राजस्थान में सरसों (भारतीय सरसों, sarson या raya) की बुवाई सितंबर के आख़िरी हफ़्ते से अक्टूबर के अंत तक करें, और निशाना मध्य अक्टूबर (लगभग 10 से 20 अक्टूबर) रखें जब दिन का तापमान 25°C के आसपास होता है। उत्तर भारत में लगभग 15 अक्टूबर से पहले बोई सरसों अक्सर जनवरी-फरवरी में माहू (aphid) के चरम प्रकोप से बच जाती है, और जल्दी बुवाई से फसल को मार्च की गर्मी से पहले पकने का समय भी मिल जाता है।
इस साल प्रोत्साहन मज़बूत है: 30 सितंबर 2026 को कैबिनेट ने 2027-28 विपणन सीज़न के लिए रेपसीड-सरसों का MSP ₹6,200 से ₹413 बढ़ाकर ₹6,613 प्रति क्विंटल कर दिया, जो छह रबी फसलों में दूसरी सबसे बड़ी बढ़ोतरी है (कुसुम में इससे ज़्यादा बढ़ा)। यही वह फसल है जो आप अभी बो रहे हैं, और मानसून 13% कम रहने तथा केंद्र के राज्यों से कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने को कहने के बीच, सरसों को गेहूं से बहुत कम सिंचाई चाहिए।
राजस्थान लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य है; ICAR-DRMR की समीक्षा के अनुसार देश के क्षेत्रफल और उत्पादन में इसका हिस्सा 47% से ज़्यादा है (2006-07 के आंकड़े)। भारतीय रेपसीड-सरसों अनुसंधान संस्थान (पहले DRMR, सेवर, भरतपुर) इसी राज्य में है, इसलिए आगे की ज़्यादातर बातें उसकी किस्म सूचियों और परीक्षणों से हैं। राजस्थान में उत्तर-पश्चिम और पूर्व के बीच मिट्टी और बारिश काफ़ी अलग है, इसलिए किस्म और मात्रा अपने KVK या कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU बीकानेर, SKNAU जोबनेर, MPUAT उदयपुर) से पक्की कर लें।
बुवाई का समय
| स्थिति | समय | क्यों |
|---|---|---|
| सिंचित, समय पर बुवाई | सितंबर के आख़िरी हफ़्ते से अक्टूबर के अंत तक; सबसे अच्छा मध्य अक्टूबर | कृषि विभाग (तिलहन प्रभाग) राजस्थान के लिए यही समय बताता है, बुवाई के लिए आदर्श तापमान लगभग 25°C है। |
| जल्दी बुवाई (लगभग 15 अक्टूबर से पहले) | 15 अक्टूबर तक | ICAR-DRMR के अनुसार उत्तर भारत में 15 अक्टूबर से पहले बोई फसल अक्सर सरसों के माहू की सबसे बुरी मार से बच जाती है। |
| सिंचित, देर से बुवाई | नवंबर से दिसंबर की शुरुआत तक, देर से बोई जाने वाली किस्म के साथ | हर हफ़्ते की देरी के साथ उपज घटती है; नीचे की सूचियों में देर से बुवाई के विकल्प Radhika, Pusa Mustard 26, BPM 11 और NRCHB 101 हैं। |
| बारानी (असिंचित) | बीज-शैया में पहली काम लायक नमी आते ही, आमतौर पर अक्टूबर में | बारानी या सूखा सहने वाली किस्म (जैसे DRMR 1165-40) लें और बुवाई के समय 40 किलो N/हेक्टेयर दें। |
राजस्थान के लिए कौन सी किस्म
ICAR-DRMR राजस्थान को ज़ोन II (दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, J&K और राजस्थान) और ज़ोन III (राजस्थान, UP, MP, उत्तराखंड और अन्य) दोनों में गिनता है। अपने KVK से पूछें कि आपका ज़िला किस ज़ोन की सूची में आता है। ये DRMR की हाल में अधिसूचित किस्में हैं, परीक्षणों की उपज के साथ (हर खेत में यही मिले ज़रूरी नहीं):
| किस्म (साल) | पकने का समय | परीक्षण उपज (किलो/हेक्टेयर) | तेल % | किसके लिए सबसे अच्छी |
|---|---|---|---|---|
