अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
गाँव के सामान्य तालाब वाले ज़्यादातर किसानों के लिए सबसे सुरक्षित चुनाव कतला, रोहू और मृगल का मिश्रण है। ग्रास कार्प और कॉमन कार्प तभी जोड़ें जब तालाब और बाज़ार दोनों इसके अनुकूल हों। कैटफ़िश, मुरल, पाबदा और मीठे पानी का झींगा प्रति किलो ज़्यादा दाम देते हैं, पर इनके प्रकाशित आँकड़े कम हैं और बीज मिलना कठिन है।
तालिका में ICAR और राज्य स्रोतों के आँकड़े हैं। "पुष्टि नहीं" का मतलब है कि दिए गए स्रोतों में वह आँकड़ा नहीं है। तालाब की तैयारी और खुराक के लिए मछली पालन गाइड देखें; पूरे सेक्शन के लिए मछली पालन देखें; खर्च के लिए प्रोजेक्ट लागत देखें।
एक नज़र में प्रजातियाँ
| प्रजाति और व्यवस्था | स्टॉकिंग घनत्व | पालन अवधि | उपज | बिक्री आकार | स्रोत |
|---|---|---|---|---|---|
| कतला, रोहू, मृगल, सामान्य तालाब | 5,000 प्रति हेक्टेयर, 50 से 100 ग्राम की अंगुलिकाएँ | 10 से 12 महीने | 4 से 5 टन प्रति हेक्टेयर | 800 ग्राम से 1.25 किलो | NABARD मॉडल 2013, TNAU के माध्यम से |
| कतला और रोहू, सघन पालन, आंध्र प्रदेश | 8,000 से 10,000 प्रति हेक्टेयर, आहार के साथ | 9 से 12 महीने | 10 से 13 टन प्रति हेक्टेयर | कतला 1.5 से 2 किलो, रोहू 1 से 1.5 किलो | Global Seafood Alliance 2007 (द्वितीयक) |
| कतला, रोहू, मृगल, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, त्रिपुरा | 10,000 प्रति हेक्टेयर, अनुपात 2:1:1:2:1 | जून से अप्रैल | सबसे अच्छा ट्रायल 5,650 किलो प्रति हेक्टेयर | ग्रास कार्प सबसे तेज़ बढ़ी, कॉमन कार्प सबसे धीमी | ICAR NEH क्षेत्र, त्रिपुरा, 2007 |
| कार्प के साथ पाबदा | 7,500 प्रति हेक्टेयर (4:3:3) में मृगल की जगह | 8 महीने | पाबदा 144 किलो और कार्प 2,440 किलो प्रति हेक्टेयर | नहीं बताया | ICAR NEH क्षेत्र, IJF 2020 |
| मांगुर, अकेले | 20,000 से 50,000 प्रति हेक्टेयर | 7 से 8 महीने | 3 से 4 टन प्रति हेक्टेयर | 100 से 120 ग्राम | ICAR समीक्षा, IJF 2018 |
| सिंघी, ट्रायल तालाब | 10,000 प्रति हेक्टेयर | 10 महीने | पुष्टि नहीं | पुष्टि नहीं | ICAR NEH क्षेत्र, IJF |
| पंगेसियस | पुष्टि नहीं | पुष्टि नहीं | 15 से 50 टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष रिपोर्ट | पुष्टि नहीं | ICAR समीक्षा, IJF 2018 |
| मुरल (चन्ना) | 12,000 से 15,000 प्रति हेक्टेयर, 8 से 10 सेमी की अंगुलिकाएँ | 8 महीने | जीवित रहना 90 से 95%; उपज नहीं बताई | 800 से 900 ग्राम | CARE ट्रायल, TNAU के माध्यम से |
