उत्तर प्रदेश में आलू की मुख्य फसल लगभग 15 अक्टूबर से नवंबर के पहले हफ्ते तक लगाएं, जब अक्टूबर शुरू की गर्मी टूट जाए। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) उत्तर भारत के मैदानों में मुख्य फसल अक्टूबर के पहले हफ्ते से बताता है, लेकिन CPRI पर आधारित सलाह के अनुसार गंगा के मैदानों के लिए अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा से नवंबर का पहला हफ्ता सबसे अच्छा समय है; पहले की तारीखें सिर्फ Kufri Pukhraj जैसी कम अवधि की किस्मों के लिए और तभी इस्तेमाल करें जब मौसम ठंडा हो चुका हो। बहुत जल्दी बोने से उगते पौधों पर गर्मी का तनाव पड़ता है, और देर से बोने पर कंद बनने का समय फरवरी के गर्म दिनों से टकरा जाता है।
NHB की सूची और CPRI के अनुसार उत्तर प्रदेश की प्रमुख किस्में हैं: मुख्य खाने वाली फसल के लिए Kufri Bahar (100 से 110 दिन) और Kufri Badshah, जल्दी कटाई के लिए Kufri Pukhraj (70 से 90 दिन), और जहां प्रोसेसिंग या पाला सहने की जरूरत हो वहां Kufri Anand और Kufri Chipsona-1। इस सीजन में एक खास बात है: 2026 में भाव तेजी से गिरने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अगस्त 2026 में आलू की तीन योजनाएं घोषित कीं, जिनमें ₹1,000 प्रति क्विंटल तक की बीज छूट भी है जो अभी बुवाई के समय लागू है। ब्योरा नीचे है।
उत्तर प्रदेश के लिए किस्म चुनना
ये राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के दिए CPRI की उन किस्मों के विवरण हैं जो उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के मैदानों के लिए जारी हुई हैं। औसत उपज बोर्ड की बताई औसत है; किसानों को आम तौर पर कम मिलती है, और जल्दी वाली किस्में 100 दिन वाली किस्मों से कुल कम उपज देती हैं।
| किस्म | पकने की अवधि | सूचीबद्ध औसत उपज | किस काम की है |
|---|---|---|---|
| Kufri Pukhraj | 70 से 90 दिन | करीब 40 t/ha | जल्दी की फसल; पीला गूदा; अगेती झुलसा के प्रति प्रतिरोधी और पछेती झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी; खाने के लिए |
| Kufri Ashoka | 70 से 80 दिन | करीब 40 t/ha | बहुत जल्दी पकती है, लेकिन पछेती झुलसा की चपेट में आती है |
| Kufri Chandramukhi | 80 से 90 दिन | करीब 25 t/ha | जल्दी की, चिकनी छिलके वाली; चिप्स और फ्लेक्स के लिए |
| Kufri Jyoti | – | – | मैदानों के लिए पकने की अवधि और उपज NHB की सूची में नहीं दी गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब में उगाई जाती है; अगेती और पछेती झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी; बीज धीरे खराब होता है; खाने और प्रोसेसिंग दोनों के लिए |
| Kufri Bahar | 100 से 110 दिन | करीब 45 t/ha | उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश; सफेद खाने वाला आलू; बीज धीरे खराब होता है |
| Kufri Badshah | 100 से 110 दिन | करीब 50 t/ha | खाने के लिए; अगेती और पछेती झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी; वायरस X के प्रति प्रतिरोधी; रोशनी लगने पर कंद बैंगनी हो जाते हैं |
| Kufri Sutlej | 90 से 100 दिन | करीब 40 t/ha | बिहार, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश; पछेती झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी |
| Kufri Lalima | 100 से 110 दिन | करीब 40 t/ha | लाल छिलका, उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए; वायरस Y के प्रति प्रतिरोधी; प्रोसेसिंग के लिए ठीक नहीं |
