करी पत्ता (कढ़ी पत्ता, Murraya koenigii) एक बहुवर्षीय झाड़ी है जो पहले साल धीरे कमाई देती है, फिर चौथे और पांचवें साल से लगातार, और यह गर्म दक्षिण भारत तथा प्रायद्वीपीय भारत के ज्यादातर हिस्सों में लाल रेतीली दोमट मिट्टी पर अच्छी चलती है। इसकी पत्तियां साल में तीन से चार बार 20 साल या उससे ज्यादा तक काटी जाती हैं, इसलिए असली मेहनत कटाई-छंटाई, हर कटाई के बाद खाद और ताजी पत्ती के खरीदार ढूंढने में है।

TNAU का उपज कार्यक्रम बताता है कि इंतजार कितना लंबा है: पहले साल 250 से 400 किलो प्रति हेक्टेयर, दूसरे और तीसरे साल 5,400 किलो, चौथे साल 10,000 किलो और पांचवें साल से 20,000 किलो। आखिरी आमदनी का बहुत छोटा हिस्सा ही पहले दो सालों में आता है।

जलवायु और मिट्टी

  • मिट्टी: अच्छे जल निकास वाली लाल रेतीली दोमट में पत्ती की सबसे अच्छी उपज मिलती है (TNAU)। हल्की बनावट वाली लाल मिट्टी इसे रास आती है, और यह सूखी जलवायु में भी उग सकती है।
  • तापमान: सबसे अच्छा तापमान 26 से 37°C है (TNAU), और 13°C से नीचे बढ़वार थोड़ी प्रभावित होती है। कड़ाके की सर्दी वाले इलाके ठीक नहीं हैं।
  • जड़ों के आसपास पानी रुकना खतरा है, इसलिए भारी और खराब निकास वाली जमीन से बचें।

किस्में

किस्मखासियत
Senkaampu (Sen Kaampa)TNAU के package में सुझाई गई स्थानीय किस्म
Dharwad-1 (DWD-1)तेज सुगंध; तेल की मात्रा 5.22%
Dharwad-2 (DWD-2)तेज सुगंध; तेल की मात्रा 4.09%
  • कुछ बाजारों में गुलाबी मध्य शिरा वाली स्थानीय किस्में पसंद की जाती हैं। किस्म चुनने से पहले स्थानीय खरीदार से पूछ लें कि कौन सी पत्ती ज्यादा भाव पाती है।
  • पौध की गुणवत्ता मायने रखती है क्योंकि पौधे 20 से 25 साल रहते हैं। पौध राज्य बागवानी विभाग की नर्सरी, कृषि विश्वविद्यालय या KVK से लें।

रोपाई और दूरी

  • प्रवर्धन: बीज से। फल जुलाई से अगस्त में मिलते हैं, और बीज तोड़ने के 3 से 4 दिन के भीतर नर्सरी क्यारियों या पॉली बैग में बो दिया जाता है। एक साल की पौध रोपी जाती है (TNAU)।
  • गड्ढे: 30 x 30 x 30 सेमी। खेत की 3 से 4 जुताई करें और आखिरी जुताई से पहले अच्छी सड़ी FYM 20 टन/हेक्टेयर (करीब 8 टन प्रति एकड़) डालें।
  • दूरी: TNAU पौधों के बीच 1.2 से 1.5 मीटर बताता है, यानी करीब 1,800 से 2,250 पौधे प्रति एकड़ (4,450 से 5,550 प्रति हेक्टेयर)। एक और package में दोनों तरफ 90 से 120 सेमी बताया गया है।
  • ट्रेनिंग: पौधा 1 मीटर का होने पर शीर्ष कली काट दें ताकि वह नीचे से शाखाएं निकाले, और हर झाड़ी में 5 से 6 शाखाएं रखें (TNAU)।

खाद और सिंचाई

  • हर कटाई के बाद: प्रति पौधा 20 किलो FYM मिट्टी में मिलाएं (TNAU)। 1,800 से 2,250 पौधों पर अगर हर तीन कटाई के बाद दी जाए तो यह साल में प्रति एकड़ 36 से 45 टन FYM है, इसलिए रोपाई से पहले खाद की आपूर्ति का इंतजाम करें।
  • रासायनिक खाद: TNAU ने NPK की कोई मात्रा नहीं दी है। एक दक्षिण भारतीय package में 20 किलो FYM के साथ प्रति पौधा सालाना 150 ग्राम N, 25 ग्राम P और 50 ग्राम K बताया गया है (दूसरे दर्जे का स्रोत)। अपने KVK और मिट्टी जांच से पक्का करें, और fertilizer guide देखें।
  • सिंचाई: रोपाई के तुरंत बाद पानी दें, फिर तीसरे दिन, उसके बाद हफ्ते में एक बार (TNAU)। चौड़ी दूरी वाली बहुवर्षीय फसल के लिए ड्रिप ठीक है।

