प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में क्लेम पाने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आपका नामांकन आपके राज्य की अंतिम तारीख से पहले हो चुका हो और प्रीमियम जमा हो। इसके बाद आपको क्या करना है, यह इस पर निर्भर करता है कि फसल का नुकसान कैसे हुआ। खेत में ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव, बादल फटना या प्राकृतिक आग (बिजली गिरना) से नुकसान हो, या कटी हुई फसल खेत में सूख रही हो और खराब हो जाए, तो 72 घंटे के अंदर Crop Insurance ऐप या टोल-फ्री नंबर 14447 पर सूचना देनी होती है। सूखा, बाढ़ या पूरे जिले में कीट के हमले जैसे व्यापक नुकसान में आपको खुद कुछ दर्ज नहीं कराना होता; क्लेम आपकी बीमा इकाई की क्रॉप-कटिंग उपज से तय होता है।
यह गाइड PMFBY की संचालन दिशा-निर्देश (Operational Guidelines, Revamped, खरीफ 2020 से लागू) और जंगली जानवरों के कवर पर 2025 की सरकारी घोषणा पर आधारित है। अंतिम तारीख, अधिसूचित फसलें और ऐड-ऑन कवर जैसी बातें हर राज्य खुद तय करता है, इसलिए अपने राज्य की अधिसूचना pmfby.gov.in पर या अपने ब्लॉक कृषि कार्यालय में जरूर देखें। प्रीमियम दर और नामांकन के लिए हमारा PMFBY योजना पेज और कौन सी फसलें कवर हैं देखें।
सबसे पहले: नुकसान किस तरह का है?
PMFBY चार अलग-अलग तरीकों से नुकसान संभालती है, और हर एक में क्लेम का रास्ता अलग है। ज्यादातर क्लेम इसलिए रद्द या लेट होते हैं कि किसान स्थानीय नुकसान को व्यापक नुकसान की तरह मान लेते हैं।
| नुकसान का प्रकार | क्या सूचना देनी होगी? | आकलन कैसे होता है |
|---|---|---|
| स्थानीय आपदा: ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव, बादल फटना, प्राकृतिक आग (बिजली गिरना) | हां, घटना के 72 घंटे के अंदर | बीमा कंपनी, कृषि अधिकारी और आप मिलकर आपके अपने खेत का सर्वे करते हैं |
| कटाई के बाद का नुकसान: कटी फसल खेत में सूख रही हो, कटाई के बाद सिर्फ 14 दिन तक, ओला, चक्रवात, चक्रवाती बारिश, बेमौसम बारिश से | हां, 72 घंटे के अंदर | अलग-अलग खेत का सर्वे |
| जंगली जानवरों का हमला (खरीफ 2026 से नया ऐड-ऑन, जहां राज्य अधिसूचित करे): हाथी, जंगली सूअर, नीलगाय, हिरण, बंदर | हां, 72 घंटे के अंदर, ऐप पर जियोटैग वाली फोटो के साथ | क्षेत्र-आधारित या अलग-अलग खेत का आकलन |
| व्यापक आपदा: सूखा, लंबा सूखा अंतराल, बाढ़, व्यापक कीट या रोग, आंधी-तूफान, चक्रवात | सूचना देने की जरूरत नहीं | आपके गांव या ग्राम-पंचायत इकाई में क्रॉप-कटिंग प्रयोग (CCE); इकाई की उपज थ्रेशोल्ड उपज से कम निकले तो भुगतान मिलता है |
| बुवाई न हो पाना, मौसम के बीच की प्रतिकूलता (सिर्फ तब, जब आपके राज्य ने ये ऐड-ऑन अधिसूचित किए हों) | नहीं, राज्य या जिला इन्हें लागू करता है | जिला समिति सर्वे करती है; एडवांस भुगतान ऑन-अकाउंट किया जाता है |
स्टेप बाय स्टेप: स्थानीय या कटाई के बाद के नुकसान की सूचना कैसे दें
- घटना की तारीख और समय नोट कर लें। 72 घंटे की गिनती घटना होने के समय से शुरू होती है, आपको पता चलने के समय से नहीं।
- तुरंत सूचना दें, Crop Insurance ऐप से (दिशा-निर्देशों के अनुसार पहली पसंद) या 14447 पर कॉल करके। आप अपनी बैंक शाखा, बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर या स्थानीय कृषि कार्यालय को भी बता सकते हैं, लेकिन उनसे लिखित रसीद या शिकायत नंबर जरूर लें।
