रानीपेट ज़िले में खेती: पूर्वी तटीय मैदान और पहाड़ियाँ
तमिलनाडु मुख्य रूप से पूर्वी तटीय मैदान और पहाड़ियाँ कृषि-जलवायु क्षेत्र में आता है (गर्म आर्द्र, पूरे क्षेत्र में सालाना 780-1300mm बारिश)। इस क्षेत्र में डेल्टा के धान के कटोरे (कावेरी, गोदावरी, महानदी), नारियल और मिर्च के साथ आम है, मिट्टी ज़्यादातर तटीय जलोढ़ और लाल दोमट है और आमतौर पर धान / चावल, गन्ना, मूँगफली, नारियल, मिर्च, तिलहन उगाई जाती हैं।
ये पूरे कृषि-जलवायु क्षेत्र के तथ्य हैं (ICAR / योजना आयोग वर्गीकरण), रानीपेट की फसल गणना नहीं। रानीपेट की अपनी मंडियों में असल में क्या बिकता है, वह नीचे है। मौसम वाले हिस्से में रानीपेट की अपनी मासिक बारिश और तापमान दिए गए हैं।
सिंचाई और मिट्टी
ड्रिप और सोलर पंप सब्सिडी से पानी और बिजली की लागत घटती है। एक ही क्षेत्र में भी खेत-खेत की मिट्टी अलग होती है, इसलिए मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड ही आपके खेत की सही ज़रूरत बताता है।
रानीपेट में मंडी भाव
रानीपेट की मंडियों (Ranipettai(Uzhavar Sandhai ), Arcot(Uzhavar Sandhai )) में 1 जून 2026 ये फसलें बिकीं, औसत भाव (प्रति क्विंटल) के साथ:
| फसल | न्यूनतम | अधिकतम | औसत भाव |
|---|---|---|---|
| Bottle gourd | ₹3,000 | ₹3,000 | ₹3,000 |
| Cluster beans | ₹3,000 | ₹4,000 | ₹3,500 |
| Coriander(Leaves) | ₹4,000 | ₹4,000 | ₹4,000 |
| Tomato | ₹2,500 | ₹3,500 | ₹3,100 |
| Potato | ₹2,300 | ₹2,500 | ₹2,400 |
| Pumpkin | ₹2,500 | ₹3,000 | ₹2,750 |
| Cabbage | ₹4,000 | ₹4,000 | ₹4,000 |
| Knool Khol | ₹4,000 | ₹4,000 | ₹4,000 |
| Papaya | ₹3,000 | ₹3,500 | ₹3,125 |
| Ashgourd | ₹2,500 | ₹2,500 | ₹2,500 |
स्रोत: रानीपेट, तमिलनाडु की Agmarknet दैनिक आवक (1 जून 2026)।
रानीपेट में असल में क्या उगाया जाता है: सरकारी फसल आंकड़े
2024-25 में रानीपेट में सबसे ज़्यादा रकबे वाली फसलें धान / चावल, मूँगफली, उड़द थीं। अकेले धान / चावल का रकबा 57,046 हेक्टेयर (नीचे दी गई फसलों के कुल रकबे का 80%) था, और इसकी उपज 3,588 किग्रा/हेक्टेयर तमिलनाडु के औसत से 9% ज़्यादा रही।
| फसल | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | उपज (किग्रा/हे.) | तमिलनाडु औसत उपज | रकबा बदलाव (2019-20 से) |
|---|---|---|---|---|---|
| धान / चावल | 57,046 | 2,04,668 | 3,588 | 3,305 | - |
| मूँगफली | 9,003 | 17,602 | 1,955 | 2,294 | - |
| उड़द | 2,061 | 951 | 461 | 470 | - |
| अरहर / तुअर | 1,407 | 708 | 503 | 677 | - |
| गन्ना | 1,059 | 1,02,951 | 97,212 | 1,02,001 | - |
| मूंग | 345 | 182 | 527 | 431 | - |
| रागी | 308 | 1,159 | 3,765 | 3,765 | - |
| तिल | 101 | 48 | 478 | 505 | - |
| ज्वार | 46 | 59 | 1,264 | 1,211 | - |
| बाजरा | 32 | 115 | 3,621 | 2,652 | - |
स्रोत: अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (अंतिम अनुमान), UPAg के माध्यम से। खेत फसलों के आंकड़े; सब्ज़ी, फल और मसाले इसमें शामिल नहीं। तमिलनाडु औसत = राज्य के सभी ज़िलों के अनुमानों का जोड़।
रानीपेट का मौसम और बुवाई का समय
रानीपेट में सालाना औसतन लगभग 1058 मिमी बारिश होती है, जिसका 42% जून-सितंबर में आता है। सबसे ज़्यादा बारिश अक्टूबर में (202 मिमी) होती है। सबसे गर्म महीना अप्रैल है (दिन का औसत 38°C) और सबसे ठंडी रातें जनवरी में (औसत 17°C) होती हैं।
- भारत के ज़्यादातर हिस्सों से अलग, रानीपेट की 45% बारिश अक्टूबर-दिसंबर में उत्तर-पूर्वी मानसून से होती है, इसलिए यहां खेती का मुख्य कैलेंडर जून की बुवाई के बजाय उसी मौसम पर चलता है।
| महीना | बारिश (मिमी) | औसत अधिकतम | औसत न्यूनतम |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 12 | 29° | 17° |
| फ़रवरी | 6 | 32° | 17° |
| मार्च | 16 | 36° | 20° |
| अप्रैल | 33 | 38° | 24° |
| मई | 67 | 37° | 26° |
| जून | 71 | 35° | 25° |
| जुलाई | 106 | 34° | 24° |
| अगस्त | 123 | 33° | 23° |
| सितंबर | 144 | 32° | 23° |
| अक्टूबर | 202 | 30° | 22° |
| नवंबर | 198 | 28° | 20° |
| दिसंबर | 80 | 27° | 18° |
स्रोत: NASA POWER दीर्घकालिक मासिक औसत (उपग्रह और मॉडल आधारित, तटीय और पहाड़ी इलाकों में बारिश कुछ कम दिखा सकते हैं), रानीपेट ज़िले के केंद्र (12.9186, 79.4082) के लिए। यह औसत है, किसी साल का पूर्वानुमान नहीं। इस हफ़्ते के मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान देखें।
रानीपेट के किसानों के लिए: सोलर पंप और ट्रैक्टर
रानीपेट के पास के ज़िले
बेचने से पहले पास के ज़िलों की मंडियों के भाव भी देखें (दूरी ज़िला केंद्रों के बीच सीधी रेखा में):
- वेल्लोर - 38 km
- कांचीपुरम - 43 km
- चित्तूर, Andhra Pradesh - 52 km
- तिरुवल्लूर - 59 km
- तिरुवन्नामलई - 70 km
- चेंगलपट्टू - 78 km
रानीपेट ज़िले में किसान योजनाएं
रानीपेट, तमिलनाडु के किसान सभी प्रमुख केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पात्र हैं। सबसे ज़रूरी योजनाएं: