धान के लिए खाद और उर्वरक
धान भारत की प्रमुख खरीफ फसल है और नाइट्रोजन की अधिक माँग करती है, पर इसका बड़ा हिस्सा पानी और हवा में चला जाता है। अच्छी पैदावार की कुंजी नाइट्रोजन को कल्ले निकलने, बाली बनने और गाभा अवस्था

परिचय
धान भारत की प्रमुख खरीफ फसल है और नाइट्रोजन की अधिक माँग करती है, पर इसका बड़ा हिस्सा पानी और हवा में चला जाता है। अच्छी पैदावार की कुंजी नाइट्रोजन को कल्ले निकलने, बाली बनने और गाभा अवस्था में बाँटकर देना है, पूरी आधार खुराक के रूप में नहीं। फॉस्फोरस और पोटाश मुख्यतः आखिरी पडलिंग पर दिए जाते हैं। कई धान वाली मिट्टी, खासकर धान-गेहूँ क्षेत्र में, ज़िंक की कमी रखती हैं, और जलमग्न मिट्टी में गंधक और लोहे की समस्या भी दिख सकती है। ICAR और राज्य कृषि विश्वविद्यालय संतुलित N:P:K सीमा देते हैं, जिसे सीधी बुवाई या रोपाई, किस्म और मिट्टी के अनुसार समायोजित करें। नीचे की मात्राओं को मार्गदर्शन मानें और हमेशा अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड या ताज़ा मिट्टी जाँच और नज़दीकी KVK के अनुसार बदलें।
धान के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
मध्यम अवधि की रोपाई धान के लिए ICAR की एक सामान्य सीमा लगभग 100 से 120 कि.ग्रा. N, 40 से 60 कि.ग्रा. P2O5 और 40 से 60 कि.ग्रा. K2O प्रति हेक्टेयर है, यानी लगभग 40 से 48 कि.ग्रा. N, 16 से 24 कि.ग्रा. P2O5 और 16 से 24 कि.ग्रा. K2O प्रति एकड़। खाद के रूप में प्रति हेक्टेयर यह लगभग 100 से 130 कि.ग्रा. डीएपी, 160 से 200 कि.ग्रा. यूरिया और 67 से 100 कि.ग्रा. एमओपी है, या प्रति एकड़ लगभग 40 से 52 कि.ग्रा. डीएपी, 65 से 80 कि.ग्रा. यूरिया और 27 से 40 कि.ग्रा. एमओपी। संकर और अधिक उपज देने वाली किस्मों को इस सीमा का ऊपरी छोर चाहिए। डीएपी से कुछ नाइट्रोजन मिलने पर यूरिया घटाएँ। ये केवल सामान्य सीमाएँ हैं। हमेशा अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड या ताज़ा मिट्टी जाँच के अनुसार बदलें और नज़दीकी KVK से पुष्टि करें।
डालने का समय और तरीका
आखिरी पडलिंग पर पूरा फॉस्फोरस, पूरा पोटाश और लगभग एक चौथाई से एक तिहाई नाइट्रोजन आधार के रूप में डालें। अगली नाइट्रोजन सक्रिय कल्ले निकलने पर, रोपाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद, और तीसरी बाली बनने की अवस्था पर, रोपाई के लगभग 40 से 45 दिन बाद दें। हल्की मिट्टी में गाभा अवस्था पर एक चौथी छोटी खुराक मदद करती है। सीधी बुवाई धान में आधार नाइट्रोजन तीन पत्ती अवस्था तक टालें ताकि नुकसान घटे। पत्ती रंग चार्ट का उपयोग या ज़रूरत दिखने पर ही नाइट्रोजन देना दक्षता बहुत बढ़ाता है।
जैविक और जैव उर्वरक
खेत तैयारी के समय 8 से 12 टन गोबर खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर, यानी लगभग 3 से 5 टन प्रति एकड़, रोपाई से कम से कम दो-तीन सप्ताह पहले मिलाएँ। धान से पहले ढैंचा या सनई की हरी खाद जोतने से 40 से 60 कि.ग्रा. नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर मिलती है और मिट्टी सुधरती है। 2 से 3 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर अच्छा विकल्प है। पौध की जड़ या बीज को एज़ोस्पिरिलम और पीएसबी जैव उर्वरकों से उपचारित करें। जलमग्न खेतों में नीली-हरी काई और अज़ोला भी नाइट्रोजन स्थिर करते हैं और खड़े पानी में यूरिया घटा सकते हैं।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
ज़िंक की कमी नीची ज़मीन और धान-गेहूँ मिट्टी में बहुत आम है। यह रोपाई के लगभग दो से चार सप्ताह बाद नीचे की पत्तियों पर जंग जैसे भूरे धब्बों और कांसी रंग के रूप में दिखती है, साथ ही बौनी और धब्बेदार बढ़त, जिसे अक्सर खैरा कहते हैं। जहाँ मिट्टी जाँच में कमी हो, आधार के रूप में लगभग 25 कि.ग्रा. ज़िंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर, यानी लगभग 10 कि.ग्रा. प्रति एकड़ डालें, या जल्दी ठीक करने हेतु छिड़काव करें। लोहे की कमी, जो नई पत्तियों के पीलेपन के रूप में दिखती है, ऐरोबिक और ऊँची धान में होती है। गंधक की कमी नई पत्तियों के पीलेपन के रूप में दिखती है और जिप्सम या सिंगल सुपर फॉस्फेट से ठीक होती है।
सुझाव और सावधानियां
नाइट्रोजन को तीन या चार खुराकों में बाँटें, क्योंकि जलमग्न मिट्टी रिसाव और गैस के रूप में नाइट्रोजन जल्दी खोती है। नीम लेपित यूरिया चुनें, जो नाइट्रोजन धीरे छोड़ती है और दक्षता बढ़ाती है। यूरिया को खड़े पानी पर बिखेरने के बजाय कीचड़ में मिलाएँ, क्योंकि पानी में यह आसानी से नष्ट होती है। पत्ती रंग चार्ट से ज़रूरत होने पर ही नाइट्रोजन दें। यूरिया का अधिक प्रयोग न करें, क्योंकि अधिकता से पौधे मुलायम होकर गिरते हैं और झुलसा तथा भूरा फुदका बढ़ता है, और अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड का पालन करें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
धान को यूरिया की कितनी खुराकें देनी चाहिए?
धान में खैरा रोग किससे होता है?
क्या धान में खड़े पानी पर यूरिया बिखेरें?
धान के लिए कितनी गोबर खाद डालें?
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