शिमला मिर्च के लिए खाद और उर्वरक
शिमला मिर्च (कैप्सिकम एनम) ऊंचे मूल्य की फल वाली सब्जी है जो कई महीने फल देती है, इसलिए इसे लगातार बांटी गई पोषण आपूर्ति चाहिए। संतुलित नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश मजबूत पौधा, अच्छा फूल और

परिचय
शिमला मिर्च (कैप्सिकम एनम) ऊंचे मूल्य की फल वाली सब्जी है जो कई महीने फल देती है, इसलिए इसे लगातार बांटी गई पोषण आपूर्ति चाहिए। संतुलित नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश मजबूत पौधा, अच्छा फूल और ठोस, अच्छे आकार का फल बनाते हैं, जबकि कैल्शियम फल के आधार पर काला धंसा दाग यानी ब्लॉसम एंड रॉट रोकने को जरूरी है। फल लगातार बनने से तुड़ाई के मौसम में पोटाश और कैल्शियम की मांग बनी रहती है। यह फसल खुले खेत और पॉलीहाउस में फर्टिगेशन के साथ खूब उगाई जाती है। अच्छी गोबर खाद मिट्टी आधार बनाती है, साथ में बांटी टॉप ड्रेसिंग या जल घुलनशील पोषण। मात्रा मृदा स्वास्थ्य कार्ड जांच पर तय करें और केवीके से पक्की करें।
शिमला मिर्च के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
खुले खेत की शिमला मिर्च के लिए आम सिफारिश करीब 100 से 150 किलो नाइट्रोजन, 50 से 75 किलो फास्फोरस और 50 से 75 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर है, यानी करीब 40 से 60 किलो नाइट्रोजन, 20 से 30 किलो फास्फोरस और 20 से 30 किलो पोटाश प्रति एकड़, साथ में 20 से 25 टन गोबर खाद प्रति हेक्टेयर। फर्टिगेशन वाली पॉलीहाउस फसल को लंबी अवधि में ज्यादा कुल पोषक मिलते हैं। ये सामान्य श्रेणियां हैं; आपकी असली मात्रा मिट्टी जांच से आनी चाहिए। अंतिम आंकड़े मृदा स्वास्थ्य कार्ड और केवीके से पक्के करें।
डालने का समय और तरीका
रोपाई पर पूरा फास्फोरस, आधा पोटाश और एक तिहाई नाइट्रोजन आधार खुराक में दें। बची नाइट्रोजन और पोटाश दो या तीन टॉप ड्रेसिंग में रोपाई के करीब 30, 50 से 60 और 75 से 90 दिन पर दें, फूल और फल बनने के समय पर, हर बार सिंचाई के साथ। पॉलीहाउस में नियमित फर्टिगेशन से पोषक दें, शुरू में 19:19:19 जैसे जल घुलनशील और फल बनते समय ज्यादा पोटाश तथा कैल्शियम नाइट्रेट पोषण ताकि उपज बढ़े और ब्लॉसम एंड रॉट रुके।
जैविक और जैव उर्वरक
भूमि तैयारी पर 20 से 25 टन अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं। 5 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर मिट्टी संरचना सुधारता और ठोस फल देता है। एजोटोबैक्टर, फास्फोरस घोलक जीवाणु और ट्राइकोडर्मा जैसे जैव उर्वरक पोषक आपूर्ति व जड़ सेहत सुधारते और मिट्टी जनित रोग रोकने में मदद करते हैं। संतुलित जैविक आधार कैल्शियम और पोटाश आपूर्ति स्थिर रखता है, जो भारी फल बनते समय ब्लॉसम एंड रॉट का खतरा सीधे घटाता है।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
कैल्शियम शिमला मिर्च का सबसे जरूरी द्वितीयक तत्व है, क्योंकि फल बनते समय इसकी कमी ब्लॉसम एंड रॉट यानी फल के सिरे पर धंसा गहरा दाग लाती है, जो असमान सिंचाई से बिगड़ता है। मिट्टी की नमी स्थिर रखें और फल बनते समय कैल्शियम नाइट्रेट छिड़काव या पोषण दें। बोरॉन फूल और फल बनने में मदद करता है; इसकी कमी से फूल झड़ते और फल कॉर्की बनते हैं। जिंक, लोहा और मैग्नीशियम की कमी पीली पत्तियों से दिखती है और पर्ण छिड़काव से ठीक होती है। सूक्ष्म तत्व मिट्टी जांच के आधार पर ही दें।
सुझाव और सावधानियां
ब्लॉसम एंड रॉट रोकने को मिट्टी नमी स्थिर रखें और कैल्शियम दें। फूल और फल के अनुसार नाइट्रोजन और पोटाश बांटें। अच्छी सड़ी गोबर खाद भरपूर दें। मिट्टी को सूखे और जलभराव के बीच न झूलने दें, यह ब्लॉसम एंड रॉट लाता है। ज्यादा नाइट्रोजन न दें, यह जड़ जलाती, फल देर करती और गुणवत्ता घटाती है। गीली पत्ती पर खाद न बिखेरें। पौधों को सहारा दें, नमी रखने को पलवार करें और मात्रा केवीके से पक्की करें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
शिमला मिर्च में ब्लॉसम एंड रॉट कैसे रोकूं?
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