अंगूर के लिए खाद और उर्वरक
अंगूर एक मूल्यवान बेल फसल है जिसमें पोषण छँटाई चक्र से गहराई से जुड़ा है, क्योंकि महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों में बेल की साल में दो बार छँटाई होती है। पोषक तत्व उस आधार छँटाई के अनुसार दिए जात

परिचय
अंगूर एक मूल्यवान बेल फसल है जिसमें पोषण छँटाई चक्र से गहराई से जुड़ा है, क्योंकि महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों में बेल की साल में दो बार छँटाई होती है। पोषक तत्व उस आधार छँटाई के अनुसार दिए जाते हैं जो शाखाएँ बनाती है और उस फल छँटाई के अनुसार जो फसल देती है। अंगूर को बेरी के आकार, मिठास और रंग के लिए अच्छी पोटाश सहित संतुलित N:P:K तथा गुणवत्ता के लिए कैल्शियम और मैग्नीशियम चाहिए। ICAR-NRC अंगूर और राज्य कृषि विश्वविद्यालय प्रति बेल प्रति वर्ष मात्रा की सलाह देते हैं, जो हर अवस्था पर सटीक नियंत्रण के लिए तेज़ी से ड्रिप फर्टिगेशन से दी जा रही है। नीचे दिए आँकड़े प्रति बेल प्रति वर्ष की सीमा हैं। इन्हें अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड या ताज़ा मिट्टी जाँच, अपनी किस्म जैसे थॉम्पसन सीडलेस, सोनाका या रेड ग्लोब, मूलवृंत और स्थानीय KVK की सलाह से बदलें।
अंगूर के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
फल देने वाली बेलों के लिए सामान्य सीमा लगभग 100 से 150 ग्राम N, 80 से 150 ग्राम P2O5 और 100 से 200 ग्राम K2O प्रति बेल प्रति वर्ष होती है, जो किस्म, दूरी और उपज लक्ष्य पर निर्भर करती है। अच्छी बेरी गुणवत्ता के लिए पोटाश अक्सर नाइट्रोजन के बराबर या उससे ज़्यादा रखा जाता है। मात्रा आमतौर पर आधार छँटाई और फल छँटाई के बीच बाँटी जाती है। इन्हें शुरुआती सीमा मानें और अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, ताज़ा मिट्टी जाँच, पर्णवृंत जाँच और KVK की सलाह से ठीक करें, क्योंकि अंगूर का पोषण बहुत अवस्था और किस्म विशिष्ट है।
डालने का समय और तरीका
गोबर खाद और पूरा फॉस्फोरस तथा कुछ नाइट्रोजन और पोटाश अक्टूबर की आधार छँटाई पर या उसके तुरंत बाद डालें। नाइट्रोजन मुख्यतः छँटाई के बाद शाखा वृद्धि अवस्था में दें और फूल आने से काफी पहले घटा दें। अधिकतर पोटाश बेरी बनने से लेकर रंग बदलने और पकने तक दें ताकि आकार, मिठास और रंग बेहतर हो। दो छँटाई वाले क्षेत्रों में मात्रा को अप्रैल की आधार छँटाई और अक्टूबर की फल छँटाई के बीच संतुलित करें। ड्रिप फर्टिगेशन में हर अवस्था के अनुसार कई छोटी साप्ताहिक मात्राओं में बाँटें ताकि सबसे अच्छी एकरूपता मिले।
जैविक और जैव उर्वरक
प्रति बेल प्रति वर्ष 10 से 30 किलो अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट डालें, आमतौर पर आधार छँटाई पर। 2 से 5 किलो वर्मीकम्पोस्ट प्रति बेल मिट्टी की संरचना और सूक्ष्मजीव जीवन सुधारता है। एज़ोटोबैक्टर, फॉस्फेट घोलक जीवाणु और पोटाश गतिशील जीवाणु तथा माइकोराइज़ा जैसे जैव उर्वरक पोषक ग्रहण में मदद करते हैं। कई किसान कतारों के बीच हरी खाद या आवरण फसल भी उगाते हैं जिसे बाद में पलवार बना देते हैं, जिससे जैविक पदार्थ बढ़ता है और गर्म सूखे अंगूर क्षेत्रों में मिट्टी की सतह सुरक्षित रहती है।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
अंगूर को आमतौर पर ज़िंक, लोहा, बोरॉन और मैग्नीशियम चाहिए। ज़िंक की कमी से छोटी पत्तियाँ, छोटे पोर और खराब बेरी सेट होता है जिसमें कई छोटी बेरियाँ रहती हैं। लोहे की कमी से नई पत्तियाँ पीली होती हैं पर शिराएँ हरी रहती हैं, अक्सर चूनेदार मिट्टी में। बोरॉन की कमी से खराब फल सेट, असमान बेरियाँ और कॉर्की ऊतक होते हैं। मैग्नीशियम की कमी से पुरानी पत्तियों के किनारे पीले होते हैं। इन्हें 0.5 प्रतिशत ज़िंक सल्फेट, 0.2 प्रतिशत बोरिक एसिड और 0.5 प्रतिशत मैग्नीशियम सल्फेट के छिड़काव से ठीक करें, अक्सर फूल आने से पहले। ज़रूरत की पुष्टि पत्ती या पर्णवृंत जाँच या KVK की सलाह से करें।
सुझाव और सावधानियां
पोषण को तय कैलेंडर के बजाय छँटाई चक्र और बेल की अवस्था के अनुसार दें। शाखा वृद्धि के दौरान नाइट्रोजन बढ़ाएँ, फिर फूल आने से पहले घटाएँ ताकि खराब सेट न हो। बेरी बनने से पकने तक पोटाश दें ताकि आकार, मिठास और रंग अच्छा हो। पर्णवृंत जाँच के साथ ड्रिप फर्टिगेशन सबसे सटीक नियंत्रण देता है। नाइट्रोजन ज़्यादा न डालें क्योंकि इससे बेहिसाब छतरी, खराब रंग और ज़्यादा रोग होते हैं। जड़ क्षेत्र को नम रखें पर जलभराव न हो, और केंद्रित खाद तने से सटाकर न डालें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
एक अंगूर की बेल को साल भर में कितनी खाद चाहिए?
अंगूर में नाइट्रोजन और पोटाश कब देनी चाहिए?
अंगूर के लिए फर्टिगेशन की सलाह क्यों दी जाती है?
अंगूर में खराब फल सेट और असमान बेरियों का क्या कारण है?
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