चंपावत ज़िले में खेती: पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र
उत्तराखंड मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र कृषि-जलवायु क्षेत्र में आता है (समशीतोष्ण से अल्पाइन, पूरे क्षेत्र में सालाना 165-2000mm बारिश)। इस क्षेत्र में सीढ़ीदार पहाड़ी खेती, बागवानी और समशीतोष्ण फल आम है, मिट्टी ज़्यादातर भूरी पहाड़ी, पॉडज़ोलिक और उप-पर्वतीय मिट्टी है और आमतौर पर सेब, गुठलीदार फल, मक्का, गेहूँ, जौ, केसर, आलू, अदरक उगाई जाती हैं।
ये पूरे कृषि-जलवायु क्षेत्र के तथ्य हैं (ICAR / योजना आयोग वर्गीकरण), चंपावत की फसल गणना नहीं। मौसम वाले हिस्से में चंपावत की अपनी मासिक बारिश और तापमान दिए गए हैं।
सिंचाई और मिट्टी
ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। एक ही क्षेत्र में भी खेत-खेत की मिट्टी अलग होती है, इसलिए मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही आपके खेत की सही ज़रूरत बताता है।
चंपावत में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में चंपावत में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें गेहूँ, धान / चावल, रागी थीं। अकेले गेहूँ का रकबा 3,665 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 30%) था, और इसकी उपज 3,152 किग्रा/हेक्टेयर उत्तराखंड के औसत से 5% कम रही। 2019-20 के बाद से सबसे बड़ा बदलाव: रागी का रकबा -46%, धान / चावल का रकबा -36%।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | उत्तराखंड औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| गेहूँ | 3,665 | 11,552 | 3,152 | 3,310 | -27% |
| धान / चावल | 3,174 | 5,627 | 1,773 | 2,710 | -36% |
| रागी | 2,349 | 5,765 | 2,454 | 1,583 | -46% |
| मक्का | 624 | 2,026 | 3,246 | 2,743 | +8% |
| जौ | 557 | 925 | 1,661 | 1,472 | -35% |
| सरसों / राई | 522 | 448 | 859 | 1,055 | -35% |
| सोयाबीन | 461 | 545 | 1,183 | 1,454 | -3% |
| मसूर | 440 | 343 | 780 | 807 | -34% |
| उड़द | 367 | 415 | 1,131 | 918 | +1% |
| तिल | 110 | 24 | 215 | 258 | +168% |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। उत्तराखंड औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
चंपावत का मौसम और बुवाई का समय
चंपावत में सालाना औसतन लगभग 1354 मिमी बारिश होती है, जिसका 82% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश जुलाई में (426 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना मई है (दिन का औसत 39°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत 8°C) होती हैं।
- आमतौर पर जून में पहली बार महीने की बारिश 100 मिमी पार करती है, यही यहां खरीफ बुवाई का सामान्य संकेत है।
- साल की 82% बारिश जून-सितंबर में होती है, इसलिए रबी और गर्मी की फसलों के लिए पक्की सिंचाई ज़रूरी है।
- सर्दियों में रातें औसतन लगभग 8°C रहती हैं, जो गेहूँ, सरसों, चना और आलू जैसी रबी फसलों के लिए पर्याप्त ठंडी हैं।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 31 | 21° | 8° |
| फ़रवरी | 49 | 24° | 11° |
| मार्च | 24 | 30° | 15° |
| अप्रैल | 38 | 36° | 21° |
| मई | 58 | 39° | 25° |
| जून | 175 | 38° | 27° |
| जुलाई | 426 | 33° | 25° |
| अगस्त | 304 | 31° | 24° |
| सितंबर | 209 | 30° | 23° |
| अक्टूबर | 22 | 29° | 18° |
| नवंबर | 5 | 25° | 13° |
| दिसंबर | 13 | 22° | 9° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), चंपावत ज़िले के केंद्र (29.235, 80.1023) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
चंपावत के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
चंपावत के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
- नैनीताल - 67 km
- उधम सिंह नगर - 68 km
- पीलीभीत, Uttar Pradesh - 82 km
- अल्मोड़ा - 83 km
- बागेश्वर - 88 km
- रामपुर, Uttar Pradesh - 102 km
चंपावत ज़िले में किसान योजनाएं
चंपावत, उत्तराखंड के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: