मिलीबग का नियंत्रण

लक्षण
तनों, पत्ती की गांठों, बढ़ते सिरों और पत्तियों के नीचे सफेद मोमी रूई जैसे झुंड दिखते हैं। प्रभावित हिस्से मधुस्राव और काली फफूंदी से चिपचिपे हो जाते हैं, पत्तियां सिकुड़कर गुच्छे बनाती हैं, और टहनियां बौनी तथा मुड़ी रहती हैं। तेज प्रकोप वाले पौधे सफेद लिपटे दिखते हैं और सूख सकते हैं।
नुकसान
मिलीबग (मुख्यतः फेनाकोकस सोलेनोप्सिस) भारी मात्रा में रस चूसता है और विष छोड़ता है जो बढ़वार बिगाड़ते हैं, जिससे गुच्छेदार सिरे, सिकुड़ी पत्तियां और बौनापन होता है। मधुस्राव से काली फफूंदी बढ़ती है जो प्रकाश संश्लेषण घटाती है। तेज प्रकोप बड़ा नुकसान और पौधे की मौत तक कर सकता है, और यह कीट चींटियों, हवा, औजारों और मजदूरों से तेजी से फैलता है।
जैविक और सांस्कृतिक नियंत्रण
शिकारी भृंग क्रिप्टोलेमस मॉन्ट्रूजियरी छोड़ें और एनेसियस बम्बावाली जैसे परजीवी सहित मित्र कीट बचाएं। झुंडों पर नीम तेल 5 मिली प्रति लीटर या फिश ऑयल रोजिन साबुन छिड़कें। तेज प्रकोप वाले पौधे के हिस्से हटाकर जलाएं। मिलीबग की रक्षा करने वाली चींटियां रोकें, और फैलाव रोकने के लिए औजार तथा जूते साफ रखें।
रासायनिक नियंत्रण
पूरे खेत के बजाय प्रभावित धब्बों पर जल्दी स्पॉट छिड़काव करें, क्योंकि मोमी परत छिड़काव को रोकती है। प्रोफेनोफॉस, बुप्रोफेजिन या थायामेथोक्साम जैसी सिफारिश की गई दवाओं को फैलाने वाले पदार्थ के साथ प्रयोग करें। खेत की मेड़ और मेजबान खरपतवार पर भी छिड़कें। हमेशा लेबल पढ़ें और मानें, कटाई पूर्व अंतराल का पालन करें, और छिड़काव से पहले अपने केवीके या योग्य कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
हमेशा उत्पाद के लेबल, अनुशंसित प्रतीक्षा अवधि (PHI) और अपने KVK या कृषि विशेषज्ञ की सलाह का पालन करें। कीटनाशक नियम बदलते रहते हैं, उपयोग से पहले पुष्टि करें।
रोकथाम
साफ, मिलीबग मुक्त पौध और औजार प्रयोग करें, और खेत की मेड़ तथा खरपतवार जांचें जहां यह कीट बचता है। कटाई के बाद फसल अवशेष और गाजर घास जैसी मेजबान खरपतवार नष्ट करें। चींटियां रोकें, प्रभावित सामग्री एक खेत से दूसरे में न ले जाएं, और नियमित निगरानी करें ताकि स्पॉट उपचार शुरुआती धब्बों को फैलने से पहले रोक सके।
सवाल-जवाब
मिलीबग को छिड़काव से काबू करना इतना मुश्किल क्यों है?
मिलीबग एक खेत से दूसरे में इतनी तेजी से कैसे फैलता है?
कपास के मिलीबग को कौन सा मित्र कीट काबू करता है?
अपनी फसल की समस्या पर किसानों से सलाह लें
समुदाय में पूछें