- दिशा-निर्देशों में बताई जानकारी दें: आपका नाम, सर्वे नंबर और बीमित फसल, प्रभावित क्षेत्र, PMFBY पोर्टल का आपका आवेदन नंबर, मोबाइल नंबर, और आपका KCC खाता नंबर (ऋणी किसान) या बचत खाता (गैर-ऋणी किसान)।
- ऐप से खराब हुए खेत की जियोटैग वाली फोटो अपलोड करें। पूरे खेत की फोटो लें और नुकसान की क्लोज-अप फोटो भी, हो सके तो फ्रेम में कोई पहचान वाली चीज रखें।
- शिकायत आईडी संभालकर रखें। बीमा कंपनी से उम्मीद है कि वह नुकसान आंकने वाला भेजेगी; बीमा कंपनियों के क्लेम पेज कहते हैं कि आपकी सूचना के 48 घंटे के अंदर सर्वेयर नियुक्त होना चाहिए।
- अपने जमीन के रिकॉर्ड और नामांकन के सबूत के साथ खेत के सर्वे के समय मौजूद रहें। नुकसान का आकलन बीमा कंपनी का आकलनकर्ता, ब्लॉक कृषि अधिकारी और आप मिलकर करते हैं।
- भुगतान जांचें। पैसा आपके बैंक खाते में आता है। कटाई के बाद के नुकसान के लिए दिशा-निर्देश कहते हैं कि नुकसान सर्वे रिपोर्ट के 15 दिन के अंदर बीमा कंपनी भुगतान करेगी, बशर्ते सरकार का प्रीमियम सब्सिडी हिस्सा बीमा कंपनी तक पहुंच चुका हो।
भुगतान की गणना कैसे होती है
व्यापक नुकसान (उपज-आधारित)। दिशा-निर्देशों में फॉर्मूला यह है: (थ्रेशोल्ड उपज घटा वास्तविक उपज) को थ्रेशोल्ड उपज से भाग दें, फिर अपनी बीमित राशि (Sum Insured) से गुणा करें। थ्रेशोल्ड उपज आपकी इकाई के पिछले सात सालों में से सबसे अच्छे पांच सालों की औसत उपज होती है, जिसे क्षतिपूर्ति स्तर (70%, 80% या 90%, राज्य तय करता है) से गुणा किया जाता है। उदाहरण (काल्पनिक संख्याएं): अगर आपके गांव की इकाई में गेहूं की थ्रेशोल्ड उपज 3,000 किलो प्रति हेक्टेयर है और क्रॉप-कटिंग से उपज 2,400 किलो निकलती है, तो कमी 600/3,000 = 20% हुई। अगर बीमित राशि ₹60,000 प्रति हेक्टेयर है, तो क्लेम उसका 20%, यानी बीमित प्रति हेक्टेयर ₹12,000 बनता है। उस इकाई में उस फसल के हर बीमित किसान को यही प्रतिशत मिलता है।
बुवाई न हो पाना। जहां अधिसूचित हो, यह तभी लागू होता है जब कम बारिश या ऐसी ही स्थितियों के कारण इकाई के सामान्य बुवाई क्षेत्र के 75% से ज्यादा हिस्से में बुवाई या रोपाई न हो सके। दिशा-निर्देशों में बीमित राशि का एक तय हिस्सा दिया जाता है (उदाहरण में 25%) और राज्य से कहा गया है कि वह सामान्य बुवाई के 30 दिन के अंदर इसे अधिसूचित करे।
मौसम के बीच की प्रतिकूलता। जहां अधिसूचित हो, अगर बाढ़, लंबे सूखे अंतराल या गंभीर सूखे के कारण इकाई में अपेक्षित उपज सामान्य उपज के 50% से कम रहने की आशंका हो, तो संभावित क्लेम का 25% तक एडवांस ऑन-अकाउंट दिया जाता है; यह अंतिम उपज-आधारित क्लेम में समायोजित हो जाता है।
जो कागज तैयार रखें
- नामांकन का सबूत: PMFBY पोर्टल का आवेदन या रसीद नंबर (या बैंक या CSC की रसीद) और प्रीमियम कटने की एंट्री।
- आधार और आपके आवेदन से जुड़ा बैंक खाता। दिशा-निर्देशों में आधार अनिवार्य है, बटाईदार और काश्तकार किसानों के लिए भी।
- जमीन का रिकॉर्ड (अधिकार अभिलेख या उसके बराबर कागज), या काश्तकार और बटाईदार किसानों के लिए पट्टा या कब्जे का वह प्रमाणपत्र जो आपके राज्य में मान्य हो।
- जियोटैग वाली फोटो और 72 घंटे के अंदर दी गई सूचना का शिकायत नंबर।
- अगर आप ऋणी किसान हैं तो अपना KCC खाता नंबर।
क्लेम क्यों रद्द या लेट होते हैं, और उसका उपाय
| कारण | उपाय या बचाव |
|---|---|
| नुकसान की सूचना 72 घंटे के बाद दी (स्थानीय या कटाई के बाद का) | उसी दिन ऐप या 14447 से सूचना दें। देर हो जाए तो भी सूचना दें और देरी का कारण लिखकर दें; फैसला बीमा कंपनी और जिला समिति के हाथ में है, इसलिए इस पर भरोसा न करें। |
