किसान परिवार के लिए शुरुआत करने का व्यावहारिक रास्ता ढिंगरी (oyster) मशरूम है: यह गेहूं या धान के भूसे पर 25 से 30 डिग्री C तापमान में साधारण शेड में उगती है, बहुत कम पूंजी चाहिए, और स्पॉन डालने के लगभग 3 से 4 हफ़्ते बाद पहली तुड़ाई मिल जाती है। रोज़ 10 किलो उत्पादन वाली ढिंगरी इकाई के लिए TNAU की परखी हुई लागत में शेड और उपकरणों पर लगभग ₹37,000 और साल भर के चालू खर्च पर लगभग ₹2.2 लाख लगते हैं, और मज़दूरी देने पर लगभग ₹79 प्रति किलो पर घाटा-मुनाफ़ा बराबर होता है (परिवार खुद मज़दूरी करे तो लगभग ₹43 प्रति किलो)।
बटन मशरूम में उत्पादन ज़्यादा होता है, लेकिन इसके लिए कंपोस्ट यार्ड, पाश्चुरीकरण और ठंडे कमरे (फल लगने के लिए 16 से 18 डिग्री C) चाहिए, इसलिए यह बड़ी परियोजना है। इस गाइड में मुख्य प्रकारों की तुलना है, फिर उगाने के चरण, लागत, ब्रेक-ईवन भाव, बाज़ार और MIDH सब्सिडी बताई गई है। सब्सिडी और प्रशिक्षण के पेज देखने के लिए हमारा मशरूम खेती पेज भी देखें।
कौन सी मशरूम उगाएं?
| प्रकार | तापमान और नमी | चक्र और उपज | किसके लिए ठीक |
|---|---|---|---|
| ढिंगरी (Oyster) (Pleurotus) | 25 - 30 C, RH 80 - 85% | हर फसल 40 - 45 दिन; जैविक दक्षता 100 - 150% (TNAU) | नए किसान, छोटे खेत; गर्म इलाकों में साल भर |
| दूधिया (Milky) (Calocybe indica) | 30 - 35 C, RH 85 - 90% | 45 - 50 दिन; BE 150 - 160%; मिट्टी की केसिंग परत चाहिए | गर्म क्षेत्र (TN, कर्नाटक, AP), गर्मी की फसल |
| बटन (Button) (Agaricus bisporus) | स्पॉन रन लगभग 23 - 25 C पर 14 - 16 दिन; फल लगना 16 - 18 C, RH 80 - 85% (ICAR-DMR सलाह) | सड़ाया हुआ कंपोस्ट और केसिंग मिट्टी चाहिए | उत्तर के मैदानों में मौसमी, साल भर सिर्फ़ ठंडक की व्यवस्था से; ज़्यादा पूंजी चाहिए |
| पुआल मशरूम (Volvariella) | गर्म और नम | छोटा चक्र, बाहर या शेड में क्यारियां | नम इलाके जहां भूसा सस्ता हो |
बटन मशरूम अब भी सबसे बड़ा प्रकार है (एक हालिया बंटवारे में भारत के उत्पादन का लगभग 70%), लेकिन 2025 की एक समीक्षा में दिए ICAR-DMR के आंकड़ों के अनुसार ढिंगरी उगाने वालों ने बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों को उत्पादन तालिकाओं में सबसे ऊपर पहुंचा दिया है। 100% "जैविक दक्षता" का मतलब है हर 1 किलो सूखे भूसे से 1 किलो ताज़ी मशरूम।
ढिंगरी मशरूम कैसे उगाई जाती है (TNAU विधि)
- स्पॉन। ताज़ा दाने वाला स्पॉन ICAR-DMR सोलन, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, KVK या लाइसेंसशुदा उत्पादक से लें। यह ज्वार के दाने पर बनता है। स्पॉन की तारीख़ देख लें: पुराने स्पॉन से बढ़वार धीमी और फफूंद लगती है। IIHR बेंगलुरु ने 2021 में ढिंगरी स्पॉन ₹90 प्रति किलो बताया था, इसके लिए 30 दिन पहले बुकिंग करनी होती है और खुद जाकर लेना पड़ता है।
- माध्यम (सब्सट्रेट)। कटे हुए धान या गेहूं के भूसे को 4 घंटे पानी में भिगोएं, फिर 45 मिनट उबालें या भाप दें, पानी निथारें और छांव में तब तक सुखाएं जब तक 65 से 70% नमी न रह जाए (मुट्ठी में दबाने पर कुछ बूंदें निकलें, धार नहीं)।
