अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
जिंक सल्फेट धान में जिंक की कमी का आम इलाज है, जिसे उत्तर भारत में खैरा रोग कहते हैं। यह दो ग्रेड में बिकता है: 21% जिंक (हेप्टाहाइड्रेट) और 33% जिंक (मोनोहाइड्रेट)। 33% ग्रेड के लिए एक कंपनी का लेबल धान और गेहूँ में बुवाई या रोपाई के समय, या 15 दिन बाद, 5 किलो प्रति एकड़ की सलाह देता है; धान के ट्रायल में जिंक सल्फेट की मात्रा 12.5 किलो से 25 किलो प्रति हेक्टेयर और क्षारीय (सोडिक) मिट्टी में 40 किलो तक रही।
जिंक सल्फेट का कोई सरकारी दाम तय नहीं है। दुकानदार से पैक पर छपा MRP और ग्रेड पूछें।
ग्रेड और प्रति बोरी जिंक
PAU के शोधकर्ता जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट (ZnSO4.7H2O) को 21% जिंक और मोनोहाइड्रेट (ZnSO4.H2O) को 33% जिंक बताते हैं। ग्रेड तय करता है कि एक किलो में कितना जिंक है।
| ग्रेड | 10 किलो में जिंक | 25 किलो में जिंक | 5 किलो जिंक के लिए मात्रा |
|---|---|---|---|
| 21% हेप्टाहाइड्रेट | 2.1 किलो | 5.25 किलो | 23.8 किलो (5 / 0.21) |
| 33% मोनोहाइड्रेट | 3.3 किलो | 8.25 किलो | 15.2 किलो (5 / 0.33) |
दोनों ग्रेड किलो के बदले किलो बराबर नहीं हैं। 33% की बोरी में 21% की बोरी से 1.57 गुना जिंक है (33 / 21), इसलिए जिंक का दाम बराबर रखने पर इसकी कीमत प्रति किलो करीब 1.57 गुना होनी चाहिए।
खैरा: धान में जिंक की कमी कैसी दिखती है
IRRI की राइस नॉलेज बैंक ये लक्षण बताती है, जो रोपाई के दो से चार हफ्ते बाद दिखते हैं:
- रुकी हुई बढ़वार वाले पौधों की ऊपरी पत्तियों पर धूल जैसे भूरे धब्बे
- असमान बढ़वार, और जगह-जगह कमजोर जमे हुए पौधों के चकत्ते
- पत्तियों की मध्य शिरा का पीला पड़ना (क्लोरोसिस), ज्यादातर नई पत्तियों के आधार के पास, और कभी-कभी शिरा पर सफेद रेखा
- निचली पत्तियों पर भूरे धब्बे और धारियाँ जो आपस में मिल जाती हैं; गंभीर हालत में कल्ले कम बनते हैं या रुक जाते हैं और पकना देर से होता है
हल्की कमी में पौधे 4 से 6 हफ्ते में सँभल सकते हैं, पर पकना देर से होता है और उपज कम रहती है। यही लक्षण लोहे की कमी, लोहे की अधिकता, ग्रासी स्टंट वायरस या टंग्रो वायरस से भी आ सकते हैं, इसलिए पुष्टि के लिए मिट्टी और पौधे की जाँच ही रास्ता है। IRRI कारणों में क्षारीय या सोडिक मिट्टी, पानी भरना, ज्यादा फॉस्फेट, भारी जैविक खाद और रेतीली मिट्टी गिनाती है। PAU ने बताया कि पंजाब की गहन खेती वाली 54.5% मिट्टी में जिंक की कमी है, और उसके ट्रायल में मिट्टी जाँच मान (DTPA-Zn) 0.6 mg प्रति किलो से नीचे होने पर खेत को कमी वाला माना गया। सॉइल हेल्थ कार्ड की जाँच से खेत में जिंक का स्तर पता चलता है।
शोध और कंपनी की सलाह में मिली मात्राएँ
| फसल और स्रोत | मात्रा | नतीजा या टिप्पणी |
|---|---|---|
| धान, SPIC (कंपनी, 33% ग्रेड) | रोपाई के समय या 15 दिन बाद 5 किलो प्रति एकड़ | निर्माता की सिफारिश, ट्रायल नहीं |
| धान, ANGRAU तिरुपति, 12 किसान खेत, 2019-21 | 25 किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर, बेसल | 2019-20 में जिंक के बिना 5,790 के मुकाबले 6,339 किलो प्रति हेक्टेयर; शुद्ध आय ₹85,948 के मुकाबले ₹94,577 प्रति हेक्टेयर |
