ज़ीरो बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) गाय पर आधारित, रसायन-मुक्त तरीका है जिसे सुभाष पालेकर ने लोकप्रिय बनाया। यह खरीदी हुई खाद और कीटनाशक की जगह घर पर बनी चीज़ें इस्तेमाल करता है: मिट्टी के लिए जीवामृत और घनजीवामृत, बीज के लिए बीजामृत, खेत के लिए मल्च और नमी प्रबंधन, और कीटों के लिए नीमास्त्र जैसे छिड़काव। इससे खरीदे गए इनपुट का खर्च घटता है, लेकिन यह सच में "ज़ीरो बजट" नहीं है, और अगर मिट्टी में नाइट्रोजन की भरपाई न हो तो उपज गिर सकती है।
सरकारी कार्यक्रमों में नाम बदल गया है: राष्ट्रीय योजना अब राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) है, जिसने पहले की भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति की जगह ली है, और आंध्र प्रदेश अपना कार्यक्रम APCNF के नाम से चलाता है। इस पेज में ICAR द्वारा प्रकाशित असली विधियों के साथ तरीका समझाया गया है, फिर ईमानदारी से फायदे-नुकसान। उपज और लागत के सबूत के लिए प्राकृतिक खेती बनाम जैविक खेती देखें।
तरीके के पांच हिस्से
- बीजामृत: बीज और पौध का उपचार।
- जीवामृत / घनजीवामृत: मिट्टी में डाला जाने वाला किण्वित तरल (या ठोस) कल्चर, जो सूक्ष्मजीवों और केंचुओं को खुराक देता है।
- आच्छादन (मल्चिंग): नमी रोकने, मिट्टी को ठंडा रखने और खरपतवार दबाने के लिए मिट्टी को फसल अवशेष या जीवित फसल से ढकना।
- वापसा: मिट्टी के छिद्रों में करीब आधी हवा और आधी जल-वाष्प रखना ताकि जड़ों को दोनों मिलें। ICAR इसे ज़रूरी सिंचाई घटाने का तरीका बताता है; किसान आमतौर पर इसे जड़ क्षेत्र के पास हल्की सिंचाई के रूप में अपनाते हैं।
- पौध संरक्षण: नीमास्त्र, अग्निअस्त्र, ब्रह्मास्त्र और ऐसे ही गोमूत्र-और-वनस्पति वाले छिड़काव।
नीचे की विधियां ICAR Research Complex for NEH Region (Indian Farming, अगस्त 2025) से हैं। इन सबका आधार स्थानीय गोबर और गोमूत्र है, बेहतर हो कि देसी गाय का। हमेशा पहले छोटा परीक्षण बैच बनाएं।
विधियां और मात्राएं
| इनपुट | सामग्री (एक बैच) | कैसे बनता है और कैसे इस्तेमाल होता है |
|---|---|---|
| बीजामृत | 5 kg ताज़ा गोबर, 5 L गोमूत्र, 50 g चूना, मुट्ठी भर खेत की मिट्टी, 20 L पानी (करीब 100 kg बीज का उपचार) | गोबर को कपड़े की थैली में पानी में करीब 12 घंटे भिगोएं, चूने का पानी और गोमूत्र मिलाएं, हिलाएं। बीज को करीब एक घंटा भिगोएं, छांव में सुखाएं, फिर बोएं। रोपाई वाली फसलों में जड़ों को 1-2 घंटे डुबोएं |
| जीवामृत | 200 L पानी, 10 kg ताज़ा गोबर, 5-10 L गोमूत्र, 2 kg गुड़, 2 kg दाल का आटा, मुट्ठी भर मेड़ की मिट्टी | ड्रम में मिलाएं, छांव में रखकर 48 घंटे किण्वित होने दें। 15 दिन तक चलता है। 200 L प्रति एकड़ (करीब 500 L प्रति हेक्टेयर) सिंचाई के पानी के साथ या छिड़काव के रूप में, हर पखवाड़े डालें। फलदार पेड़ों में हर पेड़ के चारों ओर डालें |
| घनजीवामृत | 100 kg गोबर, 2 kg गुड़, 2 kg दाल का आटा, मुट्ठी भर मेड़ की मिट्टी, थोड़ा गोमूत्र | मिलाएं, छांव में सुखाएं और ठोस मिट्टी-सुधारक के रूप में रखें |
| नीमास्त्र | 200 L पानी, 10 L गोमूत्र, 2 kg गोबर, 10 kg कुटी नीम की पत्ती (या नीम बीज का गूदा) | ढककर छांव में रखें, 48 घंटे रोज़ दो बार घड़ी की दिशा में हिलाएं, मलमल से छान लें। फुदका (जैसिड), माहू, सफेद मक्खी, मीलीबग और छोटी इल्लियों के विरुद्ध करीब 3% (100 L पानी में 3 L) छिड़कें |
| अग्निअस्त्र | 200 L गोमूत्र, 2 kg नीम पत्ती की लुगदी, 500 g तंबाकू पाउडर, 500 g हरी मिर्च की लुगदी, 250 g लहसुन की लुगदी, 200 g हल्दी पाउडर | झाग आने तक उबालें, ठंडा करें और 48 घंटे किण्वित करें, छान लें। पत्ती लपेटक, तना छेदक, फल छेदक और फली छेदक के लिए। करीब 3 महीने चलता है। मोटे तौर पर 100 L पानी में 3 L घोलें |
