लाख की खेती भारत में वहीं चलती है जहां पोषक पेड़ पहले से हों, मुख्यतः झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में, और इसके लिए खेत नहीं बल्कि पोषक पेड़ या झाड़ियां और ताजा ब्रूड लाख का स्रोत चाहिए। यह कम लागत की फसल है, लेकिन जोखिम भरी है: झारखंड के कुछ हिस्सों में हाल के मौसमों में उपज तेजी से गिरी है, और भाव में भारी उतार-चढ़ाव रहता है।
लाख कीट (Kerria lacca) कोमल टहनियों का रस चूसता है और रेजिन बनाता है, जिसे खुरचकर स्टिकलाख के रूप में बेचा जाता है। भारत में साल में 20,000 टन से ज्यादा लाख बनता है, और अकेले झारखंड का हिस्सा आधे से ऊपर है।
भारत में यह कहां उगता है
- उत्पादन में हिस्सा: झारखंड 54.6%, छत्तीसगढ़ 18.4%, मध्य प्रदेश 13.8% और पश्चिम बंगाल 5.6% (ICAR समीक्षा, 2022)। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी लाख होता है। गुजरात में बेर और Prosopis पर प्रदर्शन प्लॉट हैं।
- जलवायु: गर्म, अर्ध-आर्द्र इलाके जहां सही पोषक पेड़ हों। कीट के बैठने के समय भारी बारिश, घना कोहरा और ठंड फसल बिगाड़ते हैं; झारखंड के खूंटी के किसानों ने 2024-25 की सर्दी में घने कोहरे और धुंध से करीब 50% फसल नुकसान और जुलाई 2025 में बारिश से कुसमी लाख को नुकसान बताया।
- जमीन: कमजोर और बंजर जमीन भी काफी है, क्योंकि लाख को खाद, पानी या कीटनाशक बहुत कम चाहिए। ICFRE की सर्वोत्तम पद्धति टिप्पणी के अनुसार लाख वाले इलाके उपलब्ध पोषक पेड़ों का सिर्फ 20 से 25% इस्तेमाल करते हैं।
जातियां और पोषक पौधे
| फसल | जाति और मुख्य पोषक पौधे | कीट बैठाना | कटाई | अवधि |
|---|---|---|---|---|
| बैसाखी (गर्मी) | रंगीनी, पलास, बेर, पीपल पर | अक्टूबर से नवंबर | जून से जुलाई | करीब 8 महीने |
| कतकी (बरसात) | रंगीनी, पलास पर | जून से जुलाई | अक्टूबर से नवंबर | करीब 4 महीने |
| जेठवी (गर्मी) | कुसमी, कुसुम, बेर, semialata पर | जनवरी से फरवरी | जून से जुलाई | करीब 6 महीने |
| अगहनी (सर्दी) | कुसमी, कुसुम, बेर, खैर पर | जून से जुलाई | जनवरी से फरवरी | करीब 6 महीने |
- कुसुम (Schleichera oleosa), पलास (Butea monosperma), बेर और Ficus की प्रजातियां भारत का करीब 90% लाख देती हैं। कुसमी लाख रंग में हल्का होता है और रंगीनी से ऊंचा भाव पाता है।
- Semialata (Flemingia semialata): कुसमी लाख के लिए एक छोटा झाड़ीनुमा पोषक पौधा, उन किसानों के काम का जिनके पास पोषक पेड़ नहीं हैं। ICAR-IINRG सलाह देता है कि जल्दी पकने वाली कुसमी नस्ल लें, कीट को टहनी की जगह के 35% से ज्यादा पर न बैठने दें, जोड़ी कतार में लगाएं और मानसून के बाद हर पखवाड़े सिंचाई करें। इन कदमों से प्रति मीटर 44% ज्यादा ब्रूड लाख मिलने की रिपोर्ट है।
- बेर: सबसे पसंदीदा पोषक पौधा, क्योंकि इस पर दोनों जातियां चलती हैं और कटाई-छंटाई का असर अच्छा होता है। कुसमी लाख के लिए मार्च से अप्रैल में छंटाई करें, जुलाई से अगस्त में 4 से 6 महीने की टहनियों पर प्रति छंटाई बिंदु 20 ग्राम ब्रूड लाख लगाएं, और अगले मार्च से अप्रैल में कटाई करें। फल वाली बेर किस्मों में Kaithali, Jogia, Seb x Gola और Banarasi Karaka अच्छे लाख पोषक पाए गए।
- अरहर: देर से पकने वाली किस्म Bahar पर रंगीनी लाख चल सकता है। प्रति हेक्टेयर 26,400 पौधों पर ICAR-IINRG के अनुसार करीब 1,750 किलो खुरचा लाख और 900 किलो दाल मिलती है, जबकि दाने की उपज 32% घटती है।
साल भर के काम
- छंटाई: पोषक पौधों की छंटाई ऐसे करें कि कीट बैठाने के लिए कोमल टहनियां तैयार हों। एक ICAR अध्ययन में जनवरी और फरवरी की छंटाई से ब्रूड लाख उपज अनुपात करीब 6.2 रहा, जबकि दिसंबर की छंटाई में 4.8।
- ब्रूड लाख: भरोसेमंद स्रोत से ताजी ब्रूड लाख की डंडियां लें; इन्हें करीब एक हफ्ते से ज्यादा नहीं रखा जा सकता। प्रति मीटर टहनी करीब 20 से 25 ग्राम के हिसाब से डंडियां पेड़ में बांधें। पेड़ पर ज्यादा बोझ न डालें।
- इस्तेमाल हो चुकी डंडियां हटाएं (फूंकी) जब कीट निकल जाएं। इससे नई फसल से शिकारी कीट और परजीवी दूर रहते हैं।
- कीट: इल्ली वाले शिकारी कीट और परजीवी ततैया मुख्य दुश्मन हैं। ICAR-IINRG ने एक insect filter बनाया है जो इस्तेमाल हो चुकी ब्रूड लाख में से शिकारी कीटों को उपयोगी परजीवियों से अलग करता है। किसी भी छिड़काव के लिए लेबल के हिसाब से चलें और नजदीकी KVK या ICAR-IINRG, रांची से पूछें।
- आराम: एक ही पोषक पेड़ पर हर मौसम एक ही फसल न लें। बेर पर जल्दी पकने वाली नस्ल से लगातार सर्दी की कुसमी फसल लेने से पेड़ कमजोर पड़े, इसीलिए देर से पकने वाली नस्ल की सलाह है।
- कटाई: पकने पर टहनियों से लाख खुरच लें। कुछ फसल अगले मौसम के लिए ब्रूड लाख के रूप में रखी जाती है।
उपज और अनिश्चितता
- ICAR-IINRG की घनी बेर प्रणाली (तिहरी बाड़ में प्रति हेक्टेयर 7,445 पौधे) में सर्दी की कुसमी फसल के लिए दो साल के पौधों पर 12 किलो ब्रूड लाख से 35 किलो लाख मिला। सामान्य 4 x 4 मीटर की बेर रोपाई में प्रति हेक्टेयर करीब 625 पौधे होते हैं।
- गुजरात के एक प्रदर्शन (ताजपुर, बनासकांठा) में जुलाई 2008 में 1,000 बेर पेड़ों पर 2,000 किलो ब्रूड लाख लगाई गई और 220 क्विंटल ब्रूड लाख मिली, जिसमें से 70 क्विंटल स्टिकलाख बना जो उस समय ₹4.9 लाख का था।
- झारखंड के खूंटी में एक किसान ने बताया कि पेड़ पर 5 किलो ब्रूड लाख लगाने पर 1 किलो से भी कम मिला, जबकि पहले इतने से करीब 50 किलो मिलता था। वहां व्यापारियों के अनुसार आपूर्ति 20 से 30% घटी है। बताई गई किसी भी उपज को अच्छे साल का आंकड़ा मानें।
