बिजनौर ज़िले में खेती: ऊपरी गंगा का मैदान
उत्तर प्रदेश मुख्य रूप से ऊपरी गंगा का मैदान कृषि-जलवायु क्षेत्र में आता है (अर्ध-शुष्क से उप-आर्द्र, पूरे क्षेत्र में सालाना 720-980mm बारिश)। इस क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गन्ना और गेहूँ का गढ़ आम है, मिट्टी ज़्यादातर बलुई दोमट से चिकनी जलोढ़ है और आमतौर पर गेहूँ, गन्ना, धान / चावल, बाजरा, सरसों / राई, आलू उगाई जाती हैं।
ये पूरे कृषि-जलवायु क्षेत्र के तथ्य हैं (ICAR / योजना आयोग वर्गीकरण), बिजनौर की फसल गणना नहीं। बिजनौर की अपनी मंडियों में असल में क्या बिकता है, वह नीचे है। मौसम वाले हिस्से में बिजनौर की अपनी मासिक बारिश और तापमान दिए गए हैं।
सिंचाई और मिट्टी
ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। एक ही क्षेत्र में भी खेत-खेत की मिट्टी अलग होती है, इसलिए मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही आपके खेत की सही ज़रूरत बताता है।
बिजनौर में मंडी भाव
बिजनौर की मंडियों (Kiratpur APMC, Nagina APMC, Najibabad APMC, Haldaur APMC) में 1 जून 2026 ये फसलें बिकीं, औसत भाव (प्रति क्विंटल) के साथ:
| फसल | न्यूनतम | अधिकतम | औसत भाव |
|---|---|---|---|
| Gur(Jaggery) | ₹3,500 | ₹4,500 | ₹4,140 |
| Wood | ₹400 | ₹570 | ₹505 |
| Peas(Dry) | ₹4,725 | ₹4,725 | ₹4,725 |
स्रोत: बिजनौर, उत्तर प्रदेश की Agmarknet दैनिक आवक (1 जून 2026)।
बिजनौर में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में बिजनौर में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें गन्ना, गेहूँ, धान / चावल थीं। अकेले गन्ना का रकबा 2,38,022 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 57%) था, और इसकी उपज 86,457 किग्रा/हेक्टेयर उत्तर प्रदेश के औसत से 7% ज़्यादा रही। 2019-20 के बाद से सबसे बड़ा बदलाव: सरसों / राई का रकबा +118%, धान / चावल का रकबा -50%।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | उत्तर प्रदेश औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| गन्ना | 2,38,022 | 2,05,78,539 | 86,457 | 80,937 | +18% |
| गेहूँ | 1,28,224 | 4,61,146 | 3,596 | 3,709 | -12% |
| धान / चावल | 29,084 | 75,802 | 2,606 | 2,816 | -50% |
| सरसों / राई | 17,487 | 28,732 | 1,643 | 1,484 | +118% |
| ज्वार | 3,733 | 6,379 | 1,709 | 1,622 | - |
| मसूर | 1,250 | 1,294 | 1,035 | 1,038 | +79% |
| उड़द | 1,151 | 1,859 | 1,615 | 704 | -33% |
| बाजरा | 776 | 1,185 | 1,528 | 2,034 | - |
| मक्का | 489 | 1,723 | 3,523 | 2,879 | +456% |
| मूंग | 195 | 77 | 393 | 851 | +3150% |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। उत्तर प्रदेश औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
बिजनौर का मौसम और बुवाई का समय
बिजनौर में सालाना औसतन लगभग 1130 मिमी बारिश होती है, जिसका 84% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश जुलाई में (342 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना मई है (दिन का औसत 39°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत 7°C) होती हैं।
- आमतौर पर जून में पहली बार महीने की बारिश 100 मिमी पार करती है, यही यहां खरीफ बुवाई का सामान्य संकेत है।
- साल की 84% बारिश जून-सितंबर में होती है, इसलिए रबी और गर्मी की फसलों के लिए पक्की सिंचाई ज़रूरी है।
- सर्दियों में रातें औसतन लगभग 7°C रहती हैं, जो गेहूँ, सरसों, चना और आलू जैसी रबी फसलों के लिए पर्याप्त ठंडी हैं।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 28 | 20° | 7° |
| फ़रवरी | 35 | 24° | 10° |
| मार्च | 28 | 29° | 15° |
| अप्रैल | 23 | 36° | 20° |
| मई | 38 | 39° | 25° |
| जून | 134 | 39° | 27° |
| जुलाई | 342 | 33° | 25° |
| अगस्त | 306 | 31° | 24° |
| सितंबर | 164 | 30° | 22° |
| अक्टूबर | 17 | 29° | 18° |
| नवंबर | 4 | 25° | 13° |
| दिसंबर | 11 | 21° | 9° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), बिजनौर ज़िले के केंद्र (29.4074, 78.4821) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
बिजनौर के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
बिजनौर के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
- पौड़ी गढ़वाल, Uttarakhand - 54 km
- मुरादाबाद - 67 km
- अमरोहा - 69 km
- मुजफ्फरनगर - 72 km
- हरिद्वार, Uttarakhand - 72 km
- मेरठ - 83 km
बिजनौर ज़िले में किसान योजनाएं
बिजनौर, उत्तर प्रदेश के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: