शहतूत रेशम कीट पालन भारत में वहां चलता है जहां सिंचाई, राज्य का रेशम विभाग और पास की कोकून मंडी तीनों हों, मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर और पश्चिम बंगाल में। इसमें शहतूत का बाग और घर के अंदर पालन शेड दोनों होते हैं, साल में 5 से 6 फसलें चलती हैं, और कमाई तभी होती है जब पत्ती की आपूर्ति, शेड की सफाई और कोकून बाज़ार तीनों ठीक बैठें।
आमदनी उस दिन के कोकून भाव पर निर्भर है, जो बहुत ऊपर-नीचे होता है। नीचे इस्तेमाल हुए उपज और मुनाफे के TNAU आंकड़े पुराने हैं, इसलिए रुपये की रकम को उदाहरण मानें और अपनी निकटतम मंडी में कोकून का ताज़ा भाव देखें।
भारत में कहां उगता है
- रेशम उत्पादन: भारत में 2023-24 में 38,913 टन कच्चा रेशम बना, जिसमें शहतूत रेशम 29,892 टन (लगभग 77%) था। शहतूत का क्षेत्रफल 2017-18 के 2.24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 में 2.63 लाख हेक्टेयर हुआ। 2024-25 के अप्रैल से जनवरी के प्रारंभिक आंकड़े कम, 34,042 टन थे।
- राज्य: शहतूत रेशम मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर और पश्चिम बंगाल में बनता है। गैर-शहतूत रेशम झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पूर्वोत्तर से आता है।
- उपयुक्तता: शहतूत के लिए पक्की सिंचाई, साफ और हवादार पालन शेड, सरकारी रेशम कीट बीज की आपूर्ति और एक दिन की ढुलाई की दूरी में कोकून मंडी चाहिए। इन तीनों के बिना शुरू न करें।
शहतूत की किस्में और दूरी
| किस्म | स्रोत | टिप्पणी | कहां उपयुक्त |
|---|---|---|---|
| V1 | Central Silk Board की सिफारिश | ज़्यादा पत्ती उपज; दक्षिणी मैदानों में सिंचाई के साथ व्यापक रूप से उगाई जाती है | सिंचित दक्षिणी मैदान |
| G4 | भवानीसागर (तमिलनाडु) अध्ययन में V1 से तुलना | V1 जैसे रुझान, रेशम कीट प्रदर्शन के मान थोड़े कम | तमिलनाडु |
- भवानीसागर में 2025 के एक अध्ययन में पेड़ वाले शहतूत को 5 x 5, 6 x 6 और 7 x 7 फीट (लगभग 1,742, 1,210 और 889 पेड़ प्रति एकड़) पर परखा गया। 6 x 6 फीट दूरी की V1 पत्ती खाने वाले रेशम कीटों ने लार्वा वज़न, जीवित रहने और कोकून गुणों में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। एक और अध्ययन बताता है कि पेड़ रूप की V1 के लिए शोध संस्थानों की कोई तय सिफारिश नहीं है, इसलिए उत्पादक अपनी दूरी और छंटाई अपनाते हैं।
- किस्म और पौधे का रूप (झाड़ी या पेड़) अपने राज्य के रेशम विभाग या Central Silk Board के क्षेत्रीय केंद्र के साथ तय करें।
पोषण और सिंचाई
- TNAU प्रति हेक्टेयर 20 टन FYM (लगभग 8 टन प्रति एकड़), साल में 2 टन प्रति हेक्टेयर खली और 10 किलो प्रति हेक्टेयर ज़िंक सल्फेट दो बराबर किस्तों में सुझाता है, और बताता है कि रोपण के बाद पहले 45 दिन खरपतवार सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं।
- पत्ती उपज: TNAU का रेशम FAQ पारंपरिक तरीके में साल में 12 टन प्रति एकड़ और सुधरे तरीके में 24 टन प्रति एकड़ बताता है। मिट्टी की जांच और NPK कार्यक्रम रेशम विभाग के तकनीकी सेवा केंद्र से लें, क्योंकि यह ज़िले के अनुसार बदलता है।
- शहतूत को साल भर नियमित सिंचाई चाहिए; देखें ड्रिप सिंचाई। पालन के समय के पास शहतूत पर कोई कीटनाशक न छिड़कें, क्योंकि पत्ती पर अवशेष कीटों को मार देते हैं।
रेशम कीट पालन
- किसान रोगमुक्त अंडे (dfls) सरकारी ग्रेनेज या लाइसेंस वाले बीज केंद्रों से खरीदते हैं। कई पालक दूसरी निद्रा के बाद के छोटे कीट चॉकी पालन केंद्र से लेते हैं और खुद कोकून तक पालते हैं।
