सिंधुदुर्ग ज़िले में खेती: पश्चिमी पठार और पहाड़ियाँ
महाराष्ट्र मुख्य रूप से पश्चिमी पठार और पहाड़ियाँ कृषि-जलवायु क्षेत्र में आता है (अर्ध-शुष्क, पूरे क्षेत्र में सालाना 500-1000mm बारिश)। इस क्षेत्र में दक्कन की काली मिट्टी का क्षेत्र, कपास, तिलहन, गन्ना और बागवानी आम है, मिट्टी ज़्यादातर गहरी काली कपास मिट्टी (वर्टिसोल) है और आमतौर पर कपास, सोयाबीन, ज्वार, अरहर, गन्ना, प्याज, अंगूर उगाई जाती हैं।
ये पूरे कृषि-जलवायु क्षेत्र के तथ्य हैं (ICAR / योजना आयोग वर्गीकरण), सिंधुदुर्ग की फसल गणना नहीं। मौसम वाले हिस्से में सिंधुदुर्ग की अपनी मासिक बारिश और तापमान दिए गए हैं।
सिंचाई और मिट्टी
ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। एक ही क्षेत्र में भी खेत-खेत की मिट्टी अलग होती है, इसलिए मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही आपके खेत की सही ज़रूरत बताता है।
सिंधुदुर्ग में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में सिंधुदुर्ग में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें धान / चावल, मूँगफली, रागी थीं। अकेले धान / चावल का रकबा 58,269 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 92%) था, और इसकी उपज 2,795 किग्रा/हेक्टेयर महाराष्ट्र के औसत से 22% ज़्यादा रही। 2019-20 के बाद से सबसे बड़ा बदलाव: मूँगफली का रकबा +120%।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | महाराष्ट्र औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| धान / चावल | 58,269 | 1,62,864 | 2,795 | 2,299 | -9% |
| मूँगफली | 2,953 | 6,559 | 2,221 | 1,448 | +120% |
| रागी | 1,278 | 3,000 | 2,348 | 1,397 | -3% |
| मक्का | 483 | 1,293 | 2,680 | 2,922 | +69% |
| सरसों / राई | 244 | 145 | 594 | 403 | +352% |
| तिल | 9 | 2 | 182 | 373 | -75% |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। महाराष्ट्र औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
सिंधुदुर्ग का मौसम और बुवाई का समय
सिंधुदुर्ग में सालाना औसतन लगभग 2419 मिमी बारिश होती है, जिसका 89% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश जुलाई में (712 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना अप्रैल है (दिन का औसत 36°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत 19°C) होती हैं।
- आमतौर पर जून में पहली बार महीने की बारिश 100 मिमी पार करती है, यही यहां खरीफ बुवाई का सामान्य संकेत है।
- साल की 89% बारिश जून-सितंबर में होती है, इसलिए रबी और गर्मी की फसलों के लिए पक्की सिंचाई ज़रूरी है।
- सालाना लगभग 2419 मिमी बारिश के साथ मौसम में पानी भरपूर है; सिंचाई जितना ही खेत से पानी निकासी भी ज़रूरी है, और धान व बागानी फसलें यहां के मौसम के अनुकूल हैं।
- जनवरी में भी दिन का औसत तापमान 32°C रहता है, जो गेहूँ की अच्छी पैदावार के लिए ज़्यादा गर्म है; ठंड के मौसम में गर्मी सहने वाली दलहन, तिलहन और सब्ज़ियां बेहतर रहती हैं।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 1 | 32° | 19° |
| फ़रवरी | 1 | 34° | 20° |
| मार्च | 7 | 35° | 22° |
| अप्रैल | 13 | 36° | 24° |
| मई | 78 | 34° | 25° |
| जून | 613 | 29° | 25° |
| जुलाई | 712 | 27° | 25° |
| अगस्त | 526 | 27° | 24° |
| सितंबर | 305 | 28° | 23° |
| अक्टूबर | 138 | 29° | 23° |
| नवंबर | 22 | 30° | 21° |
| दिसंबर | 3 | 31° | 19° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), सिंधुदुर्ग ज़िले के केंद्र (16.1357, 73.6522) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
सिंधुदुर्ग के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
सिंधुदुर्ग के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
- कोल्हापुर - 59 km
- उत्तर गोवा, Goa - 70 km
- दक्षिण गोवा, Goa - 96 km
- रत्नागिरी - 129 km
- बेलगावी, Karnataka - 132 km
- सांगली - 152 km
सिंधुदुर्ग ज़िले में किसान योजनाएं
सिंधुदुर्ग, महाराष्ट्र के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: