हाइड्रोपोनिक्स भारत में कुछ ही फसलों के लिए चलती है (सलाद पत्ता और दूसरी पत्तेदार सब्जियां, हर्ब्स, स्ट्रॉबेरी, चेरी टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा), जो पॉलीहाउस, शेड नेट या इमारत के अंदर उगाई जाती हैं, और यह तभी फायदे में रहती है जब प्रीमियम उपज का खरीदार पहले से तय हो। इसमें भरोसे की बिजली, साफ पानी और ऐसा प्रशिक्षित व्यक्ति चाहिए जो रोज पोषक घोल की जांच करे, और ICAR-CISH के अनुसार कई आयातित सिस्टम ऊंची शुरुआती कीमत, पोषक मिश्रण की ऊंची कीमत और जानकारी की कमी के कारण मालिकों ने छोड़ दिए।
हाइड्रोपोनिक्स एक तकनीकी कारोबार है, कोई शॉर्टकट नहीं। भारतीय ट्रायल में उपज की बढ़त असली है, लेकिन वह खुले खेत से तुलना में नापी गई थी, किसी दूसरी संरक्षित खेती से नहीं।
भारत में इस्तेमाल होने वाले सिस्टम
| सिस्टम | कैसे काम करता है | कौन सी फसलें | बिजली पर निर्भरता |
|---|---|---|---|
| NFT (nutrient film technique) | ढलान वाले चैनलों में पोषक घोल की पतली धार जड़ों के पास से बहकर टैंक में लौटती है | पत्तेदार सब्जियां, हर्ब्स, स्ट्रॉबेरी | ज्यादा: टाइमर पर पंप |
| ड्रिप हाइड्रोपोनिक्स (कोकोपीट में बैग या स्लैब) | ठोस माध्यम पर पोषक घोल बूंद-बूंद दिया जाता है | लंबी बढ़ने वाला टमाटर, चेरी टमाटर, शिमला मिर्च, बिना परागण वाला खीरा | मध्यम |
| Ebb and flow | ट्रे को एक चक्र में भरा और खाली किया जाता है | पत्तेदार सब्जियां, पौध | मध्यम |
| ठोस माध्यम वाले वर्टिकल मॉडल (CISH पिरामिड, X-शेप) | छोटे कद के पौधे माध्यम में, टाइमर वाली ड्रिप के साथ | सब्जियां, हर्ब्स, स्ट्रॉबेरी | कम: जहां बिजली अनियमित हो वहां ICAR-CISH यही सुझाता है |
- ICAR-CISH, लखनऊ ने दस से ज्यादा भारतीय डिजाइन बनाए हैं। वर्टिकल डबल-रो NFT मॉडल में 192 पौधे लगते हैं जबकि सामान्य लेआउट में 32, सिंगल-रो वर्टिकल मॉडल में 160 (सामान्य में 40) और त्रिकोणीय वर्टिकल मॉडल में 80 (सामान्य में 32)।
- CISH के अनुसार उसके NFT डिजाइन में घोल के दोबारा घूमने से 60 से 70% पानी और करीब 40% पोषक तत्व बचते हैं। पंप टाइमर और सोलर पैनल से चलाए जा सकते हैं।
कौन सी फसलें ठीक हैं
- CISH टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, सलाद पत्ता, ब्रोकली, लाल पत्ता गोभी, Swiss chard, केल, धनिया, मेथी, पुदीना, तुलसी (basil), स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी और कुछ कट फ्लावर (गेंदा, कार्नेशन, गुलदाउदी, गुलाब) को उपयुक्त बताता है।
- ऐसी फसलें चुनें जो ऊंची कीमत वाली हों, ज्यादा उपज दें और कई बार तोड़ी जा सकें। मुख्य खेत की फसलें और सस्ती सब्जियां सिस्टम की लागत नहीं निकाल पातीं।
- भारतीय ट्रायल का नतीजा: एक छपी तुलना में खुले खेत के मुकाबले घूमने वाले NFT सिस्टम में सलाद पत्ते की उपज 169% और पालक की 190% ज्यादा रही, और बिना घूमने वाले हाइड्रोपोनिक सिस्टम में 107% और 124% ज्यादा (Acharya et al., 2022, Journal of Soil and Water Conservation)। हाइड्रोपोनिक पत्तियों में घुलनशील शर्करा और नाइट्रेट, फॉस्फोरस तथा सल्फर भी ज्यादा थे।
पोषक घोल, pH और EC
- पोषक तत्व दो स्टॉक घोल A और B में मिलाए जाते हैं, ताकि कैल्शियम नाइट्रेट फॉस्फेट और सल्फेट के साथ जमे नहीं। स्टॉक की ताकत 3x से कम रखें। ICAR-CISH ने पत्तेदार सब्जियों, सोलेनेसी सब्जियों, स्ट्रॉबेरी और खीरे के लिए सस्ता 3x A और B मिश्रण बनाया है (एक लीटर 300 लीटर पानी में); इसे पाने के लिए CISH, लखनऊ से पूछें।
- ज्यादातर पोषक तत्व pH 5.5 से 6.5 के बीच मिलते हैं। pH की जांच और सुधार दिन में दो बार करें, खासकर टैंक में घोल डालने के बाद; अम्ल (फॉस्फोरिक, नाइट्रिक, सिट्रिक) इसे घटाते हैं और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड या सोडियम बाइकार्बोनेट बढ़ाते हैं।
- EC सिर्फ कुल ताकत बताता है, अलग-अलग तत्वों का संतुलन नहीं। हाथ से चलने वाले सिस्टम में रोज जांचें। उपोष्णकटिबंधीय हालात (20 से 25 डिग्री C) के लिए CISH की सीमाएं नीचे की तालिका में हैं।
| फसल | pH | EC (mS/cm) | TDS (ppm) |
|---|---|---|---|
| सलाद पत्ता | 5.5 से 6.5 | 0.8 से 1.2 | 400 से 850 |
| पाक चोई | 6.5 से 7.0 | 1.5 से 2.0 | 1,050 से 1,400 |
| शिमला मिर्च | 6.0 से 6.5 | 1.8 से 2.2 | 1,250 से 1,540 |
| खीरा | 6.0 से 6.5 | 1.7 से 2.4 | 1,150 से 1,750 |
| टमाटर | 5.5 से 6.5 | 2 से 5 | 1,000 से 2,500 |
पानी, तापमान और ऑक्सीजन
- उदासीन, कम नमक वाला पानी इस्तेमाल करें। सिस्टम खरीदने से पहले अपने पानी का EC और pH जांच लें; कठोर या खारा बोरवेल का पानी कोई पोषक तत्व डालने से पहले ही EC ऊपर कर देता है।
- पत्तेदार और विदेशी सब्जियां 15 से 18 डिग्री C के घोल तापमान पर सबसे अच्छी बढ़ती हैं और 7 डिग्री C तक सह लेती हैं। टमाटर और शिमला मिर्च को 18 से 27 डिग्री C और खीरे को 15 से 32 डिग्री C ठीक रहता है। 10 डिग्री C से नीचे या 35 डिग्री C से ऊपर बढ़वार रुकती है, इसलिए गर्मी में चिलर या छांव वाला, ढका हुआ टैंक चाहिए हो सकता है।
- जड़ों को ऑक्सीजन चाहिए। घोल गर्म होने पर घुली ऑक्सीजन घटती है, इसलिए हवा दें या घोल को घुमाते रहें। गर्म पॉलीहाउस में कुछ घंटे की पंप या बिजली की रुकावट NFT की फसल मुरझा सकती है, इसीलिए बजट में जनरेटर या बैटरी बैकअप और एक अतिरिक्त पंप रखें।
कीट और रोग
- मिट्टी से होने वाली समस्याएं घटती हैं, लेकिन जड़ सड़न (Pythium) साझा घोल से कुछ ही दिनों में फैल सकती है। टैंक ढककर रखें, फसलों के बीच चैनल साफ करें और घोल ठंडा रखें।
- सफेद मक्खी, माहू, थ्रिप्स और माइट पॉलीहाउस के अंदर भी पहुंच जाते हैं। सभी खुले हिस्सों पर कीट-रोधी जाली, पीले चिपचिपे ट्रैप और दोहरा दरवाजा लगाएं। सीधे खाई जाने वाली फसल पर छिड़काव के लिए सिर्फ उसी के लिए लेबल वाले उत्पाद इस्तेमाल करें और लेबल के अनुसार चलें; अपने KVK या राज्य के बागवानी विभाग से पूछें।
लागत और कमाई
- व्यावसायिक हाइड्रोपोनिक यूनिट के लिए प्राथमिक स्रोतों में भारत के जांचे हुए लागत या मुनाफे के आंकड़े नहीं मिले, और छपे बिजनेस प्लान के आंकड़े बहुत अलग-अलग हैं और ज्यादातर ब्रोशर के अनुमान हैं। "प्रति वर्ग फुट मुनाफे" के किसी भी दावे को बिना पुष्टि का मानें।
- किसी प्रस्ताव को परखने के लिए लिखें: प्रति पौधा जगह सिस्टम की लागत (चैनल, पंप, टैंक, सेंसर, पॉलीहाउस), बिजली और बैकअप की लागत, हर फसल चक्र में पोषक तत्व की लागत, मजदूरी, पैकिंग, और किसी नामित खरीदार का प्रति किलो भाव। फिर साल की लागत (घिसावट और ब्याज सहित) को साल भर में बिकने वाले किलो से भाग दें।
- कम से कम तीन आपूर्तिकर्ताओं से लिखित कोटेशन लें और ऐसे चालू फार्म देखें जो दो साल से ज्यादा से चल रहे हों, नई डेमो यूनिट नहीं।
बाजार और जोखिम
- खरीदार होटल, रेस्तरां, कैफे, सलाद और पिज्जा चेन, आधुनिक रिटेल और ऑनलाइन ग्रॉसर हैं। उन्हें हर हफ्ते लगातार आपूर्ति, साफ पैकिंग और कोल्ड चेन चाहिए, जो छोटा फार्म अकेले मुश्किल से निभा पाता है। FPO के जरिए समूह में बिक्री से मदद मिल सकती है।
- सलाद पत्ता, हर्ब्स और स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब होते हैं। पहली तुड़ाई से पहले पैकिंग और कोल्ड स्टोरेज की योजना बनाएं; देखें cold storage subsidy।
- ऐसे आपूर्तिकर्ताओं से सावधान रहें जो buy-back या "पक्की आमदनी" के वादे के साथ टर्नकी किट बेचते हैं। जांचें कि कॉन्ट्रैक्ट में भाव, क्वालिटी ग्रेड और रिजेक्ट हुई उपज का खर्च कौन देगा, इस बारे में क्या लिखा है।
- हाइड्रोपोनिक्स, एक्वापोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग को Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) के तहत घटकों के रूप में प्रस्तावित किया गया है, लेकिन प्रति यूनिट सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं मिली। जिला बागवानी अधिकारी से पूछें और ढांचे के लिए subsidy finder और polyhouse subsidy पेज देखें।
- संबंधित गाइड: स्ट्रॉबेरी, बिजली बैकअप के लिए solar pump।
स्रोत
- Singh and Rajan, Vertical hydroponics: A future technology for urban horticulture, Indian Horticulture, March-April 2022 (ICAR-CISH)
- Acharya et al. 2022, Yield and quality attributes of lettuce and spinach grown in different hydroponic systems, Journal of Soil and Water Conservation
- Vertical Farm Daily, Indian government aims to boost farming through hydroponics and aquaponics (secondary source)
