भारत में aeroponics व्यवहार में आलू बीज की तकनीक है। ICAR-CPRI (शिमला) ने 2011 में रोगमुक्त आलू मिनीट्यूबर के लिए एक aeroponic प्रणाली पक्की की, और यह तकनीक उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब और हरियाणा की 14 कंपनियों को लाइसेंस पर दी गई है, साथ ही मध्य प्रदेश सरकार को भी लाइसेंस मिला है। बाजार के लिए सब्जी या पत्तेदार साग उगाने के लिए भारत का कोई ट्रायल आंकड़ा या सिद्ध व्यावसायिक मॉडल नहीं मिला, इसलिए किसान इसे कमाई का आम तरीका न मानें।
जड़ें एक बंद कक्ष में लटकती हैं और उन पर अंतराल से पोषक घोल की महीन फुहार छिड़की जाती है। इसके लिए tissue culture के पौधे, नियंत्रित वातावरण वाले ढांचे, भरोसेमंद बिजली और प्रशिक्षित स्टाफ चाहिए, और यह बीज कारोबारों और संस्थानों के लिए है, नौसिखियों के लिए नहीं।
भारत में यह प्रणाली कैसे इस्तेमाल होती है
- मकसद: आलू का बीज बड़ा खर्च है, एक ICAR पत्रिका की समीक्षा के अनुसार आलू उत्पादन खर्च का करीब 40%, और पारंपरिक बीज गुणन धीमा है और उसमें रोग जमा होते जाते हैं। Aeroponics, tissue culture के साथ मिलकर, पहले चरण में रोगमुक्त मिनीट्यूबर के साथ ऊंची गुणन दर देती है और मौसम से परे चल सकती है।
- बचा समय: ICAR के अनुसार यह प्रणाली पारंपरिक गुणन के मुकाबले बीज फसल का खेत में रहने का समय कम से कम 2 साल घटा देती है।
- आज का पैमाना: हर लाइसेंस वाली कंपनी साल में 10 लाख तक मिनीट्यूबर बना सकती है, और 14 कंपनियां मिलकर करीब आधी क्षमता पर साल में लगभग 65 लाख मिनीट्यूबर बनाती हैं। ICAR-CPRI खुद 25 किस्मों का करीब 3,187 टन न्यूक्लियस और ब्रीडर बीज सालाना बनाता है, जिसका 30% हाई-टेक प्रणालियों से और 70% पारंपरिक प्रणाली से आता है।
- कड़ी: meristem culture से बने रोगमुक्त पौधे aeroponic कक्ष में जाते हैं, मिनीट्यूबर निकाले जाते हैं, और फिर उन्हें खेत में बीज के रूप में बढ़ाया जाता है।
पौधों की घनत्व
ICAR-CPRI शिमला के एक ट्रायल में aeroponic कक्ष में तीन दूरियों की तुलना 14 कटाइयों तक की गई।
| दूरी | प्रति m2 पौधे | ट्रायल में क्या मिला |
|---|---|---|
| 15 x 10 सेमी | 66 | प्रति m2 सबसे ज्यादा मिनीट्यूबर |
| 15 x 15 सेमी | 44 | बीच का नतीजा |
| 20 x 15 सेमी | 33 | सबसे भारी औसत कंद (1.74 ग्राम) |
- कुल मिनीट्यूबर और प्रति पौधा उपज आम तौर पर कतार में 15 सेमी की दूरी पर 10 सेमी से ज्यादा रही, और प्रति m2 कंदों का वजन दूरियों के बीच काफी अलग नहीं था।
- प्रति पौधा मिनीट्यूबर की संख्या किस्म पर निर्भर है। ICAR-CPRI के काम में कुछ हालात में यह Kufri Himalini में 38 से घटकर 27 और Kufri Himsona में 29 से घटकर 11 रह गई, इसलिए किस्मों की सूची संस्थान के साथ तय करने की चीज है।
पोषक घोल और फुहार
- भारतीय किस्मों के लिए सही पोषक घोल का नुस्खा, pH, EC या फुहार का समय तय करने वाला कोई भारतीय सार्वजनिक स्रोत नहीं मिला। घोल और फुहार का चक्र लाइसेंस वाली तकनीक और उसके साथ मिलने वाले प्रशिक्षण से तय होता है, इसलिए विदेशी लेखों की सेटिंग नकल करने के बजाय ICAR-CPRI या AgrInnovate India से पूछें।
- फुहार रुकते ही जड़ें कुछ ही मिनटों में सूख जाती हैं। बिजली कटना, नोजल बंद होना या पंप खराब होना पूरा बैच बिगाड़ सकता है, इसलिए जनरेटर या इन्वर्टर का बैकअप, छना पानी और अतिरिक्त नोजल जरूरी हैं।
दूसरी फसलें
- विदेश में और शोध में aeroponics पत्तेदार साग और जड़ी-बूटियों के लिए भी इस्तेमाल होती है, लेकिन इनके लिए भारत का कोई उपज या लागत आंकड़ा नहीं मिला। अगर आपको बिना मिट्टी की सब्जी में दिलचस्पी है तो पहले hydroponics देखें जहां उपकरण सरल हैं, और polyhouse के विकल्प देखें।
लागत और कमाई
- Aeroponic बीज इकाई की पूंजी लागत, लाइसेंस फीस या प्रति मिनीट्यूबर उत्पादन लागत का कोई पुष्ट भारतीय आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए कोई आंकड़ा नहीं दिया गया। बीज इकाई को tissue culture प्रयोगशाला या पौधों की आपूर्ति, नियंत्रित ढांचा, कक्ष, फुहार और पंप प्रणाली, बिजली का बैकअप और कुशल स्टाफ चाहिए।
- निवेश से पहले इन सवालों के दाम पूछें: लाइसेंस फीस, प्रति पौधा लागत, बिजली खर्च, मजदूरी, और आपका खरीदार प्रति मिनीट्यूबर क्या भाव देगा। आमदनी = पौधे x प्रति पौधा मिनीट्यूबर x प्रति मिनीट्यूबर भाव, घटाकर सारा चालू खर्च। सुरक्षित मामले के लिए ट्रायल की सबसे कम प्रति पौधा गिनती (11 से 27) लें।
- subsidy finder से केंद्र और राज्य की मदद देखें, और उपकरण की सामूहिक खरीद के लिए FPO देखें।
बाजार और जोखिम
- खरीदार आलू बीज उगाने वाले किसान और बीज एजेंसियां हैं, और उन्हें प्रमाणित, रोगमुक्त मिनीट्यूबर चाहिए। गुणवत्ता के नियम और बीज प्रमाणन लागू होते हैं।
- जोखिम: तकनीक के लाइसेंस और प्रशिक्षण पर निर्भरता, बिजली और उपकरण की खराबी, मौजूदा लाइसेंस वाली कंपनियों से भरा छोटा बाजार, और कुशल स्टाफ की जरूरत।
स्रोत
- ICAR, Hi-tech seed production system revolutionizing the seed potato industry in India
- NITI Frontier Tech Hub, Hi-tech tissue culture and aeroponics in India's potato economy
- Standardization of planting geometry for aeroponic mini-tuber production in potato, ICAR-CPRI Shimla (AGRIS record)
- A novel sustainable aeroponic system for healthy seed potato production in India, Indian Journal of Agricultural Sciences
- Global Agriculture, licence to Government of Madhya Pradesh through AgrInnovate India