| DRMR 2018-25 (BPM 1825), 2025 | 145 दिन | 2,596 | 40.6 | ज़ोन II, समय पर सिंचित; सफ़ेद रतुआ (white rust) प्रतिरोधी |
| BPMQ 47, 2025 | 144 दिन | 2,348 | 40.5 | ज़ोन II, समय पर सिंचित; कम इरूसिक अम्ल; सफ़ेद रतुआ प्रतिरोधी |
| DRMRCI (Q) 172, 2025 | 131 दिन | 2,304 | 41.8 | ज़ोन III, समय पर सिंचित; कम इरूसिक अम्ल; सफ़ेद रतुआ प्रतिरोधी |
| DRMRIJ-31 (Giriraj), 2013 | 137 से 153 दिन | 2,225 से 2,750 | 39 से 42.6 | ज़ोन II, समय पर सिंचित; मोटा दाना |
| NRCDR 2 (2006) और NRCDR 601 (2009) | 131 से 156 दिन | 1,939 से 2,626 | 36.5 से 42.5 | ज़ोन II; खारापन और ऊंचा तापमान सहती हैं; NRCDR 601 में सफ़ेद रतुआ कम |
| DRMR 1165-40, 2020 | 142 दिन | 2,200 से 2,600 | 41.2 | ज़ोन II, समय पर बोई बारानी |
| DRMR 2017-15 (Radhika), 2021 | 131 दिन | 1,686 से 1,847 | 40.7 | ज़ोन II, देर से बोई सिंचित |
| BPM 11, 2024 | 123 दिन | 1,859 | 37.8 | ज़ोन III, देर से बोई; सफ़ेद रतुआ प्रतिरोधी |
| NRCHB 101, 2008 | 105 से 135 दिन | 1,382 से 1,491 | 34.6 से 42.1 | देर से बोई सिंचित और बारानी (ज़ोन II और III) |
| DRMR 150-35, 2020 | 114 दिन | 1,200 से 1,800 | 36.7 से 42.8 | ज़ोन III, बारानी |
IARI की किस्मों में Pusa Mustard 28 लगभग 107 दिन में पकती है और ऊंचा तापमान सहती है (राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली), Pusa Mustard 26 देर से बुवाई और अंतिम समय की गर्मी सहने वाली है (126 दिन), Pusa Mustard 30 पूर्वी राजस्थान, UP और MP के लिए जारी हुई है, और Pusa Mustard 32 कम इरूसिक अम्ल वाली, समय पर बुवाई की किस्म है (142 दिन)। कम इरूसिक अम्ल वाली किस्में तभी फ़ायदा देती हैं जब आपका खरीदार या तेल मिल उन्हें मांगे।
किसानों के खेतों में किस्मों का क्या हाल रहा? राजस्थान में सिंचाई के तहत ICAR-DRMR के 2019-20 के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों में दर्ज हुआ:
| किस्म | प्रदर्शन | औसत उपज (किलो/हेक्टेयर) | किसान की विधि से बढ़त |
|---|---|---|---|
| Giriraj | 292 | 2,196 | 9.7% |
| RH 725 | 70 | 2,311 | 11.4% |
| NRCHB 101 | 45 | 2,122 | 19.6% |
| RH 749 | 16 | 2,200 | 11.2% |
| CS 60 | 9 | 2,320 | 8.5% |
ये सब एक-दूसरे से लगभग 10% के भीतर हैं, इसलिए "सबसे अच्छा" नाम ढूंढने से ज़्यादा ज़रूरी है कि बीज सचमुच ताज़ा, प्रमाणित और समय पर मिले।
बीज दर, दूरी और बीज उपचार
- बीज: लगभग 5 किलो प्रति हेक्टेयर (लगभग 2 किलो प्रति एकड़), जैसा बिहार के विश्वविद्यालय (RPCAU) की सिफ़ारिश में है। कतारें 30 सेमी दूर रखें, 4 से 5 सेमी गहराई पर बोएं, और बुवाई के लगभग तीन हफ़्ते बाद छंटाई करके पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेमी कर दें (लगभग 3.3 लाख पौधे प्रति हेक्टेयर)। भीड़ वाली, बिना छंटाई की सरसों के पतले और माहू से ग्रस्त पौधे होने का यही सबसे आम कारण है।