- TNAU के देर-अवस्था पालन मॉडल में 2 एकड़ शहतूत के लिए 1,200 वर्ग फीट का पालन शेड माना गया है।
- हर बैच से पहले शेड और उपकरण का कीटाणुशोधन करें (भवानीसागर अध्ययन में ब्लीचिंग पाउडर और एक व्यावसायिक कीटाणुनाशक घोल इस्तेमाल हुआ)। शेड साफ, सूखा और हवादार रखें, और बैचों के बीच ट्रे, पत्ती और लोगों की आवाजाही अलग रखें। राज्य का रेशम विभाग प्रशिक्षण और कीटाणुशोधन का कार्यक्रम देता है।
- उज़ी मक्खी शेड का जाना-पहचाना कीट है; TNAU नियंत्रण के लिए परजीवी Nesolynx thymus के प्रति 100 dfls एक लाख वयस्क छोड़ने की सूची देता है। TNAU शहतूत के कीटों के लिए Tetrastichus howardii (50,000 प्रति हेक्टेयर) और Trichogramma chilonis (5 cc प्रति हेक्टेयर) छोड़ना भी बताता है।
- फ्लैचेरी, ग्रासरी, मस्कार्डिन और पेब्रीन जैसे रेशम कीट रोग तेज़ी से फैलते हैं; मरे और बीमार कीट हटाकर जला या दबा दें, और पहला लक्षण दिखते ही विभाग के सेवा केंद्र को बुलाएं।
कोकून उपज
- TNAU प्रति 100 लेइंग औसत 60 से 70 किलो कोकून, साल में 5 से 6 फसलें, और साल में प्रति एकड़ शहतूत पर 800 से 1,200 लेइंग बताता है।
- TNAU का देर-अवस्था पालन मॉडल प्रति 100 dfls 70 किलो मानता है। TNAU की बताई पूरक चीज़ें उपज प्रति 100 dfls 7 से 10 किलो बढ़ाती हैं, पर पहले एक बैच पर आज़माकर ही अपनाएं।
लागत और आमदनी
- दाम: सितंबर 2024 में रामनगरम में Central Silk Board का मासिक औसत क्रॉस-ब्रीड कोकून के लिए ₹481 प्रति किलो और बाइवोल्टाइन कोकून के लिए ₹569 प्रति किलो था। दाम महीने दर महीने बदलते हैं; अपनी निकटतम मंडी का भाव इस्तेमाल करें।
- हिसाब (उदाहरण): प्रति 100 dfls 60 से 70 किलो क्रॉस-ब्रीड कोकून ₹481 पर प्रति 100 dfls ₹28,860 से ₹33,670 होता है। साल में प्रति एकड़ 800 से 1,200 लेइंग (480 से 840 किलो कोकून) पर लागत से पहले कुल आमदनी लगभग ₹2.3 लाख से ₹4.0 लाख प्रति एकड़ साल होती है।
- पुराने TNAU आंकड़े: FAQ में शहतूत लगाने का खर्च ₹80,000 से ₹1 लाख प्रति एकड़ और शुद्ध आमदनी ₹60,000 से ₹75,000 प्रति एकड़ साल बताई गई है। देर-अवस्था पालन मॉडल में ₹1.25 लाख का शेड और कोकून ₹120 प्रति किलो पर बिकना माना गया है। ये लागत और दाम पुराने हैं, इसलिए विभाग से आज का अनुमान पूछें।
- परिवार का श्रम मुख्य निवेश है; TNAU के अनुसार एक एकड़ साल भर लगभग 5 लोगों को काम दे सकता है।
बाज़ार, जोखिम और सहायता
- कोकून सरकारी या APMC कोकून मंडियों में रीलरों को बिकते हैं। रीलिंग इकाइयां कच्चा रेशम बनाती हैं, जो बुनकरों और निर्यातकों तक जाता है। 2023-24 में रेशम निर्यात ₹2,027.56 करोड़ का था।
- जोखिम: बीमारी का प्रकोप, लू, सूखे दौर में पत्ती की कमी और गिरते कोकून दाम।
- केंद्रीय Silk Samagra-2 योजना ने 2021-22 से 2025-26 के लिए ₹1,075.58 करोड़ की सहायता दी। प्रति किसान दरें राज्य के अनुसार अलग हैं, इसलिए राज्य के रेशम विभाग से पूछें। यह भी देखें सब्सिडी खोजक, KCC और FPO।
स्रोत
- TNAU Agritech Portal, Sericulture FAQs
- TNAU Agritech Portal, Economics of late age silkworm rearing
- TNAU Agritech Portal, Sericulture technologies
- Susikaran et al., Effect of tree spacing on silkworm growth, V1 and G4, Madras Agricultural Journal, 2025
- IANS, India's raw silk production and exports (Ministry of Textiles data)
- Ministry of Textiles, Central Silk Board monthly average prices of cocoon and raw silk, September 2024
