जुकीनी (समर स्क्वैश, चप्पन कद्दू) एक आसान और तेज फसल है जो उत्तर भारत के मैदानों में ठंड के मौसम और बसंत में खुले खेत में, और सर्दी की आपूर्ति के लिए कम लागत वाले पॉलीहाउस में चलती है; इससे फायदा तभी है जब आप कोमल फल एक-दो दिन में होटल, रिटेल या किसी महानगर की मंडी में बेच सकें। ICAR के अनुसार यह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल में उगाई जाती है, और बुवाई से करीब 45 से 56 दिन में पहली तुड़ाई आती है।
उपज मौसम के हिसाब से बहुत बदलती है: सर्दी की फसल में 25 से 40 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है, जबकि बसंत-गर्मी की फसल में लगभग 8 से 16 टन। भाव दूसरा घटने-बढ़ने वाला कारक है, इसलिए पक्के खरीदार के हिसाब से योजना बनाएं।
जलवायु, मौसम और मिट्टी
- तापमान: सबसे अच्छा 24 से 27 डिग्री C। पौधा पाले और कम तापमान के प्रति संवेदनशील है, और उत्तरी मैदानों में दिसंबर से फरवरी तक खुले में ठंड की वजह से उगाना कठिन होता है।
- उत्तर भारत के मैदानों में बुवाई का समय: सर्दी की फसल सितंबर से नवंबर, जिसमें उपज और कमाई के लिए 20 अक्टूबर से 10 नवंबर सबसे अच्छा बताया गया है; बसंत-गर्मी की फसल फरवरी के पहले पखवाड़े से। कम लागत वाले पॉलीहाउस में अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक बोएं।
- मिट्टी: ज्यादातर मिट्टियों में उगती है पर जैविक पदार्थ से भरपूर, अच्छी जल निकासी वाली दोमट और बलुई दोमट पसंद करती है।
किस्में
| किस्म | स्रोत | विशेषताएं |
|---|---|---|
| Pusa Pasand | ICAR-IARI, नई दिल्ली | गर्मी सहने वाली, चपटे गोल हल्के हरे 70 से 80 ग्राम के फल; बुवाई के 45 से 50 दिन बाद पहली तुड़ाई; औसत उपज खुले में 16.0 t/ha, प्राकृतिक हवादार पॉलीहाउस में 24.5 t/ha और प्लास्टिक लो टनल में 22.8 t/ha |
| Pusa Alankar, Australian Green | ICAR-IARI | लंबा बेलनाकार फल, जुकीनी का जाना-पहचाना आकार |
| Kashi Shubhangi, Punjab Chappan Kaddu-1 | ICAR-IIVR वाराणसी; PAU लुधियाना | उत्तर भारत के लिए उपयुक्त किस्मों में सूचीबद्ध |
| निजी हाइब्रिड (जैसे Cora, Green Star, Orelia, Goldy) | बीज कंपनियां | ICAR की सलाह में विकल्प के रूप में सूचीबद्ध; अपने खरीदार की पसंद के आकार और रंग से मिलान करें |
- IARI के अनुसार उत्तर भारत के मैदानों में उपभोक्ता की पसंद चपटे गोल, मध्यम आकार के 70 से 80 ग्राम फल की है, जबकि लंबे बेलनाकार प्रकार सलाद और रेस्तरां के उपयोग के लिए ठीक हैं। पहले अपने खरीदार से आकार तय कर लें।
बुवाई, दूरी और पोषण
- दूरी: ICAR की सलाह में कतारें 60 से 75 सेमी और पौधे 50 सेमी की दूरी पर हैं, जिनमें 25,000 से 30,000 पौधे प्रति हेक्टेयर (करीब 10,000 से 12,000 प्रति एकड़) आते हैं। खेत में बुवाई के लिए बीज दर 2.25 किलो प्रति हेक्टेयर (करीब 0.9 किलो प्रति एकड़) है; पॉलीहाउस की 90 x 60 सेमी की क्यारियों के लिए 3 से 5 किलो प्रति हेक्टेयर।
- पौध तैयार करना: मिट्टी, वर्मीकंपोस्ट या गोबर की खाद और रेत (2:1:1) वाली पॉलीबैग में पौध; दो असली पत्तियों वाली 25 दिन की पौध खेत में लगाई जाती है।
- बेसल: खेत तैयार करते समय 15 से 20 टन प्रति हेक्टेयर अच्छी सड़ी गोबर की खाद (6 से 8 टन प्रति एकड़)।
- उर्वरक: एक ICAR लेख में 60 से 80 किलो N और 40 से 50 किलो P2O5 व K2O प्रति हेक्टेयर (24 से 32 किलो N और 16 से 20 किलो P2O5 व K2O प्रति एकड़) की सिफारिश है; एक और सारांश में NPK 100:50:50 किलो प्रति हेक्टेयर दिया गया है। पूरा P और K और आधा N बेसल दें, और बचा N बुवाई के लगभग चार हफ्ते बाद टॉप-ड्रेसिंग में दें।
