रोज़मेरी भारत में उगाई जा सकती है, लेकिन यह छोटे बाजार की फसल है जो ठंडे, सूखे पहाड़ी इलाकों में और सर्दी से गर्मी की मौसमी फसल के रूप में उप-उष्णकटिबंधीय तलहटी में सबसे अच्छी चलती है। पहाड़ों में यह बारहमासी झाड़ी है और मैदानों में जलभराव और मानसून की नमी से नुकसान उठाती है, इसलिए जल निकास और खरीदार ही नतीजा तय करते हैं।
भारतीय शोध दो अलग रास्ते दिखाता है: होटल और रिटेल के लिए ताजी या सूखी जड़ी-बूटी, और सुगंधित तेल का आसवन। तेल और जड़ी-बूटी की उपज के पुष्ट भारतीय आंकड़े हैं, खेत के भाव के नहीं, इसलिए रोपाई से पहले किसी खरीदार से मौजूदा दर पूछ लें।
भारत में यह कहां उगती है
- पहाड़ और पठार: University of Horticultural Sciences, बागलकोट का 2025 का एक पेपर कर्नाटक (बेंगलुरु, मैसूरु, कूर्ग, शिवमोगा), तमिलनाडु (नीलगिरी, ऊटी, कोडईकनाल) और जम्मू और कश्मीर (श्रीनगर, बारामूला, डोडा, जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर) को वे जगहें बताता है जहां यह उगाई जाती है।
- उप-उष्णकटिबंधीय तलहटी: CSIR-CIMAP के पंतनगर केंद्र (उत्तराखंड, 29 डिग्री उत्तर, 244 मीटर, neutral pH वाली mollisol मिट्टी) ने इसे सर्दी से गर्मी की मौसमी फसल के रूप में परखा। वहां गर्मी का अधिकतम तापमान 35 से 45 °C और सर्दी का न्यूनतम 2 से 5 °C रहता है। वहां फसल के लिए अक्टूबर से जून का समय ठीक रहता है।
- मिट्टी: भुरभुरी, अच्छे जल निकास वाली, neutral pH की मिट्टी। पंतनगर के ट्रायल में neutral mollisol थी। भारी चिकनी मिट्टी और पानी रुकने वाले नीचे के हिस्सों से बचें।
किस्म और रोपण सामग्री
- CSIR-CIMAP के ट्रायल में किस्म CIM-Hariyali थी, जिसके एक महीने के जड़ वाले पौधे नवंबर के मध्य में रोपे गए।
- बीज से तैयारी कमजोर तरीका है: जमाव सिर्फ करीब 10 से 20 प्रतिशत होता है और 3 से 4 हफ्ते लगते हैं, इसलिए कलमें इस्तेमाल होती हैं (Uttarakhand University of Horticulture and Forestry का ट्रायल)।
- बागलकोट (कर्नाटक) के ट्रायल में कलमों को 2,000 ppm IBA से उपचारित करने पर 84.5 प्रतिशत जड़ें निकलीं, जबकि दूसरे उपचारों में कम; closed media sachet से कुल 66.1 प्रतिशत कलमों में जड़ें आईं, और IBA 2,000 ppm के साथ मिलाने पर 88 प्रतिशत। रानीचौरी के ट्रायल में मिट्टी और cocopeat का 2:1 अनुपात जड़ निकलने के लिए सबसे अच्छा रहा।
- जड़ वाले पौधे सिर्फ उस नर्सरी से लें जो किस्म का नाम बता सके, और पहले कुछ नमूना पौधे मांगें।
दूरी और देखभाल
- CIMAP के ट्रायल में 50 x 50 सेमी पर रोपाई हुई, यानी 40,000 पौधे प्रति हेक्टेयर (करीब 16,200 प्रति एकड़)।
- रोज़मेरी को गीली जड़ें पसंद नहीं। ऊंची क्यारियां, हल्की सिंचाई (ड्रिप ठीक रहती है) और बारिश में सिंचाई से बचें।
- रोज़मेरी के लिए किसी राज्य कृषि विश्वविद्यालय की खाद सारणी नहीं मिली। मिट्टी की जांच कराएं और मात्रा के लिए अपने KVK या नजदीकी CSIR संस्थान (CIMAP, IHBT) से पूछें; पोषक तत्वों को उत्पादों में बदलने के लिए खाद देखें।
- कीट और रोग के लिए हर हफ्ते निगरानी करें, मुरझाए पौधे उखाड़ दें (जलभराव से जड़ सड़न होती है) और किसी भी छिड़काव से पहले लेबल और अपने KVK की सलाह मानें; कीट देखें।
कटाई और उपज
