मूंग (green gram) 52 से 75 दिन में पकने वाली दलहन है, जिसे साल में दो बार बोया जा सकता है: खरीफ में मानसून के साथ (जून के आख़िर से जुलाई) और रबी कटाई के बाद जायद में (उत्तर और मध्य भारत में मध्य मार्च से मध्य अप्रैल)। बीज 8 किलो प्रति एकड़ (20 किलो/हेक्टेयर) लें, 30 x 10 सेमी की दूरी पर बोएं, बीज को राइज़ोबियम कल्चर से उपचारित करें, पीला मोज़ेक सहने वाली किस्म चुनें, और जब लगभग 80% फलियां पक जाएं तब कटाई करें।
2026-27 के लिए MSP ₹8,780 प्रति क्विंटल है, जो पिछले साल के ₹8,768 से सिर्फ़ ₹12 ज़्यादा है, लेकिन सरकार के अनुमान के मुताबिक ₹5,438 प्रति क्विंटल की लागत पर 61% मार्जिन मिलता है, जो इस साल की सभी खरीफ फसलों में सबसे ज़्यादा है। मूंग नाइट्रोजन भी जमा करती है और रबी कटाई व खरीफ बुवाई के बीच के खाली समय में आ जाती है, इसीलिए यह फसल चक्र के लिए अच्छी फसल है।
खरीफ या जायद: कौन सी बोएं
| खरीफ मूंग | जायद (बसंत-गर्मी) मूंग | |
|---|---|---|
| बुवाई | मानसून की शुरुआत में; पंजाब में PAU जुलाई के दूसरे पखवाड़े की सलाह देता है | मार्च के दूसरे पखवाड़े से अप्रैल के पहले पखवाड़े तक, बुवाई से पहले सिंचाई के बाद (IIPR प्रदर्शन, उत्तर प्रदेश) |
| पानी | बारिश से; बारिश न हो तभी सिंचाई करें | बुवाई से पहले सिंचाई, पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद, फिर हर 10 से 15 दिन पर |
| मुख्य जोखिम | खरीफ में पीला मोज़ेक वायरस ज़्यादा गंभीर होता है; फूल और कटाई के समय लगातार बारिश | गर्मी का तनाव और सफ़ेद मक्खी; सिर्फ़ वहीं ठीक जहां सिंचाई पक्की हो |
| सामान्य उपज | PAU किस्में 4.2 से 4.8 क्विंटल/एकड़; पंजाब का राज्य औसत 2024-25 में 4.3 क्विंटल/एकड़ | IIPR प्रदर्शनों में सुधरी विधियों से 12 से 16.7 क्विंटल/हेक्टेयर (लगभग 4.9 से 6.8 क्विंटल/एकड़), जबकि सामान्य विधि से 9.8 से 11.1 क्विंटल/हेक्टेयर |
| किसके लिए अच्छी | रबी फसल (सरसों, गेहूं) से पहले फसल चक्र के लिए | गेहूं, सरसों, चना या मटर के बाद खाली पड़ने वाली ज़मीन का उपयोग करने के लिए |
किस्में
| किस्म | पकने का समय | उपज | खासियत | मौसम और क्षेत्र |
|---|---|---|---|---|
| IPM 205-7 (Virat), ICAR-IIPR | 52 से 56 दिन | 10 से 11 क्विंटल/हेक्टेयर संभावित (4 से 4.5 क्विंटल/एकड़) | रोग प्रतिरोधी, बहुत कम अवधि की | जायद, उत्तर-पश्चिम के मैदान और मध्य भारत |
| IPM 410-3 (Shikha), ICAR-IIPR | 65 से 70 दिन | 11 से 12 क्विंटल/हेक्टेयर संभावित (4.5 से 4.9 क्विंटल/एकड़) | रोग प्रतिरोधी | जायद, उत्तर-पश्चिम के मैदान और मध्य भारत |
| ML 1808 (PAU) | लगभग 71 दिन | 4.8 क्विंटल/एकड़ | पीला मोज़ेक, सरकोस्पोरा और जीवाणु पत्ती धब्बा के प्रति प्रतिरोधी | खरीफ, पंजाब |
| ML 2056 (PAU) | लगभग 71 दिन | 4.6 क्विंटल/एकड़ | इन्हीं तीन रोगों को सहने वाली | खरीफ, पंजाब |
| ML 818 (PAU) | लगभग 72 दिन | 4.2 क्विंटल/एकड़ | इन्हीं तीन रोगों को सहने वाली | खरीफ, पंजाब |
ICAR-IIPR ने Samrat और दूसरी कम अवधि की मूंग किस्में भी जारी की हैं, और मूंग के ब्रीडर बीज की 60% से ज़्यादा मांग इसी की किस्मों की है। अपने राज्य के लिए अपने राज्य कृषि विश्वविद्यालय की सिफ़ारिश की हुई किस्म का प्रमाणित बीज लें। वायरस वाले इलाके में अनजान स्थानीय बीज से बचें।
