सरसों के लिए खाद और उर्वरक
सरसों (राई-सरसों) एक प्रमुख रबी तिलहन है और यह दलहन नहीं है, इसलिए दलहनों के विपरीत इसे नाइट्रोजन की जरूरत होती है। सबसे जरूरी विशेष पोषक तत्व सल्फर है, क्योंकि सरसों सल्फर-प्रिय फसल है जहाँ

परिचय
सरसों (राई-सरसों) एक प्रमुख रबी तिलहन है और यह दलहन नहीं है, इसलिए दलहनों के विपरीत इसे नाइट्रोजन की जरूरत होती है। सबसे जरूरी विशेष पोषक तत्व सल्फर है, क्योंकि सरसों सल्फर-प्रिय फसल है जहाँ सल्फर तेल की मात्रा और दाने की उपज को काफी बढ़ाता है। संतुलित नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर मिलकर सबसे अच्छा परिणाम देते हैं, सिंचित फसल में नाइट्रोजन को बाँटकर देना चाहिए। फॉस्फोरस, पोटाश और पूरा सल्फर आधार खुराक में जाते हैं, जबकि नाइट्रोजन का एक हिस्सा ऊपर से दिया जाता है। खाद हमेशा मिट्टी जाँच या मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार तय करें और स्थानीय दर केवीके से पक्की करें, क्योंकि जरूरत मिट्टी, सिंचाई और किस्म के अनुसार बदलती है।
सरसों के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
सिंचित सरसों के लिए सामान्य मात्रा 32 किलो नाइट्रोजन, 16 किलो फॉस्फोरस (P2O5), 16 किलो पोटाश (K2O) और 16 किलो सल्फर प्रति एकड़ है, जो लगभग 80 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फॉस्फोरस, 40 किलो पोटाश और 40 किलो सल्फर प्रति हेक्टेयर बैठती है। असिंचित दशा में लगभग 50:25:25 किलो एनपीके प्रति हेक्टेयर की कम मात्रा ली जाती है। ध्यान दें कि नाइट्रोजन ज्यादा है क्योंकि सरसों दलहन नहीं है, और इस तिलहन के लिए सल्फर भरपूर है। ये केवल सामान्य श्रेणियाँ हैं। मिट्टी जाँच या मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाएँ और केवीके की सलाह के अनुसार मात्रा डालें।
डालने का समय और तरीका
सिंचित सरसों में आधी नाइट्रोजन और पूरा फॉस्फोरस, पोटाश तथा सल्फर बुआई के समय आधार खुराक में डालें। बची आधी नाइट्रोजन बुआई के 30 से 45 दिन बाद पहली सिंचाई के साथ ऊपर से दें। असिंचित दशा में जहाँ केवल बची नमी हो, पूरी मात्रा बुआई के समय आधार खुराक में डालें। आधार खाद हमेशा बीज के पास रखें, और पूरा सल्फर जल्दी दें क्योंकि फसल को इसकी जरूरत शुरू से होती है।
जैविक और जैव उर्वरक
बुआई से पहले 4 से 5 टन प्रति एकड़ अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट, यानी लगभग 10 टन प्रति हेक्टेयर, मिट्टी में मिलाएँ; गोबर खाद कुछ सल्फर भी देती है। 2.5 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर को कम खाद, जिंक और बोरॉन के साथ मिलाने वाले समन्वित पोषण प्रबंधन से सरसों की उपज बढ़ती देखी गई है। सरसों दलहन नहीं है, इसलिए यह राइजोबियम का उपयोग नहीं करती, पर मिट्टी और बीज को पीएसबी से उपचारित करने से फॉस्फोरस उपलब्धता बढ़ती है। जड़ और अंकुर रोगों से बचाव के लिए फफूँदनाशक बीज उपचार करें।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
सरसों के लिए सल्फर मुख्य पोषक तत्व है; जिप्सम, बेंटोनाइट सल्फर या सिंगल सुपर फॉस्फेट से लगभग 16 किलो प्रति एकड़ दें, क्योंकि यह तेल की मात्रा 2 प्रतिशत तक और उपज 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। सल्फर की कमी नई पत्तियों के पीले, कटोरीनुमा और लालिमा लिए होने में दिखती है। जिंक की कमी नसों के बीच पीलेपन में दिखती है, इसे 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ से ठीक करें। बोरॉन की कमी से फूल और फली कम बनते हैं; बोरॉन (बोरेक्स) 4 से 5 किलो प्रति एकड़ केवल तभी डालें जब मिट्टी जाँच कमी की पुष्टि करे।
सुझाव और सावधानियां
सल्फर कभी न छोड़ें क्योंकि यह सीधे तेल की मात्रा बढ़ाता है और सरसों में सबसे लाभकारी इनपुट है। सिंचित फसल में नाइट्रोजन को बाँटें, आधी आधार में और आधी पहली सिंचाई पर। फॉस्फोरस और सल्फर एक साथ कम लागत में देने के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट का उपयोग करें। नाइट्रोजन की अधिक मात्रा न दें क्योंकि यह पकने में देरी करती है और माहू (एफिड) को बुलाती है। हर दो से तीन साल में मिट्टी जाँच कराएँ और अपनी सिंचाई व किस्म की मात्रा के लिए केवीके का पालन करें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
सरसों के लिए सल्फर इतना जरूरी क्यों है?
सरसों को कितनी खाद चाहिए?
क्या सरसों को दलहनों की तरह राइजोबियम चाहिए?
सरसों में नाइट्रोजन ऊपर से कब डालें?
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