फल बढ़ने के दौरान आंधी या ओले से पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। आपके जिले में आम अधिसूचित हो तो PMFBY पर विचार करें।
  • बाग लगाने के लिए ऋण किसान क्रेडिट कार्ड या MIDH योजनाओं से मिल सकता है; सब्सिडी फाइंडर देखें और वर्तमान दरें जिला बागवानी कार्यालय से पूछें।

स्रोत