- बीज उपचार: थीरम 2 से 3 ग्राम प्रति किलो बीज (RPCAU)। ICAR-DRMR के अनुसार 5 ग्राम प्रति किलो Trichoderma harzianum से बीज उपचार ने स्क्लेरोटिनिया और अल्टरनेरिया रोगों को 30% तक घटाया, Azotobacter से बीज उपचार से 30 किलो N/हेक्टेयर तक की बचत हो सकती है और फॉस्फोरस घोलने वाले जीवाणुओं से फॉस्फोरस का उपयोग बेहतर होता है। DRMR यह भी बताता है कि राजस्थान, हरियाणा और UP के किसान बीज उपचार सबसे कम अपनाते हैं।
- जुताई: 3 से 4 जुताई या हैरो चलाना 6 से 10 जुताई के बराबर उपज देता है (DRMR)। नाली से सिंचाई वाली उठी क्यारी प्रणाली में लगभग 10% ज़्यादा दाना मिला और लगभग एक तिहाई पानी बचा।
प्रति हेक्टेयर और प्रति एकड़ खाद
| पोषक तत्व | प्रति हेक्टेयर | प्रति एकड़ | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| नाइट्रोजन (N) | सिंचित में 80 किलो (बारानी में 40 किलो) | 32 किलो (16 किलो) | सिंचित में प्रति एकड़ लगभग 70 किलो यूरिया; आधा बुवाई पर और आधा पहली सिंचाई के बाद, इससे सारा बुवाई पर देने के मुक़ाबले N का बेहतर उपयोग होता है |
| फॉस्फोरस (P₂O₅) | 40 किलो | 16 किलो | उत्तर भारत में 30 से 50 किलो/हेक्टेयर की सीमा चलती है; सिंगल सुपरफॉस्फेट से सल्फर भी मिलता है |
| सल्फर (S) | 40 किलो | 16 किलो | सबसे ज़रूरी अतिरिक्त तत्व: DRMR के अनुसार 25% तक ज़्यादा दाना और 2% तक ज़्यादा तेल। जिप्सम या तात्विक सल्फर; या SSP (12% S) इस्तेमाल करें |
| ज़िंक | 5 किलो Zn (लगभग 25 किलो ज़िंक सल्फेट) | 2 किलो Zn (लगभग 10 किलो ज़िंक सल्फेट) | 12% तक ज़्यादा दाना (DRMR); ज़िंक की कमी आम है, राजस्थान की लगभग 21% मिट्टी में |
| बोरॉन | 1 किलो B (लगभग 10 किलो बोरेक्स) या 40 और 60 दिन पर 0.25% बोरिक एसिड का छिड़काव | 0.4 किलो B | 21% तक ज़्यादा दाना (DRMR); फली और दाना बनने में सुधार |
DRMR की मानक सिफ़ारिश 80:40:0 किलो N:P₂O₅:K₂O प्रति हेक्टेयर है; इसके साथ 2.5 टन वर्मीकंपोस्ट या FYM, 40 किलो S, 5 किलो Zn और 1 किलो B डालने पर उसके परीक्षणों में 10% से ज़्यादा अतिरिक्त दाना मिला। सरसों वाले इलाकों में पोटाश का असर आमतौर पर कम होता है (जहां राज्य सिफ़ारिश करते हैं वहां 20 से 40 किलो K₂O/हेक्टेयर)। Soil Health Card की जांच बताती है कि आपके खेत में इनमें से असल में किसकी कमी है। खाद भी देखें।
सिंचाई: ज़्यादा न करें
खेत सूखा हो तो बुवाई से पहले सिंचाई दें। उसके बाद नाज़ुक अवस्थाएं फूल आना और फली बनना हैं: RPCAU फूल अवस्था (बुवाई के लगभग 35 दिन बाद) और फली अवस्था (लगभग 55 दिन) पर सिंचाई की सलाह देता है, और कृषि विभाग फूल और फली बनने पर सुरक्षात्मक सिंचाई की सलाह देता है। सिर्फ़ एक सिंचाई का पानी हो तो उसे फूल के आसपास दें। DRMR के परीक्षणों में क्यारी सिंचाई के मुक़ाबले फव्वारा या ड्रिप सिंचाई से सरसों की उपज 25 से 30% बढ़ी और सिंचाई का पानी 50% तथा नाइट्रोजन 25% कम लगा (फव्वारा सिंचाई और ड्रिप सिंचाई देखें)।
खरपतवार
25 और 50 दिन पर दो बार हाथ से निराई करने से खरपतवार वाले खेत के मुक़ाबले 12% से ज़्यादा अतिरिक्त दाना मिला। रसायन से नियंत्रण के लिए DRMR बुवाई के बाद उगने से पहले 1.0 किलो सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर पेंडीमेथालिन के छिड़काव की सलाह देता है (30 EC का लगभग 3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर, या 1.3 लीटर प्रति एकड़), या घास के लिए बुवाई के 25 से 30 दिन बाद 0.06 किलो a.i./हेक्टेयर क्लोडिनाफॉप। प्रति एकड़ मात्रा और फसल सुरक्षा की बातों के लिए लेबल पढ़ें।