लागत और कमाई
- ICAR के आंकड़े (पुराने, प्रति हेक्टेयर): फल वाली बेर पर लाख, लागत ₹1,78,926 और ब्रूड लाख व फूंकी से आय ₹4,85,740 (प्रति एकड़ करीब ₹72,000 लागत और ₹1.97 लाख आय)। तीसरे साल के बाद घनी बेर प्रणाली: आय ₹4,20,586 के मुकाबले लागत ₹1,71,285, यानी साल में शुद्ध ₹2,49,301 (प्रति एकड़ करीब ₹1.0 लाख शुद्ध)।
- छोटा उत्पादक: ICFRE की टिप्पणी में करीब 15 पोषक पेड़ों से साल में करीब ₹15,000 शुद्ध आय बताई गई है।
- भाव: छत्तीसगढ़ के वनोपज संघ ने 2022 में कुसमी के लिए ₹550 प्रति किलो और रंगीनी के लिए ₹275 प्रति किलो खरीद दर बताई, जबकि खुले बाजार में राष्ट्रीय उत्पादन घटने से कुसमी ₹300 से बढ़कर ₹900 प्रति किलो हो गया। 2025 की एक खबर में खूंटी के साप्ताहिक बाजारों में करीब ₹1,000 प्रति किलो बताया गया है। योजना बनाने से पहले नजदीकी लाख व्यापारी या MFP केंद्र से आज का भाव पूछ लें।
- हिसाब का उदाहरण: 100 किलो स्टिकलाख ₹400 प्रति किलो पर ₹40,000 होता है; ₹900 प्रति किलो पर ₹90,000। इसमें से ब्रूड लाख की खरीद, छंटाई की मजदूरी, खुरचाई और ढुलाई घटाएं। फसल फेल हो जाए तो ब्रूड लाख की लागत के सिवा लगभग कुछ नहीं लौटता।
बाजार और जोखिम
- स्टिकलाख स्थानीय व्यापारियों और MFP केंद्रों को बिकता है, फिर इससे सीडलाख और शेलैक बनता है। शेलैक फल, गोली और मिठाई की कोटिंग, लकड़ी की पॉलिश, वार्निश और बिजली के इन्सुलेशन में जाता है। ज्यादातर उत्पादक कच्चा स्टिकलाख बेचते हैं, इसलिए वैल्यू एडिशन का मुनाफा प्रोसेसरों के पास रहता है।
- ICFRE की टिप्पणी में मुख्य बाधाएं बताई गई हैं: ब्रूड लाख रखी नहीं जा सकती, गुणन दर कम है, पोषक पेड़ कम इस्तेमाल होते हैं और भाव अस्थिर हैं।
- वन भूमि के पेड़ों पर लाख स्थानीय वन नियमों के अधीन है; वन भूमि के पेड़ों पर कीट बैठाने से पहले वन विभाग या ग्राम सभा से अधिकारों के बारे में पूछ लें।
- समूह में बिक्री से FPO के जरिए भाव बेहतर मिलता है। मदद के लिए subsidy finder और कर्ज के लिए किसान क्रेडिट कार्ड देखें। छत्तीसगढ़ ने अपने वनोपज संघ के जरिए लाख उत्पादकों को ब्याज-मुक्त फसल ऋण दिए हैं।
स्रोत
- K K Sharma, Advances in lac insect culture research (Indian Journal of Entomology, 2022, ICAR-IINRG)
- ICFRE and MoEFCC, Lac cultivation best practice flyer
- Down To Earth, Sticky decline (lac in Khunti, Jharkhand)
- ICAR, Promotion of lac cultivation in tribal areas of Gujarat
- Drishti IAS, Chhattisgarh lac initiative (2022 rates)