- पॉलीहाउस की मात्रा (IARI): 100 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस के लिए 250 किलो गोबर की खाद, 1.2 किलो N, 800 ग्राम P और 600 ग्राम K, N तीन हिस्सों में बांटकर।
- बोरॉन: प्रति थाला 1 ग्राम बोरेक्स, या 30 दिन के अंतर पर 0.03% बोरेक्स के दो पर्णीय छिड़काव, उपज बढ़ाने वाले बताए गए हैं।
- सिंचाई: सतही सिंचाई के साथ 80 से 90 सेमी चौड़ी उठी क्यारियों पर लगाएं, या ड्रिप से पानी में घुलने वाला उर्वरक 8 से 10 बार में दें। नवंबर से फरवरी में ड्रिप हर तीसरे दिन 45 से 60 मिनट दी जाती है। ड्रिप सिंचाई देखें।
- खरपतवार और मल्च: 20 से 25 दिन पर एक निराई, गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाना; प्लास्टिक मल्च खरपतवार, पानी की जरूरत और माहू घटाता है।
परागण
- जुकीनी में नर और मादा फूल अलग-अलग होते हैं। पॉलीहाउस और लो टनल में, जहां मधुमक्खियां कम होती हैं, ताजा खिले फूलों का सुबह (करीब 8 से 10 बजे) हाथ से परागण करने की सलाह है। फूल बड़े और अकेले होते हैं, इसलिए यह करना आसान है।
कीट और रोग
- पत्ती सुरंगक (लीफ माइनर): सर्दी में आम तौर पर मामूली नुकसान; साप्ताहिक 4% नीम बीज गिरी अर्क (NSKE) की सलाह है।
- सफेद मक्खी, माहू और वायरस: IARI की सलाह में imidacloprid 0.3 मिली प्रति लीटर बताया गया है; लेबल और स्थानीय KVK की सलाह मानें। प्लास्टिक मल्च माहू घटाने में मदद करता है।
- माइट: बसंत-गर्मी में गंभीर हो सकती है; लेबल की सलाह पर माइटनाशी इस्तेमाल करें।
- चूर्णिल आसिता और मृदुरोमिल आसिता: फल बनने और बढ़ने के समय लगने की आशंका; हवा के लिए पुरानी पत्तियां हटाएं और अपने KVK द्वारा सुझाए फफूंदनाशी इस्तेमाल करें। आखिरी रासायनिक छिड़काव और तुड़ाई के बीच कम से कम 15 दिन का अंतर रखें।
- पहचान में मदद के लिए कीट देखें।
कटाई और उपज
- कोमल फल फूल आने के 9 से 12 दिन बाद तोड़ें, जब वे 20 से 23 सेमी लंबे, 4 से 4.5 सेमी मोटे और करीब 200 से 325 ग्राम के हों। IIVR के एक अध्ययन में 12 दिन के बाद स्वाद के अंक गिरे और 15 दिन से ऊपर के फल ताजे उपयोग के लिए बहुत सख्त और बीजदार थे।
- बुवाई के लगभग 55 दिन बाद से कुल 10 से 12 तुड़ाई; प्रति पौधा 10 से 12 फल या करीब 3.5 से 4 किलो।
- बताई गई खेत की उपज सीमा: सर्दी में 25 से 40 t/ha (10 से 16 t/एकड़), आदर्श हालात में 70 t/ha तक, और बसंत-गर्मी में 8 से 10 t/ha (3 से 4 t/एकड़)।
लागत और कमाई
- एक ICAR लेख (Indian Horticulture, 2020) में 100 से 110 दिन की सर्दी की फसल की खेती लागत ₹1,40,640 प्रति हेक्टेयर (करीब ₹56,900 प्रति एकड़), बिकने लायक उपज 320 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (करीब 130 क्विंटल प्रति एकड़) और थोक भाव ₹18 प्रति किलो दिया गया है।
- इसका हिसाब यह है: कुल आय 320 क्विंटल x ₹1,800 प्रति क्विंटल = ₹5,76,000 प्रति हेक्टेयर (करीब ₹2,33,000 प्रति एकड़) और शुद्ध आय लगभग ₹4,35,000 प्रति हेक्टेयर (करीब ₹1,76,000 प्रति एकड़)। भाव 2020 के हैं और थोक दर हैं; अभी के भाव मंडी भाव पर देखें।
- ये सर्दी के सबसे अच्छे आंकड़े हैं, बताई गई उपज पर। उसी भाव पर बसंत-गर्मी की 8 से 10 t/ha उपज सर्दी की आधी से भी कम आय देगी। पॉलीहाउस ढांचे पर काफी लागत लगती है; पॉलीहाउस सब्सिडी देखें।
बाजार और बिक्री
- खरीदार होटल, रेस्तरां, रिटेल चेन, ऑनलाइन ग्रोसर और महानगरों की सब्जी मंडियां हैं। मांग महानगरों में केंद्रित है, इसलिए बाजार छोटा है और आसानी से भर सकता है; बुवाई से पहले मात्रा और भाव तय कर लें।
- चमकदार रंग पकने के साथ फीका पड़ने पर गुणवत्ता जल्दी घटती है, इसलिए बार-बार तोड़ें और उसी दिन या अगले दिन बेचें। एक जैसे आकार और रंग की ग्रेडिंग करें।
- एक बड़ी तुड़ाई की जगह आपूर्ति स्थिर रखने के लिए हर दो से तीन हफ्ते पर बुवाई बांटकर करें।