- बैग भरना। 60 x 30 सेमी के पॉलीथिन बैग (80 गेज) में भूसे और स्पॉन की बारी-बारी से परतें भरें और 10 से 12 छोटे छेद करें।
- स्पॉन रन। बैगों को फसल वाले कमरे में रस्सियों या रैक पर लटका दें। लगभग 15 से 16 दिन में सफ़ेद कवक-जाल (माइसीलियम) भूसे पर फैल जाता है।
- फल लगना। छोटी कलियां (पिनहेड) दिखती हैं; हल्का पानी छिड़कें ताकि वे सूखें नहीं। पहली तुड़ाई 3 से 4 दिन बाद होती है, फिर 5 से 7 दिन के अंतर पर तीन तुड़ाइयां होती हैं। पूरा चक्र 40 से 45 दिन का है।
घरों के लिए ICAR-DMR का रेडी-टू-फ्रूट (RTF) बैग आसान शुरुआत है: ऐसे बैग बनाने में लगभग ₹30 से ₹40 लगते हैं और हर बैग से 600 से 800 ग्राम मशरूम मिलती है। IIHR ने 2021 में elm oyster के RTF बैग ₹40 (1 किलो सब्सट्रेट) और ₹50 (2 किलो सब्सट्रेट) में बताए थे। 500 बैग का एक बैच 200 वर्ग फुट के कमरे में आ जाता है।
उगाने का कमरा
- TNAU की लागत में रोज़ 10 किलो उत्पादन के लिए 15 x 25 फुट (375 वर्ग फुट) का छप्पर वाला घर माना गया है। मोटी छत वाला शेड या उत्तर मुखी ईंट का कमरा ज़्यादा ठंडा रहता है।
- आर-पार हवा और ज़्यादा नमी हो, सीधी धूप न आए, और खिड़कियों पर कीट-रोधी जाली लगी हो। फ़र्श धोने लायक हो या उस पर पानी छिड़का जा सके।
- सफ़ाई से ही सफलता तय होती है: हरी फफूंद (Trichoderma), मक्खियां और जीवाणु सड़न दूषित भूसे और पुराने बैगों से फैलते हैं। दूषित बैग तुरंत हटाएं, इस्तेमाल हो चुके सब्सट्रेट के लिए अलग जगह रखें और हर फसल के बीच सफ़ाई करें। पकी हुई मशरूम संभालते समय मज़दूर मास्क पहनें, क्योंकि बहुत ज़्यादा बीजाणु फेफड़ों में जलन कर सकते हैं।
बटन मशरूम संक्षेप में
बटन मशरूम के लिए भूसे, खाद और पूरक चीज़ों से बना कंपोस्ट लगभग 3 से 4 हफ़्ते बाहर तैयार किया जाता है, फिर एक कक्ष में पाश्चुरीकृत किया जाता है। स्पॉन डालने के बाद माइसीलियम को 24 से 25 डिग्री C पर लगभग 14 से 16 दिन लगते हैं, फिर मिट्टी की केसिंग परत डाली जाती है और फल लगने के लिए कमरे को 16 से 18 डिग्री C तक ठंडा किया जाता है, RH 80 से 85% के साथ (ICAR-DMR)। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में यह फसल मौसमी (सर्दी की) है, और साल भर उत्पादन के लिए चिलर चाहिए। पैसा लगाने से पहले ICAR-DMR सोलन या किसी राज्य विश्वविद्यालय से प्रशिक्षण लें।
लागत, ब्रेक-ईवन और मुनाफ़ा (ढिंगरी, रोज़ 10 किलो)
TNAU की लागत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सबसे पूरी लागत है; इसके इनपुट भाव (मज़दूरी ₹360 प्रति दिन, स्पॉन ₹40 प्रति बैग, भूसा ढुलाई समेत ₹7,000 प्रति टन) पुराने हैं, इसलिए आपकी असली लागत ज़्यादा होने की उम्मीद रखें। नीचे के आंकड़े TNAU के हैं, हिसाब जांचा हुआ है।
| मद | राशि (₹) |
|---|---|
| पूंजी: छप्पर वाला घर 15 x 25 फुट, चाफ कटर, बॉयलर, ड्रम, स्प्रेयर, चूल्हा | 37,000 |
| सालाना चालू खर्च: भूसा और ढुलाई ₹24,500; स्पॉन 2,000 बैग ₹80,000; बैग ₹3,375; मज़दूरी 1 व्यक्ति 300 दिन ₹1,08,000; अन्य ₹5,000 | 2,20,875 |
| स्थायी लागत (15% ब्याज और घिसावट) | 15,250 |
