बाजरा के लिए खाद और उर्वरक
बाजरा एक कठोर, सूखा सहन करने वाली खरीफ फसल है जो मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र के शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती है। यह कम पर सही समय की खाद पर हल्की बलुई मिट्टी में भी अच्छ

परिचय
बाजरा एक कठोर, सूखा सहन करने वाली खरीफ फसल है जो मुख्यतः राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र के शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती है। यह कम पर सही समय की खाद पर हल्की बलुई मिट्टी में भी अच्छी प्रतिक्रिया देती है, पर बारानी हालात में भारी खुराकें बेकार जाती हैं जहाँ असली सीमा नमी है। नाइट्रोजन को बुवाई और एक जल्दी टॉप ड्रेसिंग में बाँटा जाता है, जबकि फॉस्फोरस और पोटाश पूरे बुवाई पर जाते हैं। संकर किस्में स्थानीय संकुल से ज़्यादा खाद पर प्रतिक्रिया देती हैं। बलुई बाजरा मिट्टी अक्सर ज़िंक और कभी लोहे की कमी रखती है। ICAR और राज्य कृषि विश्वविद्यालय संकर और संकुल के लिए स्पष्ट N:P:K सीमा देते हैं। नीचे के आँकड़ों को मार्गदर्शन मानें और इन्हें बारानी या सिंचित हालात तथा अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड या मिट्टी जाँच और नज़दीकी KVK के अनुसार बदलें।
बाजरा के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
संकर बाजरा के लिए ICAR की एक सामान्य सीमा लगभग 80 से 100 कि.ग्रा. N, 40 से 50 कि.ग्रा. P2O5 और 40 कि.ग्रा. K2O प्रति हेक्टेयर है, यानी लगभग 32 से 40 कि.ग्रा. N, 16 से 20 कि.ग्रा. P2O5 और 16 कि.ग्रा. K2O प्रति एकड़। संकुल और स्थानीय किस्मों तथा बारानी फसल को कम, लगभग 40 से 60 कि.ग्रा. N प्रति हेक्टेयर चाहिए। खाद के रूप में प्रति हेक्टेयर संकर खुराक लगभग 90 से 110 कि.ग्रा. डीएपी, 130 से 170 कि.ग्रा. यूरिया और 67 कि.ग्रा. एमओपी है, या प्रति एकड़ लगभग 36 से 44 कि.ग्रा. डीएपी, 53 से 69 कि.ग्रा. यूरिया और 27 कि.ग्रा. एमओपी। डीएपी से कुछ नाइट्रोजन मिलने पर यूरिया घटाएँ। ये केवल सामान्य सीमाएँ हैं। हमेशा अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड या ताज़ा मिट्टी जाँच के अनुसार बदलें और नज़दीकी KVK से पुष्टि करें।
डालने का समय और तरीका
बुवाई पर पूरा फॉस्फोरस, पूरा पोटाश और लगभग आधी नाइट्रोजन आधार के रूप में बीज के पास डालें। बाकी नाइट्रोजन सक्रिय कल्ले निकलने पर, बुवाई के लगभग 25 से 30 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें, बेहतर हो किसी वर्षा या सिंचाई से ठीक पहले ताकि घुलकर जड़ों तक पहुँचे। अच्छी नमी और संकर किस्मों में नाइट्रोजन को तीन भागों में देना थोड़ा अतिरिक्त लाभ देता है। पूरी तरह बारानी खेतों में जहाँ वर्षा अनिश्चित है, नाइट्रोजन कम रखें और टॉप ड्रेसिंग तभी दें जब फसल और नमी इसकी अनुमति दें।
जैविक और जैव उर्वरक
बुवाई से पहले 5 से 10 टन अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर, यानी लगभग 2 से 4 टन प्रति एकड़ मिट्टी में मिलाएँ, जो बलुई बाजरा मिट्टी में नमी रोकने के लिए खास उपयोगी है। 1.5 से 2.5 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर अच्छा विकल्प है। बीज को एज़ोस्पिरिलम और पीएसबी जैव उर्वरकों से उपचारित करें ताकि नाइट्रोजन जुड़े और फॉस्फोरस मुक्त हो। बाजरा शुष्क, कम उर्वर मिट्टी में उगता है, इसलिए साल दर साल जैविक पदार्थ बढ़ाना नमी रोकने और किसी भी खाद पर प्रतिक्रिया दोनों को बहुत सुधारता है।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
जिस बलुई मिट्टी में बाजरा उगता है वहाँ ज़िंक की कमी आम है। यह बीच और नीचे की पत्तियों पर शिराओं के बीच पीलेपन और छोटे भूरे धब्बों तथा बौने पौधों के रूप में दिखती है। जहाँ मिट्टी जाँच पुष्टि करे, बुवाई पर लगभग 20 से 25 कि.ग्रा. ज़िंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर, यानी लगभग 8 से 10 कि.ग्रा. प्रति एकड़ डालें, या छिड़काव से जल्दी ठीक करें। लोहे की कमी, जिसमें नई पत्तियाँ पीली हों पर शिराएँ हरी रहें, क्षारीय और चूनेदार मिट्टी में होती है और छिड़काव से बेहतर ठीक होती है। गंधक शायद ही मुख्य सीमा हो पर हल्की मिट्टी में दाना गुणवत्ता सुधारती है।
सुझाव और सावधानियां
खाद को नमी से मिलाएँ: बारानी बाजरा में ऐसी भारी खुराकों पर खर्च न करें जिन्हें फसल बिना पानी उपयोग न कर सके। नाइट्रोजन को आधार और एक टॉप ड्रेसिंग में बाँटें जो वर्षा या सिंचाई के समय हो। बलुई मिट्टी में जहाँ नाइट्रोजन जल्दी बहती है वहाँ बेहतर दक्षता के लिए नीम लेपित यूरिया चुनें। फॉस्फोरस को बिखेरने के बजाय बीज के पास डालें। यूरिया का अधिक प्रयोग न करें, क्योंकि कम नमी वाले खेतों में अधिकता बस नष्ट होती है और छोटे पौधों को जला सकती है। हर साल मिट्टी का जैविक पदार्थ बढ़ाएँ, और हमेशा अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड का पालन करें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
बारानी ज़मीन में बाजरा को कितनी खाद चाहिए?
बाजरा में नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग कब करें?
मेरे बाजरा की पत्तियाँ भूरे धब्बों के साथ पीली क्यों हो रही हैं?
क्या बाजरा में जैव उर्वरक मदद करते हैं?
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