मेरठ ज़िले में खेती: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना पट्टी
उत्तर प्रदेश का मेरठ ज़िला पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना पट्टी के लिए जाना जाता है। यहां की ज़मीन गंगा, हिंडन से सिंचित होती है और मुख्यतः जलोढ़ (चिकनी, गाद और महीन रेत) मिट्टी पर है, जो गेहूँ, गन्ना, सब्जियाँ के लिए अनुकूल है। इसीलिए नीचे दी गई फसलें और योजनाएं मेरठ की असली खेती के अनुसार चुनी गई हैं, न कि राज्य के औसत के आधार पर।
मेरठ में सबसे अच्छी फसलें
ज़िले की मुख्य फसलें गेहूँ, गन्ना, सब्जियाँ हैं। गेहूँ स्थानीय अर्थव्यवस्था में अग्रणी है, इसलिए मेरठ के किसानों को इसका भाव ध्यान से देखना चाहिए। यहां की जलोढ़ (चिकनी, गाद और महीन रेत) मिट्टी उपजाऊ है, गेहूँ, धान, गन्ना और सब्ज़ियों के लिए आदर्श है।
मेरठ में मिट्टी, पानी और सिंचाई
जलोढ़ (चिकनी, गाद और महीन रेत) मिट्टी और गंगा, हिंडन के पानी के साथ, मेरठ के किसानों की प्राथमिकता फसल के अनुसार सिंचाई है। ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड बताता है कि आपकी मिट्टी को कौन से पोषक तत्व चाहिए।
मेरठ में मंडी भाव
मेरठ की मंडियों (Mawana APMC, Meerut APMC) में 1 जून 2026 ये फसलें बिकीं, औसत भाव (प्रति क्विंटल) के साथ:
| फसल | न्यूनतम | अधिकतम | औसत भाव |
|---|---|---|---|
| Wheat | ₹2,590 | ₹2,590 | ₹2,590 |
| Mustard | ₹6,000 | ₹6,000 | ₹6,000 |
स्रोत: मेरठ, उत्तर प्रदेश की Agmarknet दैनिक आवक (1 जून 2026)।
मेरठ में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में मेरठ में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें गन्ना, गेहूँ, धान / चावल थीं। अकेले गन्ना का रकबा 1,48,440 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 58%) था, और इसकी उपज 90,056 किग्रा/हेक्टेयर उत्तर प्रदेश के औसत से 11% ज़्यादा रही। 2019-20 के बाद से सबसे बड़ा बदलाव: सरसों / राई का रकबा +52%, उड़द का रकबा -28%।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | उत्तर प्रदेश औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| गन्ना | 1,48,440 | 1,33,67,845 | 90,056 | 80,937 | +7% |
| गेहूँ | 72,452 | 2,93,391 | 4,049 | 3,709 | -3% |
| धान / चावल | 13,006 | 33,300 | 2,560 | 2,816 | -24% |
| ज्वार | 8,103 | 10,423 | 1,286 | 1,622 | - |
| सरसों / राई | 7,576 | 11,937 | 1,576 | 1,484 | +52% |
| मक्का | 2,520 | 8,726 | 3,463 | 2,879 | +572% |
| उड़द | 1,045 | 1,133 | 1,084 | 704 | -28% |
| मसूर | 651 | 674 | 1,035 | 1,038 | +126% |
| बाजरा | 233 | 429 | 1,843 | 2,034 | - |
| अरहर / तुअर | 184 | 212 | 1,154 | 1,238 | -81% |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। उत्तर प्रदेश औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
मेरठ का मौसम और बुवाई का समय
मेरठ में सालाना औसतन लगभग 833 मिमी बारिश होती है, जिसका 83% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश जुलाई में (243 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना मई है (दिन का औसत 43°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत 6°C) होती हैं।
- आमतौर पर जुलाई में पहली बार महीने की बारिश 100 मिमी पार करती है, यही यहां खरीफ बुवाई का सामान्य संकेत है।
- साल की 83% बारिश जून-सितंबर में होती है, इसलिए रबी और गर्मी की फसलों के लिए पक्की सिंचाई ज़रूरी है।
- सर्दियों में रातें औसतन लगभग 6°C रहती हैं, जो गेहूँ, सरसों, चना और आलू जैसी रबी फसलों के लिए पर्याप्त ठंडी हैं।
- मई में दिन का औसत 43°C रहता है, इसलिए ज़ायद फसलों और नए बागों को बार-बार सिंचाई और मल्चिंग चाहिए।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 20 | 21° | 6° |
| फ़रवरी | 26 | 25° | 9° |
| मार्च | 21 | 32° | 15° |
| अप्रैल | 17 | 39° | 22° |
| मई | 35 | 43° | 27° |
| जून | 92 | 42° | 29° |
| जुलाई | 243 | 36° | 28° |
| अगस्त | 222 | 33° | 26° |
| सितंबर | 131 | 33° | 23° |
| अक्टूबर | 13 | 32° | 18° |
| नवंबर | 4 | 27° | 12° |
| दिसंबर | 9 | 22° | 7° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), मेरठ ज़िले के केंद्र (29.0019, 77.768) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
मेरठ के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
मेरठ के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
मेरठ ज़िले में किसान योजनाएं
मेरठ, उत्तर प्रदेश के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: