कोलार ज़िले में खेती: एशिया की सबसे बड़ी टमाटर मंडी
कर्नाटक का कोलार ज़िला एशिया की सबसे बड़ी टमाटर मंडी के लिए जाना जाता है। यहां की ज़मीन पालार (मौसमी) से सिंचित होती है और मुख्यतः लाल दोमट मिट्टी पर है, जो टमाटर, आम, रागी के लिए अनुकूल है। इसीलिए नीचे दी गई फसलें और योजनाएं कोलार की असली खेती के अनुसार चुनी गई हैं, न कि राज्य के औसत के आधार पर।
कोलार में सबसे अच्छी फसलें
ज़िले की मुख्य फसलें टमाटर, आम, रागी, सब्जियाँ हैं। टमाटर स्थानीय अर्थव्यवस्था में अग्रणी है, इसलिए कोलार के किसानों को इसका भाव ध्यान से देखना चाहिए। यहां की लाल दोमट मिट्टी विभिन्न फसलों के लिए उपयुक्त है।
कोलार में मिट्टी, पानी और सिंचाई
लाल दोमट मिट्टी और पालार (मौसमी) के पानी के साथ, कोलार के किसानों की प्राथमिकता फसल के अनुसार सिंचाई है। ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड बताता है कि आपकी मिट्टी को कौन से पोषक तत्व चाहिए।
कोलार में मंडी भाव
कोलार की मंडियों (Srinivasapur APMC, Bangarpet APMC) में 1 जून 2026 ये फसलें बिकीं, औसत भाव (प्रति क्विंटल) के साथ:
| फसल | न्यूनतम | अधिकतम | औसत भाव |
|---|---|---|---|
| Mango | ₹1,700 | ₹3,400 | ₹2,400 |
| Brinjal | ₹2,000 | ₹2,600 | ₹2,300 |
| Thondekai | ₹1,000 | ₹1,700 | ₹1,200 |
| Garlic | ₹7,000 | ₹9,500 | ₹9,000 |
| Tomato | ₹1,200 | ₹1,800 | ₹1,500 |
| Bitter gourd | ₹1,500 | ₹2,500 | ₹2,200 |
| Raddish | ₹500 | ₹1,000 | ₹700 |
| Capsicum | ₹2,000 | ₹2,700 | ₹2,500 |
| Knool Khol | ₹1,700 | ₹2,500 | ₹2,000 |
स्रोत: कोलार, कर्नाटक की Agmarknet दैनिक आवक (1 जून 2026)।
कोलार में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में कोलार में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें रागी, मक्का, धान / चावल थीं। अकेले रागी का रकबा 53,628 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 82%) था, और इसकी उपज 1,842 किग्रा/हेक्टेयर कर्नाटक के औसत से 19% ज़्यादा रही। 2019-20 के बाद से सबसे बड़ा बदलाव: धान / चावल का रकबा +175%, मक्का का रकबा +104%।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | कर्नाटक औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| रागी | 53,628 | 98,757 | 1,842 | 1,542 | -11% |
| मक्का | 3,780 | 13,520 | 3,576 | 3,234 | +104% |
| धान / चावल | 3,415 | 10,608 | 3,106 | 3,345 | +175% |
| मूँगफली | 2,388 | 2,413 | 1,011 | 961 | -68% |
| अरहर / तुअर | 1,003 | 504 | 503 | 572 | -2% |
| ज्वार | 802 | 1,370 | 1,707 | 1,257 | -70% |
| बाजरा | 43 | 55 | 1,290 | 1,290 | -66% |
| तिल | 30 | 21 | 697 | 699 | +333% |
| कपास | 21 | 72 | 570 | 3,353 | +611% |
| गन्ना | 15 | 1,308 | 88,985 | 89,000 | -59% |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। कर्नाटक औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
कोलार का मौसम और बुवाई का समय
कोलार में सालाना औसतन लगभग 877 मिमी बारिश होती है, जिसका 50% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश अक्टूबर में (157 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना अप्रैल है (दिन का औसत 35°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत 14°C) होती हैं।
- आमतौर पर मई में पहली बार महीने की बारिश 100 मिमी पार करती है, यही यहां खरीफ बुवाई का सामान्य संकेत है।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 5 | 28° | 14° |
| फ़रवरी | 6 | 31° | 15° |
| मार्च | 17 | 34° | 18° |
| अप्रैल | 51 | 35° | 21° |
| मई | 102 | 33° | 22° |
| जून | 75 | 30° | 20° |
| जुलाई | 96 | 29° | 19° |
| अगस्त | 114 | 29° | 19° |
| सितंबर | 151 | 28° | 19° |
| अक्टूबर | 157 | 27° | 18° |
| नवंबर | 76 | 26° | 16° |
| दिसंबर | 27 | 26° | 14° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), कोलार ज़िले के केंद्र (13.1805, 78.2669) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
कोलार के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
कोलार के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
- चिक्कबल्लापुर - 70 km
- तिरुपत्तूर, Tamil Nadu - 77 km
- अन्नमय्या, Andhra Pradesh - 78 km
- कृष्णगिरि, Tamil Nadu - 79 km
- बेंगलुरु शहरी - 82 km
- बेंगलुरु ग्रामीण - 84 km
कोलार ज़िले में किसान योजनाएं
कोलार, कर्नाटक के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: