मिर्च के लिए खाद और उर्वरक
मिर्च लंबी अवधि की सब्जी है जो कई तुड़ाई में काटी जाती है, इसलिए इसे एक भारी खुराक के बजाय स्थिर, निरंतर पोषक आपूर्ति चाहिए। फसल पहले मजबूत वानस्पतिक ढांचा बनाती है, फिर हफ्तों तक बार-बार फू

परिचय
मिर्च लंबी अवधि की सब्जी है जो कई तुड़ाई में काटी जाती है, इसलिए इसे एक भारी खुराक के बजाय स्थिर, निरंतर पोषक आपूर्ति चाहिए। फसल पहले मजबूत वानस्पतिक ढांचा बनाती है, फिर हफ्तों तक बार-बार फूल और फल देती है, यानी नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश सभी पूरी तुड़ाई अवधि में उपलब्ध रहने चाहिए। अधिक नाइट्रोजन, खासकर शुरू में, घने पौधे देती है जो कम फूलते और फल गिराते हैं, जबकि संतुलित पोटाश फूलना, फल बनना और सूखी मिर्च का रंग व तीखापन सहारा देता है। फल बनने और फूल झड़ने व फल समस्याओं से बचने के लिए कैल्शियम और बोरॉन जरूरी हैं। खुराक बांटना और जहां संभव हो फर्टिगेशन एक बार की खाद से कहीं बेहतर परिणाम देते हैं। नीचे दी सीमाओं को मार्गदर्शक मानें, मृदा स्वास्थ्य कार्ड या मिट्टी जांच के अनुसार समायोजित करें, और स्थानीय दरें केवीके से पक्की करें।
मिर्च के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
मिर्च के लिए सामान्य आईसीएआर शैली की सिफारिश लगभग 100 से 120 किग्रा नाइट्रोजन, 40 से 60 किग्रा फॉस्फोरस और 40 से 60 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर है, जो लगभग 40 से 48 किग्रा नाइट्रोजन, 16 से 24 किग्रा फॉस्फोरस और 16 से 24 किग्रा पोटाश प्रति एकड़ है, साथ में लगभग 20 टन गोबर खाद प्रति हेक्टेयर। ड्रिप फर्टिगेशन में उगाए हाइब्रिड को कहीं अधिक खिलाया जाता है, कभी-कभी लगभग 150 से 180 किग्रा नाइट्रोजन, 60 से 120 किग्रा फॉस्फोरस और 100 से 180 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर, पूरे मौसम कई छोटी खुराकों में। यह बड़ा अंतर दिखाता है कि किस्म, सिंचाई और प्रबंधन जरूरत कैसे बदलते हैं। इन्हें शुरुआती सीमा मानें और असली मात्रा मृदा स्वास्थ्य कार्ड या मिट्टी जांच से तय करें, मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक घटाएं, और केवीके से पक्का करें।
डालने का समय और तरीका
रोपाई के समय या ठीक बाद, लगभग 10 से 15 दिन में, पूरा फॉस्फोरस, पूरा पोटाश और लगभग एक तिहाई से आधी नाइट्रोजन आधार खुराक के रूप में दें। बची नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग के रूप में दो या अधिक किस्तों में वानस्पतिक और फूल अवस्था में फैलाकर दें, ताकि लंबी अवधि की फसल कभी कमी में न आए। ड्रिप में फर्टिगेशन आदर्श है क्योंकि मिर्च छोटी बार-बार खुराकों पर बहुत अच्छी प्रतिक्रिया देती है, और फूल व फलन बढ़ने पर पोटाश की ओर हल्का झुकाव फल बनना और सूखी मिर्च गुणवत्ता सहारा देता है। कूंड सिंचाई हो तो टॉप ड्रेसिंग कतारों के पास पट्टी में डालें और पानी दें। तुड़ाई अवधि में भी कुछ पोषण चलाते रहें, क्योंकि फसल कई हफ्तों तक फूलती व फल देती रहती है।
जैविक और जैव उर्वरक
खेत तैयारी के समय लगभग 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर, यानी लगभग 8 से 10 टन प्रति एकड़ अच्छी सड़ी गोबर खाद मिट्टी में मिलाएं, या लगभग 5 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें। जैविक पदार्थ वह पोषक व नमी आपूर्ति स्थिर रखता है जो मिर्च जैसी लंबी अवधि की फसल को कई हफ्तों के फूल व तुड़ाई में चाहिए, और जड़ स्वास्थ्य सहारा देता है जो फूल झड़ना घटाता है। नाइट्रोजन के लिए एजोटोबैक्टर या एजोस्पाइरिलम और फॉस्फोरस के लिए फॉस्फेट घोलक जीवाणु, रोपाई पर जड़ डुबोकर या खाद में मिलाकर डालें, और मिर्च में आम उकठा व जड़ रोग दबाने के लिए ट्राइकोडर्मा मिलाएं। ये साधन रासायनिक खुराक घटाने और स्थायी उर्वरता बनाने देते हैं, पर भारी, लंबे मौसम की फसल के लिए उसकी पूरी जगह नहीं लेते।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
कैल्शियम और बोरॉन मिलकर अच्छा फल बनना चलाते और मिर्च में आम फूल झड़ना व फल विकृति घटाते हैं। बोरॉन की कमी फूल झड़ने, कम फल बनने और भुरभुरे, विकृत फल के रूप में दिखती है, इसे लगभग 0.1 से 0.2 प्रतिशत बोरेक्स के सावधान पर्ण छिड़काव से ठीक करें, क्योंकि अधिक होने पर बोरॉन विषैला हो जाता है। कैल्शियम मिट्टी से और कमी की स्थिति में फलन के दौरान पर्ण कैल्शियम छिड़काव से सहारा दिया जा सकता है। जिंक की कमी छोटी, संकरी ऊपरी पत्तियों, शिराओं के बीच हल्के क्षेत्रों और रुकी वृद्धि से दिखती है, इसे जिंक सल्फेट मिट्टी में या 0.5 प्रतिशत छिड़काव से ठीक करें। लोहा क्षारीय मिट्टी पर नई पत्तियों के पीलेपन से दिखता है। कोई भी सूक्ष्म पोषक केवल मिट्टी जांच या स्पष्ट लक्षण पर दें, खुराक हल्की रखें।
सुझाव और सावधानियां
नाइट्रोजन अधिक न दें, खासकर शुरू में, क्योंकि घने पौधे कम फूलते और फल गिराते हैं, और घनी छतरी रोग रोकती है। नाइट्रोजन को पूरे मौसम बांटें ताकि कई तुड़ाई वाली लंबी फसल कभी कमी में न आए। फूल व फलन के दौरान पोटाश पर्याप्त रखें ताकि फल बनना, रंग और तीखापन बेहतर हों। ड्रिप हो तो सबसे अच्छी दक्षता और स्थिर फल बनने के लिए छोटी बार-बार फर्टिगेशन करें। फूल झड़ने पर ध्यान दें, जो अक्सर बोरॉन या कैल्शियम जरूरत या नमी तनाव का संकेत है, और भारी खुराक के बजाय हल्के से ठीक करें। सिंचाई एक समान रखें, क्योंकि नमी में उतार-चढ़ाव फूल व फल झड़ना बढ़ाते हैं। सूक्ष्म पोषक केवल जांच या लक्षण पर दें, और हर मौसम जैविक पदार्थ बढ़ाएं।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
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