हिमसागर (मालदा में इसे खिरसापाती कहते हैं) मध्य से देर के मौसम का टेबल आम है जो पश्चिम बंगाल के जलोढ़ जिलों के लिए ठीक बैठता है, जहां मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना मुख्य आम जिले हैं। इसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला है, लेकिन यह टैग सिर्फ मालदा के लिए है, और हिमसागर का बाजार भीड़ भरा रहा है: 2023 में मालदा की रिकॉर्ड फसल से खिरसापाती और मालदा की दूसरी किस्मों के भाव बहुत गिर गए।
कलमी पेड़ों को फल देने में कई साल लगते हैं, इसलिए रोपण तब ठीक है जब उगाने वाले को बंगाल में आम का अनुभव हो, फल के लिए पास में बाजार हो, और फूल आने के समय फसल को हॉपर, मिल्ड्यू और एन्थ्रेक्नोज से बचाया जा सके।
यह कहां उगता है और GI
- जिले: हिमसागर मुख्यतः पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना में उगता है। मालदा की किस्में Laxman Bhog, Khirsapati (Himsagar) और Fazli भौगोलिक संकेत के रूप में दर्ज हैं; Khirsapati (Himsagar) का आवेदन क्रमांक 112 है, मालदा क्षेत्र के लिए।
- आपके लिए GI का मतलब: यह मालदा क्षेत्र के फल के नाम की रक्षा करता है। दूसरी जगह उगा हिमसागर अच्छा आम है, लेकिन उसे मालदा GI नाम से नहीं बेचा जा सकता।
- फल: 250 से 350 ग्राम का मध्यम अंडाकार फल, चिकना पीला छिलका और पीला-नारंगी गूदा जिसमें रेशा कम होता है। ICAR इसे मीठा और अच्छी भंडारण क्षमता वाला बताता है।
- गयेशपुर (नदिया) में BCKV के सबसे अच्छे खाद उपचार में फल का TSS करीब 19.7°Brix और कमरे के तापमान पर टिकाऊपन 9 दिन रहा। हिमसागर कम टिकने वाला फल है, इसलिए ढुलाई और बिक्री कुछ दिनों में निपटाने की योजना बनाएं।
किस्म के बारे में
- बंगाल में हिमसागर ही मानक कलमी किस्म है। पश्चिम बंगाल की पारंपरिक किस्मों की तुलना में पाया गया कि Champa और Panja Pasand में हिमसागर से ज्यादा TSS, शर्करा और विटामिन C था, और Panja Pasand की उपज ज्यादा रही। ये स्थानीय किस्में हैं और इनकी रोपण सामग्री सीमित है, इसलिए भरोसा करने से पहले उपलब्धता देख लें।
- कलमें सिर्फ ऐसी नर्सरी से लें जो मातृ पौधा दिखा सके; अपने राज्य के बागवानी विभाग या BCKV से पूछें कि आपके जिले में कौन सी नर्सरियां पंजीकृत हैं।
दूरी और बाग की बनावट
- BCKV के खाद ट्रायल में 12 साल पुराने हिमसागर पेड़ 10 x 10 मीटर पर थे, यानी 100 पेड़ प्रति हेक्टेयर (40 प्रति एकड़)। नीचे का सारा उपज आंकड़ा इसी दूरी का है।
- घनी, छायादार छतरी हॉपर, पाउडरी मिल्ड्यू और एन्थ्रेक्नोज को बढ़ावा देती है; राष्ट्रीय IPM सारणी खुली छतरी रखने और बारिश के बाद भीड़ वाली शाखाओं की छंटाई की सलाह देती है।
- गड्ढे का आकार और रोपाई का मौसम: अपनी मिट्टी के लिए राज्य के बागवानी विभाग या KVK की सारणी मानें।
खाद
| उपचार (प्रति पेड़ प्रति साल) | प्रति पेड़ फल | फल का वजन | प्रति पेड़ उपज |
|---|---|---|---|
| नियंत्रण: 1,000 ग्राम N, 500 ग्राम P, 1,000 ग्राम K | 176.71 | नहीं बताया | 60.22 किलो से कम |
| सबसे अच्छा: आधा NPK + 50 किलो FYM + 5 किलो वर्मीकम्पोस्ट + 100 ग्राम पोटाश मोबिलाइज़र | 230.31 | 261.48 ग्राम | 60.22 किलो |
- यह गयेशपुर में BCKV का दो साल का ट्रायल (2012-13 और 2013-14) है। रासायनिक NPK आधा करके FYM, वर्मीकम्पोस्ट या जैव उर्वरक जोड़ने से पूरी रासायनिक खुराक से बेहतर नतीजा मिला। सबसे कम उपज (39.27 किलो प्रति पेड़) पूरी खुराक वाले नियंत्रण पर मल्च वाले उपचार में रही।
- BCKV गयेशपुर के एक पहले ट्रायल (2009 से 2011) में इसी तरह की समन्वित सारणी से प्रति पेड़ 58.56 किलो, 234 फल और औसत फल वजन 263 ग्राम तक दर्ज हुआ।
