उत्तर 24 परगना ज़िले में खेती: निचला गंगा का मैदान
पश्चिम बंगाल मुख्य रूप से निचला गंगा का मैदान कृषि-जलवायु क्षेत्र में आता है (गर्म आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय, पूरे क्षेत्र में सालाना 1300-1600mm बारिश)। इस क्षेत्र में गंगा डेल्टा की धान-जूट पट्टी, सघन फसल प्रणाली आम है, मिट्टी ज़्यादातर जलोढ़, डेल्टाई और लाल-लेटराइट है और आमतौर पर धान / चावल, जूट, आलू, तिलहन, सब्जियाँ, दालें उगाई जाती हैं।
ये पूरे कृषि-जलवायु क्षेत्र के तथ्य हैं (ICAR / योजना आयोग वर्गीकरण), उत्तर 24 परगना की फसल गणना नहीं। उत्तर 24 परगना की अपनी मंडियों में असल में क्या बिकता है, वह नीचे है। मौसम वाले हिस्से में उत्तर 24 परगना की अपनी मासिक बारिश और तापमान दिए गए हैं।
सिंचाई और मिट्टी
ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। एक ही क्षेत्र में भी खेत-खेत की मिट्टी अलग होती है, इसलिए मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही आपके खेत की सही ज़रूरत बताता है।
उत्तर 24 परगना में मंडी भाव
उत्तर 24 परगना की मंडियों (Habra APMC) में 1 जून 2026 ये फसलें बिकीं, औसत भाव (प्रति क्विंटल) के साथ:
| फसल | न्यूनतम | अधिकतम | औसत भाव |
|---|---|---|---|
| Green Chilli | ₹5,500 | ₹5,500 | ₹5,500 |
| Onion | ₹1,700 | ₹1,800 | ₹1,700 |
| Bitter gourd | ₹3,000 | ₹3,000 | ₹3,000 |
| Papaya(Raw) | ₹1,700 | ₹1,900 | ₹1,800 |
स्रोत: उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल की Agmarknet दैनिक आवक (1 जून 2026)।
उत्तर 24 परगना में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में उत्तर 24 परगना में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें धान / चावल, जूट, सरसों / राई थीं। अकेले धान / चावल का रकबा 2,31,737 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 67%) था, और इसकी उपज 2,756 किग्रा/हेक्टेयर पश्चिम बंगाल के औसत से 4% कम रही। 2019-20 के बाद से सबसे बड़ा बदलाव: मसूर का रकबा -23%।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | पश्चिम बंगाल औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| धान / चावल | 2,31,737 | 6,38,770 | 2,756 | 2,865 | +2% |
| जूट | 49,108 | 10,75,439 | 3,942 | 16,378 | -18% |
| सरसों / राई | 33,532 | 46,013 | 1,372 | 1,250 | -14% |
| तिल | 17,778 | 23,938 | 1,346 | 1,014 | +18% |
| मसूर | 9,483 | 8,198 | 864 | 915 | -23% |
| उड़द | 3,412 | 2,316 | 679 | 742 | -16% |
| गन्ना | 1,168 | 59,967 | 51,342 | 66,580 | -15% |
| मूंग | 1,091 | 1,834 | 1,681 | 875 | +37% |
| मक्का | 399 | 2,099 | 5,263 | 6,999 | -15% |
| मूँगफली | 378 | 966 | 2,556 | 3,045 | -75% |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। पश्चिम बंगाल औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
उत्तर 24 परगना का मौसम और बुवाई का समय
उत्तर 24 परगना में सालाना औसतन लगभग 1719 मिमी बारिश होती है, जिसका 72% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश जुलाई में (370 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना अप्रैल है (दिन का औसत 38°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत 11°C) होती हैं।
- आमतौर पर मई में पहली बार महीने की बारिश 100 मिमी पार करती है, यही यहां खरीफ बुवाई का सामान्य संकेत है।
- सालाना लगभग 1719 मिमी बारिश के साथ मौसम में पानी भरपूर है; सिंचाई जितना ही खेत से पानी निकासी भी ज़रूरी है, और धान व बागानी फसलें यहां के मौसम के अनुकूल हैं।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 12 | 25° | 11° |
| फ़रवरी | 22 | 31° | 15° |
| मार्च | 34 | 35° | 20° |
| अप्रैल | 55 | 38° | 24° |
| मई | 161 | 36° | 26° |
| जून | 256 | 32° | 27° |
| जुलाई | 370 | 31° | 26° |
| अगस्त | 338 | 31° | 26° |
| सितंबर | 266 | 30° | 25° |
| अक्टूबर | 165 | 30° | 23° |
| नवंबर | 29 | 28° | 17° |
| दिसंबर | 11 | 25° | 12° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), उत्तर 24 परगना ज़िले के केंद्र (22.6927, 88.6626) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
उत्तर 24 परगना के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
उत्तर 24 परगना के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
- कोलकाता - 35 km
- दक्षिण 24 परगना - 59 km
- हावड़ा - 68 km
- हुगली - 71 km
- नदिया - 89 km
- पूर्व बर्धमान - 109 km
उत्तर 24 परगना ज़िले में किसान योजनाएं
उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: