बेबी स्पिनैच और Swiss chard भारत में ठंडे मौसम (मैदानों में मोटे तौर पर अक्टूबर से फरवरी) में, और बाकी साल पॉलीहाउस या हाइड्रोपोनिक्स में उगाए जा सकते हैं, लेकिन बाजार छोटा और शहरों तक सीमित है: रेस्तरां, होटल, सलाद किचन और सुपरमार्केट। बेबी-लीफ उत्पादन या Swiss chard के लिए भारत में लगभग कोई ट्रायल आंकड़ा नहीं है, इसलिए नीचे के आंकड़े साधारण पालक और स्पिनैच पर ICAR के काम और एक विदेशी chard ट्रायल से लिए गए हैं, और पहला प्लॉट छोटा रखना चाहिए।

यहां दो पौधे शामिल हैं। असली पालक (Spinacia oleracea) ठंडे मौसम की फसल है जो पाला सह लेती है लेकिन ज्यादा तापमान में जल्दी फूल देती है। Swiss chard (Beta vulgaris) वही प्रजाति है जो भारतीय पालक (spinach beet, Beta vulgaris var. bengalensis) की है, इसीलिए chard के लिए पालक पर हुआ शोध ही सबसे अच्छा भारतीय मार्गदर्शक है।

कहां और कब उगती है

  • मौसम: Pusa Vilayati Palak (ICAR-IARI, नई दिल्ली की असली पालक) की बुवाई अक्टूबर से शुरू होती है, और उत्तरी मैदानों में नवंबर सबसे अच्छा है। गर्मी में जल्दी फूल आते हैं और फसल खत्म हो जाती है।
  • गर्म शुष्क क्षेत्र: ICAR-CIAH, बीकानेर में पालक की किस्म Thar Hariparna अक्टूबर में बोई जाती है और अक्टूबर के आखिर से मार्च तक तोड़ी जाती है।
  • हरियाणा: हिसार में पालक पर तीन साल के ट्रायल में पत्ती और बीज दोनों की उपज के लिए चार बुवाई तारीखों (10 अक्टूबर से 25 नवंबर) में 25 अक्टूबर सबसे अच्छी निकली।
  • संरक्षित खेती: केरल कृषि विश्वविद्यालय (वेल्लायनी) ने अक्टूबर 2019 से जनवरी 2020 तक हवादार पॉलीहाउस में पालक का ट्रायल किया और वहां पॉलीहाउस को साल भर की खेती के लिए उपयुक्त बताया। कुछ शहरी दुकानदार हाइड्रोपोनिक बेबी स्पिनैच बेचते हैं, लेकिन भारत के खेतों से लागत या उपज का कोई आंकड़ा नहीं मिला।

किस्में

किस्मस्रोतखासियतकहां के लिए ठीक
Pusa Vilayati PalakICAR-IARI, नई दिल्लीअसली पालक, हरी रसीली पत्तियां, कम फूल आने के लिए चुनी गई; लगभग 20 दिन के अंतर पर 2 से 3 कटाई; औसत 12 टन/हेक्टेयर हरी पत्तीशरद-सर्दी, मैदान और पहाड़
Thar HariparnaICAR-CIAH, बीकानेरपालक; 3 से 4 दिन के अंतर पर 7 से 9 तुड़ाई; बिकने लायक पत्ती 128 से 236 क्विंटल/हेक्टेयरगर्म शुष्क और रेतीली मिट्टी
  • रंगीन Swiss chard के बीज और बेबी-लीफ हाइब्रिड मुख्यतः निजी बीज कंपनियां बेचती हैं। ICAR की कोई जारी की हुई chard या बेबी-स्पिनैच किस्म नहीं मिली, इसलिए बीज खरीदने से पहले अपने खरीदार से पूछें कि उन्हें कौन सी किस्म और कितनी बड़ी पत्ती चाहिए।