| Kufri Anand | 100 से 110 दिन | 35 से 40 t/ha | उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदान; पछेती झुलसा के प्रति प्रतिरोधी; पाला सहने वाली; फ्रेंच फ्राइज के लिए |
| Kufri Chipsona-1 और -2 | 90 से 110 दिन | 40 और 35 t/ha | बिहार और उत्तर प्रदेश; पछेती झुलसा के प्रति प्रतिरोधी; पाला सहने वाली; चिप्स और फ्राइज के लिए (प्रोसेसिंग कॉन्ट्रैक्ट चाहिए) |
बिना खरीदार या कॉन्ट्रैक्ट के प्रोसेसिंग किस्म (Chipsona, Anand, Frysona) न लगाएं, क्योंकि प्रोसेसर शुष्क पदार्थ और शर्करा का स्तर तय करते हैं। आगरा, कानपुर, फर्रुखाबाद या हाथरस से खाने वाले आलू के लिए Bahar, Badshah और Pukhraj भरोसेमंद विकल्प बने हुए हैं, और कटाई व झुलसा का जोखिम बांटने के लिए एक दूसरी किस्म भी लगाएं।
बीज: आकार, गुणवत्ता और नई छूट
- बीज कंद: अच्छी तरह अंकुरित, रोगमुक्त 30 से 40 ग्राम के कंद; बड़े कंदों को आंख वाले हिस्से से लंबाई में काटा जा सकता है ताकि हर टुकड़ा 30 से 40 ग्राम का हो और उसमें आंखें हों। एक कंद से दूसरे पर जाते समय चाकू को पोटेशियम परमैंगनेट से साफ करें, और कटे बीज को बुवाई से पहले फफूंदनाशक से उपचारित करें (NHB)। कटा बीज गीली मिट्टी में सड़ जाता है; इसे नम मिट्टी में लगाएं, गीली में नहीं।
- बीज की मात्रा: NHB गोल किस्मों के लिए 1.5 से 1.8 टन प्रति हेक्टेयर और लंबे अंडाकार कंद वाली किस्मों के लिए 2.0 से 2.5 टन बताता है, और बीज को सबसे महंगा खर्च कहता है। मात्रा असल में कंद के आकार और दूरी पर निर्भर करती है, इसलिए अपने खेत के लिए खुद निकालें: बीज (kg/ha) = प्रति हेक्टेयर पौधे × औसत कंद वजन (ग्राम) ÷ 1,000। 60 × 20 सेमी पर प्रति हेक्टेयर करीब 83,000 पौधे होते हैं, इसलिए 30 ग्राम के बीज कंद के लिए करीब 2.5 t/ha और 40 ग्राम के लिए करीब 3.3 t/ha (10 से 13 क्विंटल प्रति एकड़) चाहिए। खरीदने से पहले बीज देने वाले से पूछ लें कि प्रति क्विंटल कितने कंद आते हैं।
- बीज कहां से लें: प्रमाणित बीज उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग या मान्यता प्राप्त बीज उत्पादक से लें, पिछली फसल से बचाकर रखे खाने वाले आलू न बोएं; पुराना होकर खराब हुआ बीज वायरस लाता है और हर साल उपज घटती है।
- बीज छूट (2026-27 के लिए नई): उत्तर प्रदेश सरकार ने 18 अगस्त 2026 को विभाग के प्रमाणित आलू बीज पर ₹1,000 प्रति क्विंटल तक की छूट घोषित की, जिसके लिए ₹5 करोड़ का प्रावधान है (बजट सीमित संख्या में किसानों के लिए है, जो 15,000 से ज्यादा बताई गई है)। बीज खरीदने से पहले जिला उद्यान अधिकारी से पूछें कि दावा कैसे करना है।
खेत की तैयारी, दूरी और खाद
- जमीन: 24 से 25 सेमी गहरी जुताई करें, मिट्टी को धूप लगने दें, और आखिरी जुताई में अच्छी सड़ी गोबर की खाद 25 से 30 t/ha मिलाएं (NHB)। लवणीय और क्षारीय मिट्टी से बचें।
- रोपाई: मेड़ें 50 से 60 सेमी दूर, मेड़ पर कंद 15 से 20 सेमी दूर, 5 से 7 सेमी गहराई पर, फिर मिट्टी से ढक दें। CPRI का चार कतार वाला ऑटोमैटिक प्लांटर एक दिन में 4 से 5 हेक्टेयर लगाता है।
गंगा के मैदानों की जलोढ़ मिट्टी के लिए NHB प्रति हेक्टेयर 180 से 240 kg N, 60 से 90 kg P₂O₅ और 85 से 130 kg K₂O बताता है, जिसमें दो-तिहाई नाइट्रोजन और सारा फास्फोरस और पोटाश बुवाई के समय कंदों से करीब 5 सेमी दूर पट्टी में डालें, और बाकी नाइट्रोजन मिट्टी चढ़ाते समय। सॉइल हेल्थ कार्ड की जांच बताएगी कि इस दायरे में आपको कहां रहना है। मध्यम मात्रा (करीब 200:75:100 प्रति हेक्टेयर) का एक उदाहरण, प्रति एकड़:
| पोषक तत्व (प्रति एकड़) | कुल | बुवाई के समय | मिट्टी चढ़ाते समय |
|---|---|---|---|
| नाइट्रोजन | करीब 81 kg | 54 kg: 65 किलो DAP (12 kg N) + करीब 92 किलो यूरिया (42 kg N) | 27 kg: करीब 59 किलो यूरिया |
| फास्फोरस (P₂O₅) | करीब 30 kg | 65 किलो DAP | नहीं |
| पोटाश (K₂O) | करीब 40 kg | करीब 67 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश | नहीं |
खाद की मौजूदगी और भाव हमेशा जांच लें; उर्वरक देखें। पोटाश न छोड़ें: मैदानों के लिए NHB के दायरे में 85 से 130 kg K₂O प्रति हेक्टेयर शामिल है।
सिंचाई, मिट्टी चढ़ाना और खरपतवार
- सिंचाई: पहली सिंचाई हल्की हो और बुवाई के 5 से 7 दिन बाद दें; उसके बाद मौसम और मिट्टी के हिसाब से 7 से 15 दिन के अंतर पर सिंचाई करें, क्योंकि आलू की जड़ें उथली और कम होती हैं। पाले वाली रातों में फव्वारा सिंचाई से पाले का नुकसान घटता है; ड्रिप से लगभग 50% पानी बचता है और फर्टिगेशन भी हो सकता है (देखें ड्रिप सिंचाई और फव्वारा सिंचाई)।
- मिट्टी चढ़ाना: 15 से 20 दिन के अंतर पर दो या तीन बार मिट्टी चढ़ाएं, पहली बार तब जब पौधे 15 से 25 सेमी ऊंचे हों। मेड़ इतनी ऊंची हो कि हर कंद ढक जाए; खुले कंद हरे पड़ जाते हैं और झुलसा के बीजाणुओं के संपर्क में ज्यादा आते हैं।
- खरपतवार: फसल बुवाई के करीब चार हफ्ते बाद छा जाती है, इसलिए तब तक खरपतवार निकाल दें। NHB उगने से पहले (प्री-इमर्जेंस) के विकल्प के तौर पर वार्षिक घास और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए पेंडीमेथालिन 0.5 किलो सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर बताता है; प्रति एकड़ मात्रा के लिए लेबल पढ़ें।
पछेती झुलसा: जो बीमारी फसल का फैसला करती है
पछेती झुलसा (Phytophthora infestans) ठंडे, नम, कोहरे वाले मौसम के एक हफ्ते में, आम तौर पर दिसंबर और जनवरी में, उत्तर प्रदेश की फसल को बर्बाद कर सकती है। NHB के अनुसार परिस्थितियां करीब 10 से 20°C और 80% से ज्यादा नमी की होती हैं, और जो उपाय काम करते हैं वे ये हैं:
- साफ बीज इस्तेमाल करें और ऊंची मेड़ें बनाएं ताकि नए कंद ढके रहें।
- जब झुलसा के अनुकूल मौसम आए तो सिंचाई बंद कर दें (या सिर्फ हल्की सिंचाई दें)।
- लक्षण दिखने से पहले रक्षात्मक कॉन्टैक्ट फफूंदनाशक, मैंकोजेब 0.2%, का छिड़काव करें, और मौसम अनुकूल बना रहे तो 8 से 10 दिन के अंतर पर दोहराएं। गंभीर हमले में NHB मेटालैक्सिल 0.25% के एक या दो छिड़काव और 15 दिन बाद मैंकोजेब का सुझाव देता है। फफूंदनाशक के समूह बदलते रहें, लेबल की मात्रा मानें, और अपने KVK या CPRI की ताजा झुलसा सलाह देखें।
- अगर झुलसा 75% पत्तियों पर फैल चुकी हो तो डंठल काटकर निकालें और गहरा गाड़ दें।
खुदाई, क्योरिंग और भंडारण
मुख्य फसल बुवाई के 75 से 120 दिन बाद तैयार होती है, जब ज्यादातर पत्तियां पीली-भूरी हो जाएं। डंठल जमीन के पास से काट दें, छिलका पक्का होने के लिए 8 से 10 दिन रुकें, फिर खुदाई करें; आलू को छांव में ढेर लगाकर 10 से 15 दिन छिलका पक्का होने दें, और सीधी धूप में कभी न छोड़ें (हरापन आ जाता है)। बोरियों में भरने या कोल्ड स्टोर भेजने से पहले कटे और सड़े कंद छांट लें।
भाव, उत्तर प्रदेश की योजनाएं और एक एकड़ की कमाई
2026 में आलू के भाव बुरी तरह गिरे और जिन किसानों ने फसल स्टोर की थी उन्हें कोल्ड स्टोरेज का भारी खर्च उठाना पड़ा। 18 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026-27 के लिए तीन कदम घोषित किए:
| योजना | क्या मिलता है | सीमाएं |