खेत, बीज और बुवाई
- मिट्टी: अच्छे जल निकास वाली दोमट से बलुई दोमट। खारी-क्षारीय या जलभराव वाली मिट्टी मूंग के लिए ठीक नहीं है।
- तैयारी: दो या तीन जुताई और पटेला, या गेहूं कटाई के तुरंत बाद ज़ीरो-टिल ड्रिल से बुवाई।
- बीज दर: 8 किलो प्रति एकड़ (20 किलो/हेक्टेयर), कतारें 30 सेमी की दूरी पर, पौधों में लगभग 10 सेमी, 4 से 6 सेमी गहराई पर।
- ज़्यादा उपज का विकल्प: PAU 30 सेमी पर दो दिशाओं में बुवाई की सलाह देता है, हर दिशा में आधा बीज डालकर।
- मेड़ पर बुवाई: मध्यम और भारी मिट्टी में 67.5 सेमी की दूरी पर बनी मेड़ों पर 20 सेमी पर दो कतारें बोएं। PAU के अनुसार इससे पानी बचता है और फसल तेज़ बारिश से बचती है।
- टीका (इनोकुलेशन): बीज को राइज़ोबियम कल्चर में मिलाएं (एक एकड़ के बीज पर एक पैकेट, छांव में सुखाएं, तुरंत बोएं)। PAU के अनुसार उपज में 12 से 16% की बढ़ोतरी होती है। अगर फफूंदनाशक भी लगाना हो तो पैकेट पर लिखी विधि के अनुसार करें।
खाद
मूंग को नाइट्रोजन कम चाहिए। PAU बुवाई के समय प्रति एकड़ 5 किलो N और 16 किलो P2O5 ड्रिल से देने की सलाह देता है, यानी प्रति एकड़ 11 किलो यूरिया और 100 किलो सिंगल सुपरफॉस्फेट (लगभग 12 किलो N और 40 किलो P2O5 प्रति हेक्टेयर)। सिंगल सुपरफॉस्फेट से सल्फर भी मिलता है। ऊपर से खाद डालने की ज़रूरत नहीं है। जहां हो सके मिट्टी जांच के आधार पर मात्रा तय करें (Soil Health Card) और खाद वाला पेज देखें।
खरपतवार
बुवाई के 4 हफ़्ते बाद निराई-गुड़ाई करें और ज़रूरत हो तो लगभग दो हफ़्ते बाद फिर करें। इसके बजाय PAU बुवाई के 15 से 20 दिन बाद घास, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार और मोथा के लिए 150 लीटर पानी में 300 मिली प्रति एकड़ imazethapyr 10 SL छिड़कने की सलाह देता है। लेबल के अनुसार ही करें।
कीट और रोग
| समस्या | क्या नुकसान करती है | क्या करें (PAU) |
|---|---|---|
| सफ़ेद मक्खी और पीला मोज़ेक वायरस | सफ़ेद मक्खी वायरस फैलाती है; पत्तियों पर पीले और हरे धब्बे दिखते हैं और पौधों में फलियां कम लगती हैं। खरीफ में ज़्यादा गंभीर। | सहनशील किस्में उगाएं (पंजाब में ML 1808, ML 2056, ML 818); रोगी पौधों को जल्दी उखाड़ दें; सफ़ेद मक्खी दिखते ही घर पर बना नीम अर्क (80 से 100 लीटर पानी में 1 लीटर प्रति एकड़) छिड़कें और एक हफ़्ते बाद दोहराएं |
| फली चूसक कीट (पॉड सकिंग बग) | फलियों पर सफ़ेद धब्बे, सिकुड़ा हुआ दाना जो न उगता है न खाने लायक रहता है | फली बनते समय नीम अर्क, 80 से 100 लीटर पानी में 1.25 लीटर प्रति एकड़, एक हफ़्ते बाद दोहराएं |
| फली छेदक, बालदार सुंडी, तंबाकू की सुंडी, सेमीलूपर | पत्तियों और फलियों को नुकसान; बालदार सुंडी पूरी फसल चट कर सकती है | झुंड में बैठी छोटी सुंडियों को कुचल दें या दबा दें; सीमा से ऊपर होने पर लेबल से मंज़ूर दवा इस्तेमाल करें |
| सरकोस्पोरा पत्ती धब्बा, जीवाणु पत्ती धब्बा, जड़ सड़न, वेब ब्लाइट | नमी और बारिश के दौर में धब्बे, झुलसा और सड़न | प्रतिरोधी किस्में, साफ़ बीज, खरपतवार मुक्त खेत |
कोई भी रसायन इस्तेमाल करने से पहले अपने KVK से पूछ लें, और फूल आने के समय तब तक छिड़काव न करें जब तक कीट का प्रकोप इसे ज़रूरी न बना दे। तस्वीरों के लिए कीट वाला पेज देखें।
कटाई, गहाई और भंडारण
- कब: PAU के अनुसार जब 80% फलियां पक जाएं तब फसल को हंसिया से काटें, पौधे उखाड़ें नहीं। मूंग की फलियां एक साथ नहीं पकतीं, इसलिए हर फली के काली होने का इंतज़ार करने पर पहले पकी फलियां चटककर झड़ जाती हैं।
- गहाई: कटे पौधों को साफ़ फ़र्श या तिरपाल पर सुखाएं और बदली हुई गेहूं थ्रेशर से या पीटकर दाने निकालें।
- सुखाना: दाने को धूप में सुखाएं और बोरे में भरने से पहले अच्छी तरह साफ़ करें। अनाज भंडारण का PAU का पहला नियम है कि उसे ठीक से सुखाएं; नम दाने में फफूंद लगती है और दलहन भृंग (ढोरा, Callosobruchus) हमला करता है।
- भंडारण: साफ़ गोदाम और नए या कीटाणुरहित बोरे इस्तेमाल करें, दरारें बंद करें, और ढोरा से बचाने के लिए ढेर लगी दलहन के ऊपर 7 सेमी मोटी रेत, लकड़ी का बुरादा या गोबर की राख की परत डालें (PAU)। धुआं (फ्यूमिगेशन) ज़रूरी हो तो वह सिर्फ़ प्रशिक्षित व्यक्ति हवा बंद गोदाम में करे।
बिक्री: MSP, सरकारी खरीद और मंडी
- MSP 2026-27: ₹8,780 प्रति क्विंटल। सरकार की अखिल भारतीय उत्पादन लागत (₹5,438 प्रति क्विंटल) पर अनुमानित मार्जिन 61% है।
- सरकारी खरीद: मूंग की खरीद मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) के तहत सिर्फ़ उन्हीं राज्यों में होती है जहां केंद्र खरीद को मंज़ूरी देता है। 30 सितंबर 2026 को केंद्र ने कर्नाटक के लिए 38,250 टन मूंग की मंज़ूरी दी। दूसरे राज्यों के लिए पंजीकरण और तारीखों के बारे में राज्य के कृषि या सहकारी विपणन विभाग से पूछें; माल देने से पहले आमतौर पर पंजीकरण ज़रूरी होता है।
- मंडी: बेचने से पहले मूंग का मंडी भाव और MSP पेज देखें, और eNAM (eNAM) से तुलना करें।
लागत और कमाई का हिसाब
MSP ₹8,780 और अखिल भारतीय औसत लागत ₹5,438 प्रति क्विंटल (किराये और परिवार की मज़दूरी, खाद-बीज, ज़मीन का किराया और ब्याज समेत) मानें तो मार्जिन ₹3,342 प्रति क्विंटल बैठता है। नीचे की उपज मान्यताएं हैं; खरीफ में 4 से 5 क्विंटल/एकड़ उपज के लिए सहनशील किस्में और समय पर बुवाई ज़रूरी है।
| उपज (क्विंटल/एकड़) | ₹8,780 पर कुल आमदनी (₹) | ₹5,438/क्विंटल पर लागत (₹) | मार्जिन (₹/एकड़) |
|---|---|---|---|
| 3 | 26,340 | 16,314 | 10,026 |
| 4 | 35,120 | 21,752 | 13,368 |
| 5 | 43,900 | 27,190 | 16,710 |
हिसाब: कुल आमदनी = उपज x ₹8,780; लागत = उपज x ₹5,438; मार्जिन = दोनों का अंतर। MSP पर खरीद सीमित है और अच्छी फसल वाले साल में मंडी भाव उससे नीचे रह सकता है; बिक्री भाव ₹1,000 कम होने पर प्रति क्विंटल मार्जिन ₹3,342 से घटकर ₹2,342 रह जाता है। फसल छोटी अवधि की है, इसलिए लंबी अवधि की फसल के मुक़ाबले प्रति एकड़ मज़दूरी और सिंचाई का खर्च कम बैठता है। जोखिम से सुरक्षा के लिए PMFBY और मौसमी कर्ज़ के लिए Kisan Credit Card देखें।
स्रोत
- PAU Package of Practices for Crops of Punjab, Kharif 2026 (moong, stored grain insects)
- Indian Farming, October 2025: Spring-summer mungbean for sustainable intensification (ICAR-IIPR)
- Cabinet approves MSP for Kharif crops 2026-27 (text of the official release)
- Social News XYZ: Centre approves MSP procurement of sunflower, moong, soybean in Karnataka (30 Sep 2026)