कीट और रोग

  • सिट्रस तितली की इल्लियां: इल्लियां हाथ से चुनें; TNAU malathion 1 मिली प्रति लीटर बताता है।
  • Psyllid और scale: dimethoate 1 मिली प्रति लीटर। पत्ती धब्बा: carbendazim 1 ग्राम प्रति लीटर, और इसके साथ सल्फर वाले उत्पाद न मिलाएं।
  • पत्ती ताजी खाई जाती है, इसलिए लेबल की प्रतीक्षा अवधि सख्ती से मानें और मौजूदा सिफारिश KVK से पूछें। सीमा से ज्यादा अवशेष वाली पत्ती का खरीदार छिन जाता है, और निर्यात में यह और ज्यादा मायने रखता है। कीट गाइड देखें।

कटाई और उपज

सालप्रति हेक्टेयर पत्ती (TNAU)प्रति एकड़ (करीब)
1 (पहली कटाई 10 से 12 महीने पर)250 से 400 किलो100 से 160 किलो
2 और 35,400 किलो सालानाकरीब 2,200 किलो
410,000 किलो सालानाकरीब 4,050 किलो
5 से आगे20,000 किलो सालानाकरीब 8,100 किलो
  • TNAU साल में तीन बार, 3 से 4 महीने के अंतर पर कटाई करता है। एक दूसरा दक्षिण भारतीय कार्यक्रम (दूसरे दर्जे का स्रोत) पांचवें साल से सिर्फ 3,500 से 5,000 किलो/हेक्टेयर बताता है, इसलिए 20 टन/हेक्टेयर को अच्छी तरह संभाले बाग का सबसे अच्छा नतीजा मानें, गारंटी नहीं।
  • बाग 20 से 25 साल चलता है।
💡 सुझाव: फसल फायदेमंद है या नहीं, यह हिसाब लगाते समय कम उपज वाले कार्यक्रम (पांचवें साल से करीब 5 टन/हेक्टेयर) को आधार बनाएं। खेत ने बेहतर दिया तो बोनस है, और नहीं दिया तो भी आप सुरक्षित हैं।

लागत और कमाई

  • करी पत्ते की खेती की लागत या खेत के भाव की कोई पुष्ट भारतीय श्रृंखला नहीं मिली, इसलिए कोई आंकड़ा नहीं दिया गया। ताजी पत्ती का भाव शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए खरीदार या स्थानीय सब्जी मंडी से पूछें (जहां सूचीबद्ध हो वहां mandi bhav देखें)।
  • हिसाब का तरीका: प्रति एकड़ कुल आय = पत्ती के किलो x प्रति किलो भाव। TNAU के कार्यक्रम पर एक एकड़ से दूसरे और तीसरे साल करीब 2,200 किलो और चौथे साल 4,050 किलो मिलता है, इसलिए उन सालों में खेत के भाव में हर ₹10 प्रति किलो करीब ₹22,000 और ₹40,500 प्रति एकड़ बैठता है। पांचवें साल से 5 टन/हेक्टेयर (करीब 2,000 किलो प्रति एकड़) की कम उपज पर हर ₹10 प्रति किलो का मतलब ₹20,000 प्रति एकड़ है।
  • पौध, गड्ढे, FYM (हर कटाई के बाद प्रति पौधा 20 किलो सबसे बड़ा खर्च है), सिंचाई, छंटाई और तुड़ाई की मजदूरी, और ढुलाई घटाएं। पत्ती तोड़ना और गुच्छे बांधना मजदूरी वाला काम है।

बाजार और जोखिम

  • ताजी पत्ती स्थानीय बाजारों, सब्जी थोक व्यापारियों और शहरों के व्यापारियों को जाती है, और मांग साल भर रहती है। पास में कोई व्यापारी न हो तो बड़े रकबे की बिक्री मुश्किल है।
  • सूखी पत्ती और निकाला हुआ तेल भी संभव उत्पाद हैं, लेकिन किसी भारतीय प्रोसेसर के भाव की पुष्टि नहीं हो सकी। तेल या निर्यात के वादे पर न लगाएं; पहले किसी निर्यातक या APEDA-पंजीकृत खरीदार से लिखित मानक मांगें (export buyers)।
  • फसल शुरू में धीमी है। बाग तैयार होने तक अंतरफसल करें या कोई और आमदनी रखें। इस अंतर में KCC कर्ज और स्थानीय बागवानी सब्सिडी योजनाएं (subsidy finder) मदद कर सकती हैं।

स्रोत