| आपदा से पहले प्रीमियम कटा नहीं या पहुंचा नहीं | दिशा-निर्देश साफ कहते हैं कि सिर्फ लोन मंजूर होना, प्रीमियम कटे बिना, आपको पात्र नहीं बनाता। अंतिम तारीख से पहले बैंक से प्रीमियम कटने का सबूत लें। ऋणी किसान हर सीजन पासबुक की एंट्री जांचें। |
| फसल या क्षेत्र अधिसूचित नहीं है, या बोई गई फसल बीमित फसल से अलग है | प्रीमियम भरने से पहले अपने गांव के लिए राज्य की अधिसूचना देखें। जो फसल असल में बो रहे हैं वही घोषित करें; बदलें तो प्रीमियम कटने की अंतिम तारीख से पहले बैंक को बताएं। |
| बीमित रकबा बोए गए रकबे या जमीन के रिकॉर्ड से ज्यादा है | उतना ही बीमा कराएं जितना बोया है। रकबा ज्यादा बताने पर दिशा-निर्देशों में Area Correction Factor और आधार व जमीन रिकॉर्ड से डी-डुप्लिकेशन की अनुमति है। |
| आधार, नाम या खाते में गड़बड़ी; गलत IFSC | नामांकन के समय आधार, बैंक और जमीन रिकॉर्ड में नाम एक जैसा रखें; बैंक खाता आधार से जुड़ा रखें। |
| बैंक या CSC ने आपका डेटा पोर्टल पर नहीं भेजा | नामांकन के एक हफ्ते बाद pmfby.gov.in पर अपने आवेदन की स्थिति देखें। अगर नहीं दिखे तो नुकसान के बाद नहीं, अंतिम तारीख से पहले ही ठीक करवाएं। |
| कारण कवर नहीं है (जैसे युद्ध, परमाणु जोखिम, दुर्भावना से किया गया नुकसान, अन्य रोके जा सकने वाले जोखिम) | दिशा-निर्देशों में ये शामिल नहीं हैं। पशुओं से हुआ नुकसान सिर्फ वहीं कवर है जहां राज्य ने जंगली जानवरों का ऐड-ऑन अधिसूचित किया हो। |
अगर क्लेम देर से या कम मिले
- दिशा-निर्देश बीमा कंपनियों से कहते हैं कि बिना विवाद वाले क्लेम वास्तविक उपज का डेटा अपलोड होने के 21 दिन के अंदर जारी हों, बशर्ते प्रीमियम सब्सिडी मिल चुकी हो। उपज का डेटा अपलोड होने और सब्सिडी जारी होने के 30 दिन बाद भी बिना उचित कारण लंबित रहने वाले मान्य क्लेम पर 12% सालाना दंड ब्याज देना होता है।
- सबसे पहले बीमा कंपनी के शिकायत संपर्क और जिला कृषि कार्यालय में शिकायत करें, और हर शिकायत का नंबर संभालकर रखें।
- योजना में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की शिकायत व्यवस्था है। अगर आपको अपनी इकाई की क्रॉप-कटिंग उपज पर शक है, तो नामांकन के सबूत के साथ जिला समिति को लिखित में बताएं।
रबी 2026-27: अभी क्या करें
- नामांकन की अंतिम तारीख हर राज्य तय करता है। रबी के लिए केंद्र की सांकेतिक अंतिम तारीख लगभग 15 दिसंबर है, और कई राज्य 31 दिसंबर या बीच की कोई तारीख अधिसूचित करते हैं; हर राज्य ने अभी 2026-27 की अधिसूचना जारी नहीं की है, इसलिए अपने राज्य की जांच करें।
- बिहार ने रबी 2026-27 से PMFBY में लौटने का फैसला किया है; सहकारिता मंत्री का हवाला देने वाली एक रिपोर्ट के अनुसार आवेदन 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक चलेंगे।
- रबी के अनाज और तिलहन फसलों के लिए किसान का प्रीमियम बीमित राशि का अधिकतम 1.5% और सालाना वाणिज्यिक व बागवानी फसलों के लिए 5% तय है। कुछ राज्य इसका एक हिस्सा या पूरा खुद भरते हैं।
स्रोत
- PMFBY Operational Guidelines (Revamped, effective Kharif 2020), hosted copy
- SBI General Insurance: PMFBY claim process (14447, 72 hours, 48-hour surveyor)
- All India Radio: wild animal attacks and paddy inundation to be covered under PMFBY from Kharif 2026
- Amar Ujala: PMFBY to begin in Bihar from Rabi 2026
- PMFBY official portal (to check your state notification and application status)