| धान, ANGRAU अनकापल्ले, 2012 और 2013 | मिट्टी में 12.5 किलो प्रति हेक्टेयर और रोपाई के 21 व 60 दिन बाद दो बार पत्तों पर छिड़काव | सबसे ज्यादा उपज, 5.41 और 5.26 टन प्रति हेक्टेयर; छिड़काव की सांद्रता सार में नहीं दी गई |
| सोडिक मिट्टी में धान, ICAR पत्रिका का अध्ययन | मानक 40 किलो प्रति हेक्टेयर; गोबर की खाद या प्रेसमड के साथ 20 किलो | जैविक पदार्थ में मिलाया 20 किलो अकेले 40 किलो के बराबर रहा |
| गेहूँ, SPIC (कंपनी, 33% ग्रेड) | बुवाई के समय या 15 दिन बाद 5 किलो प्रति एकड़ | निर्माता की सिफारिश, ट्रायल नहीं |
| मक्का | यहाँ कोई मात्रा नहीं दी गई | ICAR या किसी राज्य विश्वविद्यालय की मक्का की मात्रा यहाँ उद्धृत नहीं है; मिट्टी जाँच के बाद KVK से पूछें |
ANGRAU और ICAR के ट्रायल में इस्तेमाल हुए जिंक सल्फेट का ग्रेड सार में नहीं बताया गया, इसलिए 25 किलो में जिंक की मात्रा इस पर निर्भर है कि वह 21% (5.25 किलो जिंक) था या 33% (8.25 किलो)। पत्तों पर छिड़काव की सांद्रता यहाँ नहीं दी गई है; छिड़कने से पहले KVK से पूछें।
फॉस्फेट वाली खाद के साथ क्यों न मिलाएँ
- IRRI बड़ी मात्रा में फॉस्फेट देने के बाद जिंक फॉस्फेट बनने को जिंक की कमी का कारण बताती है। इस तरह बँधा हुआ जिंक फसल को नहीं मिलता।
- खेत में जिंक सल्फेट को DAP के साथ मिलाने का कोई पुष्ट नियम नहीं है। इसे अलग से देने पर यह सवाल ही नहीं उठता।
- फैक्टरी में बनी जिंक-युक्त DAP और SSP अलग उत्पाद हैं। पंजाब के पाँच किसान खेतों में PAU के ट्रायल में जिंक-युक्त DAP से गेहूँ के दाने की उपज केवल नाइट्रोजन और पोटाश की तुलना में 4.1 से 5.8% बढ़ी, और जिंक-युक्त DAP या SSP के साथ जिंक छिड़काव से धान के दाने की उपज करीब 14.4 से 16.5% बढ़ी। PIB के अनुसार जिंक-युक्त P&K ग्रेड पर ₹500 प्रति टन की अतिरिक्त सब्सिडी मिलती है।
मिलावट की पहचान
- 33% जिंक सल्फेट के लिए एक कंपनी (SPIC) का विनिर्देश कम से कम 33% जिंक, कम से कम 15% सल्फेट सल्फर, ज्यादा से ज्यादा 1% पानी में न घुलने वाला पदार्थ, ज्यादा से ज्यादा 1% लोहा, 5% घोल का pH 4 से कम नहीं, और कैडमियम (0.0025%) व आर्सेनिक (0.01%) की सख्त सीमा माँगता है। इन्हें केवल प्रयोगशाला जाँच सकती है।
- किसी सरकारी स्रोत की घर पर करने लायक भरोसेमंद जाँच ज्ञात नहीं है, इसलिए यहाँ कोई नहीं दी गई। ग्रेड, निर्माता और बैच छपी सीलबंद बोरी और बिल कम से कम चाहिए। ऊपर के ग्रेड अनुपात से न मिलने वाले दाम पर शक करें।
- शक वाली बोरी को बिल के साथ सीलबंद रखें और जिला कृषि कार्यालय में बताएँ। दूसरे उर्वरकों के लिए उर्वरक गाइड और उर्वरक के दाम देखें।
स्रोत
- सैनी, ढेरी और सिंह, Indian Journal of Agricultural Sciences 91(7), 2021 (PAU, धान-गेहूँ में जिंक)
- SPIC जिंक सल्फेट 33% उत्पाद पेज (कंपनी का विनिर्देश और मात्रा)
- IRRI राइस नॉलेज बैंक, जिंक की कमी
- धान में जिंक के प्रयोग का उपज, अर्थशास्त्र और मिट्टी के जिंक पर असर (ANGRAU, तिरुपति)
- Oryza (ICAR पत्रिका), धान के दाने में जिंक वृद्धि (ANGRAU, अनकापल्ले)
- Indian Journal of Agricultural Sciences, सोडिक मिट्टी में धान और जिंक सल्फेट
- NBS दरों पर PIB बैकग्राउंडर, 5 जनवरी 2026