| ब्रह्मास्त्र | 20 L गोमूत्र, नीम, करंज, सीताफल, अरंडी और धतूरे की पत्ती की लुगदी, हर एक 2 kg | झाग आने तक हल्का गर्म करें, 48 घंटे ठंडा करें, छान लें। करीब 6 महीने चलता है। रस चूसने वाले कीटों, फली व फल छेदकों और इल्लियों के विरुद्ध करीब 3% छिड़कें |
ICAR के पेपर में कीट छिड़कावों के घोल के आंकड़े आपस में पूरी तरह मेल नहीं खाते, इसलिए 3% को शुरुआती बिंदु मानें और KVK से पुष्टि कर लें। पेपर में छिड़काव की मात्रा 200 L प्रति एकड़ है।
एक एकड़ में कैसे शुरू करें
- अपनी मिट्टी की जांच कराएं (Soil Health Card देखें) ताकि आपको अपनी शुरुआती नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और जैविक कार्बन का पता हो।
- ऐसी फसल चुनें जिसमें एक कमज़ोर मौसम झेला जा सके, अपनी मुख्य नकदी फसल नहीं। तुलना के लिए पास की एक पट्टी अपने सामान्य तरीके से रखें।
- एक गाय का इंतज़ाम करें। 200 L के जीवामृत के बैच के लिए प्रति एकड़ हर पखवाड़े 10 kg गोबर और 10 L तक गोमूत्र चाहिए। अगर आपके पास पशु नहीं हैं, तो पता करें कि आपके क्लस्टर में जैव-इनपुट संसाधन केंद्र है या नहीं।
- बीज को बीजामृत से उपचारित करें, फिर मल्च या अवशेष में बोएं, मिट्टी को खाली छोड़ने की बजाय।
- हर 15 दिन में जीवामृत दें और फसल बढ़ने के साथ मल्च जोड़ें।
- हर हफ्ते कीटों की निगरानी करें और नीमास्त्र जल्दी छिड़कें; भारी हमले का इंतज़ार न करें।
- सब कुछ दर्ज करें: मज़दूरी के दिन, बनाए गए इनपुट, उपज, बिक्री भाव। यही रिकॉर्ड बताता है कि यह फायदेमंद है या नहीं।
यह कहां चलता है और कहां मुश्किल आती है
- लागत: आंध्र प्रदेश के धान के CESS मूल्यांकन में, ZBNF किसानों की नकद लागत ₹14,572 प्रति एकड़ थी, जबकि दूसरों की ₹16,890, और उपज में कोई ख़ास फर्क नहीं था (करीब 18 क्विंटल प्रति एकड़)।
- ज़्यादा इनपुट वाली ज़मीन पर उपज का जोखिम: ICAR-IIFSR के बासमती धान-गेहूं ट्रायल में प्राकृतिक खेती से समन्वित फसल प्रबंधन की करीब आधी उपज मिली। 2020 के एक Nature Sustainability विश्लेषण ने चेताया कि अतिरिक्त खाद के बिना, सख्त ZBNF ज़्यादा उपज वाली फसलों के लिए पर्याप्त नाइट्रोजन नहीं दे पाएगी।
- फसल के हिसाब से मिला-जुला: ICAR के मेघालय के काम में सरसों और मटर ने अच्छा जवाब दिया, जबकि मक्का, उड़द और टमाटर नियंत्रण से खराब रहे। हल्दी ने प्राकृतिक खेती में 11.6 t/ha दी, जबकि जैविक पैकेज में 22.0 t/ha।
- मेहनत और पशु: इनपुट बनाने और डालने में समय लगता है, और गोबर मुफ्त हो तब भी पशुओं का रखरखाव एक खर्च है।
इसलिए "ज़ीरो बजट" को "कम नकद लागत" पढ़ना बेहतर है। पहले 1-3 मौसमों में उपज में संभावित गिरावट के लिए तैयार रहें।
सरकारी सहायता
NMNF के तहत प्राकृतिक खेती अपनाने वाला किसान दो साल तक ₹4,000 प्रति एकड़ प्रति वर्ष का पात्र है, अधिकतम 1 एकड़ तक। मिशन KVK और मॉडल फार्मों में प्रशिक्षण, प्रशिक्षित कृषि सखियों, और 10,000 प्रस्तावित जैव-इनपुट संसाधन केंद्रों के लिए भी पैसा देता है। नामांकन राज्य कृषि विभाग के प्राकृतिक खेती क्लस्टरों के ज़रिए होता है। मिशन 2025-26 तक मंज़ूर था, इसलिए मौजूदा मौसम के बारे में अपने ज़िला कार्यालय से पूछें। आप किन और योजनाओं के पात्र हैं, यह सब्सिडी फाइंडर में खोजें, और प्रमाणित रास्ता चाहिए तो जैविक खेती कैसे शुरू करें देखें।
स्रोत
- ICAR Research Complex for NEH Region, Production techniques in natural farming, Indian Farming, August 2025
- PIB backgrounder: National Mission on Natural Farming (13 Aug 2025)
- CESS: Impact Assessment of Zero Budget Natural Farming in Andhra Pradesh, Kharif 2018-19
- Ghasal et al. (2024), Journal of Plant Nutrition, basmati rice-wheat system
- Smith et al. (2020), Nature Sustainability, yield challenges of ZBNF