अदरक के लिए खाद और उर्वरक
अदरक (जिंजिबर ऑफिसिनेल) लगभग आठ से नौ महीने की लंबी अवधि वाली प्रकंद फसल है जिसे उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और लगातार बांटी गई पोषण आपूर्ति चाहिए। काटा जाने वाला हिस्सा जमीन के नीचे

परिचय
अदरक (जिंजिबर ऑफिसिनेल) लगभग आठ से नौ महीने की लंबी अवधि वाली प्रकंद फसल है जिसे उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और लगातार बांटी गई पोषण आपूर्ति चाहिए। काटा जाने वाला हिस्सा जमीन के नीचे का प्रकंद होने से यह फसल पोटैशियम और जीवांश पदार्थ अधिक लेती है, जबकि संतुलित नाइट्रोजन पत्तेदार बढ़वार बढ़ाती है जो प्रकंद को पोषण देती है। अदरक नरम सड़न और प्रकंद सड़न के प्रति बहुत संवेदनशील है, इसलिए पोषण प्रबंधन अच्छी जल निकासी, पलवार और नीम खली जैसी जैविक खाद से जुड़ा है। बुवाई पर अच्छी सड़ी गोबर खाद की भारी मात्रा इस पद्धति की रीढ़ है, साथ में बांटकर दी खाद। मात्रा मृदा स्वास्थ्य कार्ड जांच से तय करें और सही आंकड़े केवीके से पक्के करें।
अदरक के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
आम सिफारिश लगभग 75 से 100 किलो नाइट्रोजन, 50 किलो फास्फोरस और 50 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर है, यानी करीब 30 से 40 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फास्फोरस और 20 किलो पोटाश प्रति एकड़। कुछ आईसीएआर स्रोत पोटैशियम-कम मिट्टी में नाइट्रोजन 100 किलो, फास्फोरस करीब 50 से 55 किलो और पोटाश 75 किलो तक प्रति हेक्टेयर सलाह देते हैं। ये सामान्य श्रेणियां हैं; आपकी असली मात्रा मिट्टी जांच से आनी चाहिए क्योंकि अदरक की मिट्टी बहुत बदलती है। अंतिम आंकड़े मृदा स्वास्थ्य कार्ड और केवीके से पक्के करें।
डालने का समय और तरीका
बुवाई पर पूरा फास्फोरस आधार खुराक में, साथ में एक तिहाई नाइट्रोजन और आधा पोटाश दें। बची नाइट्रोजन और पोटाश दो या तीन टॉप ड्रेसिंग में बुवाई के करीब 40 से 45 दिन, 90 दिन और 120 दिन पर दें, हर बार मिट्टी चढ़ाकर और पलवार बिछाकर। मौसम भर नाइट्रोजन और पोटाश बांटने से प्रकंद लगातार भरता है और अधिक वर्षा वाले अदरक क्षेत्र में बहाव से नुकसान घटता है।
जैविक और जैव उर्वरक
बुवाई पर 25 से 30 टन अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर बुवाई की कूड़ों में डालें। बुवाई पर करीब 2 टन नीम खली प्रति हेक्टेयर डालें, जो फसल को पोषण देती और नरम सड़न रोकने में मदद करती है। मौसम में दो से तीन बार हरी पत्तियों की पलवार नमी बचाती, जीवांश बढ़ाती और खरपतवार रोकती है। एजोस्पाइरिलम और फास्फोरस घोलक जीवाणु जैसे जैव उर्वरक पोषक ग्रहण बढ़ाते और रासायनिक खाद घटा सकते हैं।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
कमी वाली मिट्टी में अदरक को जिंक और बोरॉन से लाभ होता है। जिंक की कमी में छोटी, संकरी पत्तियां, नसों के बीच पीलापन और कमजोर प्रकंद दिखता है; इसे 20 से 25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर मिट्टी में देकर ठीक करें। बोरॉन प्रकंद गुणवत्ता में मदद करता है, इसकी कमी से प्रकंद फटे या टेढ़े बनते हैं। अम्लीय पहाड़ी मिट्टी में मिट्टी जांच के आधार पर चूना या डोलोमाइट पीएच सुधारता और कैल्शियम-मैग्नीशियम देता है। सूक्ष्म तत्व तभी दें जब जांच में कमी पक्की हो।
सुझाव और सावधानियां
बुवाई पर अच्छी सड़ी गोबर खाद और नीम खली भारी मात्रा में दें। मिट्टी को पोषण और नमी देने के लिए दो से तीन बार पलवार करें। नाइट्रोजन और पोटाश बांटकर मिट्टी चढ़ाते हुए दें। ताजी खाद न डालें और खेत में पानी न रुकने दें, दोनों प्रकंद सड़न लाते हैं। वर्षा क्षेत्र में जल निकासी नालियां न छोड़ें। ज्यादा नाइट्रोजन न दें, इससे पत्ते बढ़ते पर प्रकंद नरम और कम टिकाऊ बनते हैं। बीज प्रकंद का उपचार करें और पोषण योजना केवीके से पक्की करें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
अदरक को कितनी गोबर खाद चाहिए?
अदरक में नीम खली क्यों सलाह दी जाती है?
अदरक में नाइट्रोजन कैसे बांटें?
क्या पहाड़ी और मैदानी मिट्टी के लिए मात्रा बदलूं?
अपनी मिट्टी और फसल पर सलाह लें
किसानों से पूछें अदरक का भाव खाद उपलब्धता