बुवाई, दूरी और खाद

  • Pusa Vilayati Palak: करीब 20 किलो बीज प्रति हेक्टेयर (8 किलो प्रति एकड़), कतारें 30 सेमी दूर, पौधे 10 सेमी पर छांटे जाते हैं।
  • CIAH बीकानेर की पालक (पत्ती वाली फसल): 12 से 15 किलो बीज प्रति हेक्टेयर (5 से 6 किलो प्रति एकड़), 25 से 30 सेमी दूर कूंड़ों में 15 से 20 सेमी की दूरी पर। प्रति हेक्टेयर आधार खुराक FYM 50 क्विंटल, वर्मीकम्पोस्ट 5 क्विंटल, DAP 100 किलो, SSP 100 किलो, यूरिया 50 किलो और MOP 50 किलो थी, और आगे 50 किलो यूरिया कटाइयों में बांटकर दिया गया। रेतीली मिट्टी में बाढ़ सिंचाई से हर 7 से 8 दिन, या ड्रिप से हर 3 से 4 दिन पर पानी दिया गया।
  • केरल की पॉलीहाउस पालक (KAU वेल्लायनी, किस्म All Green): 30 सेमी x 10 सेमी, अकार्बनिक स्रोतों से 80:40:80 किलो N:P:K प्रति हेक्टेयर (32:16:32 प्रति एकड़) और छह कटाई की सलाह दी गई, और सबसे अच्छे उपचारों में प्रति पौधा 102 से 107 ग्राम पत्ती मिली।
  • Swiss chard, ब्राजील: पराना के एक ट्रायल में पास-पास पौधों से प्रति हेक्टेयर ज्यादा उपज मिली, और 160 किलो/हेक्टेयर तक नाइट्रोजन से उपज सीधी रेखा में बढ़ी, कुल उपज अधिकतम 77.8 टन/हेक्टेयर रही। यह विदेशी शोध प्लॉट का आंकड़ा है, भारत में मिलने वाली उम्मीद नहीं।
  • पत्तियां साफ रहें इसके लिए drip या sprinkler इस्तेमाल करें, और अच्छे जल निकास वाली, भुरभुरी, उपजाऊ मिट्टी चुनें।

कीट, रोग और अवशेष

  • CIAH के अनुसार पत्ती वाली पालक में कीट और रोग की समस्या कम होती है, और ताजा खाई जाने वाली फसल पर कोई कीटनाशक या फफूंदनाशक न डालने की सलाह है। सलाद की पत्ती में अवशेष खरीदार के लिए जोखिम है, इसलिए साफ बीज, जल निकास और फसल चक्र पर भरोसा करें, और कुछ भी डालने से पहले अपने KVK से पूछें। pests देखें।
  • सिर्फ साफ पानी से धोएं और साफ क्रेट में तोड़ें। खराब या पीली पत्ती वापस होने का मुख्य कारण है।

कटाई और उपज

  • CIAH हर 3 से 4 दिन पर कोमल पत्तियां तोड़ने और छोटी (A) और बड़ी (B) में छांटने की सलाह देता है ताकि ज्यादा दाम मिले। सिंचाई के तरीके के हिसाब से पालक की बिकने लायक पत्ती की उपज 128 से 236 क्विंटल/हेक्टेयर (52 से 95 क्विंटल/एकड़) रही।
  • Pusa Vilayati Palak 2 से 3 कटाई में औसतन 12 टन/हेक्टेयर (करीब 4.9 टन/एकड़) देती है। बेबी-लीफ की प्रति एकड़ उपज का कोई पक्का भारतीय आंकड़ा नहीं है।
  • पत्ती जल्दी खराब होती है: सुबह जल्दी तोड़ें, ठंडा रखें और हो सके तो उसी दिन पहुंचाएं।
💡 सुझाव: 0.1 एकड़ भी बोने से पहले किसी एक होटल, सुपरमार्केट या सलाद-किचन खरीदार से पत्ती के आकार, प्रति किलो भाव और सप्लाई के दिनों पर सहमति ले लें। खरीदार के बिना यह फसल साधारण पालक के भाव पर ही बिकती है।

लागत और कमाई

  • साधारण पत्ती का पैमाना: CIAH अच्छी तरह उगाई पालक की पत्ती से आय ₹1,10,000 से ₹1,40,000 प्रति हेक्टेयर (करीब ₹44,000 से ₹57,000 प्रति एकड़) बताता है। जून 2026 में 32 APMC मंडियों में थोक पालक का औसत भाव करीब ₹17 प्रति किलो रहा, दिल्ली में करीब ₹12.5 और पंजाब में करीब ₹14.5 प्रति किलो (ACROP, Agmarknet आंकड़े)।
  • बेबी-लीफ और chard: बेबी स्पिनैच या रंगीन chard का कोई पक्का भारतीय खेत-भाव नहीं मिला। खरीदार से लिखित भाव लें, और पॉलीहाउस या हाइड्रोपोनिक यूनिट में पैसा लगाने से पहले उसे साधारण पत्ती के ₹12 से ₹17 प्रति किलो के भाव से मिलाकर देखें।
  • पॉलीहाउस की लागत और सब्सिडी के लिए polyhouse subsidy देखें।

बाजार और जोखिम

  • खरीदार महानगरों और बड़े शहरों के होटल, रेस्तरां, सलाद और मील-किट कंपनियां, सुपरमार्केट और क्लाउड किचन हैं। हर खरीदार की मात्रा छोटी होती है, ऑर्डर बार-बार आते हैं, और गुणवत्ता की शिकायत जल्दी आती है।
  • जोखिम: पतला बाजार, साधारण पत्ती का कम भाव जो आखिरी सहारा है, कम टिकाऊपन, और ठंडे मौसम के बाहर गर्मी से फूल आ जाना।
  • आखिरी सहारे वाले भाव के लिए mandi bhav देखें, और ऑर्डर जोड़ने के लिए FPO का सहारा लें।

स्रोत