आम्रपाली एक बौना, हर साल फल देने वाला आम का संकर है जो भारत के ज्यादातर आम उगाने वाले इलाकों में चलता है, और इसका मुख्य उपयोग सघन रोपण है: 5 x 5 मीटर पर प्रति हेक्टेयर 400 पेड़ (प्रति एकड़ 162), या कड़ी छंटाई के साथ 2.5 x 2.5 मीटर पर प्रति हेक्टेयर 1,600 पेड़ (प्रति एकड़ करीब 648)। इसे पाला रहित जगह, फूल के समय सूखा मौसम और ऐसा किसान चाहिए जो हर साल छंटाई करने को तैयार हो, क्योंकि भीड़ वाले पेड़ अकेले छोड़ देने पर फल देना बंद कर देते हैं।

यह दशहरी और नीलम का संकर है, जिसे IARI, नई दिल्ली में बनाया गया और 1971 में जारी किया गया। फल छोटा, गहरे नारंगी गूदे वाला और कैरोटीन से भरपूर होता है, और यह देर से पकता है, करीब जून के तीसरे हफ्ते से। कमियां हैं छोटा फल और दूसरे व्यावसायिक आमों से कम टिकाऊपन, इसलिए योजना में यह शामिल हो कि फसल कहां और कितनी जल्दी बिकेगी।

भारत में यह कहां उगता है

  • ट्रायल और बाग के प्रमाण: आम्रपाली की दूरी के ट्रायल गुजरात (Central Horticultural Experiment Station, 1997 से 1999), छत्तीसगढ़ (IGKV रायपुर, 2015-16) और मिजोरम (ICAR Research Complex for NEH Region, उप-आर्द्र गर्म उष्णकटिबंधीय जलवायु) से दर्ज हैं। यह उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी उगता है, जहां इसके पहले पौधे नदिया जिले में तैयार हुए।
  • मिट्टी: TNAU अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट को आम के लिए आदर्श बताता है, pH 6.5 से 8.0। जलभराव वाली या उथली मिट्टी से बचें।
  • जलवायु: गर्म, और फूल के समय साफ सूखा मौसम। फूल के समय पाला और बारिश फल बनना घटाते हैं और चूर्णिल आसिता और एन्थ्रेक्नोज बढ़ाते हैं, चाहे कोई भी किस्म लगाई हो।

किस्म की जानकारी और संबंधित चयन

मदस्रोतक्या बताया गया है
आम्रपालीIARI, नई दिल्ली (Dasheri x Neelum), 1971बौना, हर साल फलने वाला, गुच्छों में छोटा फल; इस किस्म पर छपे पर्चों में TSS करीब 21 degrees Brix और कैरोटिनॉइड 5.9 से 9.1 mg प्रति 100 g; अलग-अलग अध्ययनों में फल करीब 100 से 210 g
AmbikaICAR-CISH, लखनऊ (Amrapali x Janardan Pasand)लाली वाला पीला फल, करीब 250 g, 21 degrees Brix, सख्त और कम रेशे वाला; प्रति पेड़ करीब 80 किलो बताया गया
  • आम्रपाली के फल का वजन अलग-अलग पर्चों में काफी बदलता है (रायपुर के अध्ययन में सबसे अच्छे उपचार में 212 g मिला), इसलिए आकार फल के बोझ, छंटाई और खाद पर निर्भर करता है।
  • कलमी पौधे सरकारी या ICAR से जुड़ी नर्सरी से लें और किस्म की गारंटी लिखित में लें। सड़क किनारे के विक्रेता से पौधे लेने पर गलत आम निकलने का खतरा सबसे ज्यादा है।

दूरी और रोपाई

प्रणालीप्रति हेक्टेयर पेड़प्रति एकड़ पेड़
5 x 5 मीटर (सघन रोपण, TNAU)400करीब 162
2.5 x 2.5 मीटर (अति सघन रोपण, उत्तर भारत के ट्रायल)1,600करीब 648
दोहरी हेजरो (CHES गुजरात का ट्रायल)3,556करीब 1,439
  • गुजरात के ट्रायल (1997 से 1999) में वर्गाकार (1,600), हेजरो (2,670), जोड़ी (2,133), गुच्छा (2,844) और दोहरी हेजरो (3,556) लेआउट आजमाए गए और प्रति इकाई क्षेत्र सबसे ज्यादा उपज दोहरी हेजरो में मिली, उसके बाद गुच्छा और हेजरो में। भीड़ वाले लेआउट में उपजाऊ बने रहने के लिए नियमित छंटाई जरूरी है, जो नीचे दिए छंटाई वाले ट्रायल का मुद्दा है।
  • मिजोरम के ट्रायल (2.5 x 2.5, 3 x 2.5 और 2.5 x 1.5 मीटर) में दूसरे से चौथे साल तक 1,600 पेड़ वाले लेआउट में प्रति इकाई क्षेत्र बढ़वार, उपज और गुणवत्ता सबसे अच्छी रही, और 2,666 पेड़ वाला ज्यादा घना लेआउट बेहतर नहीं निकला।
  • गड्ढे: TNAU 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर के गड्ढे सुझाता है, जिन्हें ऊपरी मिट्टी और गोबर की खाद से भरा जाए।
  • बारिश की शुरुआत में रोपें, गर्म हवा से बचाव करें और पौधे जमने तक पानी दें।

खाद और सिंचाई

  • TNAU प्रति पेड़ खुराक हर साल बढ़ती हुई बताता है, पहले साल में 10 किलो गोबर की खाद, 0.2 किलो N, 0.2 किलो P और 0.3 किलो K से लेकर छठे साल से 50 किलो गोबर की खाद, 1.0 किलो N, 1.0 किलो P और 1.5 किलो K तक, सितंबर से अक्टूबर में तने से 45 से 90 सेमी दूर डालें। ये खुराकें सामान्य दूरी वाले पेड़ों की हैं; 2.5 x 2.5 मीटर के बाग में खुराक मिट्टी जांच और KVK की सलाह पर तय करें।
  • IGKV रायपुर के अध्ययन में सिफारिश की गई खाद का 80% और गोबर की स्लरी सबसे अच्छा शुद्ध लाभ देती मिली, इसलिए जैविक पदार्थ जोड़ने से रासायनिक खाद कम हो सकती है।
  • सिंचाई: TNAU सामान्य सिंचाई में हफ्ते में एक बार पानी बताता है और कहता है कि माइक्रो-सिंचाई में करीब एक-तिहाई पानी लगता है। देखें drip irrigation।
  • ढांचा बनाना: पहले तीन साल फूल तोड़ दें (TNAU) ताकि ढांचा मजबूत बने। हर साल कटाई के बाद छंटाई करें ताकि छत्र खुला रहे; छंटाई और दूरी वाले एक ट्रायल (Phytojournal, 2018) में पाया गया कि 2.5 x 2.5 मीटर पर छंटाई की मात्रा से प्रति इकाई क्षेत्र उपज बदली।

कीट और रोग

  • फुदका (hopper): TNAU फूल के समय acephate या phosalone के दो छिड़काव बताता है। छिड़काव से पहले लेबल देखें और KVK से पूछें, क्योंकि मधुमक्खियां परागण करती हैं।
  • चूर्णिल आसिता: फूल के समय 0.2% गीला सल्फर।
  • एन्थ्रेक्नोज और डंठल सड़न: TNAU के अनुसार mancozeb (2 g प्रति लीटर) या carbendazim (1 g प्रति लीटर), 15 दिन के अंतर पर तीन छिड़काव।
  • फल मक्खी: methyl eugenol ट्रैप और गिरे फलों को हटाना पहला उपाय है। देखें pests।
  • मिली बग और तना छेदक: TNAU मिली बग के लिए chlorpyriphos या भृंग Cryptolaemus montrouzieri छोड़ना, और तना छेदक के लिए छेद में लेप या दाने डालना बताता है। मौजूदा रसायनों के पंजीकरण और खुराक KVK से पक्के कर लें।
  • विकृति (malformation): विकृत मंजरियां हटाएं और रोगमुक्त कलमें लगाएं।