CIMAP पंतनगर के ट्रायल में एक ही फसल छह तारीखों पर काटी गई और नतीजे प्रति हेक्टेयर नापे गए। देर से काटने पर जड़ी-बूटी ज्यादा मिली, और तेल की मात्रा ताजी जड़ी-बूटी का करीब 1 प्रतिशत बनी रही।
| कटाई की तारीख (रोपाई के बाद के दिन) | ताजी जड़ी-बूटी (क्विंटल प्रति हेक्टेयर) | सुगंधित तेल (लीटर प्रति हेक्टेयर) |
|---|---|---|
| 15 अप्रैल (150 दिन) | 10.44 | 10.28 |
| 15 मई (180 दिन) | 29.96 | 30.59 |
| 1 जून (195 दिन) | 50.14 | 50.14 |
| 15 जून (210 दिन) | 84.88 | 83.34 |
| 1 जुलाई (225 दिन) | 94.99 | 88.03 |
- सबसे अच्छा नतीजा, 94.99 क्विंटल ताजी जड़ी-बूटी और 88.03 लीटर तेल प्रति हेक्टेयर, करीब 38 क्विंटल जड़ी-बूटी और 36 लीटर तेल प्रति एकड़ बैठता है। पेपर यह भी बताता है कि पहाड़ों में बारहमासी रूप में उगाई यही किस्म पहले, दूसरे और तीसरे साल में 53.72, 170.87 और 359.47 लीटर तेल प्रति हेक्टेयर देती है, जो पहले के काम से लिया गया है।
- तेल की बनावट: मुख्य रूप से camphor (23.9 से 35.8 प्रतिशत), 1,8-cineole (18.0 से 23.9 प्रतिशत), alpha-pinene और verbenone, कटाई की अवस्था के हिसाब से। पहले की कटाई में camphor ज्यादा रहता है। तेल बेचें तो खरीदार इनकी जांच करेगा।
- जड़ी-बूटी को ताजा ही काटें और संभालें; सूखी जड़ी-बूटी के बाजार के लिए छांव में सुखाएं और नमी से दूर रखें।
लागत और कमाई
- रोज़मेरी की ताजी या सूखी जड़ी-बूटी या तेल का कोई पुष्ट भारतीय खेत का भाव नहीं मिला, और खेती की लागत का भी कोई छपा आंकड़ा नहीं, इसलिए मुनाफे का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया।
- हिसाब कैसे लगाएं: प्रति एकड़ कुल आय = बिकी ताजी जड़ी-बूटी (सबसे अच्छे ट्रायल नतीजे में करीब 3,800 किलो प्रति एकड़ तक) x आपको मिला जड़ी-बूटी का भाव, या तेल के लीटर (करीब 36 प्रति एकड़ तक) x तेल का भाव। इसमें से पौधे (50 x 50 सेमी पर करीब 16,200 प्रति एकड़), क्यारियां, सिंचाई, कटाई की मजदूरी, सुखाई या आसवन का ईंधन और ढुलाई घटा दें।
- पहाड़ों में पहले साल तेल की उपज प्रति हेक्टेयर कम रही और अगले दो सालों में बढ़ी, इसलिए बारहमासी योजना के लिए तीन साल का धैर्य और पूंजी चाहिए।
बाजार और जोखिम
- संभावित खरीदार होटल और रेस्तरां, प्रीमियम रिटेल, जड़ी-बूटी और चाय पैक करने वाले, और सुगंधित तेल के व्यापारी हैं। मात्रा छोटी है, इसलिए एक या दो खरीदार भाव तय कर सकते हैं।
- भारत के ज्यादातर हिस्सों में नमी भरा मानसून और जलभराव वाली मिट्टी खेत के मुख्य जोखिम हैं।
- समूह में बिक्री के लिए FPO देखें। सुगंधित और औषधीय पौधों की मदद राज्य और योजना के हिसाब से बदलती है, इसलिए subsidy finder इस्तेमाल करें और जिले के बागवानी दफ्तर से पक्का करें।
स्रोत
- Verma et al., Productivity and essential oil composition of rosemary harvested at different growth stages, north India, Journal of Essential Oil Research (CSIR-CIMAP)
- Influence of propagation chambers and growth regulators on rooting of rosemary, Plant Archives (UHS Bagalkot, 2025)
- Effect of growing media on growth parameters of rosemary and geranium, Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry (Ranichauri, Uttarakhand)
- CSIR-CIMAP, Pantnagar research centre
