मसूर के लिए खाद और उर्वरक
मसूर एक रबी दलहन है जो राइजोबियम गाँठों से नाइट्रोजन जमा करती है, इसलिए इसे नाइट्रोजन की केवल थोड़ी शुरुआती मात्रा चाहिए पर जड़ और गाँठ की बढ़त के लिए फॉस्फोरस से जोरदार प्रतिक्रिया देती है।

परिचय
मसूर एक रबी दलहन है जो राइजोबियम गाँठों से नाइट्रोजन जमा करती है, इसलिए इसे नाइट्रोजन की केवल थोड़ी शुरुआती मात्रा चाहिए पर जड़ और गाँठ की बढ़त के लिए फॉस्फोरस से जोरदार प्रतिक्रिया देती है। अच्छा राइजोबियम और पीएसबी बीज उपचार फसल की अधिकांश नाइट्रोजन देता है और खाद बचाता है। चूँकि मसूर ज्यादातर बची नमी पर उगाई जाती है, लगभग पूरी खाद बुआई के समय आधार खुराक में दी जाती है। ज्यादा नाइट्रोजन गाँठें घटाती है और पत्तेदार पौधे देती है जिनमें फलियाँ कम होती हैं। मसूर अगली फसल के लिए मिट्टी की उर्वरता भी सुधारती है। खाद हमेशा मिट्टी जाँच या मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार तय करें और स्थानीय दर केवीके से पक्की करें।
मसूर के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
सामान्य अनुशंसित मात्रा लगभग 8 किलो नाइट्रोजन, 16 से 20 किलो फॉस्फोरस (P2O5) और 8 किलो पोटाश (K2O) प्रति एकड़ है, जो लगभग 20 किलो नाइट्रोजन, 40 से 50 किलो फॉस्फोरस और 20 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर बैठती है। दलहन की तरह नाइट्रोजन कम और फॉस्फोरस ज्यादा रखा जाता है। कमी वाली मिट्टी में 8 किलो प्रति एकड़ सल्फर मदद करता है। पोटाश केवल तभी डालें जब मिट्टी जाँच में कमी दिखे। ये केवल सामान्य श्रेणियाँ हैं। मिट्टी जाँच या मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाएँ और केवीके की सलाह के अनुसार मात्रा डालें, क्योंकि जरूरत मिट्टी और क्षेत्र के अनुसार बदलती है।
डालने का समय और तरीका
मसूर को पूरी खाद बुआई के समय एक ही आधार खुराक में चाहिए। पूरी नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर बुआई से पहले बीज की कूँड़ में या बीज के ठीक नीचे डालें ताकि जड़ें इसे जल्दी पा सकें। ऊपर से नाइट्रोजन देने की जरूरत नहीं क्योंकि बाद में गाँठें नाइट्रोजन देती हैं। सिंचित फसल में फूल और दाना भरने के समय 2 प्रतिशत यूरिया या डीएपी का छिड़काव दाना बनने में सुधार कर सकता है, पर खड़ी फसल पर ज्यादा नाइट्रोजन न बिखेरें।
जैविक और जैव उर्वरक
बुआई से पहले 4 से 5 टन प्रति एकड़ अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट, यानी लगभग 10 टन प्रति हेक्टेयर, मिट्टी में मिलाएँ। बीज को पहले फफूँदनाशक से, फिर मसूर के राइजोबियम 5 ग्राम प्रति किलो बीज और पीएसबी 5 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करें, छाया में सुखाकर उसी दिन बोएँ। यह अधिकांश नाइट्रोजन देता है और मिट्टी की फॉस्फोरस उपलब्ध करता है। 1 टन प्रति एकड़ केंचुआ खाद गोबर खाद का एक हिस्सा बदल सकती है और बची नमी पर फसल को मदद करती है।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
मसूर सल्फर पर और कमी वाली मिट्टी में जिंक तथा लोहे पर प्रतिक्रिया देती है। जरूरत होने पर जिप्सम से 8 किलो सल्फर प्रति एकड़ दें। जिंक की कमी में निचली पत्तियों की नसों के बीच पीलापन और पौधे का बौनापन दिखता है, ऐसे में 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ डालें या 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट का छिड़काव करें। चूना वाली मिट्टी में लोहे की कमी से नई पत्तियाँ पीली होती हैं; 0.5 प्रतिशत फेरस सल्फेट का छिड़काव करें। बोरॉन केवल तभी डालें जब मिट्टी जाँच कमी की पुष्टि करे, क्योंकि अधिक बोरॉन फसल को नुकसान पहुँचाता है।
सुझाव और सावधानियां
बीज को पहले फफूँदनाशक, फिर राइजोबियम और पीएसबी से उपचारित करें और उसी दिन बोएँ। नाइट्रोजन का अधिक उपयोग न करें; ज्यादा यूरिया गाँठ बनना कमजोर करती है और फलियों के बजाय पत्ते देती है। बची नमी पर अच्छे उपयोग के लिए फॉस्फोरस को बीज के पास रखें। जलभराव से बचें क्योंकि यह गाँठों को नष्ट करता है। हर दो से तीन साल में मिट्टी जाँच कराएँ और अपने क्षेत्र की मात्रा के लिए केवीके का पालन करें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
मसूर को कितनी खाद चाहिए?
क्या मसूर में खाद के असर के लिए सिंचाई जरूरी है?
मसूर के बीज को राइजोबियम से क्यों उपचारित करें?
क्या मसूर में जिंक डालें?
अपनी मिट्टी और फसल पर सलाह लें
किसानों से पूछें खाद उपलब्धता