पुलवामा ज़िले में खेती: भारत का केसर का कटोरा (पंपोर)
जम्मू और कश्मीर का पुलवामा ज़िला भारत का केसर का कटोरा (पंपोर) के लिए जाना जाता है। यहां की ज़मीन झेलम, रोमशी से सिंचित होती है और मुख्यतः करेवा (झील-जनित) मिट्टी पर है, जो केसर, सेब, धान के लिए अनुकूल है। इसीलिए नीचे दी गई फसलें और योजनाएं पुलवामा की असली खेती के अनुसार चुनी गई हैं, न कि राज्य के औसत के आधार पर।
पुलवामा में सबसे अच्छी फसलें
ज़िले की मुख्य फसलें केसर, सेब, धान / चावल हैं। केसर स्थानीय अर्थव्यवस्था में अग्रणी है, इसलिए पुलवामा के किसानों को इसका भाव ध्यान से देखना चाहिए। यहां की करेवा (झील-जनित) मिट्टी विभिन्न फसलों के लिए उपयुक्त है।
पुलवामा में मिट्टी, पानी और सिंचाई
करेवा (झील-जनित) मिट्टी और झेलम, रोमशी के पानी के साथ, पुलवामा के किसानों की प्राथमिकता फसल के अनुसार सिंचाई है। ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड बताता है कि आपकी मिट्टी को कौन से पोषक तत्व चाहिए।
पुलवामा में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में पुलवामा में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें धान / चावल, सरसों / राई, मक्का थीं। अकेले धान / चावल का रकबा 10,964 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 46%) था, और इसकी उपज 2,201 किग्रा/हेक्टेयर जम्मू और कश्मीर के औसत से 11% कम रही।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | जम्मू और कश्मीर औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| धान / चावल | 10,964 | 24,134 | 2,201 | 2,482 | -8% |
| सरसों / राई | 9,569 | 7,351 | 768 | 879 | +6% |
| मक्का | 2,884 | 2,479 | 860 | 2,041 | -1% |
| गेहूँ | 292 | 145 | 496 | 2,062 | 0% |
| मूंग | 74 | 75 | 1,010 | 696 | +125% |
| अलसी | 18 | 44 | 2,478 | 2,478 | -55% |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। जम्मू और कश्मीर औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
पुलवामा का मौसम और बुवाई का समय
पुलवामा में सालाना औसतन लगभग 773 मिमी बारिश होती है, जिसका 34% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश मार्च में (104 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना जुलाई है (दिन का औसत 25°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत -8°C) होती हैं।
- सर्दियों में रातें औसतन लगभग -8°C रहती हैं, जो गेहूँ, सरसों, चना और आलू जैसी रबी फसलों के लिए पर्याप्त ठंडी हैं।
- उपग्रह आंकड़ों के अनुसार साल में लगभग 117 दिन पाला पड़ता है। आलू, फूल आने के समय सरसों और सब्ज़ी की नर्सरी को बचाएं, जैसे ठंडी रात से पहले हल्की सिंचाई करके।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 67 | 3° | -8° |
| फ़रवरी | 94 | 4° | -6° |
| मार्च | 104 | 9° | -2° |
| अप्रैल | 98 | 15° | 3° |
| मई | 58 | 20° | 8° |
| जून | 58 | 24° | 11° |
| जुलाई | 78 | 25° | 13° |
| अगस्त | 83 | 24° | 13° |
| सितंबर | 42 | 21° | 9° |
| अक्टूबर | 23 | 17° | 4° |
| नवंबर | 36 | 11° | -1° |
| दिसंबर | 32 | 6° | -5° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), पुलवामा ज़िले के केंद्र (33.949, 75.0418) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
पुलवामा के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
पुलवामा के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
पुलवामा ज़िले में किसान योजनाएं
पुलवामा, जम्मू और कश्मीर के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: