चना के लिए खाद और उर्वरक
चना एक रबी दलहन है जो अपनी जड़ों की गाँठों में रहने वाले राइजोबियम जीवाणुओं की मदद से हवा से नाइट्रोजन स्वयं जमा करता है। इसी कारण चने को नाइट्रोजन की बहुत कम शुरुआती मात्रा चाहिए, लेकिन फॉस

परिचय
चना एक रबी दलहन है जो अपनी जड़ों की गाँठों में रहने वाले राइजोबियम जीवाणुओं की मदद से हवा से नाइट्रोजन स्वयं जमा करता है। इसी कारण चने को नाइट्रोजन की बहुत कम शुरुआती मात्रा चाहिए, लेकिन फॉस्फोरस से यह बहुत अच्छा उत्पादन देता है क्योंकि फॉस्फोरस जड़ और गाँठ की बढ़त बढ़ाता है। राइजोबियम और पीएसबी से बीज उपचार करने पर फसल की अधिकांश नाइट्रोजन की पूर्ति हो जाती है और 20 से 25 प्रतिशत नाइट्रोजन खाद की बचत होती है। ज्यादा नाइट्रोजन देने से गाँठें कम बनती हैं और फसल फलियों के बजाय पत्तों में बढ़ जाती है। खाद की मात्रा हमेशा मिट्टी जाँच या मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार तय करें और स्थानीय दर अपने नजदीकी केवीके से पक्की करें।
चना के लिए अनुशंसित NPK मात्रा
सामान्य अनुशंसित मात्रा लगभग 6 से 8 किलो नाइट्रोजन, 16 से 20 किलो फॉस्फोरस (P2O5) और 8 किलो पोटाश (K2O) प्रति एकड़ है, जो लगभग 15 से 20 किलो नाइट्रोजन, 40 से 50 किलो फॉस्फोरस और 20 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर बैठती है। दलहन की तरह यहाँ नाइट्रोजन कम और फॉस्फोरस ज्यादा रखा जाता है। पोटाश केवल तभी डालें जब मिट्टी जाँच में इसकी कमी दिखे। ये केवल सामान्य श्रेणियाँ हैं। मिट्टी जाँच या मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाएँ और अपने केवीके की सलाह के अनुसार मात्रा डालें, क्योंकि जरूरत मिट्टी की उर्वरता और क्षेत्र के अनुसार बदलती है।
डालने का समय और तरीका
चने को लगभग पूरी खाद बुआई के समय आधार (बेसल) खुराक के रूप में चाहिए। पूरी नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश बुआई से पहले बीज की कूँड़ में या बीज के ठीक नीचे डालें ताकि जड़ें इसे जल्दी पा सकें। ऊपर से नाइट्रोजन छिड़कने की जरूरत नहीं क्योंकि बाद में गाँठें नाइट्रोजन देती हैं। लंबी अवधि या सिंचित फसल में फूल और दाना भरने की अवस्था पर, बुआई के लगभग 70 दिन बाद, 2 प्रतिशत यूरिया या डीएपी का छिड़काव दाना भरने में मदद करता है। खड़ी फसल पर अतिरिक्त नाइट्रोजन न बिखेरें।
जैविक और जैव उर्वरक
बुआई से पहले 5 टन प्रति एकड़ अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट, यानी लगभग 10 से 12 टन प्रति हेक्टेयर, मिट्टी में मिलाएँ। सबसे जरूरी काम है बीज उपचार: पहले बीज को फफूँदनाशक से उपचारित करें, फिर चने के राइजोबियम कल्चर से लगभग 5 ग्राम प्रति किलो बीज और पीएसबी (फॉस्फोरस घोलक जीवाणु) 5 ग्राम प्रति किलो बीज से लेप करें, छाया में सुखाकर उसी दिन बोएँ। राइजोबियम नाइट्रोजन देता है और पीएसबी मिट्टी की फॉस्फोरस को घुलनशील बनाता है। 1 से 2 टन प्रति एकड़ केंचुआ खाद गोबर खाद के एक हिस्से का बढ़िया विकल्प है।
सूक्ष्म पोषक और कमी के लक्षण
चना अक्सर सल्फर, जिंक और कभी-कभी बोरॉन पर अच्छा प्रतिक्रिया देता है। जहाँ मिट्टी में कमी हो वहाँ जिप्सम से 8 से 10 किलो सल्फर प्रति एकड़ दें। जिंक की कमी में बीच की पत्तियों की नसों के बीच पीलापन और पौधे का बौनापन दिखता है, ऐसे में 8 से 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ डालें या 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट का छिड़काव करें। बोरॉन की कमी से फूल और फली कम बनते हैं; बोरॉन केवल तभी डालें जब मिट्टी जाँच कमी की पुष्टि करे, क्योंकि अधिक बोरॉन हानिकारक है। कुछ क्षेत्रों में थोड़ा अमोनियम मॉलिब्डेट गाँठ बनने में मदद करता है।
सुझाव और सावधानियां
बीज को हमेशा पहले फफूँदनाशक, फिर राइजोबियम और पीएसबी से उपचारित करें और उसी दिन बोएँ। नाइट्रोजन का अधिक उपयोग न करें; ज्यादा यूरिया गाँठें घटाती है और फलियों के बजाय पत्ते देती है। फॉस्फोरस को बिखेरने के बजाय बीज के पास रखें ताकि अच्छी तरह उपयोग हो। जलभराव से बचें क्योंकि यह गाँठों को नष्ट करता है। हर दो से तीन साल में मिट्टी जाँच कराएँ और अपने गाँव की सही मात्रा के लिए केवीके पर भरोसा करें।
ये सामान्य अनुशंसाएं हैं। सही मात्रा के लिए अपने मृदा स्वास्थ्य कार्ड / मिट्टी जांच और स्थानीय KVK की सलाह लें। ज़रूरत से ज्यादा यूरिया न डालें।
सवाल-जवाब
क्या चने को यूरिया चाहिए?
चने में प्रति एकड़ कितनी डीएपी डालें?
चने के बीज को राइजोबियम से क्यों उपचारित करें?
चने में खाद कब डालें?
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