पपीता के लिए खाद और उर्वरक
पपीता एक तेज़ी से बढ़ने वाली कम अवधि की फलदार फसल है जो लगभग आठ से दस महीने में फल देना शुरू करती है और लगभग लगातार फल देती है, इसलिए इसे कई छोटी मात्राओं में पोषक तत्वों की नियमित आपूर्ति च

परिचय
पपीता एक तेज़ी से बढ़ने वाली कम अवधि की फलदार फसल है जो लगभग आठ से दस महीने में फल देना शुरू करती है और लगभग लगातार फल देती है, इसलिए इसे कई छोटी मात्राओं में पोषक तत्वों की नियमित आपूर्ति चाहिए। यह नाइट्रोजन और पोटाश की भारी खपत करती है, जिसमें पोटाश फल का आकार, मिठास और टिकाऊपन सुधारता है। चूँकि जड़ तंत्र उथला है और पौधा लगातार फल देता है, बार बार विभाजित खुराक या ड्रिप फर्टिगेशन कुछ बड़ी मात्राओं से कहीं बेहतर काम करता है। ICAR-IIHR और राज्य कृषि विश्वविद्यालय प्रति पौधा प्रति वर्ष मात्रा की सलाह देते हैं जो लगभग छह द्वैमासिक भागों में दी जाती है। नीचे दिए आँकड़े प्रति पौधा प्रति वर्ष की सीमा हैं। इन्हें अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड या ताज़ा मिट्टी जाँच, अपनी किस्म जैसे रेड लेडी, कूर्ग हनी ड्यू या पूसा डिलिशियस और स्थानीय KVK की सलाह से बदलें।
पपीता के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
एक व्यापक रूप से उपयोग होने वाली सीमा लगभग 200 से 250 ग्राम N, 200 से 250 ग्राम P2O5 और 250 से 500 ग्राम K2O प्रति पौधा प्रति वर्ष है। कूर्ग हनी ड्यू के लिए ICAR-IIHR की सलाह 250 ग्राम N, 250 ग्राम P2O5 और 500 ग्राम K2O प्रति पौधा प्रति वर्ष छह द्वैमासिक भागों में है। एक सरल तरीका है 200 ग्राम प्रत्येक N, P2O5 और K2O प्रति पौधा प्रति वर्ष 25 किलो गोबर खाद के साथ। यह लगभग 430 से 540 ग्राम यूरिया, 1.25 से 1.55 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट और 420 से 830 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति पौधा होता है। इन्हें शुरुआती सीमा मानें और अपनी मिट्टी जाँच और KVK की सलाह से पुष्टि करें।
डालने का समय और तरीका
रोपाई के समय गड्ढे में गोबर खाद और कुछ फॉस्फोरस डालें। पूरी NPK मात्रा को लगभग छह बराबर भागों में बाँटें और उन्हें लगभग दो महीने के अंतराल पर दें, रोपाई के लगभग दूसरे महीने से शुरू करके साल भर। खाद को तने से 20 से 30 सेंमी दूर गोल घेरे में डालें, हल्का मिलाएँ और सिंचाई करें, क्योंकि जड़ें उथली और नाज़ुक होती हैं। ड्रिप फर्टिगेशन में नियमित भोजन और सबसे अच्छे फल सेट के लिए छोटी साप्ताहिक या पाक्षिक मात्रा दें। भारी फल अवस्था के दौरान पोटाश मज़बूत रखें।
जैविक और जैव उर्वरक
प्रति पौधा प्रति वर्ष 10 से 25 किलो अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट डालें, जिसका एक अच्छा भाग रोपाई के समय गड्ढे में दें। 2 से 5 किलो वर्मीकम्पोस्ट प्रति पौधा उथले जड़ क्षेत्र को सुधारता है। एज़ोस्पाइरिलम और फॉस्फेट घोलक जीवाणु जैसे जैव उर्वरक लगभग 25 से 50 ग्राम प्रत्येक प्रति पौधा पोषक आपूर्ति में मदद करते हैं। चूँकि पपीते की जड़ें उथली और जलभराव के प्रति संवेदनशील होती हैं, जैविक खाद को थाले में अच्छी तरह मिलाएँ और मिट्टी को भुरभुरी, अच्छे निकास वाली और हल्की पलवार युक्त रखें।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
पपीते को आमतौर पर बोरॉन, ज़िंक और मैग्नीशियम चाहिए। बोरॉन की कमी से गाँठदार बेढंगे फल बनते हैं जिनकी सतह पर लेटेक्स बहता है और फल सेट खराब होता है, यह एक आम समस्या है। ज़िंक की कमी से छोटी चितकबरी पत्तियाँ और छोटे पोर होते हैं। मैग्नीशियम की कमी से पुरानी पत्तियों के किनारे पीले होते हैं पर बीच हरा रहता है। इन्हें 0.1 से 0.2 प्रतिशत बोरेक्स, 0.5 प्रतिशत ज़िंक सल्फेट और 0.5 प्रतिशत मैग्नीशियम सल्फेट के छिड़काव से ठीक करें। ज़रूरत की पुष्टि हमेशा पत्ती जाँच या KVK की सलाह से करें, और अधिक बोरॉन से बचें क्योंकि पपीता इसके प्रति संवेदनशील है।
सुझाव और सावधानियां
थोड़ा और बार बार खिलाएँ क्योंकि पपीता लगातार फल देता है और जड़ें उथली होती हैं। ड्रिप फर्टिगेशन सबसे अच्छे परिणाम देता है और खाद बचाता है। मीठे और अच्छे आकार के फल के लिए पोटाश मज़बूत रखें। थाले में जलभराव न होने दें, क्योंकि पपीते की जड़ें जल्दी सड़ती हैं और पौधा गिर जाता है। खाद तने से दूर घेरे में डालें और बाद में सिंचाई करें। भारी एकल मात्रा से बचें जो जड़ें जला सकती है। बोरॉन से जुड़े गाँठदार फल पर नज़र रखें और पत्ती जाँच से पुष्टि कर हल्के बोरेक्स छिड़काव से जल्दी ठीक करें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
एक पपीते के पौधे को साल भर में कितनी खाद चाहिए?
पपीते में कितनी बार खाद देनी चाहिए?
मेरे पपीते के फल गाँठदार और बेढंगे क्यों हैं?
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