चित्रदुर्ग ज़िले में खेती: दक्षिणी पठार और पहाड़ियाँ
कर्नाटक मुख्य रूप से दक्षिणी पठार और पहाड़ियाँ कृषि-जलवायु क्षेत्र में आता है (अर्ध-शुष्क, पूरे क्षेत्र में सालाना 677-1000mm बारिश)। इस क्षेत्र में दक्षिणी दक्कन की वर्षा आधारित मोटे अनाज, मूंगफली और मिर्च की पट्टी आम है, मिट्टी ज़्यादातर लाल बलुई दोमट और उथली काली है और आमतौर पर रागी, ज्वार, मूँगफली, दालें, कपास, मिर्च, तिलहन उगाई जाती हैं।
ये पूरे कृषि-जलवायु क्षेत्र के तथ्य हैं (ICAR / योजना आयोग वर्गीकरण), चित्रदुर्ग की फसल गणना नहीं। चित्रदुर्ग की अपनी मंडियों में असल में क्या बिकता है, वह नीचे है। मौसम वाले हिस्से में चित्रदुर्ग की अपनी मासिक बारिश और तापमान दिए गए हैं।
सिंचाई और मिट्टी
ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। एक ही क्षेत्र में भी खेत-खेत की मिट्टी अलग होती है, इसलिए मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही आपके खेत की सही ज़रूरत बताता है।
चित्रदुर्ग में मंडी भाव
चित्रदुर्ग की मंडियों (Holalkere APMC, Hosadurga APMC, Challakere APMC, Hiriyur APMC) में 1 जून 2026 ये फसलें बिकीं, औसत भाव (प्रति क्विंटल) के साथ:
| फसल | न्यूनतम | अधिकतम | औसत भाव |
|---|---|---|---|
| Arecanut(Betelnut/Supari) | ₹21,500 | ₹26,000 | ₹23,367 |
| Same/Savi | ₹4,000 | ₹5,000 | ₹4,000 |
| Groundnut | ₹4,219 | ₹8,809 | ₹7,166 |
| Corriander seed | ₹6,132 | ₹8,000 | ₹7,392 |
| Copra | ₹10,758 | ₹10,758 | ₹10,758 |
स्रोत: चित्रदुर्ग, कर्नाटक की Agmarknet दैनिक आवक (1 जून 2026)।
चित्रदुर्ग में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में चित्रदुर्ग में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें मक्का, मूँगफली, रागी थीं। अकेले मक्का का रकबा 1,15,626 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 34%) था, और इसकी उपज 3,317 किग्रा/हेक्टेयर कर्नाटक के औसत से 3% ज़्यादा रही। 2019-20 के बाद से सबसे बड़ा बदलाव: अरहर / तुअर का रकबा +265%, सूरजमुखी का रकबा +261%।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | कर्नाटक औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| मक्का | 1,15,626 | 3,83,515 | 3,317 | 3,234 | +21% |
| मूँगफली | 1,02,475 | 82,051 | 801 | 961 | -14% |
| रागी | 44,485 | 53,857 | 1,211 | 1,542 | -4% |
| चना / छोला | 32,071 | 21,584 | 673 | 597 | -7% |
| अरहर / तुअर | 21,083 | 10,223 | 485 | 572 | +265% |
| सूरजमुखी | 9,319 | 10,635 | 1,141 | 1,032 | +261% |
| कपास | 8,933 | 24,136 | 459 | 3,353 | -50% |
| मूंग | 3,084 | 865 | 280 | 427 | +254% |
| ज्वार | 3,038 | 3,745 | 1,232 | 1,257 | -81% |
| धान / चावल | 1,825 | 4,766 | 2,611 | 3,345 | +83% |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। कर्नाटक औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
चित्रदुर्ग का मौसम और बुवाई का समय
चित्रदुर्ग में सालाना औसतन लगभग 703 मिमी बारिश होती है, जिसका 58% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश सितंबर में (116 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना अप्रैल है (दिन का औसत 37°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत 15°C) होती हैं।
- आमतौर पर जुलाई में पहली बार महीने की बारिश 100 मिमी पार करती है, यही यहां खरीफ बुवाई का सामान्य संकेत है।
- जनवरी में भी दिन का औसत तापमान 31°C रहता है, जो गेहूँ की अच्छी पैदावार के लिए ज़्यादा गर्म है; ठंड के मौसम में गर्मी सहने वाली दलहन, तिलहन और सब्ज़ियां बेहतर रहती हैं।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 1 | 31° | 15° |
| फ़रवरी | 3 | 34° | 17° |
| मार्च | 16 | 37° | 20° |
| अप्रैल | 37 | 37° | 23° |
| मई | 82 | 35° | 22° |
| जून | 82 | 30° | 21° |
| जुलाई | 109 | 28° | 21° |
| अगस्त | 103 | 28° | 20° |
| सितंबर | 116 | 29° | 20° |
| अक्टूबर | 111 | 29° | 19° |
| नवंबर | 38 | 29° | 17° |
| दिसंबर | 5 | 29° | 15° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), चित्रदुर्ग ज़िले के केंद्र (14.3049, 76.5297) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
चित्रदुर्ग के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
चित्रदुर्ग के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
चित्रदुर्ग ज़िले में किसान योजनाएं
चित्रदुर्ग, कर्नाटक के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: