अरुगुला (रॉकेट, Eruca sativa) ठंडे मौसम की तेज सलाद पत्ती है जो भारत के ज्यादातर हिस्सों में ठंड के महीनों में उगाई जा सकती है, लेकिन यह तभी फायदे की है जब आपके पास रेस्तरां, होटल, सलाद पैकर या मॉडर्न रिटेल स्टोर जैसा नियमित खरीदार हो, क्योंकि आम मंडी में इसका मोल कम मिलता है। यह खेत की फसल से ज्यादा एक छोटा, तेज, मजदूरी और कोल्ड चेन वाला कारोबार है।
यही प्रजाति उत्तर-पश्चिम भारत में तारामीरा के नाम से बारानी रबी तिलहन के रूप में उगाई जाती है। सलाद रॉकेट और तारामीरा एक ही पौधे के दो अलग उपयोग हैं, इसलिए तेल के लिए बिकने वाला बीज सलाद का बीज नहीं है, और यहां कुछ भी तारामीरा की खेती की गाइड नहीं है।
कहां और कब उगता है
- मौसम: अरुगुला ठंडे मौसम की फसल है। अमेरिकी विस्तार सलाह में सबसे अच्छी बढ़त करीब 18 से 24 डिग्री C पर बताई गई है, बीज करीब 4 डिग्री C से ऊपर उगता है और सबसे अच्छा 24 डिग्री के पास, और लंबे दिन व ज्यादा गर्मी में फूल निकल आते हैं। भारत में इसका मतलब है मैदानों में अक्टूबर से फरवरी, और पहाड़ों में वसंत से शुरुआती शरद तक।
- भारत से तारामीरा के सबूत: तिलहन के रूप में तारामीरा सितंबर के आखिर से अक्टूबर में बचे हुए नमी पर बोई जाती है। ICAR-CAZRI जैसलमेर के एक ट्रायल में सितंबर के आखिर की बुवाई से 0.95 टन बीज प्रति हेक्टेयर मिला, जबकि अक्टूबर के आखिर की बुवाई से 0.84 टन, जो फसल के ठंडे मौसम को पसंद करने और सूखे को सहने को दिखाता है।
- मिट्टी: अच्छे जल निकास वाली दोमट। अमेरिकी सलाह में pH करीब 6.2 से 6.5 है; भारी मिट्टी में ऊंची क्यारियां ठीक रहती हैं।
- संरक्षित खेती: पॉलीहाउस, शेड नेट या हाइड्रोपोनिक में ठंडक के साथ गर्म महीनों में भी उगाया जा सकता है, ज्यादा खर्च पर। polyhouse subsidy देखें।
प्रकार और बीज
- उगाई जाने वाली (सलाद) रॉकेट की पत्तियां चौड़ी और हल्के स्वाद की होती हैं; जंगली रॉकेट की पत्तियां पतली, गहरी कटी और ज्यादा तीखी होती हैं। जंगली प्रकार धीरे बढ़ते हैं और धीरे कटते हैं।
- भारत में बनी किसी सलाद किस्म की पुष्टि नहीं हुई। सलाद का बीज बीज कंपनियां बेचती हैं; नाम वाला, जांचा हुआ बीज लें और खरीदार से पूछें कि उन्हें कौन सा पत्ती का प्रकार चाहिए।
बुवाई और दूरी
- बीज 0.5 से 1 सेमी गहरा बोएं। अमेरिकी सलाह में पूरे आकार की पत्ती के लिए कतारें 18 से 23 सेमी दूर और बेबी लीफ के लिए छिड़काव या पास-पास की कतारें रखी जाती हैं। सलाद रॉकेट के लिए भारत की बीज दर के आंकड़े नहीं मिले; बीज देने वाले के पैक और अपने KVK की सलाह मानें।
- ठंडी मिट्टी में बीज 5 से 12 दिन में उगता है। लगातार आपूर्ति के लिए हर 7 से 10 दिन में नई क्यारी बोएं।
- ड्रिप या बारीक फव्वारे (drip irrigation, sprinkler irrigation) इस्तेमाल करें ताकि मिट्टी एक जैसी नम रहे और पत्ती पर मिट्टी के छींटे न पड़ें।
खाद और फसल की देखभाल