माहू, सफ़ेद रतुआ और अल्टरनेरिया
- माहू (Aphid) जनवरी से फरवरी में चरम पर होता है और बहुत भारी नुकसान कर सकता है। समय पर बुवाई करें, ज़्यादा नाइट्रोजन न दें (वह माहू को बुलाता है), हमला जब टुकड़ों में शुरू हो तो ग्रस्त टहनियां तोड़कर दबा दें, और छिड़काव तभी करें जब आपके राज्य की आर्थिक सीमा पार हो जाए, अपने KVK की सलाह पर सरसों के माहू के लिए पंजीकृत दवा से।
- अल्टरनेरिया झुलसा (47% तक नुकसान), सफ़ेद रतुआ (47% तक) और स्क्लेरोटिनिया सड़न (40% तक) मुख्य रोग हैं। सफ़ेद रतुआ प्रतिरोधी किस्में (BPM 1825, BPMQ 47, DRMRCI (Q) 172, BPM 11), उपचारित बीज, संतुलित खाद और अच्छा जल निकास अपनाएं।
मिश्रित खेती
राजस्थान में परखे हुए बारानी मेल हैं चना + सरसों 3:1 कतार अनुपात में और मसूर + सरसों 6:1 में; आलू + सरसों 3:1 सिंचित पैटर्न है। अगर एक ही खेत में दाल के लिए चना और तेल के लिए सरसों चाहिए, तो चना खेती पर हमारी साथी गाइड देखें।
लागत और कमाई, हिसाब के साथ
राजस्थान में ICAR-DRMR के 2019-20 के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों में खेती की लागत लगभग ₹25,000 से ₹33,000 प्रति हेक्टेयर (₹10,000 से ₹13,500 प्रति एकड़) और लाभ-लागत अनुपात लगभग 3.0 से 3.7 दर्ज हुआ। तब से लागत बढ़ी है, इसलिए अपनी लागत की सूची खुद दोबारा बनाएं। 2027-28 के MSP पर कुल आमदनी:
| प्रति एकड़ उपज | प्रति हेक्टेयर उपज | ₹6,613/क्विंटल पर कुल आमदनी (प्रति एकड़) |
|---|---|---|
| 6 क्विंटल | लगभग 15 क्विंटल | ₹39,678 |
| 8 क्विंटल | लगभग 20 क्विंटल | ₹52,904 |
| 9 क्विंटल (प्रदर्शनों का औसत, लगभग 2,200 किलो/हेक्टेयर) | लगभग 22 क्विंटल | ₹59,517 |
दलहन और तिलहन के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत खरीद इस रबी के लिए मंज़ूर हो चुकी है; राजस्थान में पंजीकरण कब खुलेगा यह अपने कृषि कार्यालय से पूछें, और खुले बाज़ार से सरसों का मंडी भाव और MSP सूची पर तुलना करें। PMFBY के तहत रबी का बीमा आमतौर पर लगभग 31 दिसंबर को बंद होता है; तारीख़ अपने इलाके में पक्की कर लें।
स्रोत
- ICAR-Indian Institute of Rapeseed-Mustard Research (DRMR), Indian mustard varieties for Zones II and III
- ICAR-DRMR, Technologies developed (nutrient, weed and water management)
- ICAR-DRMR, AICRP-RM frontline demonstrations 2019-20 (Rajasthan results and costs)
- ICAR-DRMR Bharatpur, Rapeseed-mustard cultivation in India: an overview (GCIRC bulletin)
- Department of Agriculture, Rapeseed and Mustard, Oilseeds Division (sowing times by state)
- IARI, Pusa mustard varieties
- RPCAU Pusa, Package and practices: rai, toria, yellow sarson
- Business Today, Cabinet clears Rabi MSP hike for 2027-28 (30 Sep 2026)
- Global Agriculture, Chouhan launches Rabi Campaign 2026 (PSS and water advisory)
- Tech Times, India monsoon 2026 ends with worst deficit in over a decade