कटाई और उपज

  • मौसम: आम्रपाली देर से आता है, उत्तर भारत में करीब 20 जून से फल मिलते हैं। रंग देखकर नहीं, परिपक्वता देखकर तोड़ें और कम टिकाऊपन के कारण संभालकर रखें।
  • फलन: हर साल फलने वाला होने से यह कई पारंपरिक आमों की तरह साल छोड़ता नहीं। करीब 3 साल बाद पहली फसल छोटी होती है और TNAU शुरुआती फूल हटाने की सलाह देता है; CISH की सलाह पर चलने वाले लखनऊ के एक किसान ने तीसरे साल में आय बताई।
  • बताई गई उपज: IGKV रायपुर में 2015-16 में 11.84 टन प्रति हेक्टेयर (करीब 4.8 टन प्रति एकड़); Wikipedia पर औसत 16 टन प्रति हेक्टेयर (करीब 6.5 टन प्रति एकड़), जो दूसरे दर्जे का स्रोत है; और छंटाई के एक ट्रायल में सबसे अच्छे उपचार (2.5 x 2.5 मीटर के साथ 50% छंटाई) में 349 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, जो आदर्श हालात का नतीजा है, योजना का आंकड़ा नहीं।
  • तुलना के लिए, TNAU सामान्य आम की उपज 15 साल की उम्र तक 8 से 10 टन प्रति हेक्टेयर बताता है।
💡 सुझाव: दूरी तय करने से पहले बाजार तय करें। 2.5 x 2.5 मीटर के बाग में पौधे और छंटाई की मजदूरी ज्यादा लगती है; अगर बौने बाग का अनुभव नहीं है तो पहले एक एकड़ 5 x 5 मीटर या 3 x 2.5 मीटर पर आजमाएं।

लागत और कमाई

  • ट्रायल का हिसाब: IGKV रायपुर का पर्चा 11.84 टन पर प्रति हेक्टेयर कुल आय ₹2,36,800 और शुद्ध आय ₹1,67,647 बताता है, जिसका मतलब है करीब ₹20 प्रति किलो का भाव और सालाना करीब ₹69,000 प्रति हेक्टेयर (करीब ₹28,000 प्रति एकड़) की लागत। यह 2015-16 का भाव है; आज का भाव अलग होगा।
  • उसी उपज पर दूसरे भाव: 11.84 टन x ₹15 प्रति किलो = ₹1.78 लाख प्रति हेक्टेयर कुल आय; ₹30 प्रति किलो पर = ₹3.55 लाख। फल देने वाले बाग की चलती लागत के रूप में करीब ₹69,000 घटाएं, यह सिर्फ मोटा अंदाज है।
  • खेत का उदाहरण: CISH की सलाह पर चलने वाले मलिहाबाद (उत्तर प्रदेश) के एक किसान ने सघन रोपण के आम से तीसरे साल में ₹1.5 से 2.0 लाख प्रति हेक्टेयर और सातवें साल में ₹3.5 से 4.0 लाख प्रति हेक्टेयर बताया। स्रोत यह नहीं बताता कि वह आम्रपाली था।
  • शामिल नहीं: पौधे, गड्ढे, ड्रिप, बाड़ और पहले 1 से 3 साल की स्थापना की मजदूरी, जब फसल बहुत कम या नहीं होती। आम्रपाली की स्थापना की कोई पक्की मौजूदा लागत नहीं मिली।

बाजार और बिक्री

  • देर का मौसम होने से फल आम की भरमार के आखिरी दौर और मानसून से टकराता है। जून और जुलाई के अंत में अपनी मंडी में आम के ग्रेड का मौजूदा मंडी भाव देखें।
  • छोटा फल और कम टिकाऊपन लंबी दूरी के व्यापार में उसके खिलाफ जाते हैं, जबकि रंग और मिठास स्थानीय खुदरा, प्रसंस्करण (पल्प) और सीधी बिक्री में काम आते हैं। आम्रपाली के लिए खरीदार का कोई पक्का कॉन्ट्रैक्ट या पल्प प्रोसेसर का भाव नहीं मिला, इसलिए रोपण से पहले खरीदार तय कर लें।
  • बागवानी मिशन या MIDH योजना के तहत रोपण पर सहायता मिल सकती है; दरें राज्य के हिसाब से अलग हैं, इसलिए जिला बागवानी कार्यालय से पूछें या subsidy finder देखें। यहां कोई पक्की दर नहीं दी गई है। FPO से समूह में बिक्री करने पर ढुलाई और ग्रेडिंग में मदद मिलती है।

स्रोत