- अमेरिकी विस्तार सलाह में फसल के लिए करीब 120 पाउंड नाइट्रोजन प्रति एकड़ बताई गई है (करीब 54 किलो प्रति एकड़, 134 किलो प्रति हेक्टेयर); फॉस्फोरस और पोटाश मिट्टी जांच पर निर्भर हैं। सलाद रॉकेट की भारतीय खुराक सारणी नहीं मिली, इसलिए मिट्टी जांच पर आधारित योजना के लिए KVK से पूछें और आधार में अच्छी सड़ी कंपोस्ट डालें। fertilizers देखें।
- अमेरिकी सलाह में फ्ली बीटल मुख्य कीट है और पत्ती में छेद कर देता है जिससे सलाद की पत्ती खराब होती है; तैरने वाले रो कवर या कीट जाली से फसल बिना छिड़काव के बचती है। पत्तियां कुछ दिन में कच्ची खाई जाती हैं, इसलिए सिर्फ वही रसायन इस्तेमाल करें जो KVK पत्तेदार सब्जियों के लिए पंजीकृत बताए, लेबल का इंतजार काल मानें, और जाली, चिपचिपे ट्रैप और नीम को तरजीह दें। pests देखें।
- गर्मी और लंबे दिन में पौधे फूल पर आ जाते हैं और पत्ती कड़वी और तीखी हो जाती है; पौधों को रोकने की कोशिश के बजाय ठंडे मौसम में बोएं।
कटाई, उपज और भंडारण
- बुवाई के छपे अध्ययन में बुवाई से करीब 35 से 60 दिन का चक्र बताया गया है, जो किस्म और मौसम पर निर्भर है। अमेरिकी सलाह में सलाद के लिए 3 से 4 इंच (8 से 10 सेमी) ऊंचाई पर और पकाने वाली साग के लिए 15 से 25 सेमी पर कटाई की जाती है।
- तेज चाकू या कैंची से बढ़त बिंदु के ठीक ऊपर काटें, ताकि जहां किस्म इजाजत दे वहां दूसरी कटाई हो सके। अमेरिकी ट्रायल में हाथ से कटाई साधारण अरुगुला में करीब 9 से 11 किलो प्रति व्यक्ति प्रति घंटा रही, जबकि जंगली प्रकार में सिर्फ करीब 3.6 किलो।
- भंडारण: 0 से 5 डिग्री C पर 95 से 100% नमी में। कटाई के बाद पत्ती को जल्दी ठंडा करें, क्योंकि वह जल्दी मुरझाती है। साफ, सूखे क्रेट या क्लैमशेल में पैक करें।
- भारत में प्रति एकड़ उपज का कोई पुष्ट आंकड़ा नहीं मिला। स्थानीय उत्पादकों, KVK या अपने खरीदार से पूछें; एकड़ की उपज के बजाय इस पर हिसाब लगाएं कि आपका खरीदार हफ्ते में कितने किलो लेगा।
लागत और कमाई
- अरुगुला का भारत का कोई पुष्ट भाव नहीं मिला, और भाव शहर, मौसम और पैक के हिसाब से बदलते हैं। हिसाब खुद करें: हफ्ते में बिके किलो x वह भाव जो आपका खरीदार लिखित में पक्का करे, घटाएं बीज, मजदूरी, पैकिंग, कोल्ड चेन और ढुलाई का खर्च।
- बीज, जाली और कोल्ड स्टोरेज काटने, धोने, छांटने और पैक करने की मजदूरी के मुकाबले छोटे हैं। धनिया या पालक जैसी तेज फसलों से अपने मंडी भाव में तुलना करें कि ज्यादा मेहनत का प्रीमियम सही बैठता है या नहीं।
बाजार और जोखिम
- खरीदार रेस्तरां, होटल, कैटरर, सलाद और रेडी-टू-ईट पैकर, और बड़े शहरों के प्रीमियम ग्रोसरी या होम-डिलीवरी ब्रांड हैं। मांग सीमित है और एक ही खरीदार आपकी ज्यादातर फसल ले सकता है।
- मुख्य जोखिम: सिर्फ बड़े शहरों का बाजार, कोल्ड चेन के बिना एक-दो दिन में खराबी, छेद, पीलेपन या मिट्टी की वजह से माल लौटना, और गर्म दिनों में फूल निकल आना।
- एक ही शहर के पास के उत्पादक FPO के जरिए मिलकर आपूर्ति कर सकते हैं। संरक्षित खेती और पैक-हाउस की मदद के लिए subsidy finder और ठंडा करने के लिए cold storage subsidy देखें।