- ये शोध बाग के 12 साल पुराने पेड़ों के नतीजे हैं। मिट्टी और पत्ती की जांच कराएं और अपने पेड़ की उम्र के हिसाब से खुराक अपने KVK से पूछें। fertilizers देखें।
फूल के समय कीट और रोग
- हॉपर: मंजरी का रस चूसता है, फूल और फल गिराता है, और शहद जैसा चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है जिस पर काली फफूंद उगती है। NHM की IPM सारणी में मंजरी बनने की शुरुआत में हॉपर 5 से 10 प्रति मंजरी से ज्यादा हों तो छिड़काव, फिर पूरी लंबाई की मंजरी पर, और फिर मटर के दाने जितने फल पर छिड़काव करने को कहा गया है, साथ ही रासायनिक छिड़काव जरूरत के हिसाब से रखने और दवाएं बदलते रहने की चेतावनी है।
- पाउडरी मिल्ड्यू और एन्थ्रेक्नोज: दोनों नमी वाले, बादल भरे मौसम में फूल और छोटे फलों पर हमला करते हैं और घनी छतरी में ज्यादा फैलते हैं। रोगी पत्तियां और विकृत मंजरियां काट दें, और फफूंदनाशक छिड़काव फूल आने के समय के हिसाब से करें। दवा की मात्रा के लिए लेबल और अपने KVK या राज्य की सलाह मानें।
- फल पर थैली चढ़ाना: हिमसागर के एक ट्रायल (2019 और 2020) में non-woven हरी थैलियों से सबसे भारी फल (256 ग्राम) और सबसे बड़ा आयतन मिला, और शर्करा या अम्ल में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। अध्ययन ने लागत या दाग के बारे में नहीं बताया, इसलिए पहले कुछ पेड़ों पर आजमाएं।
- pests देखें।
कटाई और उपज
- बंगाल में हिमसागर की तुड़ाई मई के आखिर से जून तक, अल्फांसो के बाद होती है।
- प्रति एकड़ 40 पेड़ पर प्रति पेड़ 39 से 60 किलो के ट्रायल उपज का मतलब करीब 1,600 से 2,400 किलो प्रति एकड़ (4 से 6 टन/हेक्टेयर) है। भारत की औसत आम उपज 7.3 टन/हेक्टेयर बताई गई है, इसलिए चौड़ी दूरी पर ट्रायल की उपज ऊंची नहीं है, और आम खेत पर अक्सर इससे कम मिलेगी।
- आम के पेड़ अक्सर एक साल छोड़कर फलते हैं, इसलिए हर साल सबसे अच्छे साल के हिसाब से बजट न बनाएं।
लागत और कमाई
- हिमसागर की खेती-लागत का कोई पक्का आंकड़ा या 2026 का खेत-भाव नहीं मिला, इसलिए मुनाफे का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है। मालदा या मुर्शिदाबाद के जिला बागवानी कार्यालय और अपनी नजदीकी मंडी से पूछें।
- हिसाब (सिर्फ उदाहरण; भाव अनुमान हैं): प्रति एकड़ 1,600 से 2,400 किलो पर ₹30 प्रति किलो से ₹48,000 से ₹72,000 बनता है; ₹60 प्रति किलो पर ₹96,000 से ₹1.44 लाख। इसमें से छिड़काव, मजदूरी, तुड़ाई और ढुलाई का अपना खर्च घटाएं।
बाजार और बिक्री
- फल व्यापारियों और थोक बाजारों को बिकता है; अपने आसपास सक्रिय खरीदारों के लिए जिला बागवानी कार्यालय से पूछें। 2023 में अधिकारियों ने मालदा के आम अमेरिका भेजने के लिए निर्यातकों से बातचीत की बात कही थी, लेकिन हिमसागर के किसी निर्यात अनुबंध की पुष्टि नहीं हुई।
- समूह के जरिए बेचने से भाव और ढुलाई में मदद मिल सकती है। FPO, mandi bhav और export buyers देखें।
- भंडारण और कर्ज के लिए cold storage subsidy, KCC और subsidy finder देखें। हिमसागर रोपण के लिए MIDH की मौजूदा दर की पुष्टि नहीं हुई; राज्य के बागवानी विभाग से पूछें।
स्रोत
- Indian Horticulture (ICAR), mango varieties with GI in India
- Journal of Horticultural Science 2017, integrated nutrient management on mango cv. Himsagar (BCKV)
- Journal of Horticultural Science, integrated nutrient management on growth and yield of Himsagar (BCKV, Gayeshpur)
- International Journal of Economic Plants, bagging on yield and quality of Himsagar
- The Bioscan, potentiality of traditional mango cultivars of West Bengal
- National Horticulture Mission, IPM schedule for mango pests
- FreshPlaza, bumper yield in Malda leads to lower mango prices (2023)