| मीठे पानी का झींगा | अकेले 20,000 से 50,000 PL प्रति हेक्टेयर; 3,000 से 4,000 कार्प के साथ 10,000 से 15,000 | अकेले 6 से 8 महीने, कार्प के साथ 8 से 12 | 8 महीने में 600 से 1,500 किलो प्रति हेक्टेयर | 50 से 200 ग्राम | ICAR-CIFA, TNAU के माध्यम से; IJF 2018 |
| GIFT तिलापिया, बायोफ्लॉक टैंक | 15,000 लीटर के टैंक में 1,000 (पुस्तिका में 100 प्रति m3 भी लिखा है) | 6 महीने | 7 टैंक की यूनिट से प्रति फसल 2.8 से 4.2 टन | 500 ग्राम | NFDB बायोफ्लॉक पुस्तिका |
कंपोज़िट कार्प पालन और अनुपात
- कतला सतह पर, रोहू बीच में और मृगल तले में खाती है, इसलिए वे एक ही तालाब में साथ रह लेती हैं। ग्रास कार्प पौधे खाती है, कॉमन कार्प तले में चुगती है और सिल्वर कार्प प्लवक खाती है।
- NABARD मॉडल के अनुपात (कतला : रोहू : मृगल : सिल्वर : ग्रास : कॉमन): 3 प्रजाति 4 : 3 : 3; 4 प्रजाति 3 : 3 : 2 और 2 कॉमन कार्प; 6 प्रजाति 1.5 : 2 : 1.5 : 1.5 : 1.5 : 2। मॉडल में केवल तीन प्रमुख कार्प की लागत जोड़ी गई है, क्योंकि कतला और रोहू सबसे अच्छी बिकती हैं।
- ICAR त्रिपुरा कतला के साथ सिल्वर या बिगहेड कार्प रखने से मना करता है (दोनों भोजन के लिए होड़ करती हैं) और मृगल व कॉमन कार्प ज़्यादा डालने से भी। कॉमन कार्प मिट्टी खोदती है, इसलिए कम गहरे तालाब में ठीक नहीं।
- ज़्यादा मछली का मतलब ज़्यादा मुनाफ़ा नहीं है। Indian Journal of Fisheries में छपे IIT खड़गपुर के ट्रायल में पॉलिथीन लगे तालाबों में 20,000, 35,000 और 50,000 अंगुलिकाएँ प्रति हेक्टेयर डालने पर सबसे अच्छा शुद्ध लाभ, ₹1.40 लाख प्रति हेक्टेयर प्रति फसल, सबसे कम घनत्व पर मिला (छोटे परीक्षण तालाबों से बढ़ाकर निकाला गया; लगभग 190 ग्राम की मछली ₹85 प्रति किलो पर बिकी)।
- CIFA की सुधरी हुई "जयंती" रोहू हर पीढ़ी में 17 से 18% तेज़ बढ़ने वाली बताई गई है; हैचरी से नाम लेकर माँगें।
कौन सी प्रजाति किस पानी और किस व्यवस्था के लिए
- सदाबहार तालाब, लगभग 1.5 से 2 मीटर गहरा: कतला, रोहू, मृगल के साथ ग्रास और कॉमन कार्प। TNAU के अनुसार पानी 1 मीटर से नीचे नहीं जाना चाहिए।
- 5 से 6 महीने पानी वाला मौसमी तालाब: ICAR के अनुसार 300 से 400 ग्राम पर बिकने वाली छोटी कार्प और बार्ब प्रमुख कार्प से बेहतर बैठती हैं।
- हवा में साँस लेने वाली मछली का छोटा मिट्टी का तालाब या टैंक: सिंघी 60 से 90 सेमी गहराई और 28 से 30 °C पर सबसे अच्छी रही; लगभग 21 °C से नीचे बढ़वार तेज़ी से गिरी। मांगुर और सिंघी का पालन ज़्यादातर असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में होता है और बीज की कमी इसे रोकती है।
- बायोफ्लॉक टैंक: NFDB सिंघी, मांगुर, पाबदा, कोई, पंगेसियस, कॉमन कार्प, रोहू और तिलापिया को उपयुक्त बताता है। बायोफ्लॉक में धारीदार मुरल के ICAR ट्रायल में 10 महीने में 9.7 किलो प्रति m3 मिला, पर मछली केवल लगभग 150 ग्राम की थी और सर्दी में बढ़वार धीमी पड़ी।
- RAS: 90 दिन के ICAR ट्रायल में मोनोसेक्स तिलापिया का वज़न और कुल बायोमास रोहू और कतला से ज़्यादा बढ़ा।
- केज: केज की प्रजाति और घनत्व की यहाँ पुष्टि नहीं है। ज़िला मत्स्य अधिकारी से पूछें।
GIFT तिलापिया और लाइसेंस का नियम
- GIFT नील तिलापिया की सुधरी नस्ल है। WorldFish और MPEDA का Rajiv Gandhi Centre for Aquaculture TiLV-मुक्त मोनोसेक्स बीज केवल उन किसानों को देता है जिनके पास राज्य मत्स्य विभाग का तिलापिया पालन परमिट है।
- 2021 में तिलापिया पालन के लिए न्यूनतम जल क्षेत्र का राष्ट्रीय नियम 1 एकड़ से घटाकर बहुत छोटा किया गया (WorldFish एक जगह 0.05 एकड़ और दूसरी जगह 0.005 बताता है, इसलिए सही आँकड़ा राज्य मत्स्य विभाग से पूछें), और राज्य मत्स्य विभाग तिलापिया हैचरी को मंज़ूरी दे सकते हैं।
- बायोफ्लॉक और RAS के लिए PMMSY की शीट कहती है कि विदेशी प्रजातियों के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य है। पंगेसियस भी विदेशी है, इसलिए बीज खरीदने से पहले पूछ लें।
- वर्तमान प्रारूप और शर्तों के लिए राज्य मत्स्य विभाग से पूछें।
झींगा और महँगी मछलियाँ: क्या उम्मीद रखें
- ICAR-CIFA के अनुसार झींगे का जीवित रहना 50 से 70% है और बढ़वार असमान रहती है, इसलिए कटाई चरणों में होती है। ओडिशा के 46 खेतों के सर्वे में सुधरा CIFA-GI स्कैम्पी कार्प के साथ लगभग ₹418 प्रति किलो पर 416 किलो प्रति हेक्टेयर रहा।
- मुरल के लिए ICAR-CIFA औसत उत्पादन लगभग 2 टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष बताता है (IJF 2018), जो CARE की स्टॉकिंग और जीवित रहने की दर से निकलने वाले अनुमान से काफ़ी कम है। कम आँकड़े पर चलें।
- ICAR ट्रायल में पाबदा लगभग ₹500 प्रति किलो बिकी जबकि कार्प ₹200, पर उपज केवल 144 किलो प्रति हेक्टेयर रही, और बीज "बड़ी बाधा" है (ICAR समीक्षा)।
स्रोत
- NABARD मॉडल प्रोजेक्ट, कंपोज़िट मछली पालन, 2013 (TNAU)
- TNAU, मुरल पालन (CARE)
- TNAU, मीठे पानी के झींगे की स्टॉकिंग (CIFA)
- ICAR समीक्षा, भारत में मीठे पानी का मत्स्य पालन, IJF 2018
- ICAR NEH, कार्प के साथ पाबदा, IJF 2020
- ICAR NEH, सिंघी और पानी की गहराई, IJF
- ICAR, बायोफ्लॉक में मुरल, IJF
- ICAR, RAS में तिलापिया और कार्प, IJF 2023
- IIT खड़गपुर, कार्प का स्टॉकिंग घनत्व और मुनाफ़ा, IJF 2016
- ICAR-CIFA, GI स्कैम्पी खेतों में, IJF 2022
- Global Seafood Alliance, भारत में कार्प पॉलीकल्चर, 2007 (द्वितीयक)
- WorldFish, GIFT तिलापिया और भारतीय नीति, 2022
- J&K मत्स्य विभाग, PMMSY सहायता का पैटर्न
- NFDB बायोफ्लॉक पुस्तिका (संग्रहीत प्रति)