| कुल सालाना लागत | 2,36,125 |
| उत्पादन 10 किलो/दिन x 300 दिन | 3,000 किलो |
ब्रेक-ईवन भाव = 2,36,125 / 3,000 = लगभग ₹79 प्रति किलो। अगर मज़दूरी आप खुद करते हैं तो नकद लागत लगभग ₹1.28 लाख है और ब्रेक-ईवन लगभग ₹43 प्रति किलो है।
| बिक्री भाव (₹/किलो) | सालाना आमदनी (₹) | दी गई मज़दूरी समेत सारी लागत के बाद शुद्ध (₹) |
|---|---|---|
| 70 | 2,10,000 | लगभग 26,000 का घाटा |
| 100 | 3,00,000 | लगभग 64,000 |
| 120 | 3,60,000 | लगभग 1,24,000 |
| 135 (TNAU की मान्यता) | 4,05,000 | लगभग 1,68,875 |
व्यापार गाइडों के अनुसार खेत पर ढिंगरी का भाव लगभग ₹80 से ₹120 प्रति किलो है, जबकि ICAR-IIHR ने खुद 2021 में ताज़ी मशरूम ₹150 प्रति किलो बताई थी। रोज़ 10 किलो वाली इकाई पूरे समय का काम भी है, इसीलिए ज़्यादातर छोटे उत्पादक कुछ सौ बैग से शुरू करते हैं।
कहां बेचें
नज़दीकी शहर के होटल, रेस्तरां, सब्ज़ी की दुकानों, सुपरमार्केट और साप्ताहिक बाज़ारों में बेचें; ताज़ी मशरूम कमरे के तापमान पर सिर्फ़ एक-दो दिन चलती है, फ्रिज में ज़्यादा। धूप या सोलर ड्रायर में सुखाई ढिंगरी महीनों चलती है और सूखी मशरूम या पाउडर के रूप में बिक सकती है। कम से कम दो नियमित खरीदार मिलने तक क्षमता न बढ़ाएं। मशरूम पर MSP नहीं मिलता और कोई तय मंडी भाव भी नहीं है, इसलिए स्थानीय थोक भाव पर नज़र रखें।
सरकारी मदद (MIDH)
| घटक | लागत मानक | सहायता (MIDH 2025 दिशानिर्देश) |
|---|---|---|
| कम लागत / छोटी मशरूम इकाई (लगभग 200 वर्ग फुट) | ₹2 लाख प्रति इकाई | ढांचे और इनपुट पर 50%, प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 इकाइयां |
| मशरूम उत्पादन इकाई | ₹30 लाख प्रति इकाई | निजी क्षेत्र के लिए 40% क्रेडिट-लिंक्ड, बैक-एंडेड सब्सिडी; पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों, अनुसूचित क्षेत्रों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में 50% |
| स्पॉन बनाने की इकाई | ₹20 लाख प्रति इकाई | 40% क्रेडिट-लिंक्ड, बैक-एंडेड (विशेष क्षेत्रों में 50%) |
| कंपोस्ट बनाने की इकाई | ₹30 लाख प्रति इकाई | 40% क्रेडिट-लिंक्ड, बैक-एंडेड (विशेष क्षेत्रों में 50%) |
₹2 लाख की छोटी इकाई पर 50% सहायता का मतलब प्रति इकाई अधिकतम ₹1 लाख है। 2025 के संचालन दिशानिर्देश 31.12.2024 की तारीख़ के हैं। अमल राज्य बागवानी मिशन करते हैं, इसलिए उपलब्धता, आवेदन की तारीखें और कागज़ात (बैंक लोन मंज़ूरी, प्रोजेक्ट रिपोर्ट) राज्य के हिसाब से अलग होते हैं: अपने ज़िले के बागवानी कार्यालय से पूछें। बैंक से कर्ज़ आपकी शाखा से मिल सकता है; KCC और खेती का कर्ज़ देखें। सब्सिडी खोजक भी देखें।
स्रोत
- TNAU - Mushroom Cultivation (Crop Production Guide, Tamil Nadu)
- MIDH Operational Guidelines 2025 (NHB)
- ICAR-DMR Ready-to-Fruit mushroom bag (PSA India)
- ICAR-IIHR - Revised rates of mushroom spawn, RTF bags and fresh mushroom (2021)
- ICAR-DMR Solan - Crop advisory
- Current status and future prospects of mushroom cultivation and research in India (CABI, 2025)