|---|---|---|
| मूल्य स्थिरीकरण कोष (भामाशाह भाव स्थिरता कोष) | अगर बाजार भाव लागत से नीचे गिरे, तो तय उत्पादन लागत का 25% या लागत और बिक्री भाव के अंतर में से जो कम हो, वह मिलता है। ₹1,000 करोड़ का कोष | प्रति किसान 2 हेक्टेयर तक, प्रति हेक्टेयर 240 क्विंटल तक गिनकर; उत्पादन लागत कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य समिति तय करती है |
| कोल्ड स्टोरेज सहायता | निजी कोल्ड स्टोरेज के किराये के लिए ₹100 प्रति क्विंटल | अधिकतम ₹20,000 प्रति किसान; खरीदार-विक्रेता या भंडारण का दस्तावेज चाहिए; स्टोरेज रसीद, आधार, बैंक पासबुक और जमीन के रिकॉर्ड के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करें |
| बीज छूट | विभाग के प्रमाणित बीज पर ₹1,000 प्रति क्विंटल तक | ₹5 करोड़ का प्रावधान; उद्यान कार्यालय से पूछें |
कोल्ड स्टोरेज सहायता को लेकर किसानों की रुचि धीमी रही है: कानपुर देहात में आलू स्टोर करने वाले करीब 1,000 किसानों में से 10 सितंबर तक सिर्फ 13 ने पंजीकरण कराया था। अगर आप अगले सीजन आलू स्टोर करें, तो जल्दी पंजीकरण कराएं, स्टोरेज रसीद संभालकर रखें, और अपने जिला उद्यान अधिकारी से पोर्टल के ताजा निर्देश पूछें। रिपोर्टों में संचालन की अवधि 1 जनवरी से 15 अप्रैल और 1 जुलाई से 31 अक्टूबर बताई गई है। हर आंकड़ा विभाग से पक्का कर लें, क्योंकि ये योजनाएं अगस्त में घोषित हुईं और नियम बदल सकते हैं।
बाजार का अंदाजा देने के लिए: इस साइट के मंडी पेज (Agmarknet डेटा) पर अखिल भारतीय औसत आलू भाव सितंबर 2026 के आखिर में करीब ₹1,300 प्रति क्विंटल था, लेकिन फरवरी से मार्च 2027 में आपको जो भाव मिलेगा वह नई फसल और कोल्ड स्टोरेज में कितना पुराना माल बचा है, इस पर तय होगा। 100 क्विंटल (10 टन) प्रति एकड़ उपज पर कुल आमदनी ₹800/क्विंटल पर ₹80,000, ₹1,200/क्विंटल पर ₹1,20,000 और ₹1,600/क्विंटल पर ₹1,60,000 होती है। ब्रेक-ईवन भाव = आपकी प्रति एकड़ कुल लागत ÷ काटे गए क्विंटल: जैसे, प्रति एकड़ ₹90,000 लागत और 100 क्विंटल उपज पर ₹900 प्रति क्विंटल। रकबा तय करने से पहले अपने बीज, खाद, मजदूरी और भंडारण के खर्च से यह हिसाब लगाएं। ताजा आलू मंडी भाव देखें, देखें कि आपके जिले में आलू PMFBY में अधिसूचित है या नहीं और नामांकन की तारीख क्या है, और खाद-बीज के कर्ज के लिए किसान क्रेडिट कार्ड देखें।
स्रोत
- National Horticulture Board, Potato: planting, land preparation and season
- National Horticulture Board, Potato: manuring and fertilization
- National Horticulture Board, Potato: irrigation
- National Horticulture Board, Potato: intercultural operations (weeds, earthing up)
- National Horticulture Board, Potato: varieties
- National Horticulture Board, Potato: diseases (late blight)
- National Horticulture Board, Potato: propagation (seed tubers)
- National Horticulture Board, Potato: harvesting
- National Horticulture Board, Potato: soil and climate
- Haribhoomi, UP government announces three schemes for potato farmers (18 Aug 2026)
- Gaon Connection, UP three schemes for potato farmers
- Amar Ujala (Mirzapur), cold-storage assistance of ₹100 per quintal (14 Sep 2026)
- Potatoes News, Uttar Pradesh rolls out potato price-support and cold-storage subsidy, but early uptake is low
- Indian Potato, Potato cultivation in India: operational data